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Showing posts from September, 2016

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindi

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindi स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindiलगभग छ: दशको से अपने जादुई आवाज के जरिये बीस से अधिक भाषाओ में पचास हजार से भी ज्यादा गीत गाकर “गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड ” में नाम दर्ज करा चुकी संगीत की देवी लता मंगेशकर Lata Mangeshkar आज भी श्रोताओ के दिलो पर राज कर रही है | गीत , संगीत गायन और आवाज की जादूगरी की जब भी चर्चा होती है सहज ही एक ही नाम होठो पर आता है -लता मंगेशकर Lata Mangeshkar | उन्हें संगीत की दुनिया में सरस्वती का अवतार माना जाता है | आइये आज उस संगीत की देवी के जीवन से आपको रूबरू करवाते है | लता मंगेशकर का प्रारम्भिक जीवन | Early Life of Lata Mangeshkar लता मंगेशकर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के एक मराठी परिवार में हुआ था | उनके पिता दीनदयाल उपाध्याय एक शास्त्रीय संगीत गायक और थिएटर एक्टर थे | उनकी माता शेवंती , उनके पिता की दुसरी पत्नी थी | ये परिवार शुरुवात में अपना उपनाम हार्दिकर प्रयोग करता था लेकिन दीनानाथ ने इस बदलकर मंगेशकर किया था क्योंकि उनक...

गूगल बाबा के जन्म दिवस पर गूगल से जुड़े रोचक तथ्य | Google Facts in Hindi

गूगल बाबा के जन्म दिवस पर गूगल से जुड़े रोचक तथ्य | Google Facts in Hindi Google अपने 21 वर्ष पूरा कर चूका है | दुनिया के सबसे लोकप्रिय Search Engine की स्थापना 4 सितम्बर 1999 को दो दोस्तों Larry Page और Sergei Bin ने की थी | दोनों अमेरिका की Stanford University के PhD के छात्र थे | बीते कई वर्षो में Google में बहुत बदलाव आया है | यह 190 से अधिक देशो में 150 से अधिक भाषाओं में अपनी सेवाए दे रहा है | गूगलिंग हर वर्ष अपना जन्मदिन 27 सितम्बर को मनाती है इससे पहले गूगल अलग अलग दिवसों पर अपना जन्मदिन मना चुकी है | वैसे तो Google दुनिया भर की जानकारियों को समेट कर रखा है मगर Google और इसके ऑफिस के बारे में जानना भी कम रोचक नही है | आइये आज आपको गूगल बाबा के जन्म दिवस इससे जुडी ऐसी रोचक जानकारिया बता रहे है जिसे पढकर आप चौंक जाओगे | Google का पहला Tweet फरवरी 2009 ने Google ने अपना पहला Twitter पोस्ट किया था जो इस तरह था “I’ m 01100110 01100101 01100101 01101100 01101001 01101110 01100111 00100000 01101100 01110101 01100011 01101011 01111001 00001010. ” यह Message बाइनरी नंबर ...

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी | Pandit Deendayal Upadhyay Biography in Hindi

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी | Pandit Deendayal Upadhyay Biography in Hindi इतिहास के वर्तमान दौर में प. दीनदयाल उपाध्याय Pandit Deendayal Upadhyay की पहचान भारतीय जनता पार्टी के मूल अवतार भारतीय जनसंघ के महान नेता के रूप में बनी है जबकि वह एक महान राष्ट्र नायक थे जिनका इस रूप में आकलन अभी राष्ट्र और इतिहास को करना है उसी तरह जिस तरह डा. भीमराव अम्बेडकर की पहचान मात्र दलित नेता के रूप में आंकी गयी थी जबकि वह एक महान राष्ट्र नायक थे | मगर उनकी इस छवि का एहसास अभी भी अपेक्षित रूप से दिखाई नही देता | यह विडम्बना तो है किन्तु है तथ्य | प. दीनदयाल उपाध्याय Pandit Deendayal Upadhyay ने अपने गहन अध्ययन और मंथन से राष्ट्रोथान के लिए आर्थिक व्वयस्था ,सामाजिक समरसता ,राजनितिक शुचिता  ,राजनितिक दलों के लिए मर्यादाओ और लोकतंत्र की प्रकृति और सिद्धांतो के बारे में जो विचार प्रतिपादित किये , वे राष्ट्र जीवन को वर्तमान चिंतनीय अवस्था से उबारने के लिए पुरी तरह कारगर है | उन्होंने समग्र रूप से एकांत मानवतावाद को प्रस्तुत किया है वह शोध का विषय बना हुआ है | दीनदयाल उपाध्याय का प्रारम्भिक जीवन | Early...

1965 भारत -पाक युद्ध - दूसरा भाग | 1965 War of India Pakistan Story - Part 2

1965 भारत -पाक युद्ध – दूसरा भाग | 1965 War of India Pakistan Story – Part 2 1965 जंग में कश्मीर | 1965 War in Kashmir Region मित्रो 1965 भारत -पाक जंग के पहले भाग में हमने देखा कि किस तरह कच्छ में पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादे दिखा दिए थे जिसे निपटने के भारतीय सेना तैयार हो गयी थी | पाकिस्तान की योजना अब कश्मीर में बड़ी संख्या में अपने फौजे युद्ध विराम रेखा के दुसरी ओर भेजकर कश्मीरियों को भारत के खिलाफ विद्रोह के लिए भडकाने की थी | अपने इसी उद्देश्य को धयान में रखकर पाकिस्तान ने 30 हजार सैनिको की एक सेना -जिब्राल्टर फोर्क तैयार कर ली थी | इसमें शामिल अधिकांश सैनिक तथाकथित आजाद कश्मीर की फ़ौज से थे जो वास्तव में पाकिस्तानी सेना का अभिन्न हिस्सा थी | इन फौजों के साथ कुछ रजाकारो और मुजाहिदीनो को भी शामिल किया गया था | पुरी फ़ौज को दस टुकडियो में बांटा गया था जिसकी संयुक्त कमान मेजर जनरल ए.एच,मलिक के हाथो में थी | 2 से 5 अगस्त 1965 के बीच यह फ़ौज उत्तर में कारगिल तथा जम्मू सेक्टर के कालीधर क्षेत्र तक युद्ध विराम रेखा के दुसरी ओर घुस आयी | पूंछ उअर जम्मू सेक्टर में युद्ध विराम रेखा ...

1965 भारत -पाक जंग , जिसमे भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर पाकिस्तानी सेना को खदेड़ा | 1965 India Pakistan War Story in Hindi

मित्रो आज हम आपको भारत पाक युद्ध की वो कहानी बतायेंगे ,  जिसमे भारत के कई शूरवीरो ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए , लेकिन पाकिस्तानी सेना के सामने घुटने नही टेके | मित्रो इससे पहले हम आपको भारत -पाक विभाजन की पुरी कहानी पांच भागो में बता चुके है जिसकी वजह से पाकिस्तान देश बना , जो आज तक हमारे देश के लिए मुसीबत बना हुआ है | हाल ही में उरी में हुए आतंकवादी हमले में भारत के कई शहीदों ने अपने प्राण गंवा दिए , जिसकी असली वजह पाकिस्तान का आतंवादियों को सहयोग देना था | अगर पाकिस्तान आतंकवादियो को शरण देना बंद नही रहेगा तो भारत फिर से 1965 की जंग और कारगिल युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार है | अब आइये आपको 1965 में हुए भारत पाक युद्ध की पृष्ठभूमि कैसे बनी ये बताते है | भारत- पाक युद्ध की पृष्टभूमि सन 1947 में कश्मीर को अपने साथ मिलाने के सफल न होने की पीड़ा को पाकिस्तान कभी नही भुला सका | समय समय पर बदलती प्रत्येक सरकार के लिए कश्मीर एक सनक बना हुआ था | पाकिस्तान को इस बात का अनुमान था कि भारत की विशालता और उसकी इतनी विशाल सेना के कारण वह भारत के खिलाफ आमने सामने की सीधी लड़ाई में सफल नही हो सकता | ...

हाथियों से जुड़े रोचक तथ्य | Elephant Facts in Hindi

विश्व हाथी सुरक्षा दिवस पर पढिये हाथियों से जुड़े रोचक तथ्य | Elephant Facts in Hindi मित्रो , आपने मनुष्यों से हाथियों की दोस्ती पर कई फिल्मे देखी होगी | हाथी (Elephant) मनुष्यों का बेहद करीबी और वफादार जानवर के रूप में जाना जाता है | यह हमारी तरह अपनी भावनाए प्रदर्शित करता है | धरती का यह विशाल जानवर आज खतरे में है | इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता के लिए 22 सितम्बर को “विश्व हाथी दिवस ” मनाया जाता है | आज मानव जाति ने अपने स्वार्थ के लिए अवैध शिकार करके उस संकट में डाल दिया है | समूचे विश्व में प्रतिदिन 104 हाथी (Elephant) और हर साल 4000 अफ़्रीकी-एशियाई हाथी मारे जा रहे है | अफ्रीका में हाथी दांत और मांस दोनों के लिए शिकार किया जाता है जबकि भारत में ज्यादातर हाथी दांत के लिए नर हाथियों का शिकार होता है | असम ,अरुणाचल प्रदेश , मिजोरम ,मेघालय ,नागालैंड ,मणिपुर और त्रिपुरा में हाथी के शिकार से दोहरा लाभ होता है | मांस के साथ साथ उसकी खाल ,दांत और अन्य अंग भी मनमानी कीमतों पर बिक जाते है | कई प्रकार की दवाईया भी इनसे बनाई जाती है | दांत से बनी सजावटी वस्तुओ की मांग तो पुरे विश्व...

कथा तिरुपति बालाजी की | Tirupati Balaji Story in Hindi

कथा तिरुपति बालाजी की | Tirupati Balaji Story in Hindi Tirupati Balaji Story in Hindi एक बार भृगु ऋषि ने जानना चाहा कि ब्रह्मा ,विष्णु और महेश में कौन सबसे श्रेष्ठ है ? वह बारी-बारी से सबके पास गये | ब्रह्मा और महेश ने भृगु को पहचाना तक नही , न ही आदर किया | इसके बाद भृगु विष्णु के यहा गये | विष्णु भगवान विश्राम कर रहे थे और माता लक्ष्मी उनके पैर दबा रही थी | भृगु ने पहुचते ही न कुछ कहा , न सुना और भगवान विष्णु की छाती पर पैर से प्रहार कर दिया | लक्ष्मी जी यह सब देखकर चकित रह गयी किन्तु विष्णु भगवान ने भृगु का पैर पकडकर विनीत भाव से कहा ” मुनिवर ! आपके कोमल पैर में चोट लगी होगी | इसके लिए क्षमा करे “| लक्ष्मी जी को भगवान विष्णु की इस विन्रमता पर बड़ा क्रोध आया | वह भगवान विष्णु से नाराज होकर भू-लोक में आ गयी तथा कोल्हापुर में रहने लगी | लक्ष्मी जी के चले जाने से विष्णु भगवान को लगा कि उनका श्री और वैभव ही नष्ट हो गया और उनका मन बड़ा अशांत रहने लगा | लक्ष्मी जी को ढूढने के लिए वह श्रीनिवास के नाम से भू-लोक आये | घूमते घुमाते वेंकटचल पर्वत क्षेत्र में बकुलामाई के आश्रम में पहुचे...

इटानगर , जहा आज भी मौजूद है ईंटो से बने किले के अवशेष | Itanagar History in Hindi

इटानगर , जहा आज भी मौजूद है ईंटो से बने किले के अवशेष | Itanagar History in Hindi हरी भरी वादियों के बीच बसा छोटा सा नगर इटानगर (Itanagar) अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जाना जाता है | कभी यहा किसी राजा द्वारा बनाया गया किला था जो समय की धुंध में लुप्त हो गया , लेकिन किले के खंडहर आज भी उस राजा के इतिहास को स्मरण करा रहे है | किले का निर्माण लगभग 1550 ईस्वी पूर्व का बताया जाता है | इंट से बने इसे किले की उंचाई लगभग 5 मीटर है और यह दो भागो में बंटा हुआ है | इसका पूर्वी सिरा लगभग 1 किमी तथा पश्चिमी सिरा 1.40 किमी तक फैला हुआ है | इस किले की मोटाई 1.5 मीटर है | आजकल यह किला इंटा फोर्ट के नाम से जाना जाता है और इसी फोर्ट के नाम से इस जगह का नाम इटानगर (Itanagar) रखा गया जो इस राज्य यानि अरुणाचल प्रदेश की राजधानी है | यह राज्य भारत के दुसरे वन प्रदेशो में गिना जाता है | इसकी गुणवत्ता राजधानी ईटानगर से परखी जा सकती है | इस छोटे से नगर के चारो तरफ हरियाली ही हरियाली है जिससे यहाँ का सौन्दर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है | हरियाली यहा के वातावरण को शुद्ध रखती है | रोजमर्रा की जिन्दगी में यहाँ क...

श्राद्ध पक्ष विशेष - अगर पूर्वज ना होते तो हमारा अस्तित्व ही न होता | Shradh or Pitru Paksha Significance in Hindi

Shradh or Pitru Paksha Significance in Hindi श्राद्ध पक्ष विशेष – अगर पूर्वज ना होते तो हमारा अस्तित्व ही न होता | Shradh or Pitru Paksha Significance in Hindi गीता में 84 लाख योनियों का उल्लेख मिलता है जबकि पितरो की आयु 1000 वर्ष मानी जाती है | श्राद्ध का अर्थ ही है जो श्रद्धा से कर्म किया जाए | हमारे वेदों एवं शास्त्रों में स्पष्ट वर्णन मिलता है कि जो अपने पितरो को प्रसन्न रखने हेतु तथा शान्ति के लिए कर्म नही करता , वह नाना प्रकार के कष्टो ,ऋण ,रोग ,सन्तान कष्ट , राज कष्ट एवं भूमि कष्ट से पीड़ित होता है | अगर हमारे पूर्वज ना होते तो हमारा अस्तित्व ही न होता | जब हमारे पितर ही रुष्ट होंगे तो हमारे देवता भी हमारे समीप नही आ सकते है | विवेक चूडामणि के अनुसार जब जीवात्मा इस स्थूल देह से पृथक होती है उस स्तिथि को मृत्यु कहते है | यह भौतिक शरीर 27 तत्वों के संघात से बना है |स्थूल पंच महाभूत एवं स्थूल कामेन्द्रियो को छोड़ने पर अर्थात मृत्यु को प्राप्त हो जाने के बाद भी 17 तत्वों से बना सूक्ष्म शरीर विद्यमान रहता है | सूक्ष्म शरीर धारी इस लोक के सतत अभ्यास के कारण परलोक में भी इन्द्रियों ...

उत्साह और उमंग का महापर्व है ओणम | Onam Significance and Story in Hindi

पर्व हमारे जीवन में उर्जा .उमंग और खुशहाली लेकर आते है जैसे तमिलनाडू में पोंगल ,असम में बीहू , पंजाब में लोहड़ी आदि पर्व जिस उत्साह से मनाया जाता है उसी भव्यता और उत्साह के साथ केरल में ओणम उत्सव मनाया जाता है | इस वर्ष ओणम उत्सव 14 सितम्बर यानि आज से शुरू हो चूका है | यह पर्व केरल में सबसे ज्यादा धूमधाम और  प्रमुखता से मनाया जाता है | इस पर्व के दौरान केरल की संस्कृति की झलक आपको देखने को मिलती है | इसी कारण यह पर्व 1961 से केरल में राजकीय पर्व के रूप में मनाया जाता है इस पर्व की ख्याति अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ़ैल चुकी है | यह पर्व मलयाली कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है | यह 10 दिनों तक चलने वाला पर्व होता है | हर घर में बनती है रंगोली उत्साह और उमंग का महापर्व है ओणम | Onam Significance and Story in Hindi मलयालम भाषा में पुव का अर्थ फुल और कोलम का मतलब जमीन पर बने रंगीन चित्र होता है | पुकल्ल्म फूलो से बनी रंगोली है | ओणम के दौरान लोग आंगन में सुंदर पुकल्ल्म बनाते है | इस रंगोली को बनाने में ढेर सारे फूलो एवं पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है | इस रंगोली के बीचो बीच विष्णु भगवान या महा...

कितना फायदेमंद है नौकरी बदलना | Switching Job Beneficial or Not ?

कई लोग करियर में आगे बढने के लिए नौकरी बदलना पसंद करते है परन्तु वास्तव में ऐसा करना कितना फायदेमंद है यह जरुर चर्चा का विषय है | आइये आपको इसके पक्ष और विपक्ष के विचारों से आपको रूबरू करवाते है | विपक्ष में आज के अधिकतर प्रोफेशनल्स का मानना है कि करियर में सफलता के लिए अक्सर नौकरी बदलते रहना बेहतर रहता है | जहा करियर में आगे बढने के लिए कई लोगो का विश्वास है वही जरुरी नही है कि हर मामले में ऐसा ही हो | लम्बे समय तक एक ही नौकरी से जुड़े रहना कर्मचारी तथा कम्पनी दोनों के लिए फायदेमंद होता है | आजकल कई कम्पनिया उपयुक्त कर्मचारियों की नियुक्ति तथा उन्हें प्रशिक्षित करने पर काफी वक्त और पैसा खर्च कर रही है | कई प्रोफेशनल्स समझते है कि उन्हें मिलने वाली तनख्वाह ही उनकी नौकरी से होने वाली एकमात्र आय है परन्तु अक्सर वे भूल जाते है कि उनमे से कइयो को प्रशिक्षित करने पर भी कम्पनी ने काफी पैसा खर्च किया होगा | अपने दम पर वे वैसा प्रशिक्षण प्राप्त नही कर सकते है | कभी कभार नौकरी बदलना जूनियर लेवल के कर्मचारियों के लिए तो ठीक है परन्तु सीनियर कर्मचारियों के लिए कम्पनी से जुड़े रहना फायदेमंद साबित हो...

दया के मूर्तिमान स्वरूप महाराज रन्तिदेव | Raja Rantideva Story in Hindi

दया के मूर्तिमान स्वरूप महाराज रन्तिदेव | Raja Rantideva Story in Hindi रघुवंश में एक संस्कृति नाम के परम प्रतापी राजा थे | उनके गुरु और रन्तिदेव नामक दो पुत्र थे | रन्तिदेव (Raja Rantideva) दया के मूर्तिमान स्वरूप थे | उनका एकमात्र लक्ष्य था -संसार के सभी प्राणियों के दुःख का निदान | वह भगवान से प्रार्थना करते हुए कहते थे “मै आपसे अष्टसिद्धि या मोक्ष की भी कामना नही करता |मेरी आपसे इतनी ही प्रार्थना है कि समस्त प्राणियों के अन्त:करण में स्थित होकर मै ही उनके दुखो को भोग लू ,जिससे सब दुःखरहित हो जाए  “| इसलिए महाराज रन्तिदेव (Raja Rantideva) यही सोचते थरहते थे कि मेरे माध्यम से दीनो का उपकार कैसे हो , मै दुखी प्राणियों के दुःख किस प्रकार दूर करू | अंत: उनके द्वार से कोई भी याचक कभी निराश नही लौटता था | यह सबकी यथेष्ट सेवा करते थे इसलिए उनका यश सम्पूर्ण भूमंडल पर फ़ैल गया | संसार की वस्तुए चाहे कितनी ही अधिक ना हो , उन्हें निरंतर खर्च करने पर के न एक दिन समाप्त हो ही जाती है | महाराज रन्तिदेव (Raja Rantideva) का राजकोष भी दीन को बांटते बांटते एक दिन खाली हो गया | यहा तक कि उनक...

भारतेंदु हरीशचंद्र , जिन्होंने हिंदी को प्रतिष्ठित कर की देशसेवा | Bharatendu Harishchandra Biography in Hindi

भारतेंदु हरीशचंद्र , जिन्होंने हिंदी को प्रतिष्ठित कर की देशसेवा | Bharatendu Harishchandra Biography in HindiBharatendu Harishchandra भारतेंदु हरीशचंद्र आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते है | इनका मूल नाम “हरीशचंद्र” था “भारतेंदु” उनकी उपाधि थी | उन्होंने भारत देश की गरीबी ,पराधीनता ,शाशको के अमानवीय शोषण के चित्रण को ही अपने साहित्य का विषय बनाया | हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में उन्होंने अपनी प्रतिभा का भरपूर उपयोग किया | हिंदी भाषा को आगे बढाने के लिए भारतेंदु के समय हिंदी आन्दोलन का आरम्भ हुआ | आन्दोलन में नवीन धनर राय ,स्वामी दयानन्द सरस्वती ,महात्मा गांधी ,मदनमोहन मालवीय ,पुरुषोतम टंडन आदि का विशेष योगदान था | भारतेंदु काल में हिंदी की स्तिथि बड़ी विकट हो गयी थी | अंग्रेज अपनी “फुट डालो राज करो ” निति पर हिंदी की राह में तरह तरह के रोड़े अटकते थे मगर भारतेंदु ने जो हिंदी आन्दोलन चलाया वह हिन्दू-मुस्लिम सभी के लिए उपयोगी था | ठीक उसी तरह जैसे बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय और रवीन्द्रनाथ टैगोर  की बंगला सेवा हिन्दू और म...

शत्रु के लिए भी सर्वस्व त्यागने वाले महर्षि दधिची | Maharishi Dadhichi Story in Hindi

शत्रु के लिए भी सर्वस्व त्यागने वाले महर्षि दधिची | Maharishi Dadhichi Story in Hindiलोक कल्याण के लिए आत्म त्याग करने वालो में महर्षि दधिची का नाम बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है | इनकी  माता का नाम शान्ति और पिता का नाम अर्थवा ऋषि था | ये तपस्या और पवित्रता की प्रतिमूर्ति थे | अटूट शिव भक्ति और वैराग्य में इनको जन्म से ही निष्ठा थी | एक बार महर्षि दधिची बड़ी ही कठोर तपस्या कर रहे थे | इनकी अपूर्व तपस्या के तेज से तीनो लोक आलोकित हो गये और इंद्र का सिंहासन हिलने लगा | इंद्र को लगा कि महर्षि दधिची  अपनी कठोर तपस्या के द्वारा इंद्र पद छीनना चाहते है इसलिए उन्होंने महर्षि दधिची की तपस्या को खंडित करने के उद्देश्य से परम रूपवती अल्म्भुषा अप्सरा के साथ कामदेव को भेजा | अल्म्भुषा और कामदेव के अथक प्रयत्न के बाद भी महर्षि अविचल रहे और अंत में विफल मनोरथ होकर दोनों इंद्र के पास लौट गये | कामदेव और अप्सरा के निराश होकर लौटने के बाद इंद्र ने महर्षि की हत्या का निश्चय किया और देव सेना को लेकर महर्षि दधिची  के आश्रम पर पहुचे | वहा पहुचकर देवताओ ने शांत और समाधिस्थ महर्षि दधिची पर अपने कठोर अस्त्र-श...

राजा पृथु : विष्णु भगवान के अंशावतार | Raja Prithu Story in Hindi

ध्रुव के वनगमन के पश्चात उनके पुत्र उत्कल को राजा सिंहासन पर बैठाया गया लेकिन वह ज्ञानी और विरक्त पुरुष थे अत: प्रजा ने उन्हें मूढ़ एवं पागल समझकर राजगद्दी से हटा दिया और उनके छोटे भाई भ्रमिपुत्र वत्सर को राजगद्दी पर बिठाया | उन्होंने तथा उनके पुत्रो ने लम्बी अवधि तक शाशन किया |उनकी ही वंश में एक राजा हुए – अंग | उनके यहाँ वेन नामक पुत्र हुआ | वेन की निर्दयता से दुखी होकर राजा अंग बन को चले गये | वेन ने राजगद्दी सम्भाल ली | अत्यंत दुष्ट प्रकृति का होने के कारण अंत में ऋषियों ने उसे शाप देकर मार डाला | वेन के कोई सन्तान नही थी अत: उसकी दाहिनी भुजा का मंथन हुआ तब राजा पृथु का जन्म हुआ | ध्रुव के वंश में वेन जैसा क्रूर जीव क्यों पैदा हुआ ? इसके पीछे क्या रहस्य है ? यह जानने की इच्छा बड़ी स्वाभाविक है | अंग राजा ने अपनी प्रजा को सुखी रखा था | एक बार उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया था | उस समय देवताओ ने अपना भाग ग्रहण नही किया क्योंकि अंग राजा के कोई सन्तान नही थी | मुनियों के कथनानुसार अंग राजा ने उस यज्ञ को अधुरा छोडकर पुत्र प्राप्ति के लिए दूसरा यज्ञ किया | आहुति देते ही यज्ञ में से एक दिव...

ऋषि पंचमी की कहानी | Rishi Panchami Pooja Vidhi and Story in Hindi

ऋषि पंचमी की कहानी | Rishi Panchami Pooja Vidhi and Story in Hindi भाद्रपद की शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी मनाई जाती है | इस दिन को राखी के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है | इस दिन बहिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी दीर्घायु के लिए व्रत रखती है | पूजा करके व्रत खोलती है | ऋषि पंचमी की कहानी एक गाँव में एक गरीब माँ बेटे थे | भाद्रपद में ऋषि पंचमी आई | बेटे ने अपनी माँ से कहा कि “माँ ! मै अपनी बहिन के घर राखी बंधवाने जा रहा हु “| माँ ने कहा कि “बेटा हमारे पास तो कुछ भी नही है हम क्या देंगे ” | बेटे ने कहा “लकड़ी बेचकर जो मिलता है वह पर्याप्त है “| यह कहकर बेटा अपनी बहिन के घर रवाना हो गया | वह अपनी बहिन के घर पहुचता है | बहिन भाई को देख लेती है लेकिन उस समय वह सूत कात रही थी | सूत का तार बार बार टूट रहा था | बहिन तार जोड़ने में व्यस्त थी | भाई ने सोचा कि मेरी बहन को मेरे को मेरे आने से खुशी नही हुयी इसलिए वह वापस जाने लगा | इतने में बहिन के सुत का तार जुड़ गया | वह दौडकरभाई को रोकती है | बहिन कहती है “भाई ! मै तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी ल...

ममतासुर को पाताल भेजने वाले विघ्नराज गणेश जी की कहानी Lord Ganesha Story in Hindi

भगवान श्री गणेश का “विघ्नराज” नामक अवतार विष्णु ब्रह्म का वाचक है | वह शेषवाहन पर चलने वाले और ममतासुर के संहारक है | एक बार की बात है भगवती पार्वती अपनी सखियों से बात करते हुए हंस पड़ी | उनके हास्य से एक पुरुष का जन्म हुआ | वह देखते ही देखते पर्वताकार हो गया | पार्वती जी ने उसका नाम ममतासुर रखा | उन्होंने उससे कहा कि तुम जाकर गणेश का स्मरण करो | उनके स्मरण से तुम्हे सब कुछ प्राप्त हो जाएगा | माता पार्वती ने उसे गणेश जी का षडक्षर (वक्रतुण्डाय हुम ) मन्त्र प्रदान किया | ममतासुर माता के चरणों में प्रणाम कर वन में तप करने चला गया | वहा उसकी शम्बरासुर से भेंट हुयी | उसने ममतासुर को समस्त आसुरी विद्याये सिखा दी | उन विद्याओं के अभ्यास से ममतासुर को सारी आसुरी शक्तिया प्राप्त हो गयी | इसके बाद शम्बरसुर ने उसे विघ्नराज की उपासना की प्रेरणा दी | ममतासुर वही बैठकर कठोर तप करने लगा | वह केवल वायु पर रहकर विघ्नराज का ध्यान और जप करता था | इस प्रकार उसे तप करते हुए दिव्य सहस्त्र वर्ष बीत गये | प्रसन्न होकर गणनाथ प्रकट हुए | ममतासुर ने विघ्नराज के चरणों में प्रणाम कर भक्तिपूर्वक उनकी पूजा...

वास्तु में अपना करियर कैसे बनाये Career in Vastu in Hindi

वास्तु में अपना करियर कैसे बनाये Career in Vastu in Hindiअक्सर लोगो से बाते करते सुना जा सकता है कि मकान तो Vastu  वास्तु के हिसाब से ही बनना चाहिए या किसी की किचन सही जगह नही है तो किसी का बेडरूम | अब सहज प्रश्न यह है की आखिर वास्तु है क्या और इसके अनुसार मकान , दूकान जैसी चीजे नही होने पर क्या हो सकता है या क्या होता है | क्या यह कोई विज्ञान है या विज्ञान की कोई शाखा है या अन्धविश्वास का ही एक विस्तार है | और तो और क्या इसमें कोई करियर भी हो सकता है | प्राचीन मान्यताओं की माने तो हर दिशा विशेष गुण के लिए होती है और उन गुणों के मुताबिक़ मकान वगैरह बनाने से लाभ होता है | उन्ही बातो को दुसरे शब्दों में लोग दिशाओं का विज्ञान मानते है लेकिन दूसरा पहलू यह भी है कि कुछ लोग इसे मानते है और इसके अनुरूप निर्माण कार्य कराने में भरपूर यत्न करते है वही दुसरी तरफ ऐसे लोग भी है जो इसे कोरा अन्धविश्वास मानते है और कहते है की दिशाओं ,उनके गुणों या इससे होने वाले लाभ की बात बेमानी है | रही बात करियर की तो जो लोग इसमें यकीन करते है उन्हें परामर्श देकर ठीक ठाक करियर बनाया जा सकता है | Nature of Work वास्...