
भारतीय संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है | भारत में संसदीय व्वयस्था को अपनाया गया है अत: राष्ट्रपति नाममात्र की कार्यपालिका है तथा प्रधानमंत्री तथा उसका मंत्रीमंडल वास्तविक कार्यपालिका है आइये आपको भारत के राष्ट्रपति पद से जुड़े महत्वपूर्ण और रोचक तथ्य बताते है
- राष्ट्रपति देश का सवैधानिक प्रधान होता है
- राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक कहलाता है |
- राष्ट्रपति पद की योग्यता – संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार कोई व्यक्ति राष्ट्रपति होने योग्य तब होगा जब 1 वह भारत का नागरिक हो 2 . 35 वर्ष की आयु पुरी कर चूका हो 3 लोकसभा का सदस्य निर्वाचित किये जाने योग्य हो 4 चुनाव के समय लाभ का पद धारण नही करता हो
- राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचन मंडल – इसमें राज्यसभा ,लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओ के निर्वाचित सदस्य रहते है |
- राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए निर्वाचक मंडल के 50 सदस्य प्रस्तावक तथा 50 सदस्य अनुमोदक होते है
- एक ही व्यक्ति जितनी बार चाहे राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित हो सकता है
- राष्ट्रपति के निर्वाचन संबधी विवादों का निपटारा उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है | निर्वाचन अवैध घोषित होने पर उसके द्वारा किये गये कार्य अवैध नही होते है
- राष्ट्रपति पद ग्रहण की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा | अपने पद की समाप्ति के बाद भी वह पद तब तक बना रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण नही कर लेता है
- पद धारण करने से पूर्व राष्ट्रपति को एक निर्धारित प्रपत्र पर भारत के मुख्य न्यायाधीश अथवा उनकी उपस्थिति में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश के सम्मुख शपथ लेनी पडती है
- राष्ट्रपति निम्न पांच दशाओं में पांच वर्ष से पहले भी पद त्याग सकता है 1 उपराष्ट्रपति को संबोधित अपने त्यागपत्र द्वारा 2 महाभियोग द्वारा हटाए जाने पर
- राष्ट्रपति पर महाभियोग – राष्ट्रपति द्वारा सविधान के प्रावधानों के उल्लघन पर संसद के किसी सदन द्वारा उस पर महाभियोग लगाया जा सकता है परन्तु इसके लिए आवश्यक है कि राष्ट्रपति को 14 दिन पहले लिखित सुचना दी जाए ,जिस पर सदन के एक चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर हो | संसद के उस सदन ,जिसमे महाभियोग का प्रस्ताव पेश है के दो तिहाई सदस्यों द्वारा पारित कर देने पर प्रस्ताव दुसरे सदन में जाएगा ,तब दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये आरोपों की जांच करेगा या कराएगा और ऐसी जांच में राष्ट्रपति के उपर लगाये गये आरोपों को सिद्ध करने वाला प्रस्ताव दो तिहाई बहुमत से पारित होता है तब राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया पुरी समझी जायेगी और उस तिथि से राष्टपति को पदत्याग करना होगा |
- राष्ट्रपति की रिक्ति को छह महीने के अंदर भरना होता है
- जब राष्ट्रपति पद की रिक्ति पदावधि (पांच वर्ष) की समाप्ति से हुयी है तो निर्वाचन पदावधि की समाप्ति के पहले ही कर लिया जाएगा | किन्तु यदि उसे पूरा करने में कोई विलम्ब हो जाता है तो “राज अंतराल” न होने पाए इसलिए यह उपबन्ध है कि राष्ट्रपति अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी तब तब अपने पद पर बना रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी पद धारण नही कर लेता है | ऐसी दशा में उपराष्ट्रपति ,राष्ट्रपति के रूप में कार्य नही कर सकेगा |
राष्ट्रपति के वेतन एवं भत्ते
- राष्ट्रपति का मासिक वेतन डेढ़ लाख रुपया है
- राष्ट्रपति का वेतन आयकर मुक्त होता है
- राष्ट्रपति को निशुल्क निवास स्थान एवं संसद द्वारा स्वीकृत अन्य भत्ते प्राप्त होते है
- राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान उनके वेतन तथा भत्ते में किसी भी प्रकार की कमी नही की जा सकती है
- राष्ट्रपति के लिए 9 लाख रूपये वार्षिक पेंशन निर्धारित किया गया है
राष्ट्रपति के अधिकार एवं कर्तव्य
- नियुक्ति संबधी अधिकार – राष्ट्रपति निम्न की नियुक्ति करता है 1 भारत के प्रधानमंत्री 2 प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के अन्यसदस्यों 3 सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीशो 4 भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक 5 राज्यों के राज्यपाल 6 मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त 7 भारत के महान्यायवादी 8 राज्यों के मध्य समन्वय के लिए अंतर्राज्यीय परिषद के सदस्य 9 संघीय लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों 10 संघीय क्षेत्रो के मुख्य आयुक्तों 11 वित्त आयोग के सदस्यों 12 भाषा आयोग के सदस्यों 13 पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्यों 14 अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों 15 भारत के राजदूतो तथा अन्य राजनयिकों 16 अनुसूचित क्षेत्रो के प्रशाशन के ससम्बन्ध में रिपोर्ट देने वाले आयोग के सदस्यों आदि |
- विधायी शक्तिया – राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग होता है इसे निम्न विधायी शक्तिया प्राप्त होती है 1 संसद के सत्र को आहूत करने ,सत्रावसान करने तथा लोकसभा को भंग करने संबधी अधिकार
- संसद के एक सदन में या एक साथ सम्मिलित रूप से दोनों सदनों में अभिभाषण करने की शक्ति 3 लोक सभा के लिए प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारम्भ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में सम्मिलित रूप से संसद में अभिभाषण करने की शक्ति 4 संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद ही कानून बनता है 5 संसद के निम्न विधयेक को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है (a) नये राज्यों के निर्माण और वर्तमान राज्य के क्षेत्रो ,सीमाओ या नामो में परिवर्तन सम्बंधी विधेयक (b) धन विधेयक (c) संचित निधि में व्यय कर्ण वाले विधेयक (d) ऐसे कराधान पर जिसमे राज्यहित जुड़े है प्रभाव डालने वाले विधेयक (e) राज्यों के बीच व्यापार ,वाणिज्य और समागम पर निर्बन्धन लगाने वाले विधयेक
- संसद सदस्यों के मनोनयन का अधिकार – जब राष्ट्रपति को यह लगे कि लोकसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय के व्यक्तियों का समुचित प्रतिनिधित्व नही है तब वह उस समुदाय के दो व्यक्तियों को लोकसभा के सदस्य के रूप में नामांकित कर सकता है | इसी प्रकार वह कला ,साहित्य ,पत्रकारिता ,विज्ञान तथा सामाजिक कार्यो में पर्याप्त अनुभव एवं दक्षता रखने वाले 12 व्यक्तियों को राज्यसभा में नामजद कर सकता है
- अध्याधेश जारी करने की शक्ति – संसद के स्थगन के समय अनुच्छेद 123 के तहत अध्याधेश जारी कर सकता है जिसका प्रभाव संसद के अधिनियम के समान होता है | इसका प्रभाव संसद सत्र के शुरू होने के छ सप्ताह तक रहता है परन्तु राष्ट्रपति राज्य सूची के विषयों पर अध्याधेश नही जारी कर सकता , जब दोनों सदन सत्र में होते है तब राष्ट्रपति को यह शक्ति नही होती है
- सैनिक शक्ति – सैन्य बलों की सर्वोच्च शक्ति राष्टपति में निहित है किन्तु इसक प्रयोग विधि द्वारा नियमित होता है
- राजनैतिक शक्ति -दुसरे देशो के साथ कोई भी समझौता या संधि राष्ट्रपति के नाम से की जाती है | राष्ट्रपति विदेशो के लिए भारतीय राजदूतो की नियुक्ति करता है एवं भारत में विदेशो के राजदूतो की नियुक्ति का अनुमोदन करता है |
- क्षमादान की शक्ति – सविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गये किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा करने ,उसका प्रविलम्बन ,परिहार और लघुकर्ण की शक्ति प्राप्त है
- राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तिया – आपातकाल में संबंधित उपबन्ध भारतीय सविंधान के भाग 18 के अनुच्छेद 352 से 360 के अंतर्गत मिलता है | मंत्रीपरिषद के परामर्श से राष्ट्रपति तीन प्रकार के आपात लागु कर सकता है (a) युद्ध या बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण लगाया गया आपात (b) राज्यों के सवैधानिक तन्त्र के विफल होने से उत्पन्न आपात (c) वित्तीय आपात
- राष्ट्रपति किसी सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से अनुच्छेद 143 के आधीन परामर्श ले सकता है लेकिन वह यह परामर्श मानने के लिए बाध्य नही है
- राष्ट्रपति की किसी विधेयक पर अनुमति देने या ना देने के निर्णय लेने की सीमा का अभाव होने के कारण राष्ट्रपति जेबी वीटो का प्रयोग कर सकता है क्योंकि अनुच्छेद 111 केवल यह कहता है कि यदि राष्ट्रपति विधेयक को उसे प्रस्तुत किये जाने के बाद यथाशीघ्र लौटा देगा | जेबी वीटो शक्ति के प्रयोग का उदाहरण है कि 1986 में संसद द्वारा पारित भारतीय डाकघर संशोधन विधेयक ,जिसपर तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने कोई निर्णय नही लिया |
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