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लोककथा - दिल्ली की सैर | Lokkatha - Dilli Ki Sair

एक बार किसी जाट ने एक मियाँ से पूछा “खानजी , मेरी दिल्ली देखने की बड़ी तमन्ना है | क्या करना चाहिए ?”
मियाँ ने जवाब दिया “किसी आदमी को दो जूते लगा दो तुम्हे दिल्ली दिख जायेगी”
चूँकि वहा कोई दूसरा तो कोई था नही | बस जाट ने जूते उतारे और मियाँ को जमा दिए | मियाँ ने इस घटना की शिकायत थाने में कर दी | थानेदार ने जाट को दिल्ली में काजी के सामने पेश होने का हुक्म दिया |
जाट बोला “बहुत अच्छे ! मै यही चाहता था ” और वह दिल्ली की ओर चल दिया |
जब वह शहर में दाखिल हो रहा था तो उसे मिठाई की एक दूकान दिखाई दी | जाट को जोर की भूख लगी थी | हलवाई की दूकान में तरह तरह की स्वादिष्ट मिठाइया सजी हुयी थी | जाट ने एक मिठाई की तरह इशारा करके पूछा “यह क्या है ?”
हलवाई बोला “दोउठा”
जाट ने सोचा कि हलवाई उसे दो उठाने को कह रहा है | बस उसने दो डलिया उठा ली | इसके बाद जाट ने दुसरी मिठाई की तरफ संकेत करके उसका नाम पूछा तो हलवाई ने कहा “खाजा” |
जाट ने समझा , हलवाई कह रहा है कि उसे खा ले | बस उसने कई टुकड़े उठाये और चट कर गया | जाट मिठाइयाँ खा चूका , तो हलवाई ने पैसे मांगे | जाट ने पैसे देने से इन्कार किया और काजी की अदालत वाली सडक पर चल दिया |
हलवाई भी जाट के पीछे पीछे काजी से न्याय मांगने उसकी अदालत की तरफ चल पड़ा |
रास्ते में एक औरत अपने बेटे के साथ चली जा रही थी | बेटा बहुत शरारती था | परेशान होकर औरत जाट से बोली “अरे भैया , जरा कान तो काट दे इस शैतान के” |
जाट ने झट से चाकू निकाला और लडके के दोनों कान काट दिए | यह देखकर औरत चिल्लाने लगी “अरे लोगो , इस आदमी ने मेरे बेटे के कान काट दिए” उसका रोना सुनकर लोग इकट्ठे हो गये |
जाट बोला “मै तो काजी के पास ही जा रहा हु | यह औरत भी चलने लगी”
आगे रस्ते में जाट ने एक सुंदर लडकी को बनिये की दूकान से तेल खरीदते देखा | तभी लडकी के हाथ से तेल गिर गया |वह रोने लगी कि उसका पिता इस बात पर बहुत नाराज होगा |
बनिये ने कहा “अरे ,इसमें रोने की क्या बात है | तेल के गिरने से तुम्हारे बुरे ग्रह शांत हो ग
ये होंगे”
यह सुनकर जाट सोचने लगा , लगे हाथ बनिये का भी कुछ भला हो जय और इसके सारे बुरे ग्रह शांत कर दिए जाए तो कैसा ! बीएस उसने अपनी लाठी तेल के घड़े पर दे मारी |
सारा तेल बह गया | बनिया गुस्से से चीखने-चिल्लाने लगा “इस आदमी ने मेरा तेल का घड़ा फोड़ डाला”
जाट बोला “भाई ! मै तो काजी के पास ही जा रहा हु | यह बनिया भी चला चले |”
इस तरह जाट काजी की अदालत में पहुचा | उसके पीछे शिकायती लोग और सिपाही थे |
पहले काजी ने मियाँ के मामले पर विचार शुरू किया | उसने जाट से पूछा “भाई तुमने मियाँ को जूते क्यों लगाये ?”
जाट ने कहा “हुजुर मै ठहरा गाँव का सीधा साधा इंसान | मैंने अपने दोस्त मियाँ से पूछा था कि दिल्ली देखने के लिए क्या करना चाहिए | इन्होने कहा “किसी को एक दो बार जूतों से पीटो बस ,तुम्हे दिल्ली दिखाई दे जायेगी “| उस समय मियाँ के अलावा मुझे कोई दूसरा नजर नही आया इसलिए मैंने इनकी बात इन्ही पर आजमा ली | अगर यह मेरी भूल है तो मै अपना अपराध स्वीकार करता हु” | दोनों तरफ की बात सुनने के बाद काजी ने मियाँ को ही कसूरवार ठहराया |
इसके बाद मिठाई वाला आगे आकर बोला “हुजुर , जाट ने मेरी मिठाइयाँ खा ली और पैसे नही चुकाए |”
जाट ने कहा “सरकार जरा मिठाई वाले से पूछकर तो देखिये इसने मुझसे मिठाइयाँ खाने को कहा था या नही | पहले इसने कहा था “दो उठा” मैंने दो ही मिठाइयाँ उठाकर खा ली” अगर दो से एक भी ज्यादा ली हो तो पुच लीजिये | इसके बाद इसने कहा कि “खाजा” | इस पर मैंने दुसरे थाल से कुछ मिठाइया उठाकर खा ली | अगर मैंने इसके कहने के अनुसार करके कुछ गलती की तो मैं अपने को कसूरवार मानने को तैयार हु | हुजुर मै तो सीधा सादा आदमी हु | मैंने मिठाई वाले की बात सुनकर यही सोचा था कि यह जैसा कह रहा है मुझे वैसा ही करना चाहिए |
काजी ने फैसला किया कि जाट का कोई कसूर नही | मिठाई वाले को यह समझना चाहिए था कि जाट एक भोला भाला गाँव का आदमी है और उसे मिठाईयो के नाम मालुम नही है |
इसके बाद वह औरत अपने बेटे को लाई जिसके कान जाट ने काट लिए थे | जाट ने कहा “हुजुर , जरा इस औरत से पूछिए कि इसने मुझसे अपने शैतान लडके के कान काटने को कहा था या नही ?”
औरत बोली “मै तो लडके को सिर्फ डरा रही थी मेरा मतलब यह थोड़े था कि जाट मेरी बात को एकदम ही सच मान ले ”
इस पर जाट ने कहा “भाई मै तो सीधा सादा गाव वाला | मैंने यही समझा कि यह जो कह रही है सच है ”
यह सुनकर काजी ने औरत का मुकदमा भी खारिज कर दिया |
आखिरी शिकायत बनिये की थी वह बोला “दुहाई है सरकार ! इसने मेरा तेल का बर्तन फोड़ डाला | मेरा पूरा सौ रुपयों का नुकसान हो गया ”
जाट ने पुरी घटना बता दी | बोला “हुजुर एक लडकी ने इस बनिये की दूकान से तेल खरीदा था | उससे कुछ तेल गिर गया तो वह रोने लगी | इस बनिये ने उससे कहा “अरे इसमें रोने चिल्लाने की क्या बात है इस तेल के गिरने से तुम्हारे कुछ बुरे ग्रह शांत हो गये होंगे ”
काजी ने बनिये से पूछा “क्या तुमने उस लडकी से यह बात कही थी ?”
बनिये को मानना पड़ा कि उसने लडकी से यह कहा था | इस पर जाट बोला “तब तो हुजुर , मैंने तेल का घडा तोडकर बनिये के साथ भलाई ही की , क्योंकि उससे इसके सारे बुरे ग्रह शांत हो गये ”
जाट की बात सुनकर काजी हसने लगा और उस मुकदमे को भी खारिज कर दिया | अब जाट को दिल्ली घुमने की छुट मिल गयी थी | उसने जी भरकर दिल्ली की सैर की |

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