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Bhubaneswar Tour Guide in Hindi | भुवनेश्वर के प्रमुख पर्यटन स्थल

Bhubaneswar Tour Guide in Hindi
Bhubaneswar Tour Guide in Hindi

स्थापत्य , वास्तुशिल्प और मूर्तिकला की उत्कृष्ट कलाकृतियो से सम्पन्न उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर (Bhubaneswar) भारत का एक अत्यंत समृद्ध एतेहासिक एवं सांस्कृतिक नगर है | प्राचीनकाल में यह कलिंग के नाम से जाना जाता था | नागर शैली में बने यहाँ के मन्दिर उत्कृष्ट वास्तुकला के नमूने है | यहाँ के सरोवर और झीले भी दर्शनीय है | पहले यहाँ कई हजार मन्दिर थे | आज भी यहाँ 500 से ज्यादा मन्दिर है | यहाँ का अप्रतिम सौन्दर्य पारम्परिकता में ही नही बल्कि प्राकृतिक दृश्यावलियो में भी रचा बसा है | वर्षा ऋतू को छोडकर कभी भी भुवनेश्वर (Bhubaneswar) का भ्रमण किया जा सकता है |

भुवनेश्वर के प्रमुख दर्शनीय स्थल

लिंगराज मन्दिर – भुवनेश्वर के इस विशाल मन्दिर को भुवनेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है | मन्दिर प्रांगण को चार मंडपों में बांटा गया है | मन्दिर की बाहरी दीवारों पर शिल्पकला के अद्भुद नमूने दर्शनीय है | सुंदर नक्काशी और कलात्मक मूर्तियों से दीवारे अलंकृत है | मन्दिर के अंदर ग्रेनाईट से बना एक विशाल शिवलिंग है | इस शिवलिंग के आधे भाग में विष्णु का रूप उत्कीर्ण है इसलिए इसे हरि-हरात्मक मन्दिर भी कहा जाता है | मन्दिर के सिंहद्वार पर गणेश , इसके आगे नन्दी स्तम्भ और मुख्य मन्दिर है | मन्दिर में लिंगराज का चपटा अनगढ़ श्रीविग्रह है इसे बुदबुद लिंग कहा जाता है | पिनाक (एक प्रकार का त्रिशूल) यहाँ का प्रधान आयुध है | मन्दिर के प्रांगण में अनेक छोटे मन्दिर है जिनमे भुवनेश्वरी और गौरी मन्दिर प्रमुख है | 108 फीट ऊँचे शिखरवाले इस मन्दिर का निर्माण ललारेंध केशरी द्वारा सन 617-657 में कराया गया था |
मुक्तेश्वर मन्दिर – प्रसिद्ध यात्री फर्गुसन ने इस मन्दिर को वास्तुकला का सर्वोत्कृष्ट नमूना कहा है | इस मन्दिर में उड़ते हुए गन्धर्व विमान और जगमोहन के अलावा हाथियों को रौंदते हुए सिंह , उछलते-कूदते बन्दर और बाघ के भय से भागते पीछे मुडकर देखते हुए हरिणों के कलात्मक दृश्य सजीव से लगते है |
ब्रह्मेश्वर मन्दिर – ब्रह्माकुंड के पास ब्र्ह्मवेश्वर मन्दिर भी कला की दृष्टिसे दर्शनीय है | मन्दिर में शिवजी की मुर्तिया है | पश्चिम में मरीचि कुंड है | इस मन्दिर का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है |
राजा-रानी मन्दिर – राजारणिया पत्थर से निर्मित यह मन्दिर भी शिल्पकला की दृष्टि से दर्शनीय है | यहाँ कोई मूर्ति नही है | पहले विष्णु जी की मूर्ति थी |
अनंत वासुदेव मन्दिर – बिंदु सरोवर के उपरी हिस्से में स्थित इस मन्दिर में सुभद्रा , नारायण और लक्ष्मी जी की मुर्तिया है | ये भुवनेश्वर के अधिष्टाता माने जाते है | कहा जाता है कि इन्ही की अनुमति से भगवान शंकर इस क्षेत्र में पधारे थे |
रामेश्वर मन्दिर – इसे गुडिया मन्दिर भी कहते है | इसमें शिवलिंग प्रतिष्टित है | जयेष्ट शुक्ल अष्टमी को लिंगराज जी का यात्रा रथ इसी मन्दिर तक आता है |
परशुरामेश्वर मन्दिर – लिंगराज जी मन्दिर से लगभग 1 किमी दूर यह मन्दिर भुवनेश्वर का प्राचीनतम मन्दिर है | इसकी भित्तिया इस शिल्पकला के अद्भुद नमूने देखने योग्य है | इसके पास ही नागेश्वर मन्दिर है | इस क्षेत्र में पांच पवित्र कुंड है | दुग्ध कुंड ,मुक्तेश्वर कुंड ,सिद्धेश्वर कुंड , और गौरी कुंड | दुग्ध कुंड में स्नान प्रतिबंधित है कुंड के पास ही केदारेश्वर , पार्वती , हनुमान आदि अनेक देवताओं के अन्दिर है |
बिंदुसागर झील – भुवनेश्वर की इस विशालतम झील के चारो ओर लगे पत्थरों से इसकी सुन्दरता ओर बढ़ गये है | 1300 फीट लम्बे और 700 फीट चौड़ी इस झील के आस-पास का दृश्य बड़ा ही मनोरम है |
शान्ति-स्तूप – भुवनेश्वर से 8 किमी दूर धौली पहाडी पर निर्मित शान्ति स्तूप के चारो ओर महात्मा बुद्ध की मुर्तिया है | यह स्तूप बौद्ध परम्परा की आधुनिक शिल्पकला का एक उत्कृष्ट नमूना है | इस पहाडी के पास ही वह मैदान है जहा कलिंग नरेश के साथ सम्राट अशोक का भीषण युद्ध हुआ था | इस युद्ध के बाद सम्राट अशोक को युद्ध से विरक्ति हो गयी और वह बौद्ध हो गया |
नन्दन कानन – 400 हेक्टेयर में फैले इस कानन में बंद गाड़ी में बैठकर मुक्त विचरण करते व्याघ्र तथा अन्य जीवो को देखा जा सकता है | यहाँ सफेद बाघों की नसले तैयार की जाती है | पार्क में एक खुबसुरत झील है | यहाँ बच्चो के मनोरजन के लिए बाल उद्यान भी है | वन विभाग द्वारा निर्मित बंगले में ठहरने की भी समुचित व्यवश्ता है |

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