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Showing posts from January, 2016

दूरदर्शन के यादगार धारावाहिक- दूसरा भाग Unforgettable TV Serials of Doordarshan - Part 2

Unforgettable TV Serials of Doordarshan हमने पिछली पोस्ट में Doordarshan के यादगार धारावाहिक का पहला अंश बताया था जिसमे हम लोग और बुनियाद जैसे लोकप्रिय नाटको के बारे में विस्तार से बताया था | इसी कड़ी में हम आपको 80 के दशक Doordarshan के अन्य लोकप्रिय नाटको से अवगत करवा रहे है करमचन्द Karamchand दूरदर्शन के यादगार धारावाहिक- दूसरा भाग Unforgettable TV Serials of Doordarshan – Part 2 Doordarshan पर पारिवारिक धारावाहिको से हटकर दुसरे प्रकार के नाटको के बारे में जब सोचा गया तक दूरदर्शन पर पहला जासूसी नाटक श्रुंखला “करमचन्द ” का निर्माण किया गया | इस नाटक की पटकथा पंकज प्रकाश ने लिखी और निर्देशन का कार्य पंकज पाराशर ने किया था | इस नाटक शृंखला के मुख्य किरदार को जाने माने अभिनेता पंकज कपूर ने निभाया था और उनकी सहायक का किरदार सुष्मिता बेनर्जी ने निभाया था | प्रसिद्ध संगीत निर्देशक आंनद-मिलींद की जोड़ी ने इसका संगीत दिया था | इस नाटक की कहानी इस प्रकार होती है कि करमचन्द एक जासूस होता है जो हत्याओं को रहस्य को पुलिस की मदद से सुलझाता है | इस नाटक में अक्सर उनको शतंरज खेलकर के...

दूरदर्शन के यादगार धारावाहिक Unforgettable TV Serials of Doordarshan

Unforgettable TV Serials of Doordarshan मित्रो आज हम आपको दूरदर्शन के कुछ यादगार धारावाहिकों से रूबरू करवाएंगे जिसमे से कई धारवाहिको को आपने जरुर देखा होगा और नही भी देखा हो तो आप इस पोस्ट के बारे में उन धारावाहिकों के बारे में जान जायेंगे | हम लोग Hum Log दूरदर्शन के यादगार धारावाहिक Unforgettable TV Serials of Doordarshan हम लोग भारतीय टीवी पर प्रसारित होने वाला पहला धारावाहिक और पहली नाटक श्रृंखला थी जो दूरदर्शन पर राष्ट्रीय प्रसारण के रूप में 7 जुलाई 1984 से प्रारम्भ हुयी थी | उस समय दूरदर्शन एकमात्र टीवी चैनल हुआ करता था | “हम लोग” को पहला धारावाहिक इसलिए कहते है क्योंकि इससे पहले भी कुछ शो आते थे लेकिन उनका प्रसारण क्षेत्रीय था जैसे मुंबई ,दिल्ली या कलकत्ता केंद्र हुआ करता था | हम लोग धारावाहिक को पहली बार पुरे देश में एक साथ दिखाया गया था | इस धारावाहिक की कहानी 1980 के दशक के एक मध्यमवर्गीय परिवार की है जो अपने जीवन में दैनिक कठिनाइयो और महत्वाकांक्षी जरुरतो से झुझते रहते थे | इस धारावाहिक का कांसेप्ट एक मेक्सिकन टीवी सीरियल से लिया गया था जिसे उस समय के सूचना एवं प्...

दूरदर्शन के यादगार विज्ञापन Classic Indian TV Commercial Ads on Doordarshan

Classic Indian TV Commercial Ads on Doordarshan मित्रो हमने पिछली एक पोस्ट में आपको दूरदर्शन का सम्पूर्ण इतिहास बताया था कि किस तरह दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावहिको के लोगो को बाँध के रखा था | दूरदर्शन के शुरवाती दौर मतलब 80 के दशक की शूरु में विज्ञापन कंपनियों का रुझान कम था लेकिन धारवाहिको की लोकप्रियता को देखते हुए कई विज्ञापन कंपनियों ने पारम्परिक समाचार पत्र विज्ञापनों से हटकर विडियो विज्ञापनों में आने का विचार किया | उस समय बनाये जाने वाले Ad एकदम साधारण होते थे जिसमे फूहड़ता बिलकुल भी नही होती थी | ऐसा माना जाता था कि रामायण और महाभारत टीवी सीरियल के दौरान एक दस सेंकंड के Ad को टीवी पर दिखाने की दर 50000 रूपये से भी ज्यादा थी | उसके बाद 90 के दशक में Ad की दरे 10 लाख प्रति विज्ञापन तक हो गयी थी और आज इनकी दरे करोड़ो में हो गयी हो | https://www.youtube.com/watch?v=UHRfnAJAXck दूरदर्शन के शुरुवाती दिनों के विज्ञापनों में पहले साधारण कलाकार हुआ करते थे लेकिन विज्ञापन की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फ़िल्मी कलाकारों को विज्ञापनों में शामिल करना शूरू कर दिया गया | 80 के दशक में किशोर...

नवाजुदीन सिद्दकी के स्टार बनने की कहानी Nawazuddin Siddiqui Biography in Hindi

नवाजुदीन सिद्दकी के स्टार बनने की कहानी Nawazuddin Siddiqui Biography in Hindi Nawazuddin Siddiqui नवाजुदीन सिद्दकी एक बहुत गरीब किसान परिवार के थे जो मुज्जफरपूरंगर जिले के बुरहांना गाँव में रहते थे | उनके सात भाई-बहन थे  | उनके गाँव में 12वी तक स्कूल थी और उन्हें आगे की पढाई के लिए शहर जाना था | अब शहर में उनके पास ग्रजुएट होने के अलावा कोई विकल्प नही था क्योंकि उनके परिवार में उनको कुछ नया कोर्स की सलाह देने वाला कोई नही था | अब उनको ये तो पता था कि केवल ग्रेजुएट होने से कोई नौकरी मिलने वाली नही है इसी कारण उनको काम की तलाश में दर दर भटकना पड़ा था | अब उनके पास गाँव से बाहर निकलने के अलावा कोई विकल्प भी नही था क्योंकि गाँव में खेती के अलावा कोई काम नही होता था | Nawazuddin Siddiqui ने बचपन में कभी फिल्म नही देखी थी लेकिन वयस्क होने पर उनके दोस्त उन्हें फिल्म दिखाने ले जाया करते थे | उन्होंने पहली कोई फिल्म देखी थी तो उसका नाम दोस्ती था जो अंधे और लंगड़े दोस्तों की कहानी थी | फिल्म देखने के लिए उनको गाँव से 45 किमी दूर शहर में जाना पड़ता था | उनको गाँव में फिल्मे देखने नही देते थे क्योंक...

The Making of Mahabharata TV Serial 1988 महाभारत टीवी सीरियल के निर्माण की कहानी

The Making of Mahabharata TV Serial 1988 महाभारत के लिए बी.आर.चोपड़ा ने जब सोचना शुरू किया तो वो पहले महाभारत पर फिल्म बनाना चाहते थे लेकिन उनको पता था कि महाभारत इतनी विशाल है और इसमें इतने पात्र है कि केवल 3 घंटे में इस फिल्म को सही रूप से पेश कर पाना असम्भव है | तब उन्होंने टीवी माध्यम का चुनाव किया | सतीश भटनागर ने महाभारत पर रिसर्च करना शुरू कर दिया और देश भर के अलग अलग पुस्तकालयों की किताबे पढना शुरू किया | उन्होंने उर्दू कवि डा.राही मासूम रजा को इसकी स्क्रिप्ट लिखने को कहा और मुस्लिम होते हुए भी उन्होंने बहुत सुंदर स्क्रिप्ट लिखी थी और हिंदुस्तान के भूतकाल की कहानी को वर्तमान की कहानी से जोड़ने का काम किया | बी.आर.चोपड़ा के पुत्र रवि चोपड़ा ने निर्देशन की बागडोर संभाली | उन्होंने समाचार पत्रों में कलाकारों के लिए विज्ञापन दिया जिसमे दस हजार से भी ज्यादा लोगो ने महाभारत में काम करने के लिए पत्र लिखे | अब महाभारत के लिए वो ऐसे पात्रो का चुनाव करना चाहते थे जो फिल्मो या टीवी पर कभी नहीं आये हो | इस काम के लिए उन्होंने शकुनी का किरदार निभाने वाले गुफी पेंटल को इस काम के लिए सौंपा जो उस ...

Mythological TV Shows on Indian Television भारतीय टीवी पर प्रसारित होने वाले पौराणिक धारावाहिक

Mythological TV Shows on Indian Television भारतीय टीवी में Mythological TV Shows पौराणिक धारावाहिको का प्रसारण 80 के दशक में शुरू हो गया था जब दूरदर्शन ने पहली बार रामायण और महाभारत का प्रसारण किया था | इसके बाद श्री कृष्णा ,ॐ  नम: शिवाय और जय हनुमान जैसे प्रसिद्ध धारावाहिकों ने दूरदर्शन पर समा बाँध दिया | इसके बाद सिंहासन बत्तीसी और विक्रम बेताल जैसे नाटको का प्रसारण प्रारंभ हुआ | वर्तमान में सुर्यपुत्र कर्ण और देवो के देव महादेव जैसे सीरियल प्रसारित किये जाते है | आइये आपको भारतीय पर प्रसारित होने वाले कुछ प्रसिद्ध धरावाहिको  Mythological TV Shows पर वर्ष के अनुक्रम में जानकारी देते है | रामायण Ramayan Ramanand Sagar [1986] Mythological TV Shows on Indian Television भारतीय टीवी पर प्रसारित होने वाले पौराणिक धारावाहिक रामायण भारतीय टीवी पर प्रसारित होने वाला पहला पौराणिक धारावाहिक Mythological TV Show था जो 1986 में रामानंद सागर द्वारा निर्देशित किया गया था | इस धारावाहिक को मुख्यतः वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास रामचरितमानस के आधार पर निर्मित किया गया | जैसा कि आप सभी को पता कि भगवान रा...

मिंया तानसेन की जीवनी Miya Tansen Biography in Hindi

Miya Tansen Biography in Hindi मियाँ तानसेन Tansen एक महान शास्त्रीय गायक थे | तानसेन का जन्म 1520 ईस्वी में ग्वालियर के हिन्दू परिवार में हुआ था | उनके पिता का नाम मुकुंद मिश्रा था जो स्वयं एक महान कवि थे | Tansen तानसेन ने संगीत की शिक्षा पहले स्वामी हरिदास से ली और बाद में हजरत मुहम्मद गॉस ने उन्हें संगीत सिखाया | वो पहले रेवा के राजा रामचंद्र के दरबार में एक संगीतकार थे जिसे बाद में अकबर के नवरत्नों में शामिल कर लिया गया | राजा रामचंद्र तानसेन Tansen के जाने से बहुत दुखी हुए | तानसेन भारत के इतिहास का एक प्रसिद्ध नाम बन गये और उन्होंने कई शाष्त्रीय रागों की रचना की |उनकी राग दीपक और राग मल्हार सबसे ज्यादा प्रसिद्ध थे | तानसेन की उनके संगीत गुरु हरिदास से मुलाकात Tansen Meets Guru Haridas तानसेन जब बड़ा हुआ तो उनको उनके पिता ने पढ़ाने के लिए कई अध्यापको को नियुक्त किया लेकिन उनको पढने के बजाय पास के जंगल में अपने दोस्तों के साथ घुमने का शौक था |  जंगल में वो दोस्तों के साथ जानवरों और पक्षियों की आवाजो की नकल निकाला करते थे | एक बार एक गायकों का दल उस जंगल से गुजरा | तानसेन एक झाड़ी के ...

शनिदेव की कथा Shani Dev Story in Hindi

शनि को सभी ग्रहों में सबसे खतरनाक ग्रह माना जाता है | अगर कोई इन्सान एक अच्छी आयु जीता है तो उसको जीवन में तीन बार शनि की दशा से गुजरना पड़ता है | पहली बार वो इन्सान के साथ खेलता है ,दुसरी बार उसकी जिन्दगी में भूचाल ले आता है औ तीसरी बार उसके सरे धन-दौलत को नष्ट कर देता है | इसी कारण सभी शनि को शांत रखने का प्रयास करते है | शनिवार का व्रत कोई भी कर सकता है और अगर वो श्रावण मास के शनिवार से करे तो सबसे उत्तम होता है | इस व्रत को करने के लिए कुछ विशेष बातो का ध्यान रखना पड़ता है जो आप किसी अनुभवी इन्सान या पंडित की सहायता से कर सकते है | शनि देव की कथा Shani Dev Katha आज्ञा दे गुरु देव ने ,देना शीष झुकाय , कथा कहू शनि देव की ,भाषा सरल बनाय एक बार सभी ग्रह एक साथ इकट्ठे हुए और आपस में बाते करने लगे | कुछ विषयों पर बात करते करते वो एक विषय पर आकर रुक गये कि “सबसे सम्मानित ग्रह कौनसा है ” | वो सब आपस में तर्क वितर्क करने लगे लेकिन कोई नतीजा नही निकला इसलिए उन्होंने इंद्र देव के पास जाने का विचार किया | तो सभी ग्रह इंद्र देव के पास गये और वो भी विस्मय में पड़ गये क्योंकि अगर वो किसी ...

सोलह सोमवार व्रत कथा Solah Somvar Vrat Katha [16 Mondays Fast Story in Hindi]

Solah Somvar Vrat Katha in Hindi हिन्दू धर्म में कई औरत सोलह सोमवार व्रत करती है | इस सोलह सोमवार व्रत को सम्भव हो सके तो , श्रावण मास से ही शुरू करना चाहिए और लगातार 16 सोमवार तक इस व्रत को करते है | सोलह सोमवार व्रत की कथा इस प्रकार है | एक बार शिवजी और माता पार्वती मृत्यु लोक पर घूम रहे थे | घूमते घूमते वो विदर्भदेश के अमरावती नामक नगर में आये | उस नगर में एक सुंदर शिव मन्दिर था इसलिए महादेव जी  पार्वती जी के साथ वहा रहने लग गये | एक दिन बातो बातो में पार्वती जी ने शिवजी को चौसर खेलने को कहा | शिवजी राजी हो गये और चौसर खेलने लग गये | इसे भी पढ़े : महाशिवरात्रि व्रत कथा उसी समय मंदिर का पुजारी दैनिक आरती के लिए आया | पार्वती ने पुजारी से पूछा “बताओ , हम दोनों में चौसर में कौन जीतेगा ” | वो पुजारी भगवान शिव का भक्त था और उसके मुह में तुंरत निकल पड़ा “महादेव जी जीतेंगे ” | चौसर का खेल खत्म होने पर पार्वती जी जीत गयी और शिवजी हार गये | पार्वती जी ने क्रोधित होकर उस पुजारी को श्राप देना चाहा तभी शिवजी ने उन्हें रोक दिया और कहा कि ये तो भाग्य का खेल है उसकी कोई गलती न...

प्रति सोमवार व्रत कथा Somvar Vrat Katha in Hindi

सोमवार व्रत का हिन्दू धर्म में बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि ये व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है | वैसे इस व्रत का कठोर रूप से पालन करने वाले दिन में “ॐ नम: शिवाय ” का जाप करते रहते है | इस व्रत को आप शाम 4 या 5 बजे तक खोल सकते है | इस व्रत में फलाहार पर कोई प्रतिबन्ध नही होता है लेकिन भोजन दिन में एक बार ही करना चाहिए | वैसे तो इस व्रत को कोई भी कर सकता है लेकिन अविवाहित लडकिया सुंदर वर के लिए इस व्रत को करती है और विवाहित औरते अपने लम्बे और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत को करती है | पुरुष इस व्रत को इसलिए करते है ताकि सुखी और शांतिपूर्ण जीवन बिता सके | इस व्रत का पालन करने वाले को व्रत खोलते समय केवल शाकाहारी भोजन करना चाहिए | Types of Monday Fast (Somvar Vrat) सोमवार व्रत के प्रकार सोमवार व्रत चार प्रकार से किया जा सकता है | चारो व्रतो के लिए विधि एक समान है जिसमे शिवजी की पूजा के बाद कहानी पढी या सूनी जाती है | आइये आपको चारो व्रतो के बार में बताते है (1) साधारण प्रति सोमवार व्रत Simple every Monday fast /Somvar Vrat Katha (2) प्रदोष सोमव...

शेखचिल्ली के कारनामे Shekh Chilli Stories in Hindi

Shekh Chilli Stories in Hindi Shekh Chilli शेखचिल्ली के कारनामे के बारे में हमने बचपन में बहुत किताबे ओर कॉमिक्स पढी है उन्ही कहानियो में से कुछ चुनिन्दा कहानिया आज हम आपको सुनायेंगे | वैसे शेखचिल्ली एक सूफी संत था जो मुगल बादशाह दारा शिकोह का गुरु था |शेख चिल्ली की कब्र आज भी हरियाणा के थानेसर में बनी हुयी है | Shekh Chilli शेखचिल्ली का बचपन बहुत गरीबी में बिता था और बचपन में उसकी पिता की मौत के बाद उसकी माँ ने उसको पाल पोसकर बड़ा किया | उसको बचपन में सभी शेख कहकर पुकारते थे | एक दिन मौलवी साहब ने मदरसे में उसको सिखाया कि लडके और लड़की के लिए अलग अलग शब्दों का प्रयोग होता है जैसे सुलेमान पानी पीता है और सुल्ताना पानी पीती है उसी तरह सुल्तान गाव जाता है और सुल्ताना गाँव जाती है | अब वो मौलवी साहब की इस शिक्षा को समझ गया | एक दिन वो रास्ते में जा रहा तो उसे किसी के चिल्लाने की आवाज आयी उसने पास जाकर देखा तो एक लडकी कुंवे में गिर गयी थी और मदद के लिए चिल्ला रही थी | वो दौड़ता हुआ अपने साथियो के पास गया और कहने लगा “एक लडकी कुंवे में गिर गयी है और मदद के लिए चिल्ली रही है ” | उसके...

सिंदबाद जहाजी की सातवी और अंतिम समुद्री यात्रा The Seventh Voyage of Sinbad the Sailor

The Seventh Voyage of Sinbad the Sailor अब सिंदबाद ने सातवी समुद्री यात्रा की कहानी सुनाई | तो मै छठी यात्रा से थका हारा लौट आया लेकिन अब बहुत हो गया था | अब मैंने सोच लिया था कि अब वापस कभी समुद्री यात्रा पर नही जाऊँगा लेकिन मेरा भाग्य मेरा पीछा नही छोड़ रहा था | एक दिन मेरे घर पर एक आदमी आया और कहने लगा कि खलीफा ने मुझे बुलाया है | अब खलीफा के यहा गया और उनको अभिवादन किया | उन्होंने मेरा अभिवादन स्वीकार किया और कहा “मुझे तुमसे एक काम है , क्या तुम करोगे ?” | मैंने कहा “आपका गुलाम आपकी क्या मदद कर सकता है ” | खलीफा ने कहा “”मेरी इच्छा है कि तुम सरनदीप राजा के वापस जाओ और मेरी तरफ से कुछ तोहफे उन्हें भेंट करो ” | ये सुनकर मै काँप गया और  कहा “ए खुदा , मै अब समुद्री याताओ से नफरत करने लगा हु और जब भी कोई मुझे समुद्री यात्रा के लिए बोलता है मेरी रूह काँप उठती है , पिछली यात्राओ की मुसीबतों को देखते हुए मैंने बगदाद से बाहर नहीं निकलने की कसम खाई थी ” | मैंने खलीफा को अपनी पिछली समुद्री यात्राओ की मुसीबते बताई तो उन्होंने कहा “वास्त...