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Showing posts from April, 2019

मणिकर्ण , जहा खोयी थी माता पार्वती की मणि | Manikaran Tour Guide in Hindi

मणिकर्ण , जहा खोयी थी माता पार्वती की मणि | Manikaran Tour Guide in Hindi कुल्लू से लगभग दस किमी नीचे भुंतर से लगभग 35 किमी की दूरी पर स्थित है मणिकरण (Manikaran) | वर्तमान में तो यहाँ तक सीधी बस सेवा की सुविधा है किन्तु पुराने समय में लोग कई दिनों का सफर तय कर दूर दूर से इस घाट के दुर्गम मार्गो से होते हुए आते थे | सड़क सिंगल रूट है | सर्पीले रस्ते में तिब्बती लोग खूब  मिलते है | इसी रास्ते पर शाट गाँव बहे है जहां कभी बादल फटा था और प्रकृति के कहर ने बस्ती की जगह उफनता नाला बना दिया था | समुद्रतल से 6000 फुट की उंचाई पर बसे मणिकरण (Manikaran) में गुरूद्वारे की विशाल इमारत के पास से पार्वती नदी पुरे वेग के साथ बहती है | मणिकरण वह स्थान है जहां शिवप्रिया पार्वती की मणि खोयी थी | समय और सभ्यता की दौड़ के साथ मणिकरण तक बस जाने लगी है | हिमालय की ओर आने वाले साधू-सन्यासी मणिकर्ण और मणि महेश की यात्राओं का उल्लेख बड़े गर्व से करते है | पुराने समय में ये दो यात्राये पवित्र किन्तु कठिन मानी जाती थी | पर्वत पुत्र पार्वती के बर्फानी पानी में एक ऐसा स्थल है जहां एक ओर बर्फ का पानी बह रहा है तो किना...

बैजनाथ मन्दिर , जहां रावण ने की थी घोर तपस्या | Baijnath Temple History in Hindi

बैजनाथ मन्दिर , जहां रावण ने तपस्या कर शिवजी को किये शीश अर्पित | Baijnath Temple History in Hindi बैजनाथ में बैधनाथ शिव का प्रसिद्ध मन्दिर है | वैधनाथ में 16 ओर प्राचीन मन्दिर है जिनकी कला अत्यधिक आकर्षक है | मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय मार्ग संख्या 20 पर एक कस्बा बैजनाथ , धर्मशाला से 56 किमी , पालमपुर से 16 किमी , पठानकोट से 132 किमी और कांगड़ा से लगभग 40 किमी दूर और समुद्रतल से 3200 फुट ऊँचाई पर स्थित वैधनाथ नामक एक पूण्य स्थान है | यहाँ एक बहुत प्राचीन और इतिहास प्रसिद्ध देव मन्दिर है | स्थानीय लोग इसके शिवलिंग को द्वादस ज्योतिर्लिंगो अर्थात 12 प्राचीन विशेष पवित्र शिवलिंगों में से एक मानते है | इसके उत्तर की ओर दूर दिखाई देने वाला बर्फ से ढकी हिमालय की चोटी , दक्षिण में विशाल फैले हुए खेत उस स्थान को सुंदर बना देते है | धौलाधार के आधार में नीली बिनवा नदी के किनारे अद्वितीय शिव मन्दिर जो उत्तर भारत में वास्तुकला का अद्भुत नमूना है | प्रतिहार शैली का यह मन्दिर अपनी बेजोड़ कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध है | शिव मन्दिर तक कोई आक्रमणकारी नही पहुच पाया जबकि यहाँ से मात्र 30 किमी दूर नगरकोट मन्दिर...

माता चिन्तपुर्णी मन्दिर , जहां होती है सारी चिंताए दूर | Chintpurni Temple History in Hindi

माता चिन्तपुर्णी मन्दिर , जहां होती है सारी चिंताए दूर | Chintpurni Temple History in Hindi हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के मुख्यालय से लगभग 70 किमी दूर माता चिन्तपुर्णी का मन्दिर है | शिव पार्वती का शव उठाये हुए पहाड़ो पर विचर रहे थे | उस समय भगवान विष्णु के चक्र से कटकर सती का हृदय इसी जगह पर गिरा था | यह भगवती छिन्नमस्ता देवी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है | ऐसी मान्यता है कि यहाँ दर्शन पूजन और साधना करने से कामनाये पूर्ण होती है तथा बाधाये दूर होती है | माता चिन्तपुर्णी की पौराणिक कथा एक कथा के अनुसार एक बार माँ भवानी अपने दो सहचरियो सहित मन्दाकिनी नदी में स्नान करने गयी | वहा सहचरियो को बहुत भूख लगी | उन द्वारा अधिक भूख जताने पर मान भवानी ने खड्ग से अपना सिर काट डाला | कटे सर से निकली लहू की दो धाराए दोनों सहचरियो के मुख में गिरी | मध्य धारा भवानी ने बांये हाथ में पकड़ी और स्वयं पान किया | चिंतपुर्णी माँ छिन्नमस्तक के इस पवित्र धाम का संबध एक ओर पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है | कथानुसार देव-दानव संग्राम में राक्षसराज महाबली शुम्भ और निशुम्भ नाक अजेय दैत्यों ने आदिशक्ति माँ चण्डिका और काली रूप का...

जीणमाता मन्दिर , जिनके चमत्कार से भाग गयी थी मुगल सेना | JeenMata Temple History in Hindi

जीणमाता मन्दिर , जिनके चमत्कार से भाग गयी थी मुगल सेना | JeenMata Temple History in Hindi रणबांकुरो की भूमि राजस्थान में देवी जीण माता ने सबसे बड़ा चमत्कार मुगल बादशाह औरंगजेब को दिखाया था जब उसकी सेना पर भौरों ने आक्रमण कर दिया जिसके वजह से दिल्ली सल्तनत हिल गयी और स्वयं उसको माता को सोने का छत्र चढाना पीडीए था | राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र में सीकर-जयपुर मार पर गोरिया के पास जीण माता गाँव में देवीस्वरूप जीण माता का प्राचीन मन्दिर बना हुआ है | जीण माता का वास्तविक नाम जयंती माता था | माता दुर्गा का अवतार है | यह मन्दिर शक्ति की देवी को समर्पित है | घने जंगल से घिरा हुआ यह मन्दिर तीन छोटे पहाड़ो के संगम पर स्थित है | जीण माता का यह मन्दिर बहुत प्राचीन शक्तिपीठ है | मन्दिर दक्षिणमुखी है लेकिन मन्दिर का प्रवेश द्वार पूर्व में है | मन्दिर के देवायतन का द्वार सभा मंडप में पश्चिम की ओर है और यहाँ जीण भगवती की अष्टभुजी आदमकद मूर्ति स्थापित है | सभा मंडप पहाड़ के नीचे मन्दिर में ही एक ओर मन्दिर है जिसे गुफा कहा जाता है जहां जगदेव पंवार का पीतल का सिर और कंकाली माता की मूर्ति है | मन्दिर के पश्चि...

भारत की कुछ मनमोहक झीले | Beautiful Lakes of India

यदि आपको पानी के करीब रहना अच्छा लगता है तो झीलों वाले स्थान पर छुट्टिया गुजारने से बेहतर क्या होगा | हमारे देश में कुछ बेहद सुंदर झीले मौजूद है जिनमे हिमाचल प्रदेश में स्थित अर्द्धचन्द्र जैसे आकार वाली चन्द्रताल झील से लेकर मणिपुर की एकमात्र तैरते टापुओ वाली झील शामिल है | यहाँ आपको देश की कुछ ख़ास झीलों के बारे में बता रहे है जहां कम से कम एक बात तो आपका जाना बनता है | त्सो मोरिरी (लद्दाख) लेह के दक्षिण-पूर्व में 250 किमी दृ बेहद उंचाई पर स्थित त्सो मोरिरी झील विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों तथा जानवरों का आवास भी है | इस झील की सैर के दौरान कुछ खुबसुरत जीवो तथा पक्षियों से भी पर्यटकों का सामना होता है | रस्ते में ही गंधक युक्त गर्म पानी वाली चुमथांग स्प्रिंग्स भी आती है | इस झील तक जाने के लिए पहले परमिट लेना जरुरी है | लोकटक झील (मणिपुर) मणिपुर के बिशनपुर जिले में स्थित यह एक बेहद खास झील है | यह विश्व की एकमात्र ऐसी झील है जिसमे तैरते हुए टापू पाए जाते है | 286 वर्ग मील में फ़ैली यह झील अपने आप में एक अलग पारिस्थितिकी तन्त्र का निर्माण करती है | संकटग्रस्त “ब्रो एंटलरेड डियर...