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दूरदर्शन के यादगार धारावाहिक- दूसरा भाग Unforgettable TV Serials of Doordarshan - Part 2

Unforgettable TV Serials of Doordarshan हमने पिछली पोस्ट में Doordarshan के यादगार धारावाहिक का पहला अंश बताया था जिसमे हम लोग और बुनियाद जैसे लोकप्रिय नाटको के बारे में विस्तार से बताया था | इसी कड़ी में हम आपको 80 के दशक Doordarshan के अन्य लोकप्रिय नाटको से अवगत करवा रहे है

करमचन्द Karamchand

दूरदर्शन के यादगार धारावाहिक- दूसरा भाग Unforgettable TV Serials of Doordarshan - Part 2
दूरदर्शन के यादगार धारावाहिक- दूसरा भाग Unforgettable TV Serials of Doordarshan – Part 2

Doordarshan पर पारिवारिक धारावाहिको से हटकर दुसरे प्रकार के नाटको के बारे में जब सोचा गया तक दूरदर्शन पर पहला जासूसी नाटक श्रुंखला “करमचन्द ” का निर्माण किया गया | इस नाटक की पटकथा पंकज प्रकाश ने लिखी और निर्देशन का कार्य पंकज पाराशर ने किया था | इस नाटक शृंखला के मुख्य किरदार को जाने माने अभिनेता पंकज कपूर ने निभाया था और उनकी सहायक का किरदार सुष्मिता बेनर्जी ने निभाया था | प्रसिद्ध संगीत निर्देशक आंनद-मिलींद की जोड़ी ने इसका संगीत दिया था |
इस नाटक की कहानी इस प्रकार होती है कि करमचन्द एक जासूस होता है जो हत्याओं को रहस्य को पुलिस की मदद से सुलझाता है | इस नाटक में अक्सर उनको शतंरज खेलकर केस सोल्व करते हुए दिखाया जाता है | करमचन्द की सहायक इस नाटक में हास्य कलाकार का काम करती है जो करमचन्द से बेवकुफो भरे प्रश्न पूछकर करमचन्द को परेशान करती है और करमचन्द हर बार कहता है “Shut up, Kitty”

ये जो है जिन्दगी Ye Jo Hai Zindagi

Ye Jo Hai Zindagiये जो है जिन्दगी दूरदर्शन Doordarshan पर प्रसारित होने वाला पहला और सबसे ज्यादा चलने वाला हास्य धारावाहिक था | ये धारवाहिक दूरदर्शन पर 1984 से प्रसारित हुआ था | इसकी पटकथा हास्य लेखक शरद जोशी ने लिखी थी और इस नाटक का निर्देशन कुंदन शह , ओबेरॉय और रमन कुमार ने की थी | इसका हर एपिसोड 20-25 मिनट का हुआ करता था जो हर शुक्रवार रात 9 बजे प्रसारित होता था | इस नाटक की लोकप्रियता इतनी थी कि हिंदी सिनेमा तक इस नाटक की वजह से प्रभावित हो गया था |
इस नाटक की कहानी अभिनेता शफी इनामदार और स्वरुप संपत के इर्द गिर्द घुमती है जिन्होंने रणजीत वर्मा और रेनू वर्मा के शादीशुदा जोड़े का किरदार निभाया था |  इस नाटक में इन दोनों के साथ रेणु का अविवाहित और बेकार छोटा भाई रहता है | मशहूर अभिनेता सतीश शाह इसमें अलग अलग किरदार निभाते है जो लोगो को हँसाते है | 80 के दशक में सतीश शाह को “कॉमेडी का बादशाह” माना जाता था | इस नाटक को दो सीजन में किया गया था जिसमे कुल मिलाकर 61 एपिसोड थे | इस नाटक को देखने वालो को आज भी उनके डायलॉग याद होंगे जैसे “ये क्या हो रहा है ” “बच्चो की दुनिया है बाबा ” थर्टी इयर्स का एक्सपेरिएंस है ” |

रजनी Rajni

1985 में Doordarshan प्रसारित होने वाला धारावाहिक “रजनी” भी खूब चला जिसका निर्देशन बासु चटजी ने किया था | इस नाटक में प्रिया तेंदुलकर मुख्य कलाकार थी | इस नाटक में सरकारी दफ्तरों में सरकरी मुलाजिमो द्वारा किये जाने वाले भ्रष्टाचातो को दिखाया गया है इस कारण ये नाटक बहुत प्रसिद्ध हुआ था | इस नाटक में रजनी हर एपिसोड में सरकारी भ्रष्टाचारो के खिलाफ आवाज उठाती है और सरकारी मुलाजिमो को बदलने का प्रयास करती है | पहले इस नाटक के लिए पद्मिनी कोल्हापुरी को लिया जाने वाला था लें बाद में प्रिय तेंडुलकर इस रोल के लिए राजी हो गयी थी जो इस नाटक के कारण बहुत प्रसिद्ध हुयी थी |इसकी पटकथा करण राजदान ने लिखी थी जिन्होंने इस नाटक में अभिनय भी किया था

नुक्कड़ Nukkad

नुक्कड़ धारावाहिक Doordarshan पर 1986 में प्रसारित होने वाला एक हास्य धारावाहिक था जिसक निर्देशन कुंदन शाह ने किया था | इस नाटक में मुख्य कलाकार दिलीप धवन , रमा विज , पवन मल्होत्रा , संगीता नायक और अवतार गिल थे | इस नाटक को लोगो ने खूब पसंद किया और 80 के दशक में बुनियाद व् हम दोनों सीरियल के बाद सबसे लोकप्रिय नाटक था | इस नाटक का पहला सीजन 1986-87 के बीच प्रसारित किया गया जिसमे कुल 40 एपिसोड थे | इस नाटक की कहानी कम आय वाले व्यक्तियों की दैनिक समस्याओ पर आधारित थी जो एक या दो किरदारों के इर्द गिर्द घुमती थे | इस नाटक के कई एपिसोड तो आशा के साथ खत्म होते  थे जबकि कुछ एपिसोड में निराशा होती थी | इस नाटक की लोकप्रियता के चलते 1993 में “नया नुक्कड़” नाम से धारवाहिक बनाया गया जिसमे कलाकार तो पुराने थे लेकिन किरदार नये थे लेकिन वो इतना सफल नही हो सका |

कच्ची धुप Kacchi Dhoop

कच्ची धुप नाटक भी 80 के दशक में Doordarshan प्रसारित होने वाला लोकप्रिय धारावाहिक था जिसकी पटकथा चिट्टा पालेकर ने लिखी और निर्देशन मशहूर अभिनेता और निर्देशक अमोल पालेकर ने किया था | इस नाटक से भाग्यश्री और आशुतोष गोवारिकर ने अपने कैरियर की शुरुवात की थी | इस नाटक में भाग्यश्री ने अल्का का किरदार और आशुतोष गोवारिकर ने एक अध्यापक का किरदार निभाया था | इस नाटक में आपको जीवन के अलग अलग पहलू देखने को मिलेंगे |

भारत एक खोज Bharat Ek Khoj

भारत एक खोज , जवाहरलाल नेहरु की पुस्तक “The Discovery of India” पर आधारित है जिसमे भारत का पूरा इतिहास दर्शाया गया था | इस नाटक में आज से 5000 साल पहले के इतिहास से लेकर भारत की स्वतंत्रता तक के इतिहास को दिखाया गया है | इस नाटक का निर्माण और निर्देशन मशहूर फ़िल्मकार श्याम बेनेगल ने किया था | इस नाटक में मुख्य कलाकार ओम पुरी ,इरफ़ान खान . लकी अली , पियूष मिश्रा ,रोशन सेठ ,टॉम आल्टर और सदाशिव अमरापूरकर थे | जवाहरलाल नेहरु का किरदार रोशन सेठ ने निभाया था | इस नाटक को बनाने में 144 सेट का पयोग किया गया था |
जिस तरह बी आर चोपड़ा के लिए महाभारत सीरियल बनाना एक सपना था उसी प्रकार श्याम बेनेगल के लिए इस नाटक को बनाना एक सपना और चुनौती थे क्योंकि इस नाटक में उनको भारत के उस इतिहास को दर्शाना है जो पहले कभी नही देखा गया था | श्याम बेनेगल ने पहली बार इस नाटक से माध्यम से टीवी पर पदार्पण किया था | इस नाटक को बनाने में 4 करोड़ रूपये की लागत आयी थे क्योंकि इस नाटक में उन्होंने उस इतिहास को दिखाया था जो अब तक हम केवल किताबो में पढ़ते थे | मौर्य साम्राज्य और अंग्रेजो के बारे में इस नाटक में विस्तार में बताया गया है  |
रोशन सेठ ने जवाहरलाल नेहरु का जो किरदार निभाया था वो लाजवाब था उन्होंने इस नाटक में सूत्रधार का काम किया था जो हर कहानी को आगे बढ़ाने का काम करते थे | बेनेगल ने कभी सोचा भी नही था कि रोशन सेठ ,नेहरु जी का किरदार इतना बढ़िया ढंग से पेश कर पायेंगे | ओम पुरी शुरू से ही फिल्मो के साथ साथ टीवी पर सक्रीय रहे थे इस नाटक में उन्होंने अशोक ,रावण और दुर्योधन के अलग अलग किरदार निभाए थे |  इस नाटक के लिए उन्होंने बॉम्बे सिनेमा से एक साल का विश्राम लेकर इस नाटक में एकाग्रता से काम किया था | ओम पुरी के अलावा इरफ़ान खान भी कुछ एपिसोड में नजर आये थे
ओम पुरी और इरफ़ान खान के अलावा इस नाटक में केके रैना ,इला अरुण ,अंजन श्रीवास्तव ,अनंग देसाई ,विजय कश्यप और अपराजिता कृष्णा भी बार बार दिखाए गये थे |इस नाटक के चित्रण के लिए श्याम बेनेगल इतिहास की हजारो किताबे साथ लेकर पटकथा लेखक शमा जैदी के साथ बैठते थे | इस नाटक के लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत की थी और इस नाटक में पुरी तरह खो गये थे |

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