
गंगोत्री (Gangotri) को गंगाजी का उदय स्थल माना जाता है | यह एक बहुत ही पवित्र एवं महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है | गंगोत्री (Gangotri) में कई मन्दिर एवं कुंड भी बने है जो दर्शनीय है | इस स्थान का मुख्य मन्दिर गंगा मन्दिर है | इस मन्दिर में गंगा जी की मूर्ति है जो आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिष्टित की गयी थी | इस मन्दिर में राजा भागीरथ , यमुना ,सरस्वती एवं शंकराचार्य जी की मुर्तिया इसकी शोभा को ओर अधिक बढाती है | मन्दिर में सुवर्ण रचित गंगाजी की मूर्ति है और छत्रमुकुट भी सोने का ही है | यहाँ पर भेदभाव नहे है | अछूत और सवर्ण सबके साथ एक ही व्यवहार होता है |
गंगाजी के मन्दिर के पास ही भैरवनाथ मन्दिर भी है | गंगोत्री (Gangotri) स्थान समुद्र स्तर से लगभग दस हजार फुट की उंचाई पर स्थित है | यह गंगाजी के दक्षिण तट पर है यहाँ कई धर्मशालाये है | यात्रियों को यहाँ सदावर्त भी मिलता है | गंगाजी यहाँ केवल 44 फुट चौड़ी है और गहराई लगभग तीन फुट है | गंगोत्री (Gangotri) के बारे में मत है कि वर्ष 1794 ई. में मराठा नरेश ने इंदौर की रानी लक्ष्मीबाई के अनुरोध पर यहाँ मन्दिर बनवाया था जो सन 1803 में ध्वस्त हो गया था | तब वर्ष 1807 में गोरखा नरेश अमर सिंह थापा ने इस मन्दिर को फिर से बनवाया |
गंगोत्री (Gangotri) के निकटवर्ती दर्शनीय स्थल
भागीरथ शिला – गंगोत्री में सूर्यकुंड ,विष्णुकुंड और ब्रह्मकुंड आदि तीर्थ है | यही पर राजा भागीरथ द्वारा बैठकर तप किया | इसी स्थान पर एक शिला भी है जो भागीरथ शिला के नाम से प्रसिद्ध है | इस शिला को पिंडदान किया जाता है | यहाँ गंगाजी को विष्णुतुलसी चढाई जाती है |
गौरीकुंड – गंगोत्री (Gangotri) से लगभग दो किमी नीचे गौरीकुंड है | यहाँ जाने के लिए गंगाजी को पुल से पार करना है | इस कुंड से होती हुयी केदार गंगा , भागीरथी में मिलती है | गंगाजी से मिल्रने वाली यह पहली नदी है | केदार गंगा के पानी का रंग भूरा है |
पातगनी -गंगोत्री (Gangotri) से तीन किमी पर पातगनी नामक स्थान है | कहा जाता है कि पांच पांड्वो ने बारह वर्ष तप किया था | यह समस्त स्थान शीतकाल में बर्फ से ढक जाता है
गोमुखी धारा – लगभग 25 किमी दूर गंगा जी का उदय स्थल गोमुखी धारा स्थित है जो एक पवित्र स्थान है | गोमुख द्वारा गंगाजी की धारा पर्वत से बाहर निकलती हो परन्तु यहाँ बर्फ इतनी रहती है और मार्ग इतना दुर्गम है कि प्रत्येक यात्री वहां पर नही जा सकता है | गंगोत्री (Gangotri) के आसपास जंगल भी बना है किन्तु गोमुखी स्थान वृक्षों से हीन है | गोमुख में ही हिमधारा भगवती भागीरथी के दर्शन करके लगता है कि जीवन धन्य हो गया |
नन्दनवन – गंगोत्री (Gangotri) से 6 किमी दूर गंगोत्री ग्लेशियर से दुर्गम चढाई के बाद नन्दनवन तपोवन ऐसा प्रतीत होता है जैसे क्षितिज पर सूर्य | भागीरथी पर्वत चोटियों की तलहटी में बसा तपोवन हिमालय पर्वतमालाओं के मनोहारी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है |
केदारताल – गंगोत्री (Gangotri) से 18 किमी दूर स्थित 4425 मीटर की ऊँचाई पर दर्शनीय केदार ताल अत्यंत मनोहारी है | पैदल मार्ग अत्यंत कठिन होने के कारण केदारताल समीपस्थ शिखरों के पर्वतारोहियों के लिए आदर्श पड़ाव बी चूका है |
गंगोत्री पहुचने के मार्ग
यमुनोत्री से वापस गंगाजी तक लौट आना चाहिए | यहाँ से बसे आदि मिल जाती है | उत्तराखंड सरकार ने इस क्षेत्र में अनेक सड़क मार्गो से तीर्थ स्थानो को जोड़ दिया है | अत: अब पैदल यात्रा बहुत कम करनी पडती है | यमुनोत्री से 10 किमी लौट आने पर उत्तराकाशी के लिए मोटर-बसे आसानी से मिल जाती है | गंगोत्री (Gangotri) के लिए ऋषिकेश से भी बसे उपलब्ध है | गंगोत्री (Gangotri) के पास अनेक धर्मशालाये एवं आश्रम आदि है जहां तीर्थ यात्री ठहर सकते है | खाने पीने का सामान भी यहाँ उपलब्ध है |
Comments
Post a Comment