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Showing posts from August, 2016

गुरुभक्त आरुणि की कहानी Guru Bhakt Aaruni Story in Hindi

गुरुभक्त आरुणि की कहानी Guru Bhakt Aaruni Story in Hindiपुराने समय में ज्ञान सम्पन्न गुरु और योग्य शिष्यों को बहुत ही सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है | कुलीन राजघरानो और ब्राहमणों के पुत्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुकुल और आश्रमों की शरण लिया करते थे | उन दिनों आमोद धौम्य नामक एक ज्ञान सम्पन्न गुरु थे जो अपने शिष्यों के परम आदरणीय थे | गुरु धौम्य ज्ञान और पुरुषार्थ दोनों की ही शिक्षा प्रदान करते थे इसलिए उनके पास निर्धन और सम्पन्न दोनों ही वर्गो के शिष्य आया करते थे | वह बिना भेदभाव के समान रूप से उन्हें शिक्षा प्रदान करते थे | आश्रम का खर्च शिष्यों द्वारा की गयी कृषि से ही चलता था | शिष्यों को आत्मनिर्भरता का पाठ पढाने के लिए ही गुरु धौम्य ने उन्हें कृषि करने की आज्ञा दी थी | वैदिक ज्ञान , कृषि और अनुशाशन आदि क्षेत्रो में गुरु धौम्य के शिष्यों का कोई मुकाबला नही था फिर भी उनकी आँखे किसी योग्य शिष्य को तलाशती रहती थी | एक बार इंद्र के प्रकोप के कारण भीषण वर्षा हुयी | जल और थल का भेद मिटने लगा था | लगता था प्रलय आकर ही रहेगा |गुरु धौम्य अपने सभी शिष्यों के साथ चिंतित खड़े वर्षा रुकन...

जिन्दगी का आनन्द लेना बच्चो से सीखे Learn Joy of Life from Children

कई बार हमे ऐसा लगने लगता है की हम फिर से बच्चे हो जाए तो जीवन  में फिर मस्ती भर जायेगी | न किसी बात की टेंशन और न किसी बात का अफ़सोस होगा | बच्चो जैसी मस्ती करने के लिए बच्चे जितनी उम्र नही ,बल्कि उनके जैसा दिल होना चाहिए | बच्चो जैसी कुछ ख़ास आदतों को यदि अपना लिया जाए तो जिन्दगी का लुत्फ़ उठाना भी आ जाएगा | आइये अब आपको बताते है किस तरह आप बच्चो की तरह जिन्दगी का आनन्द ले सकते है | 01 किसी के बीच अंतर नही बच्चे हर चीज को कई रंगो और ढंग से देखते है | उनके लिए किसी बात के दो मतलब नही होते है और ना ही उन्हें रंग ,जाति और गोरे काले से मतलब होता है | यही बात बच्चे को प्यारा बना देती है और उसे हर किसी के करीब ले आती है | आप भी इस आदत को अपना ले तो हर कोई अपना लगने लगेगा | 02 जैसे है वैसे रहे बच्चो को किसी की परवाह नही होती है वे अपने आप में व्यस्त रहते है | उन्हें सिर्फ अपनी ही चिंता होती है | वे बडो की तरह दिखावा नही करते है , आप भी जैसे है वैसे ही रहे | ०3 मुस्कुराये बच्चे भले कितना ही रो ले  , परन्तु जरा सी बात पर वे मुस्कुरा उठते अहि | ऐसा ही आप करे , हमेशा मुस्कुराये तथा सकारात्मक सोचे |...

बछबारस पूजन विधि और कहानी Bach Baras Pooja Vidhi and Story in Hindi

बछबारस पूजन विधि और कहानी Bach Baras Pooja Vidhi and Story in Hindiमित्रो आज बछ बारस Bach Baras है जो हिन्दू धर्म में गाय और बछड़े के महत्व को समझाता है | बछ बारस प्रतिवर्ष जन्माष्टमी के चार दिन पश्चात भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की द्वादशी के दिन मनाया जाता है इसलिए इस गोवत्स द्वादशी भी कहते है | भगवान कृष्ण के गाय और बछड़ो से बड़ा प्रेम था इसलिए इस त्यौहार को मनाया जाता है और ऐसा माना जाता है की बछ बारस के दिन गाय और बछड़ो की पूजा करने से भगवान कृष्ण सहित गाय में निवास करने वाले सैकड़ो देवताओ का आशीर्वाद मिलता है जिससे घर में खुशहाली और सम्पन्नता आती है | Bach Baras बछबारस का पर्व राजस्थानी महिलाओं में ज्यादा लोकप्रिय है | Bach Baras बछबारस के दिन विवाहित महिलाये पुत्र प्राप्ति और मंगल कामना के लिए व्रत करती है | इस दिन अंकुरित चने , मटर ,मुंग आदि का सेवन किया जाता है | इस दिन गाय का दूध और उससे बनी वस्तुओ का सेवन नही करना चाहिए | इस दिन गेहू का उपयोग नही करना चाहिए और साथ ही कटी हुयी सब्जियों और फ्लो को भी नही खाना चाहिए | इस दिन गायो और बछड़ो की पूजा की जाती है | अब हम आपको Bach Baras बछ...

Ashok Kumar Biography in Hindi | अभिनय सम्राट अशोक कुमार की जीवनी

भारतीय फिल्मो के इतिहास में जब बोलती फिल्मो का दौर शुरू हुआ , उस वक्त अभिनय में काफी लाउडनैस हुआ करती थी | इसके साथ ही उस वक्त रंगमंच का भी अच्छा दौर था , पारसी रंगमंच के प्रभाव के कारण संवाद अदायगी पर काफी जोर दिया जाता था | उस दौर में अशोक कुमार (Ashok Kumar) “दादा मुनि ” हिंदी सिनेमा से ऐसे कलाकार के रूप में सामने आये , जिनके अभिनय से सहजता और स्वाभाविकता थी | उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता से भारतीय सिनेमा में स्टारडम को नया आयाम दिया | बिहार के भागलपुर में गंगा तट पर स्तिथ आदमपुर मोहल्ले में 13 अक्टूबर 1911 को जन्मे कुमुद लाल गांगुली उर्फ़ अशोक कुमार (Ashok Kumar )ने अपने को किसी इमेज से बंधने दिया और उस वक्त नायक को नई छवि दी | ऐसे वक्त में जब हीरो को अच्छाई का प्रतीक समझा जाता था , उस वक्त उन्होंने फिल्म “किस्मत ” में एंटी हीरो की भूमिका निभाते हुए उस दौर की प्रचलित मान्यताओ को खारिज कर दिया | उन्होंने ऐसे दौर में अभिनय को सम्मानजनक स्थान दिलाया , जब फिल्मो को सम्मान की नजरो से नही देखा जाता था | अशोक कुमार (Ashok Kumar) की रूचि अभिनय नही थी बल्कि वह फिल्म में ...

Medical Lab Technician में अपना करियर कैसे बनाए | Medical Lab Technician Career Details in Hindi

Medical Lab Technician Career Details in Hindi आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में क्लिनिकल प्रयोगशाला एक महत्वपूर्ण रोल अदा करती है | छोटी सी छोटी बीमारी के लिए डॉक्टर मरीजो को विभिन्न तरह की जांचे कराते है ताकि असली मर्ज और उसकी स्तिथि का पता चल सके | ऐसे में सही इलाज और दवा के लिए क्लिनिकल प्रयोगशाला की भूमिका अहम हो जाती है | ऐसी प्रयोगशालाओ पर काम करने के लिए प्रशिक्षित Technician की जरूरत होती है | इन प्रशिक्षित Technician को चिकित्सा के क्षेत्र में Medical Lab Technician (M.L.T.) कहते है | Medical Lab Technician (M.L.T.) शरीर में खून , खून के प्रकार ,सैल और अन्य अवस्थाओ का विश्लेष्ण करता है | Medical Lab Technician का कार्यक्षेत्र Medical Lab Technician डॉक्टरो के निर्देशों पर काम करते है | उपकरणों की रख रखाव और कई तरह के काम इनके जिम्मे होता है | Lab में नमूनों की जांच और विश्लेष्ण में काम आने वाला घोल Lab Technician ही बनाते है | इन्हें Medical Science के साथ साथ लैब सुरक्षा नियमो और जरुरतो के बारे में पूरा ज्ञान होता है |  Lab Technician नमूनों की जांच का काम करते है लेकिन वे इसके पर...

बॉलीवुड के पहले एंग्री यंग मेन सुनील दत्त की जीवनी Sunil Dutt Biography in Hindi

Sunil Dutt Biography in Hindi बॉलीवुड के पहले एंग्री यंग मेन सुनील दत्त की जीवनी Sunil Dutt Biography in Hindi बलराज दत्त उर्फ़ सुनील दत्त Sunil Dutt का जन्म पंजाब (तत्कालीन पाकिस्तान ) के झेलम जिले के खुर्दी गाँव में हुआ था | वह बचपन सही अभिनय के क्षेत्र में जाना चाहते थे | बलराज साहनी , फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता के रूप में उन दिनों स्थापित हो चुके थे इसे देखते हुए उन्होंने अपना नाम बलराज दत्त से बदल कर सुनील दत्त रख लिया | उनका बचपन यमुना नदी के किनारे मदाली गाँव में बीता जो हरियाणा प्रदेश में है | वह इसके बाद लखनऊ चले गये , जहा पर वह अख्तर नाम से अमीनाबाद गली में मुस्लिम औरत के घर [पर रहे | कुछ समय बाद वो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई चले गये | मुम्बई आकर उन्होंने परिवहन सेवा के बस डिपो में चैकिंग क्लर्क के रूप में कार्य किया | फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए 1955 से 1957 तक संघर्ष करते रहे | उनकी पहली फिल्म “रेलवे प्लेटफोर्म ” 1955 में प्रदर्शित हुयी , जिसमे उन्होंने अभिनेता के रूप में कार्य किया | अपनी पहली फिल्म में कुछ खास पहचान नही मिली | उन्होंने इसके बाद “कु...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष Shree Krishna Janmashtami Essay in Hindi

Shree Krishna Janmashtami Essay in Hindi श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष Shree Krishna Janmashtami Essay in Hindi भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी , बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के समय मथुरा नगरी के कारागार में हुआ था | उनके पिता वासुदेव जी और माता देवकी थी | उनका पालन पोषण वृन्दावन में माता यशोदा और नन्द बाबा ने किया था | इस दिन मथुरा में रात को बारह बजे कृष्ण जन्म उत्सव विशाल रूप से मनाया जाता है | वृन्दावन में बिहारी जी के मन्दिर में भक्तो को सुबह से दर्शन होते है | कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव पुरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है | इस दिन घरो में नन्द गोपाल को पालने में विराज कर बाल लीला की झांकी सजाई जाती है | पूजन सामग्री और पूजन विधि बालकृष्ण की छोटी मूर्ति ,फूलो से सजा हुआ पालना ,कृष्ण जी के नये वस्त्र , श्रुंगार ,चन्दन ,इत्र ,फुल की माला ,भोग के लिए मेवा | पंचामृत (कच्चा दूध ,दही ,घी ,शहद ,चीनी ), पंजीरी (सूखे धनिये से पीसी हुयी चीनी मिलाये इसके बाद काजू ,बादाम ,पिस्ता मिलाये ) आदि |  सर्वप्रथम बारह बजते ही ठाकुर जी जा पंचामृत से अभिषेक करे | पहले ...

कृष्णनगरी वृन्दावन , जो है श्रीकृष्ण की बाल लीलाओ का साक्षी | Vrindavan Temples History in Hindi

कृष्णनगरी वृन्दावन , जो है श्रीकृष्ण की बाल लीलाओ का साक्षी | Vrindavan Temples History in Hindi वृन्दावन मथुरा से लगभग 15 किमी की दूरी पर है | वृन्दावन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओ का साक्षी है | इस पावन स्थली का नामकरण वृन्दावन कैसे हुआ इसके बारे में अनेक मत है | वुन्दा तुलसी को कहते है | पहले यह तुलसी का घना वन था इसलिए वृन्दावन कहा जाने लगा | वृन्दावन की अधिष्ठात्री देवी वृंदा अर्थात राधा है | ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्री राधा रानी के सोलह नामो में से एक नाम वृंदा भी है | वृंदा अपने प्रिय श्रीकृष्ण से मिलने की आकांशा लिए इसी वृन्दावन में निवास करती है तथा वृन्दावन को पावन और रसमय करती है | वृन्दावन की गलिया बड़ी प्रसिद्ध है और वृन्दावन की इन गलियों को कुंज गलिया कहते है |आइये अब हम आपको वृन्दावन के प्रसिद्ध मन्दिरों की जानकारी देते है | 01 बांके बिहारी का मन्दिर वृन्दावन का प्रमुख दर्शनीय मन्दिर श्री बांके बिहारी मन्दिर है | स्वामी हरिदास जी द्वारा निर्मित यह मन्दिर अति प्राचीन है | मन्दिर की स्थापित श्री विग्रह निधिवन से प्रकट हुए थे जिसे स्वामी हरिदास ने यहा स्थापित किया था |...

10 Life Skills जिन्हें अपने जीवन में अपनाकर पाए सफलता | 10 Life Skills to Get Success

10 Life Skills जिन्हें अपने जीवन में अपनाकर पाए सफलता | 10 Life Skills to Get Successऐसे कई कौशल है जिन्हें सीखना सफलता के लिए जरुरी है | यु तो इनमे कई सारे कौशल शामिल किये जा सकते है परन्तु किसी भी पेशे से सफलता के लिए जरुरी 10 Life Skills के बारे में हम आपको यहा बता रहे है जिन्हें आप अपने जीवन में अपनाकर सफलता की सीढी पर चढ़ सकते हो और साथ ही हम उन सफल व्यक्तियों के बारे में भी बतायेंगे जिन्होंने इन 10 Life Skills को अपनाकर अपने जीवन में बुलन्दियो को छुआ है | 01 शांतचित होकर फीडबैक स्वीकार करना यह एक कमाल का कौशल है जिसे अभ्यास से सीखा जा सकता है | ऐसे मौके पर आपको अपनी भावात्मक प्रतिक्रिया को एक तरफ करके पेश की जा रही सुचना पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए |इनमे से कुछ सूचना काम की होगी और कुछ बेकार परन्तु इसका फैसला अपने दिमाग को करने दे न कि अपने अहम को | माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला पद ग्रहण के बाद से ही नियमित रूप से अपनी नेतृत्व शैली के संबंध में फीडबैक प्राप्त करते रहे है | 02 दिल से माफी माँगना इन्सान गलतियों का पुतला माना जाता है लेकिन दिल से माफी माँगना एक जरुरी कौशल है | जब...

R.D.Burman Biography in Hindi | अद्वितीय संगीतकार आर.डी.बर्मन की जीवनी

R.D.Burman Biography in Hindi 27 जून 1939 को कलकक्ता में जन्मे R.D.Burman आर.डी.बर्मन के पिता एस.डी.बर्मन जाने माने संगीतकार थे | घर में फ़िल्मी माहौल के कारण उनका भी रुझान संगीत की ओर हो गया और वह अपने पिता से संगीत की शिक्षा लेने लगे | उन्होंने उस्ताद अली अकबर खान से सरोद वादन की भी शिक्षा ली थी | फिल्म जगत में पंचम दा के नाम से मशहूर आर.डी.बर्मन को यह नाम तब मिला जब उन्होंने अशोक कुमार को संगीत के पांच सुर सा रे गा मा पा गाकर सुनाये | 9 वर्ष की छोटी सी उम्र में पंचम दा  ने अपनी पहली धुन “ए मेरी टोपी पलट के आ ” बनाई और बाद में उनके पिता सचिन देव बर्मन ने उसका इस्तेमाल 1956 में प्रदर्शित फिल्म “फंटूश ” में किया | इसके अलावा उनकी बनाई धुन “सर जो तेरा चकराए ” भी गुरुदत्त की फिल्म “प्यासा ” के लिए इस्तेमाल की गयी | अपने सिने करियर की शुरुवात उन्होंने अपने पिता के साथ बतौर सहायक के रूप में की | इन फिल्मो में “चलती का नाम गाडी ” और “कागज के फुल” जैसी सुपरहिट फिल्मे भी शामिल है | बतौर संगीतकार उन्होंने अपने सिने करियर की ...

अंतिम हिन्दू सम्राट हेमू हेमचन्द्र विक्रमादित्य ,जो थे शौर्य और बलिदान का पर्याय Hemu Aka Samrat HemChandra Vikramaditya History in Hindi

अंतिम हिन्दू सम्राट हेमू हेमचन्द्र विक्रमादित्य ,जो थे शौर्य और बलिदान का पर्याय Hemu Aka Samrat HemChandra Vikramaditya History in Hindi भारतीय इतिहास शौर्य गाथाओ से सराबोर है | इन शौर्य गाथाओ के अदम्य साहस और वीरता की गाथाये आज भी प्रेरक मिसाल बनी हुयी है | ऐसे में रणबांकुरो में अंतिम हिन्दू सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य , जिन्हें हेमू के नाम से भी जाना जाता है , का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है | एक साधारण व्यापारी से विक्रमादित्य की पदवी तक का सफरनामा उनके अद्भुद साहस ,कुशाग्र बुद्धि एवं प्रेरक रणकौशल का प्रमाण है | हेमचन्द्र विक्रमादित्य का जन्म आश्विन शुक्ल दशमी विक्रमी संवत 1556 (1501 ईस्वी ) में राजस्थान के अलवर जिले के अंतर्गत माछेरी नामक गाँव के एक समृद्ध धूसर भार्गव परिवार में हुआ था | हेमू के पिता राय पूरनदास संत प्रवृति के नेक इन्सान थे जो पुरोहिती कार्य करते थे | बाद में उन्होंने हरियाणा के रेवाड़ी स्तिथ क़ुतुब पुर नामक क्षेत्र में रिहायश कर यहा व्यापार शूरू किया | वह मुख्यत: तोप और बंदूक में प्रयोग किय जाने वाले पोटेशियम नाइट्रेट (शोरा) का व्यापार करते थे | हेमू ने अपनी ...

तानाशाह ईदी अमीन ,जिसने युगांडा के 1 लाख निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतारा था Idi Amin Biography in Hindi

तानाशाह ईदी अमीन ,जिसने युगांडा के 1 लाख निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतारा था Idi Amin Biography in Hindi मित्रो अब तक तानशाही की मामले में हम केवल हिटलर और मुसोलिनी जैसे क्रूर शाशको का नाम सुनते आये है लेकिन 20 सदी के अंत में Idi Amin ईदी अमीन भी उन्ही क्रूर तानाशाहो की श्रेणी में शामिल हो गया जिसने सत्ता के लिए युगांडा के 1 लाख से ज्यादा निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतारा था | Idi Amin ईदी अमीन को “अमीन दादा ” , “बुचर ओर अफ्रीका ” और “ब्रिटिश साम्राज्य के विजेता” जैसे नामो से पुकारा जाता रहा है जो कि उसकी तानशाही को प्रमाणित करते है | आइये आज हम आपको विश्व के बदनाम कातिलो में शामिल Idi Amin ईदी अमीन की जीवनी से रूबरू करवाते है कि किस तरह उसने क्रूरता का रुख अपनाया था | ईदी अमीन का प्रारम्भिक जीवन Idi Amin ईदी अमीन का जन्म युगांडा के उत्तर पश्चिमी कोने में स्तिथ काकवा अरुयो के पास कोबोको में हुआ था | उसका जन्म सन 1923 से सन 1925 के मध्य माना जाता है |  ईदी अमीन के पिता किसान थे और इस्लाम का अनुयायी थे और उसकी माँ लुग्बारा जनजाति की सदस्या थी | अमीन के छ...

इतिहास के पन्नो में रक्षाबंधन के किस्से और पौराणिक महत्व History of Rakhi Raksha Bandhan in Hindi

History of Rakhi Raksha Bandhan in Hindi बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है , प्यार के दो तार से संसार बाँधा है | भाई की कलाई पर Rakhi राखी बाँधने का सिलसिला बहुत पुराना है | Raksha Bandhan रक्षाबंधन का इतिहास सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है | वह भी तब आर्य समाज में सभ्यता की रचना की शुरुवात मात्र हुयी थी | Raksha Bandhan रक्षाबंधन पर्व पर जहा बहनों को भाइयो की कलाई में रक्षा का धागा बाँधने का बेसब्री से इंतजार रहता है वही दूर दराज बसे भाइयो को भी इसी बात का इंतजार रहता है कि उनकी बहना उन्हें राखी Rakhiभेजे | उन भाइयो को निराश होने की जरूरत नही है जिनकी अपनी सगी बहन नही है क्योंकि मुहबोली बहनों से Rakhi राखी बाँधने की परम्परा काफी पुरानी है | असल में Raksha Bandhan रक्षा बंधन की परम्परा उन बहनों ने डाली थी जो सगी नही थी | भले ही उन बहनों ने अपने संरक्षण के लिए ही इस पर्व की शुरुवात क्यों ना की हो लेकिन उसकी बदौलत आज भी इस त्यौहार की मान्यता बरकरार है | आइये आज हम आपको रक्षाबंधन से जुड़े पौराणिक रिश्ते की कहानिया आपको बताते है | 01 देवराज इंद्र और शाची की कथा एक समय देवताओ के राजा इ...

बॉलीवुड में भाई-बहन के प्यार को दर्शाती फिल्मे , जिसमे से काफी सफल रही Hindi Movies to Watch on Raksha Bandhan

कभी हिंदी फिल्मो का फ्लेवर पारिवारिक हुआ करता था | एक भरा-पूरा परिवार जिसमे माँ ,पिता , भाई-बहन और भाभी सभी मौजूद होते थे जिसमे हर पर्व की गुंजाइश होती थी | ऐसे में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन को तो फिल्मो में होना ही था लेकिन आज फिल्मो का फॉर्मेट बिलकुल बदल चूका है | अब तो “रेस-2” जैसी फिल्मो में भाई-बहन एक दुसरे के खिलाफ साजिश रचते है | जोया अख्तर की फिल्म “दिल धडकने दो” भी सतही तौर पर परिवार और भाई-बहन को दिखाती है | यही कारण है कि दर्शको को अज भी पुराने जमाने की फिल्मो के भाई-बहन और सखी गीत याद आते रहते है | ऐतेहासिक फिल्मो के भाई-बहन दो एतेहासिक फिल्मो “सिकन्दर ” और “हुमायु” को भाई बहन के रिश्ते दिखाने वाली फिल्मे कहा जा सकता है | सोहराब मोदी की फिल्म “सिकन्दर “में सिकन्दर की पत्नी पुरुराज को राखी बांधती है और अपने पति की रक्षा का वचन लेती है | महबूब खान की 1945 में रिलीज़ फिल्म “हुमायूँ” में अशोक कुमार हुमायु बने थे | वीणा ने रानी कर्णावती की भूमिका की थी | कर्णावती अपने पति की रक्षा के लिए हुमायूँ को ...

सयुंक्त पंजाब के प्रथम सम्राट जस्सा सिंह आहलूवालिया की जीवनी Jassa Singh Ahluwalia History in Hindi

 Jassa Singh Ahluwalia History in Hindi आजादी के लिए सिखों के संघर्ष के दौरान मिसलो यानि सिख राज्यसंघ के चुने हुए सर्वोच्च कमांडर सुल्तान-उल-कौम नवाब जस्सा सिंह आहलूवालिया Jassa Singh Ahluwalia का जन्म 3 मई 1718 को लाहौर के करीब एक छोटे से गाँव आहलू में हुआ था | जब वह केवल 5 साल के थे तो ही उनके पिता सरदार बदर सिंह का निधन हो गया | उनकी माँ माता जीवन कौर ने अपने भाई एवं प्रमुख सिख योद्धा सरदार बाग़ सिंह ह्ल्लोवालिया की मदद से उनका पालन पोषण किया | उनके मामा के निधन के पश्चात उनके जत्थे का उत्तराधिकार का उत्तराधिकार नवाब जस्सा सिंह आहलुवालिया Jassa Singh Ahluwalia को मिला | सच्चे अर्थो में वह दल खालसा के आहलूवालिया मिसल के संस्थापक थे | 1723 में युवा जस्सा सिंह Jassa Singh Ahluwalia को दिल्ली ले लाया गया ताकि उस वक्त वहा रह रही गुरु गोविन्द सिंह जी की धर्मपत्नी माता सुन्दरी जी का आशीर्वाद दिलवाया जा सके | माता सुन्दरी जी ने उनकी देखभाल अपने बच्चे की तरह की | युद्ध कला तथा राज्य तन्त्र का शुरुवाती प्रशिक्षण उन्हें सिखों के महान नेता नवाब कपूर सिंह फजलपुरिया से प्राप्त हुआ | उनके बाद 1753 ...

देशभक्ति पर बनी बॉलीवुड फिल्मे , जिन्हें आप इस स्वतंत्रता दिवस पर देखना ना भूले Patriotic Bollywood Movies in Hindi

Patriotic Bollywood Movies in Hindi बॉलीवुड ने कई ऐसी फिल्मे बनाई है जो देशभक्ति के रंग में रंगी है | फिल्म निर्माताओ ने अपने अपने तरीके से देशभक्ति दिखाने की कोशिश की है | कई Patriotic Bollywood Movies फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर सफल रही तो कुछ बुरी तरह पिट गयी | वैसे दूरदर्शन तो शूर हे ही स्वंतंत्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस पर देशभक्ति फिल्मे दिखा रहा है लेकिन वर्तमान में इतने मूवी चैनल है कि आपको हर एक पर अलग अलग देशभक्ति फिल्म Patriotic Bollywood Movies जरुर देखने को मिल जायेगी | अगर किसी पर भी आपके पसंदीदा फिल्म नही आ रही है तो youtube तो सलामत है ही तो मित्रो आजादी की 70 वी वर्षगांठ के मौके पर ऐसी ही कुछ फिल्मो को याद कर लेते है | 01 शहीद Shaheed यह देशभक्ति पर आधारित सर्वाधिक पसंद की गयी फिल्मो में से एक है | शहीद भगत सिंह के जीवन पर आधारित यह फिल्म 1965 में रिलीज़ हुयी थी | फिल्म को राष्ट्रीय पुरुस्कार मिला था | केवल कश्यप इसके निर्माता थे | डायरेक्शन एस.राम शर्मा का था | मुख्य किरदार निभाने वाले अभिनेता मनोज कुमार को इस फिल्म के लिए इतनी सराहना मिली कि इसके बाद देशभक्ति पर आधारित कई फिल...

करतार सिंह सराभा , जिनसे प्रभावित होकर भगत सिंह ने लड़ी थी आजादी की जंग Kartar Singh Sarabha Biography in Hindi

करतार सिंह सराभा , जिनसे प्रभावित होकर भगत सिंह ने लड़ी थी आजादी की जंग Kartar Singh Sarabha Biography in Hindi 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की विफलता के बाद ब्रिटिश सरकार ने सत्ता पर सीधा नियन्त्रण कर एक ओर उत्पीडन तो दुसरी ओर भारत में औपनिवेशिक व्वयस्था का निर्माण शूरू कर दिया था | चूँकि खुद ब्रिटेन में लोकतान्त्रिक व्यवस्था थी इसलिए Municipality आदि संस्थाओ का निर्माण भी किया गया लेकिन भारत का आर्थिक दोहन अधिक से अधिक हो इसलिए यहा के देशी उद्योगों को नष्ट करके यहा से कच्चा माल इंग्लैंड भेजा जाना शुरू किया गया | साथ ही पुरे देश में रेलवे का जाल बिछाना शुरू हुआ | ब्रिटिश सरकार ने भारत के सामन्तो को अपना सहयोगी बनाकर किसानो का भयानक उत्पीडन शूरू किया | नतीजन 19वी सदी के अंत तक आते आते देश के अनेक भागो में छुटपुट विद्रोह होने लगे | महराष्ट्र और बंगाल तो इसके केंद्र बने ही , पंजाब में भी किसानो की दशा पुरी तरह खराब होने लगी | परिणामत: 20 वी सदी के आरम्भ में ही पंजाब के किसान कनाडा ,अमेरिका की ओर मजदूरी की तलाश में जाने लगे | मध्यमवर्गीय छात्र भी शिक्षा प्राप्ति के लिए इंग्लैंड ,अमेरिक...

डा. राजेन्द्र प्रसाद की जीवनी | Rajendra Prasad Biography in Hindi

डा. राजेन्द्र प्रसाद , एक महान और विनम्र राष्ट्रपति | Rajendra Prasad Biography in Hindi डा. राजेन्द्र प्रसाद (Rajendra Prasad) भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति थे | उनका जीवन  सार्वजनिक इतिहास है | वह सादगी ,सेवा , त्याग और देशभक्ति के प्रतिमूर्ति थे | स्वतंत्रता आन्दोलन में अपने आपको पुरी तरह से होम कर देने वाले राजेन्द्र बाबू (Rajendra Prasad) अत्यंत सरल और गम्भीर प्रकृति के व्यक्ति थे | वह सभी वर्ग के लोगो से सामान्य व्यवहार रखते थे | लगभग 80 वर्षो के उनके प्रेरक जीवन में साथ साथ भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के दुसरे चरण को करीब से जानने का एक बेहतर माध्यम उनकी आत्मकथा है | राजेन्द्र प्रसाद (Rajendra Prasad) जन्म एवं शिक्षा डा. राजेन्द्र प्रसाद (Rajendra Prasad) का जन्म 3 दिसम्बर 1884 को बिहार के एक छोटे से गाँव जीरोदई में हुआ था | उनके पूर्वज सयुंक्त प्रान्त के अमोढ़ा नाम की जगह से पहले बलिया और फिर बाद में सारन (बिहार ) के जीरोदाई आकर बसे थे | पिता महादेव सहाय की तीन बेटियाँ और दो बेटे तह जिनमे से वह सबसे छोटे थे | प्रारम्भिक शिक्षा उन्ही के गाँव जीरोदाई में हुयी थी | पढाई की तरफ इन...