Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2018

भूटान देश से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Bhutan Facts in Hindi

भूटान (Bhutan) चारो ओर जमीन से घिरा दक्षिण एशिया का एक देश है जो पूर्वी हिमालय में स्तिथ है | भूटान (Bhutan) की सीमाए तिब्बत , सिक्किम , अरुणाचल प्रदेश  ,असम और पश्चिमी बंगाल से लगती है | भूटान दक्षिण एशिया में मालदीव के बाद सबसे कम जनसख्या वाला देश है | भूटान की राजधानी थिम्फू सबसे बड़ा शहर है | आइये भूटान (Bhutan) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में आपको विस्तार से बताते है | भूटान का इतिहास भूटान एक संस्कृत शब्द भोतांत से बना हुआ है जिसका अर्थ है “तिब्बत का अंत” | भूटान का असली अर्थ है ऊँची जमीन | भूटानी लोग अपने देश को द्रुक युल अर्थात थंडर ड्रैगन कहकर पुकारते है | एक तिब्बती लामा गवांग नामग्याल 1616 ईस्वी में भूटान आया था और उसने ही सबसे पहले धार्मिक सरकार की स्थापना की थी | उसने ही भूटान में जोंग की स्थापना की थी | गवांग नामग्याल की मृत्यु के दो शताब्दियों के बाद भूटान में गृहयुद्ध हुआ जिसकी वजह से स्थानीय शासको को काफी ताकत मिली | इसकी वजह से 1907 में भूटान को पहला राजा उग्येन वांगचुक मिला | 1865 में ब्रिटिश सेना ने भूटान पर आक्रमण किया | 1910 में भूटान ने विदेशी माम...

त्रिपुरा राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Tripura Facts in Hindi

त्रिपुरा राज्य से जुड़े रोचक तथ्य | Tripura Facts in Hindi त्रिपुरा (Tripura) भारत का नार्थईस्ट प्रदेश है जो भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है | त्रिपुरा बांग्लादेश एवं बर्मा की नदी के घाटियों के बीच स्थित है |इसके तीनो तरफ बांग्लादेश एवं उत्तर-पूर्व में यह असम एवं मिजोरम से जुड़ा हुआ है | त्रिपुरा पर कई शताब्दियों पहले त्रिपुरी वंश का राज था इसलिए इसे त्रिपुरा (Tripura) कहते है | आइये आपको त्रिपुरा (Tripura) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में विस्तार से बताते है | त्रिपुरा एक नजर में | Tripura Facts in Hindi देश भारत गठन 21 जनवरी 1972 राजधानी अगरतला सर्वाधिक जनसख्या वाला शहर अगरतला कुल जिले आठ कुल क्षेत्रफल 10,491.69 वर्ग किमी क्षेत्रफल के लिहाज से स्थान 27th (2014) कुल जनसंख्या 3,671,032 जनसख्या के लिहाज से स्थान 22nd (2014) जनसंख्या घनत्व 350 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी साक्षरता दर 87.75 प्रतिशत (2011) मुख्य भाषाए बंगाली ,अंग्रेजी , कोकबोरोक राज्य पशु फ़रीज पर्णवानर राज्य पक्षी हरा शाही कबूतर राज्य वृक्ष अगर राज्य पुष्प नागेसर राज्य दिवस 21 जनवरी उच्च न्यायालय गुवाहाटी स्कूल 4455 महाविद्...

गंगोत्री धाम से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी | Gangotri Travel Guide in Hindi

गंगोत्री धाम से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी | Gangotri Travel Guide in Hindi गंगोत्री (Gangotri) को गंगाजी का उदय स्थल माना जाता है | यह एक बहुत ही पवित्र एवं महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है | गंगोत्री (Gangotri) में कई मन्दिर एवं कुंड भी बने है जो दर्शनीय है | इस स्थान का मुख्य मन्दिर गंगा मन्दिर है | इस मन्दिर में गंगा जी की मूर्ति है जो आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिष्टित की गयी थी | इस मन्दिर में राजा भागीरथ , यमुना ,सरस्वती एवं शंकराचार्य जी की मुर्तिया इसकी शोभा को ओर अधिक बढाती है | मन्दिर में सुवर्ण रचित गंगाजी की मूर्ति है और छत्रमुकुट भी सोने का ही है | यहाँ पर भेदभाव नहे है | अछूत और सवर्ण सबके साथ एक ही व्यवहार होता है | गंगाजी के मन्दिर के पास ही भैरवनाथ मन्दिर भी है | गंगोत्री (Gangotri) स्थान समुद्र स्तर से लगभग दस हजार फुट की उंचाई पर स्थित है | यह गंगाजी के दक्षिण तट पर है यहाँ कई धर्मशालाये है | यात्रियों को यहाँ सदावर्त भी मिलता है | गंगाजी यहाँ केवल 44 फुट चौड़ी है और गहराई लगभग तीन फुट है | गंगोत्री (Gangotri) के बारे में मत है कि वर्ष 1794 ई. में मराठा नरेश ने इंदौर की रानी लक्ष...

जोधपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Jodhpur Tour Guide in Hindi

जोधपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Jodhpur Tour Guide in Hindi राजस्थान के दुसरे शहरों के मुकाबले जोधपुर (Jodhpur) में सूर्य का प्रकाश देर तक रहता है इसलिए इसे सूर्य नगरी भी कहा जाता है | थार मरुस्थल के मुहाने पर स्थित जोधपुर को राव जोधा ने 1459 ई. में बसाया था | राजस्थान के अनेक एतेहासिक नगरो में जोधपुर (Jodhpur) शहर भी महत्वपूर्ण है | यहाँ आने वाले पयर्टको को आज भी वहां के इतिहास की झलक दिखाई देती है | यहाँ के किले पर्यटकों का विशेष ध्यान आकर्षित करते है | आइये आपको जोधपुर (Jodhpur) के प्रमुख पर्यटन स्थलों से रुबुरु करवाते है | जोधपुर (Jodhpur) के मुख्य दर्शनीय स्थल मेहरानगढ़ किला – यह किला जमीन से लगभग 120 मीटर ऊँची पहाडी , चिड़िया नाथ जी की टंकू पर स्थित है | इस किले का निर्माण सामरिक एवं सुरक्षा के लिए किया गया है | सन 1459 ई. में राव जोधा ने इस किले का निर्माण करवाया | आकर्षक एवं अत्यंत विशाल किले की लम्बाई लगभग 457 मीटर  तथा चौड़ाई 228 मीटर है | राव जोधा के बाद अनेक शासको के द्वारा इस किले के निर्माण कार्य करवाए गये तथा महल आदि बनवाये गये | यहाँ का संग्रहालय सन 1972 से संचलित है ...

डलहौजी के प्रमुख पर्यटन स्थल | Dalhousie Tour Guide in Hindi

डलहौजी के प्रमुख पर्यटन स्थल | Dalhousie Tour Guide in Hindi धौलाधार की पहाडियों पर बसा यह पर्यटन स्थल (Dalhousie) समुद्र तट से 2036 मीटर की उंचाई पर स्थित है | चीड़ एवं देवदार के वृक्ष तथा बर्फ से अच्छादित ऊँचे शिखर डलहौजी (Dalhousie) का मुख्य आकर्षण है | चीड़ एवं देवदार के वृक्षों से घिरे डलहौजी की मनोरम छवि को बालून , कथलोग , पोटरीन , तेहरा और बरकोटा नामक पर्वत ओर अधिक सुंदर बनाते है | यह पर्यटन स्थल ब्रिटिश वायसराय लार्ड डलहौजी (Lord Dalhousie )के नाम पर विकसित किया गया था | 1850 में डलहौजी ने इस स्थल को अपने रहने के लिए चुना था | प्राकृतिक सुन्दरता के कारण धीरे धीरे यह स्थल पर्यटकों को अच्छा लगने लगा | आज यह एक सुविधा सम्पन्न और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर पर्यटन स्थल है | आइये डलहौजी (Dalhousie) पर प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में आपको बताते है| डलहौजी के प्रमुख पर्यटन स्थल जंदडी घाट – जंदडी घाट कभी चम्बा के पूर्व शासको की शरण स्थली थी | यहाँ की प्राकृतिक छटा अत्यंत मनोहारी है | यह एक उत्तम पिकनिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है | सतधारा – पंजकुला से रास्ते में 2036 मीटर क...

जैसलमेर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Jaisalmer Tour Guide in Hindi

जैसलमेर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Jaisalmer Tour Guide in Hindi राजस्थान राज्य के पश्चिमी दिशा में स्थित जैसलमेर (Jaisalmer) पाकिस्तान की सीमा के करीब है | यह के मरुस्थलीय क्षेत्र होने के बाद भी प्राकृतिक रूप से बहुत ही अनूठा है | जैसलमेर (Jaisalmer) मीलो लम्बे रेत के समुद्र के बीच स्थित है | कुदरत की अनुकम्पा भी निराली है | इस नगर के चारो तरफ रेत ही रेत का साम्राज्य कुदरत ने बनाया है | वही दुसरी तरफ मानव के मस्तिष्क एवं उसके हाथो ने प्रस्तरो पर नायाब नक्काशी उकेर कर इसे ओर खुबसुरत बना दिया है | जैसलमेर (Jaisalmer) में चारो तरफ दूर दूर तक जहां तक नजर जाती है रेत की बनती बिगडती लहरे , मीलो लम्बी खामोशी को तोडती रेत की सरसराहट वीरान पहाड़िया , ऊँची ऊँची हवेलियाँ तथा उनकी कलात्मक बनावट , नक्काशी युक्त जाली जरोखे , किले की अनूठी स्थापत्य कला , सोनार किला , सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय बिखेरती स्वर्णिम आभा , शांतमय एवं उल्लास से परिपूर्ण तथा उमंग भरा जीवन आदि सभी कुछ तो देखने के योग्य है | सूर्य की रोशनी में स्वर्ण की भांति चमकती इस “स्वर्णनगरी” में कलात्मक हवेलियो की बहुतायत के वज...

चित्तोडगढ के पर्यटन स्थल | Chittorgarh Tour Guide in Hindi

चित्तोडगढ का इतिहास एवं पर्यटन स्थल | Chittorgarh Tour Guide in Hindi चित्तोडगढ (Chittorgarh) राजस्थान का एक एतेहासिक पर्यटन स्थल है | यहाँ अनेक प्रकार के किले , महल और मन्दिर है | चित्तोडगढ (Chittorgarh) देशवासियों को अखंड , अविभाज्य , विविधताओं में एकता के दर्शन कराने वाले क्षेत्र का एहसास कराता रहेगा तथा आने वाली अनेक सदियों तक चित्तोडगढ (Chittorgarh) प्रेरणा स्त्रोत बना रहेगा | भारतीय इतिहास के अंदर चित्तोडगढ का अपूर्वं  योगदान रहा है | वह कभी भी भुलाया नही जा सकता | चित्तोडगढ (Chittorgarh) के संबध में एक कहावत यह है जो प्रचलित भी है “गढ़ में चित्तोडगढ बाकी सब गडिया” | इसका मतलब यही है कि चित्तोडगढ के अभेद्य दुर्ग जैसा विश्व में कोई दूसरा दुर्ग नही है | इसके अतिरिक्त बाकी कोई गढ़ नही है अपितु गड़िया है | चित्तोडगढ दुर्ग का निर्माण कब हुआ यह कहना कठिन है तथा इतिहासकारों में भी इस संबध में मतभेद है | परन्तु इसके बावजूद भी अनेक इतिहासकारो का दावा है कि आज से करीब 5000 वर्ष पूर्व इसका निर्माण किया गया था | चित्तोडगढ (Chittorgarh) के प्रमुख दर्शनीय स्थल  महाराणा कुम्भा के महल ...

महाबलेश्वर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Mahabaleshwar Tour Guide in Hindi

महाबलेश्वर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Mahabaleshwar Tour Guide in Hindi महाबलेश्वर (Mahabaleshwar) की खोज 1828 में सर जॉन मेल्कन ने की थी | यह सह्याद्री पर्वतमाला में समुद्रतल से 1372 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | यह कभी मुम्बई प्रेसिडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी था | महाबलेश्वर (Mahabaleshwar) को इसके प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण महाराष्ट्र का सबसे अच्छा एवं सुंदर पर्वतीय स्थल माना जाता है | यहाँ के खुबसुरत झरने एवं प्राकृतिक झीलों की छटा अद्भुत है | इकी छवि देखते ही बनती है | महाबलेश्वर के प्रमुख पर्यटन स्थल पंचगनी – पुराने जमाने के सुंदर एवं सुसज्जित बंगले पंचगनी में देखे जा सकते है | पंचगनी महाबलेश्वर से 24 किमी पहले आता है | सुंदर बंगलो के अतिरिक्त घने पेड़ो द्वारा घिरा एवं घुमावदार रास्ता भी है | इसके दुसरी तरफ कृष्णा नदी के बहते हुए पानी का दृश्य पर्यटकों को मुग्ध एवं आकर्षित करता है | यहाँ पर मलगढ़ का किला भी दर्शनीय है | इसकी छवि देखते ही बनती है | प्रतापगढ़ – महाबलेश्वर (Mahabaleshwar) से 24 किमी दूर प्रतापगढ़ का किला स्थित है | छत्रपति शिवाजी ने अकेले में बघनके द्वारा अफजल...

कोणार्क सूर्य मन्दिर , वास्तुकला एवं मूर्तिकला का अद्भुद मिश्रण | Konark Sun Temple Travel Guide in Hindi

कोणार्क सूर्य मन्दिर , वास्तुकला एवं मूर्तिकला का अद्भुद मिश्रण | Konark Sun Temple Travel Guide in Hindi उड़ीसा में तमाम धार्मिक पर्यटन स्थल है जिनमे से कोणार्क का सूर्य मन्दिर (Konark Sun Temple) अतिविख्यात है | इस मन्दिर में वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्भुत सम्मेलन को देखकर चकित रह जाना पड़ता है | 9वी शताब्दी में केसरी वंश के एक राजा ने इसका निर्माण करवाया था | कालान्तर में गंग वंश के राजा तांगुला नरसिंह देव ने 13वी शताब्दी में नये सिरे से इसका निर्माण करवाया था | इसके निर्माण के संबध में एक बड़ी रोचक कहानी प्रचलित है | कहा जाता है कि नरिसंह देव ने कारीसन के युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद सूर्य उपासना के लिए यह मन्दिर बनवाया था | यह भी कहा जाता है कि राजा कुष्ट रोग हो गया था | किसी ने उनसे कहा कि समुद्रतट पर यदि आप सूर्य-मन्दिर बनवाकर सूर्य की उपासना करे तो आपको रोग से मुक्ति मिल जायेगी | राजा ने चन्द्रप्रभा नदी और समुद्रत के संगम स्थल को मन्दिर निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान समझकर वहां पर सूर्य मन्दिर का निर्माण करवाया जो कोणार्क के नाम से प्रसिद्ध है | कोणार्क अक सूर्य मन्दिर (Kona...

एशिया कप से जुड़े रोचक तथ्य | Asia Cup Facts in Hindi

एशिया कप से जुड़े रोचक तथ्य | Asia Cup Facts in Hindi एशिया कप (Asia Cup) क्रिकेट में पुरुषो की एकदिवसीय और टी-20 प्रतियोगिता है जो हर दो साल में आयोजित होती है | क्रिकेट के इस माहौल में आज हम आपको एशिया कप से जुड़े रोचक तथ्य बताते है | Asia Cup की स्थापना 1983 में Asian Cricket Council द्वारा एशियाई देशो के बीच अच्छे संबध बनाने के लिए शुरू की गयी थी | पहला Asia Cup संयुक्त अरब अमीरात में 1984 में आयोजित किया गया था जहां पर पर Asian Cricket Council का ऑफिस था | 1986 एशिया कप में भारत ने इस प्रतियोगिता का बहिस्कार (भाग नही लिया) इसलिए किया था क्योंकि उसके श्रीलंका के साथ क्रिकेट संबध अच्छे नही थे | 1990-91 में पाकिस्तान ने एशिया कप का बहिस्कार (भाग नही लिया) इसलिए किया था क्योंकि उसके भारत के साथ राजनितिक संबध अच्छे नही थे | 1993 का एशिया कप भारत पाकिस्तान के रिश्तो में गहरी राजनितिक दरार के वजह से स्थगित करना पड़ा था | ACC ने इस बात की घोषणा की कि 2008 के बाद इस प्रतियोगिता को हर दो वर्ष में आयोजित किया जाएगा और सभी खेल एकदिवसीय होंगे | 2015 में एशियाई क्रिकेट कौसिल का कद घटने के बाद ICC ...

बद्रीनाथ धाम यात्रा से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी | Badrinath Dham Travel Guide in Hindi

बद्रीनाथ धाम यात्रा से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी | Badrinath Dham Travel Guide in Hindi भारतवर्ष में प्रमुख रूप से चार धाम है जो इस प्रकार है पहला द्वारा धाम , दूसरा बद्रीनाथ धाम (Badrinath) , तीसरा रामेश्वरम धाम और चौथा जगन्नाथ धाम | इन चार धामों में से सबसे प्रमुख धाम बद्रीनाथ धाम है | पुराणों के अनुसार बद्रीनाथ (Badrinath) भारत का सबसे प्राचीन क्षेत्र है इसकी स्थापना सतयुग की मानी जाती है | बदरी अर्थात बेर के घने वन होने के कारण इस क्षेत्र का नाम “बदरी-वन” पड़ा | आदि युग में नर और नारायण , त्रेता में भगवान राम , द्वापर में भगवान वेदव्यास और कलियुग में शंकराचार्य ने बद्रीनाथ में ही शान्ति अर्जित कर धर्म और संस्कृति के सूत्र पिरोये | शंकराचार्य जी के समय से यह क्षेत्र बद्रीनाथ के नाम से प्रसिद्ध है | बदरिकाश्रम (Badrinath) इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि वहां व्यास मुनि का आश्रम था | “बररी-वन” में जन्म होने के कारण ही उन्हें “बादरायण” कहा गया | उन्होंने वेदों का पूर्ण प्रबंध किया इसलिए वेदव्यास कहलाये | बद्रीनाथ की यात्रा पहले बहुत कठिन मानी जाती थी | पांच...

अयोध्या के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Ayodhya Tour Guide in Hindi

अयोध्या के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Ayodhya Tour Guide in Hindi प्राचीन धार्मिक नगरी तथा हिन्दुओ की आस्था का केंद्र अयोध्या (Ayodhya) सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध रहा है | हिन्दू धर्म के अनुसार ईश्वर का अवतार माने जाने वाले श्रीराम जी की जन्मभूमि होने के कारण अयोध्या (Ayodhya) सर्वोपरि स्थान है | अयोध्या (Ayodhya) राम-लक्ष्मण  की जन्मभूमि ही नही अपितु ऋषभ , अजित ,अभिनंदन ,सुमितअनंत और अचल जी की भी जन्मभूमि है | “स्कंदपुराण” के अनुसार यह सुदर्शन चक्र पर बसी है | अयोध्या शब्द का अर्थ निकालते हुये स्कन्दपुराण का कहना है कि “अ” का अर्थ ब्रह्मा , “य” का अर्थ विष्णु तथा “ध” का अर्थ रूद्र का स्वरूप है | अत: अयोध्या ब्रह्मा , विष्णु और भगवान शंकर इन तीनो का समन्वित रूप है | सर्वप्रथम ब्रह्माजी ने अयोध्या (Ayodhya )की यात्रा की थी और अपने नाम से एक कुंड बनाया था जो ब्रह्मकुंड के नामस इ प्रसिद्ध है | भगवती सीता द्वारा निर्मित एक सीताकुंड है जिसमे भगवान श्रीराम ने वर देकर समस्त कामपूरक बनाया | उसमे स्नान करने से मनुष्य समस्त पापो से म...

मथुरा के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Mathura Tour Guide in Hindi

मथुरा के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Mathura Tour Guide in Hindi हिन्दू धर्म की आस्था एवं श्रुद्धा का केंद्र मथुरा (Mathura) भगवान श्रीकृष्ण की जन्म स्थली होने के कारण काफी प्रसिद्ध है | यहाँ के विशाल और भव्य मन्दिर जो स्थापत्य और शिल्प कला की दृष्टि से काफी उत्कृष्ट है | आइये आपको मथुरा (Mathura) के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में विस्तार से बताते है | मथुरा के प्रमुख दर्शनीय स्थल द्वारकाधीश का मन्दिर – द्वारकाधीश मन्दिर अपेक्षाकृत नया होने के बावजूद आस्थावादी हिन्दुओ के आकर्षण का बहुत बड़ा केंद्र है | यहाँ वर्ष बर भारी भीड़ रहती है | कृष्ण जन्मभूमि – कृष्ण जन्मभूमि जिसे कटारा केशवदास के नाम से जाना जाता है | यह मथुरा का सर्वाधिक दर्शनीय स्थल आस्थावादी हिन्दुओ के अनुसार वही स्थान है जहा एक समय कंस के कारागृह में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था | कृष जन्मभूमि पर स्थित वर्तमान मन्दिर का निर्माण कार्य उद्योगपति  डालमिया , हनुमान प्रसाद पोद्दार और बिड़ला के सयुक्त प्रयासों से इसी सदी में हुआ | मन्दिर में कृष्ण जन्मस्थान के अतिरिक्त राधाकृष्ण मन्दिर तथा श्रीमदभागवत भवन भी दर्शनीय है | श...

हरिद्वार के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Haridwar Tour Guide in Hindi

हरिद्वार के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Haridwar Tour Guide in Hindi हरिद्वार (Haridwar) नवसृजित उत्तराखंड के 13 जनपदों में से एक है | हिमालय की गोद में बसे गोमुख से निकली गंगा नदी के दाहिने तट पर बसा यह नगर विश्वभर में एक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में ख्याति पाए हुए है | हरिद्वार (Haridwar) का प्राचीन नाम “मायापुरी” है | मायापुरी ,हरिद्वार , कनखल , ज्वालापुर और भीम गोडा इन पाँचो पुरियो को मिलाकर हरिद्वार कहा जाता है  वास्तव में प्रकृति का यह लोक मायालोक ही दिखता है | चारो ओर हरी-भरी पहाडियों से घिरा हरिद्वार नगर हिन्दुओ का प्रमुख धार्मिक स्थल है | उत्तराखंड के चारो धामों का प्रवेशद्वार हरिद्वार ही है | धार्मिक स्थल होने के कारण वर्षभर सैलानियों का ताँता लगा रहता है | यहाँ वर्ष भर देश-विदेश के संख्य पर्यटक घुमने के लिए आते है | हरिद्वार की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पृष्टभूमि पुराणो के अनुसार हरिद्वार (Haridwar) में ही ब्रह्माजी ने इस स्थान पर विशाल यज्ञ किया था | ब्रह्मकुंड में सभी यात्री स्नान करते है | ब्रह्मकुंड के पास पत्थर के एक मन्दिर में भगवान विष्णु के “चरण चिन्ह...

अमरनाथ यात्रा से जुडी सम्पूर्ण जानकारी | Amarnath Tour Guide in Hindi

अमरनाथ यात्रा से जुडी सम्पूर्ण जानकारी | Amarnath Tour Guide in Hindi अमरनाथ की यात्रा पुरे भारत में प्रसिद्ध है | यहाँ की यात्रा अत्यधिक लाभदायक मानी जाती है | सम्पूर्ण भारत के लोग इस यात्रा के लिए अत्यधिक संख्या में श्रुद्धापूर्वक आया करते है | अमरनाथ गुफा में बर्फ से बने शिवलिंग की पूजा होती है | कुछ लोगो का विशवास है कि अमरनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है | इस गुफा की पहाड़िया लगभग 5000 फुट ऊँची है | कुछ चोटियाँ ऐसी है जो गर्मियों में भी सदा बर्फ से ढकी रहती है | अमरनाथ की पवित्र गुफा में कोई मानव निर्मित मन्दिर नही है औ न ही यह गुफा मनुष्य ने पहाडी काटकर बनाई है | यह एक खुली द्वारहीन उबड़-खाबड़ गुफा है जिसका निर्माण प्रकृति ने स्वयं किया है | किंवदती है कि चातुर्मास की प्रतिपदा को हिम के लिंग का निर्माण अपने आप आरम्भ होता है और वह धीरे धीरे शिवलिंग के आकार का बन जाता है तथा पूर्णिमा को परिपूर्ण होकर दुसरे पक्ष में घटने लगता है | अमावस्या या शुक्ल-पक्ष को प्रतिप्रदा को यह लिंग पूर्णत: अदृश्य हो जाता है | दुसरे मास में फिर वही वृद्धि और लय का कार्यक्रम चलता है | कहा जाता है कि भग...

कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुडी पुरी जानकारी | Kailash Mansarovar Yatra Guide in Hindi

कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुडी पुरी जानकारी | Kailash Mansarovar Yatra Guide in Hindi हिमालय के पर्वतीय तीर्थो की यात्राओं में कैलाश मानसरोवर (Kailash Mansarovar) यात्रा ही सबसे कठिन मानी जाती है | इसकी कठिनाई की तुलना केवल बद्रीनाथ से आगे स्वर्गारोहण की या मुक्तिनाथ की यात्रा से ही की जा सकती है | कैलाश-मानसरोवर (Kailash Mansarovar),अमरनाथ , गंगोत्री , स्वर्गारोहण जैसे क्षेत्रो की यात्रा में ,जहा यात्री को समुद्र स्तर से 12 हजार फुट उपर या उससे अधिक ऊँचाई पर जाना पड़ता है | कैलाश मानसरोवर की धार्मिक पृष्टभूमि हिमालय के तिब्बत प्रदेश में स्थित एक तीर्थ जिसे गण पर्वत और रजतगिरी भी कहते है | कैलाश के बर्फ से आच्छादित 22,028 फुट ऊँचे शिखर और उससे लगे मानसरोवर का यह तीर्थ मानस खंड भी कहलाता है | माना जाता है कि प्राचीन साहित्य में वर्णित “मेरु” भे यही है | पौराणिक अनुश्रुतियो के अनुसार शिव और ब्रह्मा आदि देवगण , मरीच आदि ऋषि एवं रावण ,भस्मासुर आदि ने यही तप किया था | पांडवो के दिग्विज प्रयास के समय अर्जुन ने इस प्रदेश पर विजय प्राप्त की थी | आदि शकंराचार्य ने इसी के आसपास कही अपना...

यमुनोत्री का इतिहास और धार्मिक महत्व | Yamunotri Tour Guide in Hindi

यमुनोत्री का इतिहास और धार्मिक महत्व | Yamunotri Tour Guide in Hindi भगवान सूर्य की पुत्री कही जाने वाली यमुना जी की उत्पति भी हिमालय से ही हुयी है इसलिए यमुना भी गंगा की तरह पवित्र मानी जाती है | उतराखंड की यात्रा में ऋषीकेश , बद्रीनाथ , गंगोत्री तथा यमुनोत्री आदि तीर्थो के दर्शन हो जाते है | यमुनोत्री (Yamunotri) का यह स्थान समुद्र तट से दस हजार फुट की उंचाई पर है | यहाँ कई गर्म पानी के कुंड है जिनका जल खौलता रहता है | यात्री लोग कपड़े में चावल आदि बांधकर इसमें डुबो देते है और वे पक जाते है | इस प्रकार यहाँ भोजन बनाने के लिए चुल्हा नही जलाना पड़ता | यमुनोत्री (Yamunotri) की धार्मिक अवधारणा बहुत उंचाई पर कालिंदगिरी से हिम पिघल क्र कई धाराओं में गिरता है | कालिंद पर्वत से निकलने के कारण यमुना जी कालिंद-नन्दिनी या कालिंदी कही जाती है | वहां इतना अधिक शीत है कि बार-बार झरनों का जल जमता रहता है | लोगो का ऐसा कहना है कि इस स्थल पर महर्षि असित प्रतिदिन गंगा में स्नान करते थे और इसी आश्रम में आकर निवास करते थे | महर्षि की वृध्दावस्था में इस पर्वतीय रास्ते को प्रतिदिन जाना मुश्किल हो गया | तब ग...

अक्षरधाम मन्दिर , गुजरात का अनोखा तीर्थ स्थल | Akshardham Gujarat Tour Guide in Hindi

अक्षरधाम मन्दिर , गुजरात का अनोखा तीर्थ स्थल | Akshardham Gujarat Tour Guide in Hindi गुजरात की हरी भरी राजधानी गांधीनगर अहमदाबाद नगर से सड़क द्वारा 25 किमी दूर है | गांधीनगर की हरियाली भूमि पर राष्ट्रीय राजमार्ग र आकर्षण का यह केंद्र अक्षरधाम मन्दिर (Akshardham Temple)स्थापत्य एवं नवीनतम तकनीक का संगम है | अक्षरधाम (Akshardham) परिसर तक सभी दिशाओं से पहुचा जा सकता है | हवाई अड्डा केवल 23 किमी दूर है | गांधीनगर का रेलवे स्टेशन मात्र 2 किमी दूर है | गांधीनगर में होटल ,हवेली ,सर्किट हाउस और पथिक आश्रम भी बने है | बोचासण वाणी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संख्या इस अक्षरधाम के निर्माता है | इसके प्रेरक है प्रमुख स्वामी महाराज शास्त्री नारायण स्वरूप दास | अक्षरधाम मन्दिर का यह परिसर भगवान के प्रति श्रुद्धभक्ति है | इसका शिलान्यास 14 दिसम्बर 1979 को हुआ था और 2 नवम्बर 1992 को अक्षरधाम (Akshardham) के पट जनता के लिए खोल दिए गये थे | अक्षरधाम परिसर चार प्रमुख भागो में बंटा है | अक्षरधाम स्मारक ,अक्षरधाम अनुभूति ,आर्ष और सहजानंद वन | अक्षरधाम परिसर -अक्षरधाम स्मारक परिसर गुलाबी पत्थरों से...

Matheran Hill Station Tour Guide in Hindi | माता के जंगल माथेरान के प्रमुख दर्शनीय स्थल

Matheran Hill Station Tour Guide in Hindi | माता के जंगल माथेरान के प्रमुख दर्शनीय स्थल माथेरान (Matheran) मुम्बई महानगर से करीबन 108 किमी की दूरी पर पुणे से पहले एक पहाडी स्थल है जो माथेरान नाम से प्रसिद्ध है | माथेरान (Matheran) का तात्पर्य माता के जंगल से लगाया जाता है | माथेरान की यात्रा करने के लिए मुम्बई वी.टी.स्टेशन से अम्बरनाथ की ओर जाने वाले लाइन पर एक छोटा से नरेल रेलवे स्टेशन है | उसी स्टेशन से उतरकर इस पहाडी स्थल की यात्रा की जा सकती है | स्टेशन नरेल से माथेरान तक पैदल ,टैक्सी या विशेष रूप से बनाई गयी Toy Train से भी पर्यटक यात्रा का मनोरंजन ले सकते है | यदि प्रात: 6 बजे ट्रेन से नरेल पहुचा जाए तो शाम तक वापिस भी आ सकते है | अत्यधिक वृक्षों एवं सघन जंगलो से आच्छादित माथेरान (Matheran) समुद्री तट से करीब 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है | माथेरान के मुख्य दर्शनीय स्थल  पॉइंट्स | Echo Point रात्रि को जगमगाती मुम्बई का दृश्य हार्ट पॉइंट्स से अत्यंत लुभावना एवं मनोहारी लगता है | पेमास्तर पार्क , चार्लोट लेक पॉइंट , केथेड्रल रॉक , पाली मास्टर वाक के अतिरिक्त हनीमून पॉइंट ,एको पॉइंट...

Chamba Tour Guide in Hindi | चम्बा के प्रमुख पर्यटन स्थल

Chamba Tour Guide in Hindi | चम्बा के प्रमुख पर्यटन स्थल मनमोहक पर्यटन स्थली और “कला की नगरी” आदि नामो से सुप्रसिद्ध चम्बा कस्बा  (Chamba) रावी नदी के किनारे बसा है | वर्ष 920 ई. में राजा साहिल वर्मा द्वारा बसाया गया चम्बा का नाम राजा की बेटी चम्पावती के नाम पर पड़ा था | कला की नगरी कहलाने वाली चम्बा घाटी को अतीत के कई कलाप्रिय राजाओं ने संवारा और सजाया था | तभी तो यहाँ काष्टकला , मूर्तिकला , वास्तुकला और भित्ति चित्रकला अपने आप में बेजोड़ है | चम्बा (Chamba) एक साधारण सा पहाडी कस्बा है जहां कुछ घंटे बिताये जा सकते है | यहाँ मन्दिर और भूरीसिंह संग्रहालय आदि का भी अपना ही महत्व है | | समुद्र तट से लगभग 996 किमी की ऊँचाई पर बसे इस शहर में अनेक एतेहासिक एवं धार्मिक स्थल है जो पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है | चम्बा (Chamba) के मुख्य दर्शनीय स्थल सहो – चम्बा (Chamba) से लगभग 20 किमी दूरी पर स्थित यह क्षेत्र साल नदी के किनारे पर है | यहाँ पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण केंद्र चंद्रशेखर मन्दिर है जो बहुत ही विख्यात है | सलूनी – 1829 मीटर की ऊँचाई पर स्तिथ यह जगह चम्बा...