Amir Khusro Biography in Hindi सन 1253 एटा जिले का पटियाली ग्राम | यहाँ अमीर सैदुद्दीन के घर लडके का जन्म हुआ | मौलवी की सलाह पर उसका नामा अबुल हसन यमीनुद्दीन (Amir Khusro) रखा गया | चालीस दिनों तक जश्न मनाया गया | तुर्की के प्राचीन कबीले के सरदार के यहाँ रौनक की कमी होती भी है क्या ? अल्लाह का दिया यहाँ सब कुछ मयस्सर था | गाँव में ही शहर की सहुलियते और नियामते जुटाई गयी | जंगल में मंगल हो गया | अबुल हसन हाजिर जवाबी में अपनी सानी नही रखता था | चार साल की छोटी सी उम्र में उसे अपने वालिद के साथ दिल्ली जाने का मौका मिला | तो कई बड़े ओहदे वालो ने वल्लाह कहा | असाधारण प्रतिभा के प्रति लोग आश्चर्यचकित हो जाते थे | अबुल हसन के पिता का देहावसान युद्ध में हो गया | अबुल हसन के जीवन में परिवर्तन आ गया | सुख-सुविधाओं का जीवन समाप्त हो गया | आठ साल की कोमल अवस्था में अबुल हसन को जीवन की कठोरता के बारे में सोचना पड़ा | अबुल हसन की माँ बेटे के साथ मायके आ गयी | अबुल हसन के नाना का नाम जनाब इमादुल हक था | वह भारतीय थे और उन्हें भारत से अपार प्रेम था | उनके यहाँ सुयोग्य व्यक्ति आते थे | कम समय में पढाई क...