देवी सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी | Vasant Panchami Essay in Hindi विश्व भे में भारत एक ऐसा देश है जहा प्रकृति के विस्तृत रंगमंच पर वर्ष में छ: ऋतुये क्रम में आती है और एक अनोखा दृश्य दिखाकर चली जाती है | सर्वप्रथम आगमन होता है वसंत ऋतू का ,जिसे पुराणों में कामदेव का पुत्र बताया गया है रूप सौन्दर्य के देवता कामदेव के घर पुत्रोत्पत्ति का समाचार सुनते ही प्रकृति नृत्यरत हो गयी | तरह तरह के फुल उसके आभूषण ,हरियाली उसके वस्त्र , कोयल की कुक सा मीठा स्वर और पूरा शरीर प्रफुल्लता से रोमांचित हो उठा | इस प्रकार रूप यौवन सम्पन्न प्रकृति इठलाते हुए ऋतुराज वसंत का सज धज कर स्वागत करती है | वसंत पंचमी यानि शुक्ल पक्ष का पाँचवा दिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जनवरी-फरवरी तथा हिन्दू तिथि के अनुसार माघ महीने में आता है | यह तिथि बागेश्वरी एवं श्रीपंचमी कके नाम से भी प्रसिद्ध है | इस समय में पंचतत्व अपना प्रकोप छोडकर सुहावने रूप से प्रकट होते है यानि वायु,अग्नि ,जल .,आकाश और धरती अपना मनमोहक रूप धारण करते है | वसंत पंचमी से जुडी मान्यताये वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी और ज्ञान की अधिष्टात्री देवी स...