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Showing posts from March, 2018

Ajmer Tour Guide in Hindi | अजमेर के प्रमुख दर्शनीय स्थल

Ajmer Tour Guide in Hindi | अजमेर के प्रमुख दर्शनीय स्थल रंगरंगीले राजस्थान के हृदय स्थल में स्थित अजमेर (Ajmer) , जयपुर के पश्चिम में लगभग 135 किमी की दूरी पर है | सातवी शताब्दी में राजा अजयपाल चौहान ने इसे बसाया था एवं 12वी शताब्दी तक अजमेर (Ajmer) पर चौहानों का प्रभुत्व रहा | पृथ्वीराज चौहान यहाँ का अंतिम हिन्दू शासक हुआ जिसके काल में अजमेर (Ajmer) को राजधानी बनने का अवसर मिला | अजमेर (Ajmer) पर मेवाड़ के राणा कुम्भा , मालवा के मुस्लिम शासको का भी कब्जा रहा था | जिन्हें मारवाड़ के मालदेव राठौड़ ने निकाल बाहर किया था | बाद में अकबर ने अपने गुजरात एवं राजपुताना के अभियानों के लिए 1556 ई. में अजमेर को अपना मुख्यालय बनाया था | यही शाहजहाँ के पुत्र दाराशिकोह का जन्म हुआ था | आज जिस भवन में राजकोष संग्रहालय है उसे कभी अकबर ने अपने विश्राम स्थल के रूप में बनवाया था | इसी इमारत में अंग्रेज राजपूत सर थॉमस रों ने मुगल बादशाह जहांगीर से सन 1616 में पहली मुलाकात कर भारत में व्यापार करने की इजाजत एवं कुछ रियासते माँगी थी | अजमेर (Ajmer) जिस पठारी भाग पर स्थित है वह घुमावदार अरावली पर्वत श्रेणी की त...

Bhimrao Ambedkar Biography in Hindi | डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जीवनी

Bhimrao Ambedkar Biography in Hindi | डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जीवनी अगाध ज्ञान के भंडार , घोर अध्यवसायी , अद्भुत प्रतिभा , सराहनीय निष्ठा और न्यायशीलता तथा स्पष्टवादिता के धनी डॉ. भीमराव अम्बेडकर (Bhimrao Ambedkar) ने अपने आपको दलितों के प्रति समर्पित कर दिया था | अस्पृश्य समझी जाने वाली महार जाति में जन्म लेने के कारण उन्हें अपने जीवन में पग-पग पर भारी अपमान और घोर यन्त्रणा की स्थितियों का सामना करना पड़ा था | इन अपमानो और सामाजिक यातनाओं को झेलते हुए वे जीवन में निरंतर आगे बढ़े और उन्होंने निश्चय किया कि भारत के अस्पृश्य वर्ग के लिए अमानवीय जीवन की इस स्थिति को समाप्त कर उन्हें मानवता के स्तर पर लाना है | इस महामानव ने भारत के दलित वर्ग के प्रति निष्ठा और समर्पण की जिस स्थिति को अपनाया था उसके आधार पर उसे भारत का लिंकन और मार्टिन लूथर कहा गया और यहा तक कि बोधित्सव की उपाधि से विभूषित किया गया | भीमराव (Bhimrao Ambedkar) का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई. को इन्दौर के पास महू छावनी में हुआ | जन्म के समय उनका नाम भीम सकपाल था | महार जाति , जिसमे डा.अम्बेडकर का जन्म हुआ , महाराष्ट्र में अछूत समझी ज...

जयप्रकाश नारायण की जीवनी | Jayaprakash Narayan Biography in Hindi

जयप्रकाश नारायण की जीवनी | Jayaprakash Narayan Biography in Hindi भारत के समाजवादी विचारको में जयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan) का विशिष्ट स्थान है | वे एक समाजवादी थे गांधीवादी थे और सर्वोदयवादी थे लेकिन इनमे से किसी के साथ वे जीवन भर बंधकर न रह सके | वस्तुत: उनके जीवन और चिन्तन का एक ही लक्ष्य था और वह था आर्थिक-सामाजिक न्याय और नैतिकता पर आधारित व्वयस्था की स्थापना करना | इस दृष्टि से उन्होंने सम्रग क्रान्ति की बात कही | इस दिशा में वे एक कदम आगे बढ़े लेकिन एक ही कदम बढ़ पाए और लोकनायक का सम्रग क्रान्ति का विचार एक स्वप्न ही रहा | जयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan) का जन्म बिहार के सितावदियारा गाँव में (वर्तमान में उत्तर प्रदेश में) 11 अक्टूबर 1902 को हुआ था | उनकी प्रारम्भिक शिक्षा पटना में हुयी | बाल्यकाल से ही नैतिक तत्वों के प्रति उनका आकर्षण रहा और भगवद्गीताने उन्हें प्रेरणा दी | जयप्रकाश जब कॉलेज में थे तभी 1921 में गांधीजी के नेतृत्व में चल रहे असहयोग आन्दोलन में कूद पड़े | सन 1922 में उनका विवाह प्रभा देवी के साथ हुआ | 1922 में ही वे अध्ययन के लिए अमरीका गये और उन्होंने...

लोककथा - तीन निति वचन | Lokkatha- Teen Niti Vachan

किसी जमाने में इन्द्रपुरी नगरी में एक बहादुर राजा राज करता था | दूर दूर तक उसका नाम फ़ैला था | वह बहुत समझदार था , प्रजा का पालन बड़े ध्यान से करता था जैसे पिता अपने सन्तान की देखभाल करता है | उसके राज्य में सभी सुखी थे | सारी जनता उसे प्यार करती थी | एक दिन उसके दरबार में एक गरीब ब्राह्मण आया और उसे निति के तीन वचन सुनाये | राजा ने ब्राह्मण से पुछा “आप क्या चाहते है ?” ब्राह्मण ने कहा “मुझे अपनी बेटी का विवाह करना है | अगर हर निति वाक्य के बदले मुझे एक हजार रुपया मिल जाए , तो मेरा काम चल जाएगा” राजा ने मंत्री को आज्ञा दी कि ब्राह्मण को तीन हजार रूपये दिलवा दे | फिर उसने तीनो निति वचनों को कागज पर सुंदर ढंग से लिखवाकर अपने बिस्तर के सामने दीवार पर टंगवा दिया | रात को जब राजा सोने गया , तो उसकी निगाहें सामने लिखे निति वचनों पर गयी | पहला था “राजा को सदा सतर्क , सजग रहना चाहिए” राजा ने फैसला किया कि वह शहर में जाकर पता लगाएगा कि उसकी प्रजा में कौन लोग सुखी है और कौन दुखी ? उसने वेश बदला और चल दिया | जब राजा एक गली से गुजर रहा था तो उसने एक बुढी औरत के रोन...

लोककथा - लखटकिया | Lokkatha - Lakhtakiya

एक था कुम्हार | बेचारा बहुत ही गरीब था | काम धंधा ठीक से नही चलता था | आख़िरकार एक दिन राजा के पास जाकर उसने कहा “अन्नदाता , मै आपकी सेवा में रहना चाहता हूँ” राजा ने पूछा “क्या तनख्वाह लोगे ?” कुम्हार बोला “एक लाख टका महीना | आप जो भी काम कहेंगे , वही मै पूरा करके दिखाऊंगा” राजा ने उसकी बात मान ली और इस तरह कुम्हार “लखटकिया” नाम से मशहूर हो गया | दरबार के बहत सारे लोग कुम्हार से इर्ष्या करने लगे | एक दिन उन्होंने राजवैध के साथ मिलकर एक षडयंत्र रचा और राजा से कह दिया कि महारानी की आँखों का रोग शेरनी का दूध डालने से ही दूर हो सकता है | राजा ने हुक्म दिया कि कोई जाकर शेरनी का दूध ले आवे | इस पर हरेक ने जवाब दिया | “अन्नदाता , लखटकिया कुछ भी काम-धाम नही करता | उसे ही यह काम सौंपा जाए” सो राजा ने शेरनी का दूध वापस लाने के लिए लखटकिया से कहा | शाम को कुम्हार जब वापस गया तो उसने देखा उसका गधा गायब है | एक तो वह पहले से ही परेशान था क्योंकि उसे पता नही था कि शेरनी को कैसे पकड़े , उस पर गधे के खो जाने की परेशानी ओर भी बढ़ गयी | रात हो गयी ...

लोककथा - एक पैसे में शादी | Lokkatha - Ek Paise me Shaadi

एक गरीब औरत थी | उसका एक बेटा था | जब वह बड़ा हुआ तो उसने अपनी माँ से कहा “मै शादी करने की सोच रहा हु ताकि तुम्हे घर के काम-काज में सहारा मिल सके” उसकी बुधिया माँ बोली “मेरे पास पैसे के नाम पर कुछ भी नही है ऐसे में तू भला शादी कैसे कर लाएगा ?” बेटे ने कहा “मुझे शादी के लिए सिर्फ एक पैसा चाहिए” उसने अपनी माँ से एक पैसा लिया , उसके भुने चने खरीदे और नदी किनारे जा बैठा | वहां एक धोबी राजा के कपड़े धो रहा था | बुढिया का बेटा भुना चना खाने लगा | धोबी का लड़का भी वहां था | उसे भूख लगी ,तो पिता से खाने को कुछ मांगने लगा | धोबी बोला “भला राजा के कपड़े हम यहाँ छोडकर जाए तो कैसे ?” बुढिया के बेटे को धोबी जानता नही था फिर भी वह बोला “चाचाजी , फ़िक्र क्यों करते हो ! मै रखवाली करूंगा तुम्हारे कपड़ो की , तुम बच्चे को ले जाकर खाना खिला आओ” धोबी ने उसका नाम पूछा तो बताया “मेरा नाम तूफ़ान है” धोबी अपने बेटे को खाना खिलाने घर ले गया | जैसे ही वह गया , उसने सारे कपड़े इकट्ठे किये और उन्हें लेकर अगले गाँव की ओर चल दिया | रस्ते में वह खेतो के ब...

लोककथा - आलसी का प्रण | Lokkatha- Aalsi Ka Pran

पुराने जमाने में एक बड़ा ही बलवान राजा था | उन दिनों हर राजदरबार में कुछ चारण-भाट हुआ करते थे | वे राजा के बड़े-बड़े कामो का गान किया करते थे | ऐसा ही एक चारण इस राजा के दरबार में रहता था | वह बूढा और बुद्धिमान आदमी था | एक शाम उस चारण ने कहा “बिना ऊँचे उद्देश्य के जीने से अच्छा है कि जीवन में कोई न कोई उद्देश्य जरुर रखा जाए , भले ही वह कितना ही उल-जलूल क्यों न हो “| इसी बात पर उसने एक कहानी सुनाई | तेजा नाम का एक जाट था | वह बहुत आलसी था | अपने दिन खा और सोकर गुजार देता था | कोई काम नही करता था | जब वह छोटी उम्र का था तो पिता उसकी देखभाल करते थे | उसके पिता के गुजर जाने के बाद कुछ समय तक उसके भाई सहारा देते रहे | फिर एक धनी परिवार में उसका विवाह हो गया और बहुत वर्षो तक उसके ससुर उसका खर्च चलाते रहे लेकिन ऐसी बाते आखिर कितने दिन चलती | हर चीज की एक सीमा होती है | एक दिन सवेरे ही जाट की पत्नी ने जाकर बताया “हमारे पास जो कुछ भी था सब खत्म हो गया | तुम एक ऐसे आलसी जीव हो , जिसके जीवन का कोई लक्ष्य नही है | हर आदमी के जीवन का कोई न कोई लक्ष्य रहता ही है लेकिन तुम्हारे जीवन मे...

लोककथा - दिल्ली की सैर | Lokkatha - Dilli Ki Sair

एक बार किसी जाट ने एक मियाँ से पूछा “खानजी , मेरी दिल्ली देखने की बड़ी तमन्ना है | क्या करना चाहिए ?” मियाँ ने जवाब दिया “किसी आदमी को दो जूते लगा दो तुम्हे दिल्ली दिख जायेगी” चूँकि वहा कोई दूसरा तो कोई था नही | बस जाट ने जूते उतारे और मियाँ को जमा दिए | मियाँ ने इस घटना की शिकायत थाने में कर दी | थानेदार ने जाट को दिल्ली में काजी के सामने पेश होने का हुक्म दिया | जाट बोला “बहुत अच्छे ! मै यही चाहता था ” और वह दिल्ली की ओर चल दिया | जब वह शहर में दाखिल हो रहा था तो उसे मिठाई की एक दूकान दिखाई दी | जाट को जोर की भूख लगी थी | हलवाई की दूकान में तरह तरह की स्वादिष्ट मिठाइया सजी हुयी थी | जाट ने एक मिठाई की तरह इशारा करके पूछा “यह क्या है ?” हलवाई बोला “दोउठा” जाट ने सोचा कि हलवाई उसे दो उठाने को कह रहा है | बस उसने दो डलिया उठा ली | इसके बाद जाट ने दुसरी मिठाई की तरफ संकेत करके उसका नाम पूछा तो हलवाई ने कहा “खाजा” | जाट ने समझा , हलवाई कह रहा है कि उसे खा ले | बस उसने कई टुकड़े उठाये और चट कर गया | जाट मिठाइयाँ खा चूका ,...