
हिमाचल में छितकुल (Chitkul ) किन्नौर का अंतिम गाँव है | यहाँ सड़क से लगा हुआ ही गेस्ट हाउस है | बस्पा घाटी यहाँ काफी चौड़ी और समतल जैसी है | जहां से बस्पा का उद्गम है उस तरफ से पहाड़ ही पहाड़ चले जाए तो गंगोत्री तक पहुच सकते है | गंगोत्री पहुचने में 4 दिन लगते है | रास्ता दुगम पास , लान्का पास , भैरव घाट होकर गंगोत्री पहुचता है | थोली पास के उस पार तिब्बत का पहला गाँव तोगो है | यहाँ से लोग जौ ,गुड ,चावल , फाफडा ,सूती कपड़ा लेकर वहां जाते है और वहां से उन , नमक , भेड़-बकरा लाते है |
छितकुल (Chitkul ) का मतलब है छित (छह) कुल जहां इकट्ठे हो अर्थात छह धाराए जहां मिले | उपर हिम नदी से बहकर आने वाली कितनी ही धाराए दिखाई देती है | बस्पा का अर्थ है भस्म | कहते है विष्णु जी ने भस्मासुर को भस्म किया था | यह भस्म का खड्ड है कोई काम नही आता | सही है बस्पा के जल का कोई उपयोग नही हो रहा | न पीने के लिए ना सींचने के लिए | वह तो सांगला से ठीक पहले जे.पी.इंडस्ट्रीज अब जाकर पनबिजली संयंत्र स्थापित कर इस जल के उपयोग का उद्यम कर रही है |
स्थानीय निवासी बताते है कि छितकुल (Chitkul ) में पहले 45 घर थे और अब 80 घर है | जनसंख्या 500 के करीब है | छितकुल की देवी माथी नाम से संबोधित है | इसे राणी रणसंगा भी कहते है | देवी के प्रति यहाँ अपार श्रुद्धा है | कहते है कि देवी लोगो की हर तरह रक्षा करती है यहाँ तक कि देवी अपने क्षेत्र के पर्यावरण की भी रक्षा करती है | किन्नर कैलाश की परिक्रमा करने वाले श्रुद्धालू परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले इस मन्दिर में आज की तरह लोग पूर्व में भी श्रुद्ध भाव से आते रहे है |
लोग देवी को चढाने या भेंट करने के लिए किन्नर कैलाश से एक दुर्लभ फुल लाया करते थे | यदि फुल चढाने की परम्परा यथावत चलती रहती तो यह अलभ्य फुल समाप्त हो जाता | देवी ने उक्त फुल भेंट के लिए नही लाने का आदेश दिया | अन्य फुल भले भी ले आते है किन्तु संबधित दुर्लभ फुल का तोडा जाना बंद है | देवी के द्वारा पर्यावरण रक्षा का यह अनुपम उदाहरण है |
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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