भारत की स्वतन्त्रता के प्रथम युद्ध में जिन देशभक्तों ने अपनी आहुति प्रदान की थी उनमे तात्या टोपे (Tatya Tope) का अन्यतम स्थान है | उनकी शूरता और उनके त्याग की कहानी बड़ी प्रेरणादायक है | वे देश की सेवा के लिए ही धरती की गोद में आये थे और देश की सेवा करते हुए फाँसी के तख्ते पर चढ़ गये | उन्होंने अपने हाथो से फाँसी का फंदा अपने गले में डालते हुए कहा था “मै पुराने वस्त्र छोडकर नये वस्त्र धारण करने जा रहा हु | मै अम्र हु | मैंने जो कुछ किया है अपने देश और मातृभूमि के लिए किया है” | तात्या टोपे (Tatya Tope) के शौर्य और चातुर्य की प्रशंसा स्वयं अंग्रेजो तक ने की है | तात्या टोपे का जन्म 1814 ई. में नासिक के पास जाबालि में एक ब्राह्मण वंश में हुआ था | उनके पिता का नाम पांडूरंगराव और माता का नाम रुक्मणबाई था | उनके पिता पूना में बाजीराव पेशवा के दरबार में रहते थे | बाजीराव जब पुन छोडकर बिठुर चले गये तो वे भी अपने कुटुंब को लेकर बिठुर में जाकर बस गये थे और बाजीराव की सेवा में रत रहते थे | तात्या टोपे (Tatya Tope) की बाल्यावस्था बिठुर में ही व्यतीत हुयी | वे बाजीराव के दत्तक पुत्रो के साथ खेलते-कू...