बॉलीवुड में भाई-बहन के प्यार को दर्शाती फिल्मे , जिसमे से काफी सफल रही Hindi Movies to Watch on Raksha Bandhan
कभी हिंदी फिल्मो का फ्लेवर पारिवारिक हुआ करता था | एक भरा-पूरा परिवार जिसमे माँ ,पिता , भाई-बहन और भाभी सभी मौजूद होते थे जिसमे हर पर्व की गुंजाइश होती थी | ऐसे में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन को तो फिल्मो में होना ही था लेकिन आज फिल्मो का फॉर्मेट बिलकुल बदल चूका है | अब तो “रेस-2” जैसी फिल्मो में भाई-बहन एक दुसरे के खिलाफ साजिश रचते है | जोया अख्तर की फिल्म “दिल धडकने दो” भी सतही तौर पर परिवार और भाई-बहन को दिखाती है | यही कारण है कि दर्शको को अज भी पुराने जमाने की फिल्मो के भाई-बहन और सखी गीत याद आते रहते है |
ऐतेहासिक फिल्मो के भाई-बहन
दो एतेहासिक फिल्मो “सिकन्दर ” और “हुमायु” को भाई बहन के रिश्ते दिखाने वाली फिल्मे कहा जा सकता है | सोहराब मोदी की फिल्म “सिकन्दर “में सिकन्दर की पत्नी पुरुराज को राखी बांधती है और अपने पति की रक्षा का वचन लेती है | महबूब खान की 1945 में रिलीज़ फिल्म “हुमायूँ” में अशोक कुमार हुमायु बने थे | वीणा ने रानी कर्णावती की भूमिका की थी | कर्णावती अपने पति की रक्षा के लिए हुमायूँ को राखी भेजती है | हुमायु राखी के बंधन को निभाता भी है | बहुत बाद में फिल्म “जोधा अकबर ” में ऐश्वर्या रॉय और सोनू सूद के जरिये भाई सुजमाल और बहन जोधा के प्यार को प्रभावशाली ढंग से दिखाया था |
तूफ़ान और दिया
प्रभात कुमार निर्देशित यह फिल्म पुरी तरह भाई-बहन की कहानी पर केन्द्रित थी | इस फिल्म में नंदा ने बहन की भूमिका निभाई थी और सतीश व्यास उनके भाई बने तह | उस समय नंदा की उम्र 17 साल की थी | यह अनाथ भाई-बहन तमाम दुश्वारियो से गुजरते है , बहन की आँखे चली जाती है तब छोटा भाई अपनी बहन को एक आश्रम में रखकर खुद मेहनत मजदूरी कर उसकी शादी करने का बीड़ा उठाता है | इस फिल्म के निर्माता नंदा के चाचा वी.शांताराम थे | इस फिल्म के लिए नंदा को फिल्मफेर का नॉमिनेशन मिला था |
हिंदी फिल्मो की बहन नंदा
8 मार्च 1939 को जन्मी नंदा ने कई फिल्मो में नायिका की भूमिका अदा की , लेकिन कुछ प्रारम्भिक फिल्मो में उन पर बहन का ठप्पा लगा दिया | “तूफ़ान और दिया ” का जिक्र उपर किया जा चूका है | एल.वी.प्रसाद की 1959 में प्रदर्शित फिल्म “छोटी बहन ” से नंदा हिंदी फिल्मो की छोटी बहन के तौर पर विख्यात हो गयी थी | इस फिल्म में नंदा ने दो बड़े भाइयो की अंधी छोटी बहन का किरदार निभाया था | इन फिल्मो में नंदा पर बहन का ठप्पा लगा दिया होता अगर उन्हें “हम दोनों” और “तीन देवियाँ” की सपोर्टिंग भूमिका के बाद “कानून ” और “चाहरदीवारी” में नायिका की भूमिका न मिल गयी होती | “चाहरदीवारी” के लिए उन्हें सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्म्फेयर अवार्ड भी मिला था |
वहीदा बनी बहन
1962 में रिलीज़ भीम सिंह की फिल्म “राखी ” में अशोक कुमार और वहीदा रहमान अनाथ भाई-बहन बने थे जो अपनी मेहनत से अमीर बन जाते है लेकिन शादी के बाद भाई को बहन से काफी दूर जाना पड़ता है | लम्बे अरसे के बाद भाई रक्षाबंधन के दिन वापस आता है | बहन उसे राखी बांधती है | इस फिल्म का अंत दोनों के मरने से होता है | इस फिल्म के बाद अशोक कुमार ने वहीदा ररहमान को अपनी बहन मान लिया था और वह आजीवन वहीदा रहमान से राखी बंधवाते रहे |
पॉपुलर राखी गीत
फिल्म “छोटी बहन ” का नंदा पर फिल्माया गया “भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना ” गीत आज भी राखी के दौरान बजता है | इसी प्रकार “राखी ” फिल्म का “राखी धागों का त्यौहार ” भी लोकप्रिय गीतों में शुमार है | “तूफ़ान और दिया ” का “मेरी छोटी बहन” गीत भी काफी लोकप्रिय है | “अनपढ़” फिल्म की नायिका माला सिन्हा “रंग बिरंगी राखी लेकर आया है त्यौहार ” गीत पर नाचते दिखाई गयी थी | “रेशम की डोरी से ” में धर्मेन्द्र को राखी बांधते हुए कुमुद छुगानी “बहना ने भाई की कलाई में प्यार बाँधा है ” गीत गाती है |
देव आनन्द की 1971 में रिलीज़ सुपरहिट फिल्म “हरे रामा हरे कृष्णा ” में देव आनंद का बचपन का किरदार (अभिनेता सत्यजीत ) अपनी छोटी बहन (बेबी गुड्डू ) को मनाने के लिए “फूलो का तारो का सबका कहना है ” गाता है | इसी गीत को देव आनन्द भी जीनत अमान को अपने बचपन की याद दिलाने के लिए गाते है | फिल्म “काजल ” में अभिनेत्री मीना कुमारी अपने भाई शैलेश कुमार को राखी बांधते हुए “मेरे भैया मेरे चंदा ” गीत गाती है | यह गीत पॉपुलर राखी गीतों में शुमार है | राजेश खन्ना की दोहरी भूमिका वाली फिल्म “सच्चा झूठा” में बाजावाला बने राजेश खन्ना अपनी बहन नजीम के लिए “मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया ” गीत पर गाते हुए ठुमका लगाते है |
पसंद नही आये भाई-बहन
आम तौर पर हिंदी दर्शक भाई-बहन वाले फिल्म पसंद करता है लेकिन कभी दर्शक ऐसी जोडियो को नकारते ही है ,फिल्मे फ्लॉप कर देते है | मंसूर खान की फिल्म “जोश ” एक ऐसी ही फिल्म थी | इस फिल्म में शाहरुख खान और ऐश्वर्या की जोड़ी भाई-बहन बनी थी | दर्शको ने इस जोड़े को कुछ इस कदर नकारा कि खुद शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय की हिम्मत भाई-बहन बनने की नही हुयी | हाल ही में रिलीज़ हुयी फिल्म “सरबजीत” में भी ऐश्वर्या ने रणदीप हुड्डा की बहन का किरदार निभाया था जो बॉक्स ऑफिस पर तो फेल हो गयी थी लेकिन क्रिटिक्स ने सराहना की थी | इसी प्रकार खालिद मोहम्मद की फिल्म “फिजा ” में ऋतिक रोशन की करिश्मा कपूर के साथ बनी भाई-बहन की जोड़ी नकार दी गयी और फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुयी |
त्याग और बलिदान के प्रतीक
हिंदी फिल्मो में भाई-बहन त्याग और बलिदान के प्रतीक है | फिल्म “रेशम की डोरी ” और “गर्व” में भाई अपनी के बलात्कारी की हत्या कर देता है | फिल्म “तूफ़ान ” और “दिया” का भाई अपनी बहन की शादी के लिए मजदूरी करता है | “दिल धडकने दो” का भाई रणवीर सिंह बहन प्रियंका चोपड़ा को बुरे पति से तलाक लेने के लिए सपोर्ट करता है जबकि बहन भाई को उसका प्यार अनुष्का शर्मा को पाने के लिए प्रेरित करती है | हाल ही में रिलीज़ फिल्म “धनक ” में भाई-बहन के रिश्ते को बहुत सुंदर तरीके से दर्शाया है जिसमे एक बहन अपने अंधे भाई के साथ लम्बा सफर तय करती है |
“हम साथ साथ है “के तीन भाई सलमान खान , सैफ अली खान और मोहनीश बहल अपनी बहन नीलम कोठारी के लिए कुछ भी कर गुजरते है | “माय ब्रदर निखिल” में जूही चावला का किरदार अपने एड्स पीड़ित भाई संजय सुरी को सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष करता है | “प्रेम रतन धन पायो ” में सलमान खान अपनी बहन की खुशी के लिए सारी सम्पति उसके नाम कर देता है | इस तरह कई हिंदी हिंदी फिल्मो में भाई-बहन के रिश्ते को त्याग और बलिदान का प्रतीक बताया है तो मित्रो राखी पर बनी आपकी पसंदीदा फिल्म कौनसी है ? आप हमे कमेंट के जरिये जरुर बताये |
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