Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2018

लोककथा - दो चालाक भाई | Lokkatha - Do Chalak Bhai

Lokkatha – Do Chalak Bhai एक राजा था | उसका मंत्री बड़ा चतुर था | मंत्री दो बेटे छोडकर स्वर्ग सिधार गया | बेटे अपने पिता जैसे चतुर चालाक थे | राजा ने उन्हें मंत्री बनाने की सोची लेकिन दरबार के कुछ लोगो ने उनके खिलाफ षडयंत्र रचा | राजा से कह दिया “इनके स्वर्गीय पिता ने हमसे साठ हजार रूपये कर्ज लिए थे” | इस पर नये मंत्री ने कहा कि जब तक ये लोग कर्ज न चूका दे , मंत्री का सम्मानजनक पद इन्हें देना ठीक नही | राजा ने मंत्री के बेटों को बुलाकर कर्ज के बारे में पूछा | लडके बोले “अन्नदाता ,हमे तो इसके बारे में कोई जानकारी नही है लेकिन जब नये मंत्री ने इसका दावा किया है तो हम जरुर अदा करेंगे” इसके बाद उन्होंने राजा से कोई नौकरी देने की प्रार्थना की | मंत्री उन्हें काम देने को तैयार हो गया , पर वह बहुत ही चालाक था | उसने एक को दरबान की नौकरी दी और दुसरे को बाग़ में माली बना दिया | दोनों भाइयो को जितनी तनख्वाह मिलती थी वह गुजारे के लिए कम पडती थी | कर्ज भुगतान करने के लिए उनके पास कुछ बचता ही नही था | यह हालत देखकर एक दिन दोनों भाइयो ने आपस में सलाह की और कुछ करने का निश्...

लोककथा - सिद्ध का प्रसाद | Lokatha - Siddh Ka Prasad

Lokatha – Siddh Ka Prasad लालपुर नामक शहर में एक राजा कौशलध्वज राज करता था | राजा के महल के पास एक डूंगरी थी | डूंगरी पर कोई आता जाता तो महल के रखवाले को दिखाई दे जाता था | बिना राजा के हुक्म के डूंगरी पर कोई जा नही सकता था | एक दिन राजा ने महल में जाते देखा कि डूंगरी पर आग जल रही है | राजा ने मंत्री को बुलाकर पूछा कि डूंगरी पर कौन है ? राजा से कोई हुक्म नही लिया गया था | राजा ने कहा कि मै खुद जाकर पता लगाऊंगा | राजा डूंगरी पर चढ़ गये और उपर जाकर देखा तो बाबा गोरखनाथ जी समाधि में बैठे है और बगल में मोटे मोटे लक्कड़ जल रहे है | राजा हाथ जोडकर एक पाँव पर खड़े हो गये | सेवा चाकरी की | गोरखनाथ जी ने पलक उठाया तो देखा राजा खड़ा है | गोरखनाथ जी बोले “राजा मांगो , मै तुम्हे क्या दु ?” राजा ने अरज की कि महाराज आपके प्रसाद से सब सुख की दौलत है परन्तु मेरे पुत्र नही है | आपकी कृपा दृष्टि हो जाए तो एक पुत्र का वरदान दीजिये | गोरखनाथ जी ने एक गुलाब की छड़ी राजा को दी और कहा कि राजा यह छड़ी रानी के सिरहाने रख देना , तुम्हारी इच्छा पुरी हो जायेगी | राजा ने यही किया | रानी की आशा बंध गयी औ...

Puri Tour Guide in Hindi | पुरी के प्रमुख पर्यटन स्थल

Puri Tour Guide in Hindi उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से करीब 60 किमी दूर समुद्र-तट पर स्थित पुरी (Puri) भारत का परम पावन तीर्थ स्थल है | यहाँ का जगन्नाथ मन्दिर विश्वविख्यात है | बारहों महीने में जगन्नाथ , बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं के दर्शनार्थ लाखो की संख्या में देश-विदेश से लोग यहाँ आते रहते है | पुरी (Puri) में गुजरते हुए समुद्र का दृश्य मन में ओजस्वी भावो का संचार करता है | यहाँ के घने जंगल शीशम , सखुआ , सागवान आदि कीमती लकडियो वाले वृक्षों से आच्छादित है | पहाडी क्षेत्र खनिज सम्पदा से परिपूर्ण है | लोहा , लौह पत्थर , कोयला , मैगनीज और बोक्साईट यहाँ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है | केपुझार और सुन्दरगढ़ में मैगनीज ; तालघर और रायपुर में कोयला ; सुंदरगढ़ ,केंचुअर और मयुरभंज में कोयला पाया जाता है | कागज , सीमेंट , अलुमिनियम , कांच ,चीनी और लोहे के बड़े बड़े कारखाने यहा है | राऊकरेला का इस्पात कारखाना विश्वप्रसिद्ध है | जगन्नाथ पुरी (Puri) की रथयात्रा विश्वप्रसिद्ध है | कहते है प्राचीनकाल में पुरी को पुरुषोत्तम क्षेत्र और श्री क्षेत्र भी कहा जाता था | ऐसी मान्यता है कि भगवान बुद्ध का यह...

Bhubaneswar Tour Guide in Hindi | भुवनेश्वर के प्रमुख पर्यटन स्थल

Bhubaneswar Tour Guide in Hindi स्थापत्य , वास्तुशिल्प और मूर्तिकला की उत्कृष्ट कलाकृतियो से सम्पन्न उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर (Bhubaneswar) भारत का एक अत्यंत समृद्ध एतेहासिक एवं सांस्कृतिक नगर है | प्राचीनकाल में यह कलिंग के नाम से जाना जाता था | नागर शैली में बने यहाँ के मन्दिर उत्कृष्ट वास्तुकला के नमूने है | यहाँ के सरोवर और झीले भी दर्शनीय है | पहले यहाँ कई हजार मन्दिर थे | आज भी यहाँ 500 से ज्यादा मन्दिर है | यहाँ का अप्रतिम सौन्दर्य पारम्परिकता में ही नही बल्कि प्राकृतिक दृश्यावलियो में भी रचा बसा है | वर्षा ऋतू को छोडकर कभी भी भुवनेश्वर (Bhubaneswar) का भ्रमण किया जा सकता है | भुवनेश्वर के प्रमुख दर्शनीय स्थल लिंगराज मन्दिर – भुवनेश्वर के इस विशाल मन्दिर को भुवनेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है | मन्दिर प्रांगण को चार मंडपों में बांटा गया है | मन्दिर की बाहरी दीवारों पर शिल्पकला के अद्भुद नमूने दर्शनीय है | सुंदर नक्काशी और कलात्मक मूर्तियों से दीवारे अलंकृत है | मन्दिर के अंदर ग्रेनाईट से बना एक विशाल शिवलिंग है | इस शिवलिंग के आधे भाग में विष्णु का रूप उत्कीर्ण है इसलिए इसे ...

Pythagoras Biography in Hindi | पायथोगोरस की जीवनी

Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म  ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...

मैडम मेरी क्युरी की जीवनी | Marie Curie Biography in Hindi

Marie Curie Biography in Hindi मादाम मैरी क्युरी (Marie Curie) का जन्म 7 नवम्बर 1867 को वारसा , पोलैंड में उन दिनों हुआ जब पश्चिमी देशो में महिलाओं को उच्च शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नही था | किन्तु मादाम ने भागीरथ प्रयास करके पुरुषो के समान उच्च शिक्षा ग्रहण की | इन्होने रेडियम का अविष्कार करके इतनी ख्याति अर्जित की कि जितनी शायद किसी अन्य महिला ने न की होगी | पोलैंड की राजधानी वारसा में जन्मी इस महिला का बाल्यकाल में नाम स्कलोदोवस्का था किन्तु बाल्यकाल में इनको मान्या नामा से पुकारा जाता था | कालान्तर में पियरे क्युरी नामक वैज्ञानिक से विवाह कर लेने के पश्चात वे मैडम क्युरी के नाम से विख्यात हुयी | मान्या के माता-पिता अध्यापक थे इसलिए इनका बाल्यकाल शिक्षा के वातावरण में ही व्यतीत हुआ था | 16 वर्ष की आयु में इन्होने हाईस्कूल उत्तीर्ण किया जिसमे असाधारण योग्यता का प्रदर्शन करने के लिए इनको स्वर्ण पदक प्रदान किया गया | मैरी (Marie Curie) चाहती थी कि वह विज्ञान विषय लेकर विश्वविद्यालय में अध्ययन करे किन्तु वारसा विश्वविद्यालय में उन दिनों महिला छात्रों को प्रवेश नही दिया जाता था | माता-...

Birbal Sahni Biography in Hindi | बीरबल साहनी की जीवनी

Birbal Sahni Biography in Hindi पूरा वनस्पति विज्ञानी बीरबल साहनी (Birbal Sahni) का जन्म 24 नवम्बर 1891 को शाहपुर जिले के भेडा गाँव (अब पाकिस्तान) में हुआ था | उनके पिता प्रो. रुचिराम साहनी सरकारी कॉलेज , लाहौर में रसायनशास्त्र के प्रोफेसर थे | भेड़ा आने से पूर्व इनके पूर्वज डेरा इस्माइल खा में रहते थे किसी कारणवश उन्हें अपनी पैतृक सम्पति छोडकर वहां से भेडा आना पड़ा था | इनके पिता तथा परिवार ब्रह्मसमाजी विचारों एक थे और इनके पिता रुचिराम साहनी स्वतंत्रता सेनानी भी थे | इन सबका प्रभाव बालक बीरबल साहनी पर भी पड़ा था | बीरबल साहनी (Birbal Sahni) की रूचि बाल्यकाल से ही पेड़-पौधों की ओर थी | पिता चाहते थे कि वह I.C.S. बनकर किसी सरकारी उच्च पद पर प्रतिष्टित हो , किन्तु बीरबल की रूचि विज्ञान में थी | बीरबल साहनी की शिक्षा लाहौर में हुयी और पंजाब विश्वविद्यालय में बी.एस.सी. उत्तीर्ण करने के उपरान्त सन 1918 में वे उच्च अध्ययन हेतु कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय इंग्लैंड में चले गये , जहां उन्होंने एमानुअल कॉलेज से ट्राईपोस उपाधि प्राप्त की और फिर प्रोफेसर एल्बर्ट चार्ल्स स्वीर्ड के मार्ग दर्शन में शोध कार...