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Showing posts from January, 2017

देवी सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी | Vasant Panchami Essay in Hindi

देवी सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी | Vasant Panchami Essay in Hindi विश्व भे में भारत एक ऐसा देश है जहा प्रकृति के विस्तृत रंगमंच पर वर्ष में छ: ऋतुये क्रम में आती है और एक अनोखा दृश्य दिखाकर चली जाती है | सर्वप्रथम आगमन होता है वसंत ऋतू का ,जिसे पुराणों में कामदेव का पुत्र बताया गया है रूप सौन्दर्य के देवता कामदेव के घर पुत्रोत्पत्ति का समाचार सुनते ही प्रकृति नृत्यरत हो गयी | तरह तरह के फुल उसके आभूषण ,हरियाली उसके वस्त्र , कोयल की कुक सा मीठा स्वर और पूरा शरीर प्रफुल्लता से रोमांचित हो उठा | इस प्रकार रूप यौवन सम्पन्न प्रकृति इठलाते हुए ऋतुराज वसंत का सज धज कर स्वागत करती है | वसंत पंचमी यानि शुक्ल पक्ष का पाँचवा दिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जनवरी-फरवरी तथा हिन्दू तिथि के अनुसार माघ महीने में आता है | यह तिथि बागेश्वरी एवं श्रीपंचमी कके नाम से भी प्रसिद्ध है | इस समय में पंचतत्व अपना प्रकोप छोडकर सुहावने रूप से प्रकट होते है यानि वायु,अग्नि ,जल .,आकाश और धरती अपना मनमोहक रूप धारण करते है | वसंत पंचमी से जुडी मान्यताये वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी और ज्ञान की अधिष्टात्री देवी स...

भारत के सुप्रसिद्ध भैरव मन्दिर | Famous Bhairav Temples History in Hindi

कालो में काल महाकाल अर्थात महाकालेश्वर भगवान शिव महादेव है | वह लिंग रूप में निराकार ब्रह्म के द्योतक है और सर्वत्र विराजमान है | भुतभावन भगवान भैरव को शिव का अवतार माना गया है अत: वह शिव स्वरूप ही है और उनके साकार रूप है | भैरव सम्पूर्णत: परात्पर शंकर ही है | भैरव (Bhairav Temples) की महत्ता अस्न्धिग्ध है वह आपति-विपत्ति विनाशक एवं मनोकामना पूर्ति के देव है | वैसे तो संसार में भैरव कई रूप से सुख्यात है परन्तु उनमे दो रूप अत्यंत प्रसिद्ध है | पहली काल भैरव और दुसरे बटुक भैरव-आनन्द भैरव काल के समान भीषण होने के कारण इन्हें कालभैरव कहा गया ,वस्तुत: ये कालो के काल है और सभी प्रकार से संकट करने में सक्षम है | आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काल भैरवाष्टक का पाठ अत्यंत लाभकारी होता है | मथुरा का पाताल भैरव मन्दिर एवं नागपुर (विदर्भ) का पाताल भैरव मन्दिर तथा काकधाम देवघर का पाताल भैरव मन्दिर भी सुख्यात है | भारत के दक्षिण-पश्चिम में प्रमुखत: मालवा एवं राजस्थान के हर गाँव में देवी स्थल में देवी की पिंडियो के साथ एक पिंडी भैरव की होती है | अब आइये आपको भारत के प्रसिद्ध भैरव मन्दिरों (Bhairav Temple...

महात्मा गांधी से जुड़े 5 रोचक तथ्य , जो आपको बतायेंगे कि गांधीजी भी फैशनेबल और स्टाइलिश थे | Mahatma Gandhi Facts in Hindi

आप आज भले खुद को फैशनेबल और स्टाइलिश बनाने की कोशिश में जुटे हो , लेकिन महात्मा गांधी ने 100 साल पहले ही स्टाइलिश बनने के गुर सीख लिया था | आइये आपको उनकी सेहत और स्टाइल से जुड़े रोचक तथ्य बताते है 01 महात्मा गांधी अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखते है वो रोज सुबह 4 बजे बिस्तर छोड़ देते है और दिनभर करीब 20 किलोमीटर पैदल चलते थे |पैदल चलने का उनका एक रिकॉर्ड भी है जिसमे गांधीजी ने 60 साल की उम्र में डांडी यात्रा के दौरान 24 दिन में 385 किलोमीटर के पैदल यात्रा की | महात्मा गांधी से जुड़े 5 रोचक तथ्य | Mahatma Gandhi Facts in Hindi 02 वैश्वीकरण से 100 साल पहले 1893 में उन्होंने एक एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में बतौर वकील करियर की शुरुवात की थी जो उस जमाने में प्रतिष्टित पेशा हुआ करता था |गांधीजी ने अपनी कानून की डिग्री लन्दन से पुरी की और महज 25 बरस की उम्र में तीन महाद्वीपों का सफर पूरा कर लिया था | 03 गांधीजी एक स्टाइल आइकॉन भी थे उन्होंने धोती , खादी और गोल चश्मों को उस वक्त का प्रतीक बनाया ,उनसे पहले इसे पिछड़ेपन की निशानी माना जाता था |यही नही महात्मा गांधी ने गर्व के साथ धोती पहनकर बर्किन्घम पैल...

60 Interesting Facts about Thailand in Hindi | थाईलैंड से जुड़े 60 रोचक तथ्य

Thailand Facts in Hindi | थाईलैंड से जुड़े 60 रोचक तथ्य | Facts of Thailand in Hindi Interesting Facts about Thailand in Hindi – Fact 1 to 10 थाईलैंड (Thailand) का थाई भाषा में नाम “प्रथेत थाई” है जिसका अर्थ है “स्वतंत्र लोगों की ज़मीन” | थाईलैंड (Thailand) दक्षिणी पूर्व एशिया का एकमात्र ऐसा देश है जो कभी किसी यूरोपीयन देश का उपनिवेश नही बना | थाईलैंड (Thailand) को दशको से अनेक नामो से पुकारा जाता था | सौ वर्ष पहले ये अपने प्रमुख शहरों जैसे सुखोथोई ,अयुठाय्या और थोंबुरी नाम से जाना जाता था | मई 2010 में थाईलैंड में धुली हुयी प्लेट की सबसे लम्बी लाइन बनाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है जिसमे वहा के लोगो ने 10,488 धुली हुयी प्लेटो को एक लाइन में रखा था | हालांकि यह रिकॉर्ड 6 अप्रैल 2011 को टूट गया जब भारत में 15,295 धुली हुयी प्लेट को एक लाइन में रखा था जो 2.36 मील लम्बी थी | थाईलैंड चार देशो के साथ अपना बॉर्डर सांझा करती है जिसमे से उत्तर एवं पश्चिम में म्यांमार (Myanmar) , उत्तर-पूर्व में लाओस (Laos) ,दक्षिण-पूर्व में कम्बोडिया (Cambodia) और दक्षिण में मलेशिया (...

पेशवा बाजीराव , जिसने अपने जीवन में एक भी जंग नही हारी | Peshwa Bajirao History in Hindi

Peshwa Bajirao History in Hindi पेशवा बाजीराव (Peshwa Bajirao) प्रथम हिंदुस्तान में मराठा साम्राज्य का एक महान सेनापति था | उसने 1720 से लेकर अपनी मौत तक  चौथे मराठा छत्रपति साहू के पेशवा (प्रधानमंत्री) के रूप में सेवा की | उसके अन्य नामो में उसे बाजीराव बल्लाल आयर थोराले बाजीराव भी कहते है | बाजीराव (Peshwa Bajirao) ने अपने सैन्य काल में मराठा साम्राज्य को चरम सीमा तक पहुचाया था जो उसकी मौत के बीस साल बाद भी उसके पुत्र के शासन में बना रहा | अपने 20 साल के छोटे सैन्यवृति में बाजीराव ने एक भी जंग नही हारी | एक अंग्रेज अफसर ने तो बाजीराव को हिंदुस्तान का सबसे बेहतरीन घुड़सवार सेना का सेनापति बताया है | वैसे बाजीराव मस्तानी फिल्म के जरिये बाजीराव (Peshwa Bajirao) के शौर्य के बारे में आपको काफ़ी जानकारी मिली होगी लेकिन फिर भी उसके शौर्य को सदैव जीवित रखने के लिए हम उसकी जीवनी से आपको रुबुरु करवाते है | बाजीराव का प्रारम्भिक जीवन | Early Life of Peshwa Bajirao बाजीराव (Peshwa Bajirao) का जन्म कोकनष्ठ चितपावन ब्राह्मण वंश के भट्ट परिवार में 18 अगस्त 1700 को हुआ था | उसके पिता बालाजी विश्वनाथ ,...

गणतन्त्र दिवस से जुड़े रोचक तथ्य | Republic Day Facts in Hindi

26 जनवरी को उन सभी देशभक्तों को श्रुधासुमन अर्पित करते हुए गणतन्त्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व मनाया जाता है जिन्होंने देश के खातिर अपना सब कुछ लुटा दिया | यह दिन सिखाता है कि हमारा एक ही धर्म एक ही जाति है हम भारतीय है | 26 जनवरी को तिरंगा हाथ में थामते ही हमारे अंदर देशभक्ति जाग उठती है तो आइये इस गणतन्त्र दिवस पर आपको 26 जनवरी से जुड़े रोचक तथ्य बताते है | 01. 26 जनवरी 1930 को शुरुवात एम् सबसे पहले पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया था | यही वो दिन था जिस दिन पुरे देश ने पूर्ण स्वंतंत्रता के लिए दृढ़ निश्चय किया था | 02. 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद हमारे देश के नेता 26 जनवरी को इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में याद कराना चाहते थे इसलिए भी स्वराज के लिए इसी तारीख को चुना गया | 03 भारत की आजादी के तीन साल बाद 26 जनवरी 1950 को पहली बार हमने गणतन्त्र दिवस मनाया | 04 गणतन्त्र दिवस तीन दिन लम्बा आयोजन होता है जो 29 जनवरी को Beating Retreat ceremony के साथ समाप्त होता है | 05 पहली गणतन्त्र दिवस परेड राजपथ पर 1955 से आयोजित होना शुरू हुयी थी | 06 एक क्रिस्चियन गाना Abide With Me को ...

पर्यटन दिवस विशेष - लोगो को एक सूत्र में पिरोते है धर्मस्थल | National Tourism Day India Special in Hindi

एतेरेय ब्राह्मण में लिखा है कलि” शयानो भवति , संजिहानस्तु द्वापर: | उतिष्ठन  त्रेता भवति ,कृत स्पन्द्व्ते चरन || चरैवेति ,चरैवति अर्थात जन मनुष्य सोया रहता है वह कलियुग में होता है | जब वह बैठ जाता है तब द्वापर में होता है जब उठ खड़ा होता है तब त्रेतायुग में तथा जब चलने लगता है तब वह सतयुग को प्राप्त करता है अत: चलते रहो ,चलते रहो | जीवन चलने का नाम है आगे बढने का नाम है | पर्यटन भी तो चलने का ,निरंतर आगे बढने का और नित्य नव अन्वेषण करने का नाम है अत: पर्यटन जीवन है पर्यटन ही मनुष्य का विकास है | पर्यटन मनुष्य के विकास का पर्याय है उसकी क्षमता का मूल्याकंन करने तथा उसकी क्षमता को विकसित करने का साधन और माध्यम भी | केवल भौतिक नही अपितु मानसिक और आह्द्यात्मिक क्षमता का विकास है पर्यटन | अपनी भौतिक क्षमता को जानने के लिए अपने को जानना आवश्यक है और अपने को जानना है आध्यात्मिक अभ्युदय | इसके लिए आवश्यक है मानसिक क्षमता का विकास भी अत: भौतिक ,मानसिक तथा आध्यत्मिक तीनो तत्वों के विकास का मार्ग और साधन है पर्यटन | पर्यटन अर्थात देश-देशांतर का भ्रमण सतयुग के तुल्य है क्योंकि चलना ही (कुछ कर...

नौ जन्मो के बाद तीर्थंकर बने भगवान पार्श्वनाथ | Bhagwan Parshwanath History in Hindi

लगभग तीन हजार वर्ष पूर्व पौष कृष्ण एकादशी के दिन जैन धर्म के 23वे तीर्थंकर पार्श्वनाथ (Parshwanath) का जन्म वाराणासी में हुआ था | उनके पिता का नाम अश्वसेन और माता का नाम वामादेवी था | राजा अश्वसेन वाराणासी के राजा थे | जैन पुरानो के अनुसार तीर्थंकर बनने के लिए पार्श्वनाथ को पुरे नौ जन्म लेने पड़े थे | पूर्व जन्म के संचित पुण्यो और दसवे जन्म के तप के फलत: ही वे 23वे तीर्थंकर बने | पुराणों के अनुसार पहले जन्म में वह मरुभूमि नामक ब्राह्मण बने ,दुसरे जन्म में वज्रघोष नामक हाथी ,तीसरे जन्म में स्वर्ग के देवता ,चौथे जन्म में रश्मिवेग नामक राजा ,पांचवे जन्म में देव ,छठे जन्म में वज्रनाभि नामक चक्रवती सम्राट ,सातवे जन्म में देवता ,आठवे जन्म में आनन्द नामक राजा ,नौवे जन्म में स्वर्ग के राजा इंद्र और दसवे जन्म में तीर्थंकर बने | दिगम्बर धर्म के मतावलम्बियो के अनुसार पार्श्वनाथ (Parshwanath) बाल ब्रह्माचारी थे जबकि श्वेताम्बर मतावलम्बियो का एक धड़ा उनकी बात का समर्थन करता है लेकिन दूसरा धड़ा उन्हें विवाहित मानता है |इसी प्रकार उनकी जन्मतिथि ,माता पिता के नाम आदि के बारे में भी मतभेद बताते है | बचपन ...

सुभाष चन्द्र बोस जयंती विशेष - नेताजी के जीवन से जुड़े रोचक प्रेरक प्रसंग | Inspirational Stories of Subhash Chandra Bose in Hindi

सुभाष चन्द्र बोस जयंती विशेष – नेताजी के जीवन से जुड़े रोचक प्रेरक प्रसंग | Inspirational Stories of Subhash Chandra Bose in Hindi सुभाष चन्द्र बोस के बारे में जितना जाना जाए ,जितना पढ़ा जाए वो कम लगता है बचपन से हे प्रतिभा के धनी सुभाष Simple Living and High Thinking यानी सादा जीवन उच्च विचार की विचारधारा को मानते थे | गरीबो और मित्रो की मदद को वे सदा तत्पर रहते थे | पिता की इच्छा पुरी करने के लिए उन्होंने ICS परीक्षा भी पास की | 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक शहर में जन्मे नेताजी के जन्म दिवस पर आपको हम उनके जीवन से जुड़े रोचक पहलुओं से रुबुरु करवाते है | स्कूल ड्रेस पहनने की खुशी सुभाष जब पांच साल एक थे जब उन्हें बताया गया कि अब वो भी अपने बड़े भाई-बहनों के साथ स्कूल जायेंगे | 14 भाई-बहन में उनका नम्बर 9वा था | सबसे ज्यादा खुश इसलिए थे कि उनके लिए भी नई स्कूल ड्रेस बनेगी और वे स्कूल जायेंगे | उनका बचपन से ही पढाई में मन लगता था | चौथी कक्षा में वे मिशनरी स्कूल को छोड़ रावेजा कॉलेजिएट स्कूल चले गये | तब उन्हें उनकी मातृभाषा बंगाली बिलकुल नही आती थी और उन्हें जब पहली बार बंगाली में लेख...

सफलता के लिए Mindset कैसे तैयार करे | How to Prepare Mindset for Success

सफलता के लिए Mindset कैसे तैयार करे | How to Prepare Mindset for Success मित्रो आपने एक कहावत तो सूनी ही होगी “मन के हारे हार है मन के जीते जीत “| ये कहावत भले आपको पुरानी लगे लेकिन ये आपकी सफलता में आपके Mindset की भूमिका निभाने में आज भी प्रासंगिक है | आपकी अप्रोच ही किसी क्षेत्र में आपकी सफलता और विफलता को तय करती है | बिजनेस में सफलता हासिल करनी है तो सबसे पहले अपनी अप्रोच को सकारात्मक बनाये | अक्सर आप पढ़ते होंगे कि इन्सान जैसा सोचता है ,वो वैसा ही बन जाता है | यदि किसी की सोच पॉजिटिव है तो उसकी अप्रोच में भी उसका असर झलकने लगता है और वो अवसरों की तलाश करने लगता है | लेकिन अगर किसी का Mindsetही नेगेटिव है तो उसे हर काम में खामिया ही दिखती है | उस लगातार विफलता का डर सताता रहता है | इस अप्रोच के चलते या तो वह कोई प्रोजेक्ट हाथ में लेता ही नही है या फिर विफलता का सोच सोचकर उसे अच्छी तरह से पूरा करने का प्रयास ही नही कर पाता है | बिजनेस में सफलता के लिए जरुरी है आप लक्ष्यों ,क्षमताओं एवं भविष्य को लेकर आशान्वित हो | तो आज जानिये कुछ ऐसी ही अप्रोचेज के बारे में जो आपको बिजने...

Penguin Facts in Hindi | पेंगुइन से जुड़े 10 रोचक तथ्य

Penguin Facts in Hindi | पेंगुइन से जुड़े 10 रोचक तथ्य अधिकतर वैज्ञानिक इस बात से सहमत है कि कि पेंगुइनो की 17 प्रजातियाँ है | इन 17 प्रजातियों में से 13 प्रजातियाँ या तो खतरे में है या विलुप्त होने की कगार पर है | सीधी कलंगी वाले Penguin Erect-crested Penguin (Eudyptes sclateri) की आबादी पिछले 20 वर्षो में 70 प्रतिशत तक घट चुकी है जबकि Galapagos Penguin (Spheniscus mendiculus) की आबादी 70 के दशक से अब तक 50 प्रतिशत तक गिर चुकी है | इन सबका प्रमुख कारण प्रदूषण, मानव अतिक्रमण, वाणिज्यिक मछली पकड़ने, डंपिंग, शैवाल, और ग्लोबल वार्मिंग रहे हैं | सामान्यत: पेंगुइन लैंगिक दृष्टि से द्विरुपी (sexually Dimorphic ) होते है अर्थात नर और मादा एक जैसे दीखते है Magellanic Penguin का नाम Ferdinand Magellan के नाम पर रखा गया जिन्होंने उसे सर्व प्रथम 1520 में देखा था | तेल रिसाव के कारण लगभग 20 हजार वयस्क और 22 हजार किशोर मैगेलैनिक पेंगुइन हर साल अर्जेंटीना के तटो पर मारे जाते है पेंगुइन भोजन के रूप में कंकड़ और पत्थर भी निगल जाते है | वैज्ञानिकों का मत है कि इन पत्थरों से उनकी पाचन क्रिया तेज हो जाती ह...

भारत के राष्ट्रपति पद से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Facts about President of India

भारत के राष्ट्रपति पद से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Facts about President of India भारतीय संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है | भारत में संसदीय व्वयस्था को अपनाया गया है अत: राष्ट्रपति नाममात्र की कार्यपालिका है तथा प्रधानमंत्री तथा उसका मंत्रीमंडल वास्तविक कार्यपालिका है आइये आपको भारत के राष्ट्रपति पद से जुड़े महत्वपूर्ण और रोचक तथ्य बताते है राष्ट्रपति देश का सवैधानिक प्रधान होता है राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक कहलाता है | राष्ट्रपति पद की योग्यता – संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार कोई व्यक्ति राष्ट्रपति होने योग्य तब होगा जब 1 वह भारत का नागरिक हो 2 . 35 वर्ष की आयु पुरी कर चूका हो 3 लोकसभा का सदस्य निर्वाचित किये जाने योग्य हो 4 चुनाव के समय लाभ का पद धारण नही करता हो राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचन मंडल – इसमें राज्यसभा ,लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओ के निर्वाचित सदस्य रहते है | राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए निर्वाचक मंडल के 50 सदस्य प्रस्तावक तथा 50 सदस्य अनुमोदक होते है एक ही व्यक्ति जितनी बार चाहे राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित हो सकता है राष्ट्रप...

पतंग और पतंगबाजी से जुड़े रोचक तथ्य | Kite and Kite Flying Facts in Hindi

पतंग और पतंगबाजी से जुड़े रोचक तथ्य | Kite and Kite Flying Facts in Hindi पतंगो (Kite) का रिश्ता हमारे देश के साथ बेहद ख़ास है | चाहे 15 अगस्त हो या 14 जनवरी यानी कि मकर सक्रांति हम भारतवासी पतंग उडाना नही भूलते | इन दो दिनों में तो इतनी पतंगे उड़ाई जाती है कि आकाश भी पतंगो (Kite) से अट जाता है | आइये आज हम आपको पतंगो के उत्सव पर पतंग और पतंगबाजी से जुड़े रोचक तथ्य बताते है ईसा पूर्व चीन में पतंग उड़ाने की शुरुवात हुयी हुयी थी | शुरुवात में पतंग को संदेश आदान प्रदान के लिए उडाई जाती थी | कुछ लोगो का मानना है कि उसी दौर में यूनान के के व्यक्ति आरकाइट्स ने दुनिया की पहली पतंग का निर्माण किया था और इसी कारण पतंग को अंग्रेजी में काईट कहते है ऐसा माना जाता है कि लगभग 3000 वर्ष पूर्व पहली पतंग उडायी गयी , जो पत्तो से बनाई गयी थी | इंडोनेशिया में अभी भी पत्तो से बनी पतंग का प्रयोग मछली पकड़ने के लिए किया जाता है पतंगो का संबध अविष्कारों से भी है आपको यह जानकर बेहद हैरानी होगी कि हवाज जहाज के अविष्कारक राईट बंधुओ ने पतंगो से काफी कुछ सीखा था | बेंजामिन फ्रेंकलिन और मार्कोनी ने भी पतंगो की प्रेरणा से...

मकर सक्रांति से जुड़े खगोलीय, एतेहासिक और वैज्ञानिक तथ्य | Makar Sankranti Facts in Hindi

मकर सक्रांति से जुड़े खगोलीय, एतेहासिक और वैज्ञानिक तथ्य | Makar Sankranti Facts in Hindi मकर सक्रांति में “मकर” शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि सक्रांति का शाब्दिक अर्थ संक्रमन अर्थात प्रवेश करना है इस दिन सूर्य खोगोलीय पथ का चक्कर लगाते हुए धनु राशि में प्रवेश करता है अर्थात सूर्य का मकर राशि में प्रवेश ही मकर सक्रांति है इस इदं किसान अच्छी फसल के लिए भगवान को धन्यवाद देकर अपनी अनुकम्पा सदैव लोगो पर बनाये रखने का आशीर्वाद मांगते है इसलिए इसे फसलो का त्यौहार भी कहा जाता है | भौगौलिक विवरण पृथ्वी साढ़े 23 डिग्री अक्ष पर झुकी हुयी सूर्य की परिक्रमा करती है तब वर्ष में चार स्थितिया ऐसी होती है जब सूर्य की सीधी किरने दो बार (21 मार्च और 23 सितम्बर) को विषुवत रेखा पर तथा 21 जून को कर्क रेखा पर और 22 दिसम्बर को मकर रेखा पर पडती है वास्तव में चन्द्रमा के पथ को 27 नक्षत्रो में बाँटा गया है जबकि सूर्य के पथ को 12 राशियों में बांटा गया है भारतीय ज्योतिष में इन चार स्थितियों को 12 सक्रांतियो में बांटा गया है खगोलीय तथ्य कभी कभी यह त्यौहार 12, 13 या 15 को भी होता है यह इस बात पर निर्...

मकर सक्रांति पर लगनेवाले ख़ास मेले | Makar Sakranti Fairs Significance in Hindi

भारत में उत्सव के दौरान मेला एक ख़ास आकर्षण होता है वैसे भी मेले हमारी सांस्कृतिक ,सामाजिक और आर्थिक जीवन के केंद्र है मकर सक्रांति के दिन नदियों,ताल-तलैयों में स्नान कर दान करने की प्रथा रही है यह प्रथा अत्यंत प्राचीनकाल से चली आ रही है ऐसे में लोगो की आस्था और भीड़ मेले अक रूप धारण कर लेती है आइये आपको आज मकर सक्रांति पर लगने वाले कुछ प्रमुख मेलो के बारे में रोचक जानकारी बताते है प्रयाग का माघ मेला | Allahabad Magh Mela इलाहाबाद में गंगा-यमुना के संगम पर प्रति वर्ष मकर सक्रांति के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध माघ मेले का आयोजन बड़े व्यापक स्तर पर किया जाता है जहा लाखो लोग संगम स्थल के पवित्र जल में डुबकी लगाकर स्नान करते है | माना जाता है कि इस दिन यहा स्नान करने से पूण्य फल मिलते है एक महीने तक चलनेवाले इस मेले के दौरान संगम की रेतीली भूमि पर तम्बुओ का शहर बस जाता है जहा श्रुधालू एक महीने तक कल्पवास भी करते है प्रयाग के अलावा वाराणसी ,हरिद्वार और गढ़ मुक्तेश्वर में भी स्नान और मेले का आयोजन किया जाता है | पंजाब में मुक्तसर का मेला | Shri Muktsar Sahib मकर सक्रांति की पूर्व संध्या पर पंजाब में...

Agatha Christie Biography in Hindi | मशहूर क्राइम फिक्शन लेखिका अगाथा क्रिस्टी की जीवनी

Agatha Christie Biography in Hindi Agatha Christie Biography in Hindi | मशहूर क्राइम फिक्शन लेखिका अगाथा क्रिस्टी की जीवनी लेखिका अगाथा क्रिस्टी (Agatha Christie) का जन्म 15 सितम्बर 1890 को इंग्लैंड में हुआ | अगाथा मैरी क्लारिशा मिलर तीन भाई बहनों में सबसे छोटी थी | दस वर्ष की अल्पायु में उन्होंने माँ को खो दिया था | उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा नही मिली थी | माँ एवं गर्वनेस ने घर पर ही शिक्षा दी | 1906 में उन्होंने पेरिस के फिनिशिंग स्कूल में दाखिला लिया | माँ ने उन्हें संगीत के साथ लेखन के लिए प्रोत्साहित किया | 24 वर्ष की आयु में उनका विवाह आर्ची से हुआ | अगाथा (Agatha Christie) ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान घायलों की सेवा की | वे उनके बीच काफी समय बिताती | वही से उन्हें विभिन्न प्रकार के रोगों तथा विषयों की जानकारी मिली | वे अपने लेखन में इस जानकारी का भी प्रयोग करने लगी | उनका पहला उपन्यास Mysterious Affairs at Styles को काफी लोकप्रियता मिली और वह हाथो हाथ बिका | 1982 में पति से तलाक होने के बाद उन्होंने फ्रांस ,बगदाद , ईराक और मेसोपोटामिया आदि स्थानों की यात्रा की | दुसरी यात्रा में ...

Facts About Goa in Hindi | गोवा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

Facts About Goa in Hindi | गोवा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य गोवा एक नजर में | Quick Facts of Goa in Hindi क्षेत्रफल 3702 वर्ग किमी क्षेत्रफल के लिहाज से भारत में स्थान 29वा जनसंख्या 14,57,723 (2011 जनगणना) जनसंख्या घनत्व 390 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी जनसंख्या में लिहाज से भारत में स्थान 26वा (2011 जनगणना) लिंगानुपात 973/1000 पुरुष पर साक्षरता दर 88.70% राजधानी पणजी कुल जिले 2 मुख्यमंत्री मनोहर पारिर्कर (भाजपा) राज्यपाल मृदल सिन्हा विधानसभा सीटो की संख्या 40 लोकसभा सीटो की संख्या  2 राज्यसभा सीटो की संख्या 1 प्रथम मुख्यमंत्री दयानन्द बन्दोंदकर प्रथम राजपाल गोपाल सिंह राज्य पशु  गौर राज्य पक्षी बुलबुल राज्य वृक्ष  मट्टी राज्य दिवस 30 मई राज्य भाषा कोंकणी Historical Facts about Goa in Hindi | गोवा का इतिहास  प्राचीनकाल में गोवा गोमांचल ,गोपकट्टम . गोपपुरी ,गोवापुरी एवं गोमान्तक आदि कई नामो से जाना जाता रहा है | पहली शताब्दी ईसा पूर्व में गोवा सातवाहन साम्राज्य का अंग था | इसके बाद कदम्ब ,मलखेडा के राष्ट्रकूटो ,चालुक्य एवं सिलहार राजाओ का शासन रहा | 14वी शताब्दी के आखिर में यादवो का शासन समाप्त ...

Florence Nightingale Biography in Hindi | आधुनिक नर्सिंग की जनक फ्लोरेंस नाईटेंगल की जीवनी

Florence Nightingale Biography in Hindi | आधुनिक नर्सिंग की जनक फ्लोरेंस नाईटेंगल की जीवनी वर्तमान युग में अस्पतालों के प्रबन्धन और रोगियों के स्वास्थ्य लाभों में नर्सो का विशेष महत्व है | नर्सो को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है लेकिन 19वी शताब्दी के मध्य तक की स्थिति इसके सर्वथा विपरीत थी | नर्स का कार्य बहुत घटिया समझा जाता था | निम्न वर्ग की महिलाये ही इस पेशे से आती थी | उनमें से अधिकाँश अनपढ़ और चरित्रहीन होती थी और नशा करती थी | उन्हें अपने कार्य के लिए कोई व्यवस्थित ट्रेनिंग भी नही मिलती थी | इस पेशे को सम्मान दिलाने का श्रेय फ्लोरेंस नाईटेंगल (Florence Nightingale) को जाता है | फ्लोरेंस नाईटेंगल (Florence Nightingale) का जन्म 12 मई 1820 में एक धनी परिवार में हुआ था | उस युग के ब्रिटिश वैभवपूर्ण जीवन के प्रति उन्हें कोई आकर्षण नही था इसके विपरीत दुखी मानवता के लिए उनके हृदय में अपार संवेदना थी | सन 1840 में इंग्लैंड में भयंकर अकाल पड़ा और अकाल पीडितो की दयनीय स्थिति देखकर वह बैचैन हो गयी | अपने एक पारिवारिक मित्र डा. फोउलेर से उन्होंने नर्स बनने की इच्छा प्रकट की | उनका यह निर्ण...

Louis Braille Biography in Hindi | ब्रेल लिपि से नेत्रहीनो को आशा की किरण देने वाले लुइस ब्रेल की जीवनी

Louis Braille Biography in Hindi | ब्रेल लिपि से नेत्रहीनो को आशा की किरण देने वाले लुइस ब्रेल की जीवनी दुनिया भर में नेत्रहीनो में ब्रेल लिपि बहुत लोकप्रिय है | इस लिपि में दुनिया भर का अच्छा साहित्य मौजूद है | ब्रेल लिपि की खोज करने वाले लुइस ब्रेल (Louis Braille) स्वयं नेत्रहीन थे | लुइस ब्रेल (Louis Braille) का जन्म फ्रांस की राजधानी पेरिस के निकट कुपरे नामक गाँव में 14 जनवरी 1809 में हुआ था | उनके पिता सायमन ब्रेल का घोड़ो की जीन बनाने का कारखाना था | लुइस (Louis Braille) जब तीन साल के थे , तब एक बार पिता के साथ उनके कारखाने चले गये | वहा पर खेल खेल मे वो चाक़ू से चमडा काटने की कोशिश करने लगे और झटके से चाक़ू उनकी एक आंख में जा लगा | आँख से खून की धारा बहने लगी और उनकी एक आँख की रोशनी हमेशा के लिए चली गयी | थोड़े दिनों में संक्रमन से उनकी दुसरी आँख से भी दिखना बंद हो गया और वो पुरी तरह दृष्टिहीन हो गये | सात साल ऐसे ही गुजर गये | जब लुइस (Louis Braille) दस साल के हुए , उसी वर्ष नेत्रहीन बच्चो के लिए खुले विश्व के पहले स्कूल नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ब्लाइंड चिल्ड्रन , पेरिस में उन्हें दाख...