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Showing posts from July, 2019

Amir Khusro Biography in Hindi | कवि अमीर खुसरो की जीवनी

Amir Khusro Biography in Hindi सन 1253 एटा जिले का पटियाली ग्राम | यहाँ अमीर सैदुद्दीन के घर लडके का जन्म हुआ | मौलवी की सलाह पर उसका नामा अबुल हसन यमीनुद्दीन (Amir Khusro) रखा गया | चालीस दिनों तक जश्न मनाया गया | तुर्की के प्राचीन कबीले के सरदार के यहाँ रौनक की कमी होती भी है क्या ? अल्लाह का दिया यहाँ सब कुछ मयस्सर था | गाँव में ही शहर की सहुलियते और नियामते जुटाई गयी | जंगल में मंगल हो गया | अबुल हसन हाजिर जवाबी में अपनी सानी नही रखता था | चार साल की छोटी सी उम्र में उसे अपने वालिद के साथ दिल्ली जाने का मौका मिला | तो कई बड़े ओहदे वालो ने वल्लाह कहा | असाधारण प्रतिभा के प्रति लोग आश्चर्यचकित हो जाते थे | अबुल हसन के पिता का देहावसान युद्ध में हो गया | अबुल हसन के जीवन में परिवर्तन आ गया | सुख-सुविधाओं का जीवन समाप्त हो गया | आठ साल की कोमल अवस्था में अबुल हसन को जीवन की कठोरता के बारे में सोचना पड़ा | अबुल हसन की माँ बेटे के साथ मायके आ गयी | अबुल हसन के नाना का नाम जनाब इमादुल हक था | वह भारतीय थे और उन्हें भारत से अपार प्रेम था | उनके यहाँ सुयोग्य व्यक्ति आते थे | कम समय में पढाई क...

Ranakpur Jain Temple Tour Guide in Hindi | रणकपुर जैन मन्दिर का इतिहास

Ranakpur Jain Temple Tour Guide in Hindi | रणकपुर जैन मन्दिर का इतिहास रणकपुर जैन मन्दिर (Ranakpur Jain Temple) अपनी अद्भुद शिल्पकला के कारण देशभर में विख्यात है | यह दर्शनीय स्थल उत्तरी राजस्थान के हरे भरे क्षेत्र सावडी से 9 किमी दूर अरावली पहाडियों की गोद में प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच अवस्थित है | यह उदयपुर से करीब 137 किमी , जोधपुर से 132 किमी और मारवाड़ जंक्शन एवं अहमदाबाद रेल लाइन फालना स्टेशन से 21 किमी की दूरी पर स्थित है | यहाँ से पहुचने के लिए बसों की समुचित व्यवस्था उपलब्ध रहती है | अरावली पहाड़ो की शृंखलाओं की गोद में बसा यह पवित्र धार्मिक स्थल जैन सम्प्रदाय का महान तीर्थस्थल है जो गोडवाड के पंचतीर्थो का प्रमुख अंग है | यहाँ हजारो दर्शनार्थी बारहों मॉस आते रहते है | रणकपुर के इस मन्दिर (Ranakpur Jain Temple) का निर्माण महाराणा कुम्भा के मंत्री सेठ धारणाशाह , जो रणकपुर के समीपस्थ गाँव नदिया के निवासी थे , ने करीब 90 लाख स्वर्ण मुहरे खर्च करके बनवाया था | इस मन्दिर की नींव सन 1446 में पोरवाल वंशीय सेठ धारणाशाह और उनके बड़े भाई रत्नाशाह ने आचार्य सोमसुंदर सूरी के सम्पर्क में आने प...

सीतामढी , जहां हुआ था माता सीता का अवतरण | Sitamarhi Tour Guide in Hindi

सीतामढी , जहां हुआ था माता सीता का अवतरण | Sitamarhi Tour Guide in Hindi सीतामढी वह स्थान है जहां भारतीय नारियो की आदर्श देवी सीताजी का अवतरण हुआ था | मुजफ्फरपुर , मधुबनी एवं जनकपुर से नेपाल मार्ग और दरभंगा एवं रक्सोल से रेलमार्ग द्वारा सीतामढी पहुचा जा सकता है | सीतामढी से 5 कि.मी. पश्चिम में पुनौरा ग्राम है | इसका पौराणिक नाम पुण्यारान्य है और यही पर सीताजी माँ आविर्भाव हुआ था | पौराणिक कथा के अनुसार लंकाधिपति रावण अपने राज्य में निवास करने वाले ऋषि मुनियों से कर के रूप में रक्त लेता था | इस अनाचार और कुकृत्य के लिए ऋषियों ने उसे श्राप दे दिया , जिस कलश में तुम हमारा रक्त एकत्रित कर रहे हो , उस कलश का मुंह जिस दिन खुलेगा , उसी दिन उसी कलश से तुम्हारा काल उत्पन्न होगा | ऋषियों के श्राप के डर से रावण ने रक्त से भरे कलश को राजा जनक के राज्य में , एक खेत में गडवा दिया | जनकजी के राज्य में जब घोर अकाल पड़ा रो ऋषियों ने कहाकि राजा जनक जब खेत में हल चलाएंगे तो वर्षा होगी | | जनकजी ने खेत में हल चलाना शुरू किया तो हल की नोक उस रक्त्त पूरित कलश से टकरा गयी और कलश का मुंह खुल गया | उसी कलश से स...

Amarkantak Tour Guide in Hindi | अमरकंटक के प्रमुख दर्शनीय स्थल

Amarkantak Tour Guide in Hindi | अमरकंटक के प्रमुख दर्शनीय स्थल अमरकंटक (Amarkantak) नर्मदा नदी , सोन नदी और जोहिला नदी का उद्गम स्थान है | मैकाल की पहाडियों में स्थित अमरकंटक (Amarkantak) मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में पड़ता है | समुद्रतल से 1065 मीटर ऊँचे इस स्थान पर ही मध्य भारत के के विन्ध्य और सतपुड़ा की पहाडियों का मेल होता है | चारो ओर से टीक और महुए के पेड़ो से घिरे अमरकंटक से ही नर्मदा और सोन नदियों की उत्पति होती है | नर्मदा नदी यहाँ से पश्चिम की तरफ और सों नदी पूर्व दिशा में बहती है | अमरकंटक (Amarkantak) के खुबसुरत झरने ,पवित्र तालाब ,ऊंची पहाड़िया और शांत वातावरण सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देते है | प्रकृतिप्रेमी और धार्मिक प्रवृति के लोगो को यह स्थान काफी पसंद आता है | नर्मदा को समर्पित यहाँ अनेक मन्दिर बने हुए है जिन्हें दुर्गा की प्रतिमूर्ति माना जाता है | अमरकंटक बहुत से आयुर्वेदिक पौधों के लिए भी प्रसिद्ध है जिन्हें किंवद्तियो के अनुसार जीवनदायीनी गुणों से भरपूर माना जाता है | अमरकंटक (Amarkantak) में गर्म पानी का एक झरना भी है | कहा जाता है कि यह झरना औषधीय गुणों से सम्प...

Meenakshi Temple History in Hindi | मीनाक्षी मंदिर का इतिहास

Meenakshi Temple History in Hindi | मीनाक्षी मंदिर का इतिहास दक्षिण भारत तीर्थस्थानों से भरा पड़ा है | इसी कारण कभी कभी साउथ इंडिया की रेलवे को तीर्थयात्रा की रेलवे कहा जाता है | यहाँ के सैकड़ो स्थानों में रामेश्वरम और मदुरै का स्थान सर्वोच्च है | यहाँ के मन्दिर अत्यंत प्राचीन काल के बने हुए है और इनका इतिहास भी सदियों पुराना है | ये इतने विशाल और कला की दृष्टि से उच्चकोटि के है कि मनुष्य इन्हें देखकर ठगा सा रह जाता है | उत्तरी भारत में ऐसा कोई प्राचीन मन्दिर नही है जिसमे इन मन्दिरों की तुलना की जा सके | तिरुचुरापल्ली-तूतीकोरिन लाइन पर तिरुचिरापल्ली से लगभग 165 किमी के फासले पर मदुरै नगर है | जो यात्री रामेश्वरम यात्रा करके मदुरै आते है उन्हें रामेश्वरम-रामबाद से आगे मानामदुरै जंक्शन पर ट्रेन बदलनी पडती है | मानामदुरै से मदुरै तक रेल आती है | मानामदुरै से मदुरै की दूरी 50 किमी है | यह नगर वेगा नदी के किनारे है | संस्कृत ग्रंथो में इसका नामा मधुरा मिलता है | इस दक्षिण मथुरा भी कहा गया है | कहा जाता है कि पहले यहाँ कदम्ब का वन था | कदम्ब के एक वृक्ष के नीचे भगवान सुन्दरेश्वर का स्वयम्भूलिं...

केदारनाथ का इतिहास एवं दर्शनीय स्थल | Kedarnath History in Hindi

Kedarnath History in Hindi | केदारनाथ का इतिहास एवं दर्शनीय स्थल श्री केदारनाथ जी (Kedarnath) द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है | इनको केदारेश्वर भी कहा जाता है और केदार नामक पहाड़ पर स्थित है | सतयुग में उपमन्यु जी ने यहाँ भगवान शंकर की आराधना की थी | द्वापर में पांड्वो ने यहाँ तपस्या की | यह केदारनाथ क्षेत्र (Kedarnath) अनादि है | महिषरूपधारी भगवान शंकर के विभिन्न अंग पांच स्थानों में प्रतिष्टित हुए , जो पंचकेदार माने जाते है | उनमे से (तृतीय केदार) तुंगनाथ में बाहु , (चतुर्थ केदार) रुद्रनाथ में मुख , (द्वितीय केदार) मदमाहेश्वर में नाभि , (पंचम केदार) क्लेपेश्वर में जटा तथा केदानाथ में पृष्टभूमि और पशुपतिनाथ (नेपाल) में सिर माना जाता है | केदारनाथ (Kedarnath) में भगवान शंकर का नित्य सानिद्ध्य बताया गया है | केदारनाथ की पृष्टभूमि | Kedarnath History in Hindi शिवपुराण में कथा है कि नर और नारायण नामक दो अवतार बदरिकाश्रम नामक तीर्थ स्थान में तपस्या करते थे | उन दोनों ने पार्थिव शिवलिंग बनाक उसमे स्थित हो पूजा ग्रहण करने के लिए शम्भु से प्रार्थना की | शिवजी प्रतिदिन पार्थिवलिंग में पूजित ...

Mahakaleshwar Temple History in Hindi | महाकालेश्वर मन्दिर का इतिहास

Mahakaleshwar Temple History in Hindi कोटिरूद्र संहिता का अनुसार महाकालेश्वर (Mahakaleshwar) शिप्रा नदी के तट पर उज्जैन नामक नगर में है | उज्जैन उन पवित्र सात नगरियो में से एक है जहां की यात्रा मोक्षदायिनी है | वे सात नगरीया है अयोध्या , मथुरा , हरिद्वार , काशी , साँची , उज्जैन और द्वारका | पुरानी उज्जैन नगरी वर्तमान नगर से एक किमी दूर है | महाकालेश्वर (Mahakaleshwar) की धार्मिक पृष्टभूमि शिवपुराण में वर्णित महाकाल की कथा इस प्रकार है अवन्ति नाम से प्रसाद नगरी , भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है और समस्त देहधारियो को मोक्ष प्रदान करने वाली है | वही एक धर्मात्मा ब्राह्मण वास करता था | उसके चार पुत्र थे | रत्नमाला पर्वतवासी दूषण नाम के एक राक्षस ने नगर को घेर कर जनता को त्रस्त करना आरम्भ किया | जनता योग सिद्ध करने वाले उस ब्राह्मण की शरण में गयी |उसके तप से प्रसन्न होकर भगवान महाकाल पृथ्वी फाडकर प्रगट हुए और राक्षस का संहार किया | भक्तो ने  भगवान से प्रार्थना की “हमे पूजा की सुविधा देने के लिए ,आप यही निवास करने की कृपा कीजिये ” | भक्तो के आग्रह पर महाकाल ज्योतिर्लिंग के रूप में व...