
सीतामढी वह स्थान है जहां भारतीय नारियो की आदर्श देवी सीताजी का अवतरण हुआ था | मुजफ्फरपुर , मधुबनी एवं जनकपुर से नेपाल मार्ग और दरभंगा एवं रक्सोल से रेलमार्ग द्वारा सीतामढी पहुचा जा सकता है | सीतामढी से 5 कि.मी. पश्चिम में पुनौरा ग्राम है | इसका पौराणिक नाम पुण्यारान्य है और यही पर सीताजी माँ आविर्भाव हुआ था |
पौराणिक कथा के अनुसार लंकाधिपति रावण अपने राज्य में निवास करने वाले ऋषि मुनियों से कर के रूप में रक्त लेता था | इस अनाचार और कुकृत्य के लिए ऋषियों ने उसे श्राप दे दिया , जिस कलश में तुम हमारा रक्त एकत्रित कर रहे हो , उस कलश का मुंह जिस दिन खुलेगा , उसी दिन उसी कलश से तुम्हारा काल उत्पन्न होगा | ऋषियों के श्राप के डर से रावण ने रक्त से भरे कलश को राजा जनक के राज्य में , एक खेत में गडवा दिया |
जनकजी के राज्य में जब घोर अकाल पड़ा रो ऋषियों ने कहाकि राजा जनक जब खेत में हल चलाएंगे तो वर्षा होगी | | जनकजी ने खेत में हल चलाना शुरू किया तो हल की नोक उस रक्त्त पूरित कलश से टकरा गयी और कलश का मुंह खुल गया | उसी कलश से सीताजी का आविर्भाव हुआ | इसके बाद रावण द्वारा सीता-हरण और राम द्वारा रावण वध की कहानी तो सभी जानते है | सीतामढी शहर से 3 किमी दूर यहाँ एक भव्य सरोवर है है जिसे जानकी जन्मकुंड और इससे और इससे सटे पूरब में जानकी जन्मभूमि मन्दिर है | मन्दिर में सीताराम की कश्मीरी पद्दति से निर्मित प्रस्तर और अष्टधातु की प्राचीनतम प्रतिमाये है | मुख्य द्वार पर गदा और पर्वत उठाये महावीरजी विराजमान है |
सीताजी का आविर्भाव-दिवस बैशाख शुक्ल नवमी माना जाता है | उनके विवाह की तिथि अगहन शुक्ल पंचमी मानी जाती है | खेत में जिस जगह कलश से सीताजजी प्रकट हुयी थी उसी जगह सीताकुंड है | यह स्थान सीतामढी में है | सीतानवमी के अवसर पर यहाँ एक बड़ा मेला लगता है |
नेपाल के एक प्रमुख शहर जनकपुर सीतामढी के सुरसंड प्रखंड कार्यालय के समीप अवस्थित है | देश के विभिन्न भागो से लोग यहाँ सीतामढी -सुरसंड भिड़ामोठ होते हुए जनकपुर जाते है | मिथिला की संस्कृति भारत की प्राचीनतम संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग है | आदिकाल में सम्पूर्ण सीतामढी क्षेत्र राजा जनक के राज्य में सम्मिलित था | कहा जाता है कि कपरौल के पास गौतम ऋषि का आश्रम था जिनके श्राप से उनकी पत्नी अहिल्या पत्थर बन गयी थी | अज यह स्थान “अहिल्यास्थान” के नामस इ प्रसिद्ध है | कपरौल में कपिल मुनि ,खड़का ग्राम में खडक ऋषि और चकमहिला में चक्रधर ऋषि का आश्रम था |
सीतामढी से 8 किमी दूर रीगा नामक स्थान पर ऋग्वेद के विद्वान रहते थे | रीगा ऋन्गया का अपभ्रश है | राजपट्टी ग्राम में बाज पद्दति और राजोपट्टी में राज्सुत्र के ज्ञाता का निवास था | सीतामढी से 15 किमी दूर देवकुली में शिवजी का प्राचीनतम मन्दिर है | सीतामढी से 30 किमी दूर हलेश्वर स्थान है जहां प्राचीन शिव मन्दिर है कहा जाता है कि राजा जनक ने हल चलाने के लिए यहाँ पुत्रेष्टि यज्ञ किया था |
सीतामढी में मारवाड़ी धर्मशाला एवं शिवनारायण धर्मशाला के अलावा पर्यटन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त सीतामय होटल है जहां ठहरा जा सकता है | पुनौरा धाम में विश्रामघर के अलावा दीपक गेस्ट हाउस , अम्बर गेस्ट हाउस और राजकुमार होटल में ठहरने की उचित व्यस्थ्सा है |
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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