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Showing posts from July, 2018

Statue of Liberty Facts in Hindi | स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी से जुड़े दिलचस्प तथ्य

Statue of Liberty Facts in Hindi अमेरिकी शहर न्युयोर्क के निकट “लिबर्टी आइलैंड” पर स्थित है Statue of Liberty | इस टापू का पुराना नाम बेडलॉज टापू था | इस प्रतिमा के एक हाथ में मशाल और दुसरे हाथ में एक पुस्तक है | अमेरिका की पहचान मानी जाने वाली वाली Statue of Liberty वास्तव में अमेरिका को फ्रांस की ओर से तोहफे में मिली थी | 04 जुलाई 1776 को अमेरिका को मिली स्वतंत्रता की स्मृति में फ़्रांसीसीयो द्वारा उपहार स्वरूप दिए गये Statute of Liberty का निर्माण फ्रांस तथा अमेरिका दोनों ने संयुक्त प्रयासों से किया गया था | दोनों देशो की सरकारों के बीच हुए एक समझौते के तहत अमेरिकी लोगो ने इस मूर्ति का आधार बनाया जबकि फ़्रांसीसीयो ने मूर्ति को आकार और स्वरूप दिया | इसका पूरा नाम Liberty- Enlightening the World (स्वतंत्रता संसार को शिक्षाप्रद करती है) है | इस विशाल मूर्ति के स्टील के ढाँचे को दो मशहूर फ़्रांसिसी वास्तुकारों युजेन इमानुएल विओल ले दुक और अलेक्सेंडर गुस्तोव एफिल ने तैयार किया | एफिल वही डिज़ाइनर है जिन्होंने पेरिस के विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर को भी डिजाईन किया था | मई 1884 में फ्र...

मणिपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Manipur Tour Guide in Hindi

मणिपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Manipur Tour Guide in Hindi भारत के पूर्वी सीमा पर स्थित मणिपुर (Manipur) को प्रकृति ने अपार नैसर्गिक सुन्दरता से सजाया है | मणिपुर (Manipur) में आदिवासी एवं गैर आदिवासी संस्कृति का मिलाजुला रूप देखने को मिलता है | मणिपुर की सीमा म्यांमार (बर्मा) से मिली होने की वजह से यह सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है | पंडित जवाहरलाल नेहरु ने मणिपुर को “पूर्व का मणि” कहा था | इस पुरे प्रदेश पर यदि विहंगम दृष्टि डाली जाए तो यह ऊँचे ऊँचे पहाड़ो के साए सदृश्य नजर आता है | मणिपुर (Manipur) का मौसम दक्षिण-पूर्वी मानसून से प्रभावित होता है यहाँ दिसम्बर से फरवरी शीत ऋतू , मार्च से अप्रैल पूर्व मानसून , मई से सितम्बर तक मानसून तथा अक्टूबर से नवम्बर उत्तर मानसून रहता है | कला और संस्कृति की दृष्टि से मणिपुर महत्वपूर्ण राज्य है | रासलीला यहाँ का शास्त्रीय नृत्य है | इसके अलावा आदिवासी लोकनृत्य में मणिपुर के आदिवासी समाज के जीवन , रहन-सहन और परम्पराओं की झलक दिखती है | नीले पहाड़ो , घने जंगलो से घिरी वादी में बसा मणिपुर (Manipur) सांस्कृतिक दृष्टि से भी सम्पन्न है | इ...

बच्चो की हैण्ड राइटिंग कैसे सुधारे ? Child Handwriting Tips in Hindi

Child Handwriting Tips in Hindi कंप्यूटर के बढ़ते इस्तेमाल से न केवल बच्चो की Handwriting बल्कि लिखने के प्रति उनकी दिलचस्पी भी कम कर दी है | आज बच्चे लिखने से ज्यादा टाइप करना ज्यादा सुविधाजनक समझते है और अपने हर काम को वे कंप्यूटर एवं फोन पर ही निपटा लेते है | उन्हें लगता है कि पढाई में अच्छा परफॉर्म करने के लिए हैण्ड राइटिंग का सुंदर होना जरुरी नही परन्तु उनकी यह सोच तब गलत साबित हो जाती है जब परीक्षा में सारे सही जवाब लिखने के बावजूद गन्दी लिखाई के कारण उन्हें कम मार्क्स मिलते है | लिखाई खराब होने के कारण अध्यापक उनके पेपर्स ठीक से पढ़ नही पाते जिसके कारण जवाब सही होते हुए भी उन्हें कम मार्क्स मिलते है | अत: लिखाई का सुंदर और स्पष्ट होना बेहद जरुरी है | यदि आप भी अपने बच्चे की खराब हैण्ड राइटिंग से परेशान है तो आप भी कुछ टिप्स अपना कर अपने बच्चो की हैण्ड राइटिंग को सुधर सकते है | Study Table की उंचाई सही हो बच्चे के स्टडी टेबल की उंचाई सही होने चाहिए | टेबल इतना ऊँचा होना चाहिए जिस पर बच्चा आराम से कोहनियाँ टिकाकर लिख सके | साथ ही कुर्सी भी ऐसी होनी चाहिए जिस पर बैठने से बच्चे के पैर...

कोल्हापुर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Kolhapur Tour Guide in Hindi

Kolhapur Tour Guide in Hindi महाराष्ट्र राज्य में स्थित कोल्हापुर शहर (Kolhapur) एक धार्मिक स्थल है जहां प्रति वर्ष लाखो श्रुधालू दर्शन करने आते है | कई सौ साल पहले अस्तित्व में आया यह क्षेत्र सह्याद्री पर्वत श्रेणियों के पास ही स्थित है | इस क्षेत्र को कोल्हापुर बनाने का श्रेय छत्रपति ताराबाई को जाता है | ताराबाई के बाद कोल्हापुर की देखभाल और सत्ता छत्रपति शाहू जी महाराज के हाथो में आ गयी थी | उन्होंने इस इलाके में सामाजिक और शैक्षिक विकास किये | कोल्हापुर के प्रमुख आकर्षण कोल्हापुर (Kolhapur) का हर स्थल एतेहासिक महत्व रखता है | यहाँ का शाहू म्यूजियम भी काफी पुराना है | कोल्हापुर के कुशबाग़ मैदान में कुश्ती का अभ्यास किया जाता है | प्रकृति प्रेमी यहाँ स्तिथ झीलों के किनारे आकर अच्छा समय बिता सकते है | यहाँ की रणकला चौपाटी बहुत काल्पनिक जगह है जहां बच्चो को बहुत अच्छा लगता है | आप कोल्हापुर आये तो यहाँ की मिसाल मानी जाने वाली चप्पलो को खरीदना न भूले | पर्यटक यहाँ आकर ढेर सारी शॉपिंग कर सकते है | कोल्हापुर में चमड़े का सामान काफी अच्छा मिलता है | खाने के मामले में यहाँ का तामडा रसा बहुत ख़...

छितकुल : जंहा छ धाराए मिलती है Chitkul Tour Guide in Hindi

Chitkul Tour Guide in Hindi हिमाचल में छितकुल (Chitkul ) किन्नौर का अंतिम गाँव है | यहाँ सड़क से लगा हुआ ही गेस्ट हाउस है | बस्पा घाटी यहाँ काफी चौड़ी और समतल जैसी है | जहां से बस्पा का उद्गम है उस तरफ से पहाड़ ही पहाड़ चले जाए तो गंगोत्री तक पहुच सकते है | गंगोत्री पहुचने में 4 दिन लगते है | रास्ता दुगम पास , लान्का पास , भैरव घाट होकर गंगोत्री पहुचता है | थोली पास के उस पार तिब्बत का पहला गाँव तोगो है | यहाँ से लोग जौ ,गुड ,चावल , फाफडा ,सूती कपड़ा लेकर वहां जाते है और वहां से उन , नमक , भेड़-बकरा लाते है | छितकुल (Chitkul ) का मतलब है छित (छह) कुल जहां इकट्ठे हो अर्थात छह धाराए जहां मिले | उपर हिम नदी से बहकर आने वाली कितनी ही धाराए दिखाई देती है | बस्पा का अर्थ है भस्म | कहते है विष्णु जी ने भस्मासुर को भस्म किया था | यह भस्म का खड्ड है कोई काम नही आता | सही है बस्पा के जल का कोई उपयोग नही हो रहा | न पीने के लिए ना सींचने के लिए | वह तो सांगला से ठीक पहले जे.पी.इंडस्ट्रीज अब जाकर पनबिजली संयंत्र स्थापित कर इस जल के उपयोग का उद्यम कर रही है | स्थानीय निवासी बताते है कि छितकुल (Chitkul ) म...

Motilal Nehru Biography in Hindi | मोतीलाल नेहरु की जीवनी

Motilal Nehru Biography in Hindi भारत की आजादी की लड़ाई में लाखो ने बलिदान दिया परन्तु इस बलिदान से भी हमे स्वतंत्रता नही मिल सकती थी यदि हमे अपने स्वतंत्रता संग्राम में साहसी ,त्यागी और बुद्धिमान देशभक्तों का नेतृत्व प्राप्त न होता | इन नेताओं में पंडित मोतीलाल जी (Motilal Nehru) का प्रमुख स्थान है | भारत के इतिहास में उनका नाम चिरस्मरणीय रहेगा | जब कोई आदमी महान हो जाता है तो उसके इर्द गिर्द कहानियाँ खडी हो जाती है और किंवदंतीया चल निकलती है परन्तु उस वाक्य में भी कुछ सत्य है कि “होनहार बीरबान के होत चिकन पात” | पंडित मोतीलाल नेहरु (Motilal Nehru) का जन्म 6 मई 1861 को आगरा में हुआ | इससे पहले नेहरु परिवार दिल्ली में बसा था | मोतीलाल नेहरु के दो ओर भाई थे नन्दलाल और बंशीधर | उनके पिता गंगाधर दिल्ली में कोतवाल थे | 12 वर्ष तक दिल्ली के मकतबो में ही उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और बाद में कानपुर के एक अंग्रेजी स्कूल में भर्ती हुए | उन्होंने हाई स्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की और उसके बाद म्योर सेंट्रल कॉलेज , इलाहाबाद में दाखिल हुए | बी.ए. की परीक्षा में एक पर्चा बिगड़ ज...

Aurobindo Ghosh Biography in Hindi | अरविन्द घोष की जीवनी

Aurobindo Ghosh Biography in Hindi इस भारत भूमि में अनेक योगी-महात्माओं ने समय समय पर जन्म लिया है | स्वामी दयानन्द , रामकृष्ण परमहंस , स्वामी विवेकानंद इत्यादि के नाम आप में से बहुतो ने सुने होंगे | अरविन्द घोष (Aurobindo Ghosh) भी एक महान योगी और संत थे अपने ढंग के बिल्कुल ही निराले संत | अरविन्द घोष (Aurobindo Ghosh) बचपन से ही थे कुशाग्र बुद्धि उनका जन्म 15 अगस्त 1872 को बंगाल के एक सम्पन्न परिवार में हुआ था | उनके पिता का नाम डॉक्टर कृष्णधन घोष और माता का नाम श्रीमती स्वर्णलता देवी था | डॉक्टर कृष्णधन सिविल सर्जन थे और पुरी तरह पश्चिमी सभ्यता में रंग गये थे | वैसा ही वह अपने बच्चो को बनाना चाहते थे | अरविन्द से बड़े उनके दो ओर पुत्र थे | अरविन्द (Aurobindo Ghosh) बचपन से ही बड़े कुशाग्र बुद्धि और चंचल थे | उन्हें देखकर लोग बरबस उनकी ओर आकर्षित हो उठते थे | “होनहार बिरवान के होत चिकने पात” वाली कहावत उन पर पुरी तरह लागू होती थी | सात वर्ष की आयु में माता-पिता के साथ आ गये इंग्लैंड जब वह पांच वर्ष के थे तभी उन्हें पढने के लिए दार्जीलिंग के एक अंग्रेजी स्कूल में भेजा गया | उ...

Bal Gangadhar Tilak Biography in Hindi | बाल गंगाधर तिलक की जीवनी

Bal Gangadhar Tilak Biography in Hindi बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) का जन्म 23 जुलाई 1856 ई. को महाराष्ट्र के पश्चिमी किनारे पर स्थित रत्नागिरी में हुआ था | उनके पिता संस्कृत के पंडित थे और माता तपस्विनी थी | पुत्र के लिए तिलक जी की माता ने सूर्य भगवान की पूजा की थी | तिलक का जन्म का नाम था केशव पर प्यार से उन्हें सब बाल कहते थे | आगे चलकर उनका यही नाम प्रसिद्ध हुआ | बचपन में स्कूल में ही उनकी प्रखर बुद्धिमता फलक उठी | उनके पिता ने उन्हें संस्कृत पढाई | तिलक को गणित विषय भी प्रिय था | कक्षा के अध्यापक सवाल हल करने को देते तो वे उसे कागज पर न लिखकर जबानी ही उत्तर देते थे | परीक्षा में भी कठिन सवाल ही हल करते थे बाकि वैसे भी छोड़ देते थे | सवाल करने की इस अजीब पद्धति के कारण के शिक्षक से उनका झगड़ा भी हो गया | सारे अध्यापक उन्हें तेज और बुद्धिमान विद्यार्थी मानते थे | कॉलेज के प्रथम वर्ष में उन्होंने अपना स्वास्थ्य सुधारने का बीड़ा उठाया | कॉलेज की पढाई की ओर उदासीन होकर उन्होंने अपना व्यायाम और तैरने का शौक पूरा किया | वहां भी सबको उनके स्वभाव का परिचय मिला | किसी भी विषय का अभ्या...

Jamshedji Tata Biography in Hindi | जमशेदजी नौशेरवांजी टाटा की जीवनी

Jamshedji Tata Biography in Hindi आज हमारे देश में बड़े से बड़े कारखाने दिखाई देते है पर आज से सौ साल पहले हमारे देश में कारखाने नही थे | जमशेदजी नौशेरवांजी टाटा (Jamshedji Tata) भारत के उन गिने-चुने लोगो में से थे जिन्होंने यहाँ कारखाने खोले | उनका जन्म 03 मार्च 1839 को बम्बई के नवसारी में एक पारसी कुटुंब में हुआ था | उनके पुरखे पुरोहिती करते थे पर जमशेदजी के पिता नौशेरवांजी का मन पुरोहिती करने में नही लगा और वे व्यापार करने लगे | जमशेदजी (Jamshedji Tata) की पढाई-लिखाई का अच्छा इंतजाम किया गया | 19 वर्ष की आयु में उन्होंने बम्बई के elphinston कॉलेज की पढाई समाप्त की फिर वह अपने पिता के साथ मिलकर व्यापार करने लगे | जमशेदजी  के पिताजी चीन के साथ अफीम और कपास का व्यापार करते थे | उनकी कोठी की दो शाखाए चीन के हांगकांग और शंघाई शहरों में थी | वह इन दोनों शहरों में गये और वहां उन्होंने खूब अनुभव प्राप्त किया | उनके पिता (Jamshedji Tata) ने जमशेदजी को लन्दन भेजा कि वह भे कोठी की एक शाखा खोले तथा व्यापार विषयक में नया अनुभव प्राप्त करे परन्तु उनके बैंक की हालत बहुत बिगड़ गयी और जमशेदजी बड़ी मुसीब...

Ramakrishna Paramahansa Biography in Hindi | रामकृष्ण परमहंस की जीवनी

Ramakrishna Paramahansa Biography in Hindi हुगली जिले के कामारपुर नामक छोटे से गाँव में खुदीराम चट्टोपाध्याय नाम के गरीब ब्राह्मण रहते थे | उनकी पत्नी चन्द्रमणि भी पति के समान ही सरल स्वभाव वाली थी और भगवान की पूजा किया करती थी | इन्ही के घर 17 फरवरी 1836 ई. को भी श्री रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahansa) का जन्म हुआ | उनका असली नाम था गदाधर | रामकृष्ण नाम तो सन्यास लेने के बाद पड़ा | पिता चाहते थे कि पुत्र उन्ही के समान ईश्वर-भक्त और धार्मिक बने इसलिए वह उसे रामायण और महाभारत की कहानियाँ सुनाया करते थे | गदाधर अत्यंत कुशाग्रबुद्धि बालक था इसलिए पिता ने उसे पाठशाळा में भर्ती करा दिया | पाठशाळा जाकर बालक ओर भी अधिक फुर्तीला हो गया | गदाधर बंगला आसानी से पढ़-लिख लेता था लेकिन गणित उसकी समझ से बाहर थी | उसके मीठे स्वभाव के कारण अध्यापक उससे बहुत प्रसन्न रहते और उसे खूब प्यार करते थे | गदाधर का कंठ बड़ा मधुर था और बड़े सुरीले स्वर से कृष्णलीला के गीत गाया करते थे | वह सदैव प्रसन्न रहता और अपनी मीठी मीठी बातो से सबको खुश रखता था | बचपन से ही गदाधर की धर्म एम् रूचि थी | गदाधर की भक्ति भावना...