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Showing posts from November, 2016

Jagadish Chandra Bose Biography in Hindi | जगदीश चन्द्र बोस , जिनको बचपन की जिज्ञासा ने बनाया वैज्ञानिक

Jagadish Chandra Bose Biography in Hindi जगदीश चन्द्र बोस , जिनको बचपन की जिज्ञासा ने बनाया वैज्ञानिक | Jagadish Chandra Bose Biography in Hindi कोई भी व्यक्ति ऐसे ही महान नही बन जाता है उस महानता तक पहुचने के लिए कठोर परिश्रम और एक ही विश्वास पर अडिग रहना पड़ता है | (Jagadish Chandra Bose ) जगदीश चन्द्र बोस भी ऐसे ही व्यक्ति थे उन्होंने कभी भी किसी भी समस्या से हार नही माना | आइये जानते है उनके जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग बोस का प्रारम्भिक जीवन | Early Life of Jagadish Chandra Bose सर जगदीश चन्द्र बोस (Jagadish Chandra Bose) का जन्म बंगाल के मुंशीगंज इलाके (वर्तमान में बांग्लादेश में स्थित ) में 30 नवम्बर 1858 को हुआ था | उनके पिता भगवान चन्द्र बोस फरीदपुर में डिप्टी मजिस्ट्रेट और ब्रह्म समाज के नेता थे | बोस ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा वेर्नाकुलर स्कूल में हुयी थी क्योंकि उनके पिता का मानना था कि अंग्रेजी सीखने से पहले किसी को भी अपनी मातृभाषा सीखनी चाहिए | बोस ने 1869 में “हरे स्कूल” में प्रवेश लिया और उसके बाद कोलकाता की सेंत ज़ेवियर स्कूल में आगे की पढाई की |बोस को बचपन से ह...

चे ग्वेरा - एक डॉक्टर के क्रांतिकारी बनने की कहानी | The Story of Che Guevara in Hindi

The Story of Che Guevara in Hindi चे ग्वेरा – एक डॉक्टर के क्रांतिकारी बनने की कहानी | The Story of Che Guevara in Hindi Che Guevara चे ग्वेरा एक ऐसा नाम है जिसको भारत में शायद कोई जनता न हो लेकिन उसके चित्र बनी हुयी टीशर्ट को भारत के लाखो युवा पहनते है | 50 और 60 के दशक में चे ग्वेरा वो शख्स है जिसने अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को चुनौती दे दी थी | युवाओं के हको की लड़ाई के लड़ने वाले चे ग्वेरा में अपना जीवन उनके लिए न्योछावर कर दिया था | आशा की किरण जगाने वाले Che Guevara चे ग्वेरा को आज पुरी दुनिया जानती है और उसके पोस्टर पुरी दुनिया में पहुचे जिन्होंने वर्तमान में टीशर्ट पर अपना आधिपत्य जमा लिया | चलो आज उसी क्रांतिकारी शख्स Che Guevara की जीवन के रोचक तथ्यों से आपको रुबुरु करवाते है | 01  चे ग्वेरा का असली नाम “अर्नेस्टो ग्वेरा दे ला सेरना लिंच “ इस युवा क्रान्तिकारी का असली नाम  “अर्नेस्टो ग्वेरा दे ला सेरना लिंच ” था तो आपके मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि तो उसके नाम के आगे “चे” शब्द कहा से आया | आइये आपको बताते है | अर्नेस्तो ग्वेरा का जन्...

महाभारत और दिल्ली के सुल्तान की मनोकामना Tenali Raman Story in Hindi

एक दिन राजा कृष्ण देव राय को दिल्ली के तत्कालीन सुल्तान आदिल शाह ने दो प्रान्तों के बीच चल रहे मसलो को सुलझाने के लिए बुलाया | अनावश्यक रक्तपात से बचने और शांति बहाल के लिए राजा कृष्ण देव राय अपने कवियों, नर्तको और  विद्वानों की टोली साथ लेकर दिल्ली पहुचे | आदिल शाह ने राजा का भव्य स्वागत किया  और वार्तालाप के सुखद दौर में कृष्ण देव राय के कवियों ने महाभारत के कुछ दृश्यों के बारे में सुनाया | आदिल शाह महाभारत महाकाव्य की बाते सुनकर काफी प्रभावित हुआ और उसने राजा कृष्ण देव से अपने आदमियों से , स्वयं और उसके मित्रो को पांडव और उसके दुश्मनों कोए कौरव बताकर . इस काव्य को फिर से लिखने की बात कही | राजा कृष्ण देव राय सुल्तान की ऐसी अजीब फरमाइश सुनकर दंग रह गया | वो अब चिंतित हो गया कि अगर उसके आदमी सुल्तान की फरमाइश को पूरा करने में असफल हो गये तो वो विजयनगर पर आक्रमण बोल सकता है | राजा को चिंतित देख तेनालीराम ने स्तिथि को सम्भालने का राजा को विश्वास दिलाया | राजा अब निश्चिंत था क्योंकि इस पेचीदा मसले से केवल तेनालीराम Tenali Raman  ही बचा सकता है इसलिए उसने तेनालीराम को सुल्तान से मिलने की ...

क्यूबाई क्रान्ति के जनक फिदेल क्रास्तो, जिन्होंने 638 बार मौत को मात दी | Fidel Castro Facts in Hindi

13 अगस्त 1926 को जन्मे Fidel Castro फिदेल क्रास्तो क्यूबा की क्रान्ति के जनक और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव थे | Fidel Castro कास्त्रो ने अपनी राजनितिक जीवन की शुरुवात अमेरिकी समर्थित फुल्गेशियो बतिस्ता शासन के खिलाफ आवाज उठान के साथ की | संयुक्त राज्य अमेरिका का क्यूबा के राष्ट्रहित में राजनितिक और कारपोरेट के प्रभाव के आलोचक के रूप में Fidel Castro कास्त्रो ने बतिस्ता का विरोध शुरू किया | Fidel Castro कास्त्रो ने आधी सदी तक महाशक्ति अमेरिका को चुनौती दी | इस दौरान अमेरिका के 11 राष्ट्रपति सत्ता में आकर चले गये लेकिन कास्त्रो सत्ता में बने रहे | 90 वर्ष की उम्र में 26 नवम्बर 2016 शनिवार को उनका निधन हो गया | फिदेल क्रास्तो का जीवन परिचय लॉ की पढाई के साथ राजनीति से जुड़े – क्यूबा के ओरिएंट प्रांत में एक धनी किसान के घर जन्मे | 1940 के दशक के मध्य में हवाना विश्वविद्यालय से लॉ की पढाई के समय ही Fidel Castro कास्त्रो राजीतिक कार्यकर्ता बने | जल्द ही वक्ता के रूप में पहचान बनाई | बतिस्ता के खिलाफ विफल विद्रोह 1953 – क्यूबा में तत्कालीन शासक फुल्गेरिया बतिस्ता के खिलाफ विफ...

भारत एक खोज टीवी सीरियल , जिसने हिंदुस्तान के इतिहास को पहली बार टीवी पर दिखाया | Bharat Ek Khoj TV Serial Memories in Hindi

भारत एक खोज टीवी सीरियल , जिसने हिंदुस्तान के इतिहास को पहली बार टीवी पर दिखाया | Bharat Ek Khoj TV Serial Memories in HindiBharat Ek Khoj भारत एक खोज , जवाहरलाल नेहरु की पुस्तक “The Discovery of India” पर आधारित है जिसमे भारत का पूरा इतिहास दर्शाया गया था | इस नाटक में आज से 5000 साल पहले के इतिहास से लेकर भारत की स्वतंत्रता तक के इतिहास को दिखाया गया है | इस नाटक का निर्माण और निर्देशन मशहूर फ़िल्मकार श्याम बेनेगल ने किया था | इस नाटक में मुख्य कलाकार ओम पुरी ,इरफ़ान खान . लकी अली , पियूष मिश्रा ,रोशन सेठ ,टॉम आल्टर और सदाशिव अमरापूरकर थे | जवाहरलाल नेहरु का किरदार रोशन सेठ ने निभाया था | Bharat Ek Khoj नाटक को बनाने में 144 सेट का पयोग किया गया था | भारत सरकार ने की थी इस सीरियल के निर्माण की पहल 80 के दशक में मध्य में छोटे पर्दे पर रामायण और महाभारत ने अनेको दर्शको को टीवी की ओर खींचा था | इनकी सफलता को देखते हुए भारत सरकार ने भारत के इतिहास को दर्शाने के लिए सोचना शुरू कर दिया | इसके लिए भारत सरकार के प्रतिनिधि सबसे पहले मशहूर फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल के पास पहुचे | श्याम बेनेगल ...

कहानी - बारह हो गये तेरह | Barah Ho Gaye Terah - Story in Hindi

एक बार एक गुरु अपने बारह चेलो के साथ तीर्थयात्रा पर निकला | अब न तो गुरु ज्ञानी था और न ही चेले इसलिए चेले आँख मूंदकर उसकी आज्ञा का पालन करते | चलते चलते दिन ढला और सामने पुरे वेग से बहती एक नदी नजर आयी | गुरु ने अपनी छड़ी की दीवार बनाते हुए चेलो को पीछे करते हुए कहा “रुको ! इस नदी में बच कर चलना है न जाने कितने लापर\वाह लोगो को इसने अपने पेट में समाया है | हो सकता है कि अब हमारी बारी हो लेकिन तुम सब डरो नही , तुम्हारे साथ तुम्हारा गुरु है गुरु का ज्ञान बड़ा भारी होता है | उसी ज्ञान के आधार पर कहता हु कि नदी अभी जाग रही है | जब तक वह सो नही जाती हमे कुछ समय के लिए विश्राम करना चाहिए ” | गूर की आज्ञा सिर-माथे | चेले विश्राम की तैयारी करने लगे | चेलो ने अलाव जलाया | भोजन बनाने की जोर शोर से तैयारिया होने लगी | जब भोजन बन गया तो गुरु ने चेलो के साथ पेट पूजा की और भोजन उपरान्त अपनी तोंद को थपथपाते एक चेले को बुलाकर कहा “अलाव से एक जलती लकड़ी ले जाओ | उस लकड़ी को नदी से छुआ कर देखो कि वह अभी तक जाग रही है अथवा सोयी है ” | चेलें ने गूर का कहा किया लेकिन जैसे ही अलाव की लकड़ी नदी के ठंडे पानी में ...

भारत के महान वैज्ञानिक , जिन्होंने विश्व में हिन्दुस्तान का परचम फहराया | Great Indian Scientists Biographies in Hindi

Great Indian Scientists Biographies in Hindi जगदीश चन्द्र बसु (Jagdish Chandra Basu) 30 नवम्बर 1858 को मयरागंज (वर्तमान में बांग्लादेश में ) में जन्म हुआ | 1885 में कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में व्याख्याता के रूप में चयन हुआ किन्तु भारतीय होने के कारण इनका वेतन यूरोपीयन व्याख्याताओ की तुलना में आधा ही निर्धारित हुआ | इन्होने पद स्वीकार कर लिया किन्तु वेतन स्वीकार नही किया | तीन वर्षो बाद इनकी प्रखर बुद्धि का लोहा मानते हुए इन्हें पूरा वेतन दिलवाया | 10 मई 1901 को रॉयल सोसाइटी के वैज्ञानिकों के सम्मुख अपना शोध पत्र पढ़ा तथा प्रयोग द्वारा सर्व प्रथम सिद्ध किया कि पौधों में जीवन होता है | बेतार का तार का भी इन्होने सर्वप्रथम अविष्कार किया किन्तु इसका श्रेय एक साल बाद मार्कोनी को मिला | माइक्रो\वेव बनाने का श्रेय भी इन्ही को है | इनके द्वारा बनाया गया यंत्र आज भी अनेक इलेक्ट्रॉनिक तथा न्यूक्लीयर यंत्रो में आवश्यक पुर्जो के रूप में प्रयोग किये जाते है | इनका सर्वोत्तम अविष्कार “केस्कोग्राफ” नामक यंत्र है जो पेड़ पौधों की बढत को नाप सकता है | इन्होने कलकत्ता में वैज्ञानिक अनुसन्ध...

हम लोग धारावाहिक , जिसने 80 के दशक में जीता हिंदुस्तान का दिल | Hum Log TV Serial Memories in Hindi - Character and Cast

हम लोग धारावाहिक , जिसने 80 के दशक में जीता हिंदुस्तान का दिल | Hum Log TV Serial Memories in Hindi – Character and CastHum Log हम लोग भारतीय टीवी पर प्रसारित होने वाला पहला धारावाहिक और पहली नाटक श्रृंखला थी जो दूरदर्शन पर राष्ट्रीय प्रसारण के रूप में 7 जुलाई 1984 से प्रारम्भ हुयी थी | उस समय दूरदर्शन एकमात्र टीवी चैनल हुआ करता था | Hum Log “हम लोग” को पहला धारावाहिक इसलिए कहते है क्योंकि इससे पहले भी कुछ शो आते थे लेकिन उनका प्रसारण क्षेत्रीय था जैसे मुंबई ,दिल्ली या कलकत्ता केंद्र हुआ करता था | Hum Log “हम लोग” धारावाहिक को पहली बार पुरे देश में एक साथ दिखाया गया था | इस धारावाहिक की कहानी 1980 के दशक के एक मध्यमवर्गीय परिवार की है जो अपने जीवन में दैनिक कठिनाइयो और महत्वाकांक्षी जरुरतो से झुझते रहते थे | मेक्सिकन टीवी सीरियल से प्रेरित था “हम लोग” इस धारावाहिक का कांसेप्ट एक मेक्सिकन टीवी सीरियल से लिया गया था जिसे उस समय के सूचना एवं प्रसारण मंत्री वंसत साठे को मेक्सिकन ट्रिप के दौरान विचार आया था | भारत आते ही उन्होंने लेखक मनोहर श्याम जोशी को इस नाटक...

Sher Shah Suri History in Hindi | शेरशाह सुरी का इतिहास

Sher Shah Suri History in Hindi | शेरशाह सुरी का इतिहास शेरशाह सुरी (Sher Shah Suri ) का नाम इतिहास में सम्मान से लिया जाता है क्योंकि भारत पर राज करने वाले विदेशी शाशको में से शेरशाह सुरी (Sher Shah Suri ) उन अच्छे शाषको में गिना जाता है जिसने भारतवर्ष को एकसुत्र  में बाँधने का प्रयास किया था | शेरशाह सुरी वही शासक है जिसने पांच साल के लिए मुगलों से उनकी हुकुमत छीन ली थी जब मुगल काल चरम सीमा पर थी | सुरी के शाशनकाल में नागरिक सुविधाओ और यातायात के साधनों का काफी विकास हुआ था जिसके कारण विदेशी शाषक होने के बावजूद उसे जनता का स्नेह प्राप्त था | Sher Shah Suri शेरशाह सुरी अपनी वीरता , अदम्य साहस और परिश्रम के बल पर दिल्ली के सिंहासन पर कब्जा जमाने में सफल हुआ था | आइये आज हम आपको उसी दूरदर्शी और कुशल शाषक शेरशाह सुरी की जीवनी से रूबरू करवाते है | शेरशाह सुरी का प्रारम्भिक जीवन सुल्तान बहलोल के शाषनकाल में Sher Shah Suri शेर शाह सुरी के दादा इब्राहीम खान सुरी अपने पुत्र हसन खा सुरी के साथ अफ़घानिसतान से भारत आये थे | इनके पिता हसन खा जौनपुर राज्य के अंतर्गत सासाराम के जमींदार थे |  शेर शाह...

Aurangzeb History in Hindi | औरंगजेब का इतिहास एवं जीवनी

Aurangzeb History in Hindi | औरंगजेब , जिसने अपनी कट्टर नीतियों से किया मुगल साम्राज्य का अंत औरंगजेब (Aurangzeb), जिसका पूरा नाम अबुल मुजफ्फर मुहिनुदीन मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर था , मुगल साम्राज्य का छठा और अंतिम प्रभावी शासक था उसने 1658 से लेकर अपनी 1707 में अपनी मौत तक हिंदुस्तान के बड़े हिस्से पर 49 वर्ष तक शासन किया था |  औरंगजेब (Aurangzeb) ने अपने शासनकाल में मुगल साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार किया था | उसने अपने जीवन में 3.2 मिलियन वर्ग किमी के हिस्से के 100-150 मिलियन लोगो पर शासन किया था | औरंगजेब को अपनी धार्मिक असहिष्णुता वाली नीतियों के कारण विद्रोहों का सामना करना पड़ा , जो उसकी मौत के बाद इतना बढ़ गया कि धीरे धीरे मुगल साम्राज्य का पतन हो गया | आइये आपको आज औरंगजेब (Aurangzeb) की सम्पूर्ण जीवनी से रुबुरु करवाते है | बचपन में ही किया अपनी बहादुरी का प्रदर्शन | Early Life of Aurangzeb in Hindi औरंगजेब (Aurangzeb) का जन्म 4 नवम्बर 1618 में गुजरात के दाहोद जिले में हुआ | वो शाहजहा की छठी सन्तान और तीसरा पुत्र था | उनके पिता उस समय गुजरात के शाषक थे | 1626 में उनके पिता शाहजहा के...

Maharaja Ranjit Singh History in Hindi | महाराजा रणजीत सिंह , जिन्होंने फैलायी थी सिख साम्राज्य की विजयी पताका

Maharaja Ranjit Singh History in Hindi | महाराजा रणजीत सिंह , जिन्होंने फैलायी थी सिख साम्राज्य की विजयी पताका रणजीत सिंह का प्रारम्भिक जीवन रणजीत सिंह (Maharaja Ranjit Singh) का जन्म 13 नवम्बर 1780 को गुंजारवाला में हुआ था | उनके पिता महासिंह सुकरचकिया मिसल के सरदार थे | रणजीत सिंह की माता का नाम राजकौर था | बचपन में ही उनको चेचक हो गया था जिसके कारण उनकी बायी आँख की रोशनी चली गयी थी |उनकी शिक्षा की कोई व्यवस्था नही हो सकी जिसके कारण वो अनपढ़ ही रहे थे | रणजीत सिंह घुडसवारी , तलवार चलाने एवं युद्ध विद्या में निपुण थे | 10 साल की उम्र से ही उन्होंने अपने पिता के साथ सैनिक अभियानों में जाना शूरू कर दिया था | 13 साल की उम्र में ही उन पर पहली बार हत्या का प्रयास किया गया , जिसमे हशमत खा ने उनको मारने की कोशिश की लेकिन रणजीत सिंह (Maharaja Ranjit Singh )ने बचाव करते हुए उसे ही मौत की नींद सुला दिया | 1792 में उनके पिता महासिंह की मृत्यु हो गयी और छोटी आयु में ही वो मिसल के सरदार बन गये | 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह महतबा कौर नामक कन्या से किया | अपनी सास सदाकौर के प्रोत्साहन पर उन्होंने र...

मौर्य वंश , जिन्होंने अखंड भारत का सपना किया था पूर्ण | Maurya Empire and Maurya Rulers History in Hindi

मौर्य वंश , जिन्होंने अखंड भारत का सपना किया था पूर्ण | Maurya Empire and Maurya Rulers History in Hindi Chandragupta Maurya History and Facts in Hindi मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ईस्वी पूर्व हुआ था | विशाखदत्त कृत मुद्राराक्षस में चन्द्रगुप्त मौर्य के लिए वृषल (निम्न कुल में उत्त्पन्न) शब्द का प्रयोग किया था | घनानंद को हराने के लिए चाणक्य ने चंदगुप्त मौर्य की मदद की थी जो बाद में चन्द्रगुप्त का प्रधानमंत्री बना | नन्द वंश का विनाश करने में चन्द्रगुप्त ने कश्मीर के राजा प्रवर्तक से सहायता प्राप्त की थी | चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना में लगभग 50000 अश्वारोही सैनिक , 9000 हाथी और 8000 रथ थे | चन्द्रगुप्त ने नंदों के  पैदल सेना से तीन गुनी अधिक संख्या में अर्थात 60000 सैनिको को लेकर सम्पूर्ण उत्तर भारत को रौंद डाला था | चन्द्रगुप्त मगध की राजगद्दी पर 322 ईसा पूर्व में बैठा | चन्द्रगुप्त जैन धर्म का अनुयायी था | चन्द्रगुप्त ने 305 ईस्वी में सिकन्दर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर को हराया था | सेल्यूकस ने अपने बेटी कार्नेलिया की शादी चन्द्रगुप्त से करवा दी | युद्ध की संधि ...

लोदी वंश , जिनको हराकर मुगलों ने किया हिंदुस्तान पर राज | Lodi Dynasty History in Hindi

Lodi Dynasty History in Hindi लोदी वंश , जिनको हराकर मुगलों ने किया हिंदुस्तान पर राज | Lodi Dynasty History in Hindi Lodi Dynasty लोदी वंश एक पश्तो वंश था जिसने 1451 से लेकर 1526 तक दिल्ली सल्तनत Delhi Sultanate पर राज किया था | Lodi Dynasty लोदी वंश की स्थापना बहलोल लोदी ने की थी जिसने सैय्यद वंश के स्थान पर उत्तरी भारत के साम्राज्य पर राज किया था | Lodi Dynasty लोदी वंश का अंत इब्राहिम लोदी के साथ हुआ था जिसने राणा सांगा के खिलाफ युद्ध में मात खाई थी और पानीपत के प्रथम युद्ध में उसकी मौत के बाद उत्तरी भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना हुयी | बहलोल लोदी ने रखी लोदी वंश की नीव | Bahlul Lodi History in Hindi Bahlul Lodi बहलोल लोदी मुल्तान (वर्तमान पाकिस्तान) के एक पश्तो जनजाति से आया था | Bahlul Lodi  बहलोल लोदी सिरहिन्द पंजाब के शासक मालिक सुल्तान शाह का भतीजा और दामाद था | वो सैय्यद वंश के मुहम्मद शाह के शासन के दौरान ही सिरहिन्द का शासक नियुक्त कर दिया गया | मुहम्मद शाह ने उसे अमीर का दर्जा दिया था | वो पंजाब के मंत्रियों में सबसे ज्यादा शक्तिशाली और उग्र नेता था | उसने अपने प्रदेश...

Mahmud of Ghazni History in Hindi | महमूद गजनवी , जिसने 17 बार भारत में मचाई लुट लेकिन किया नही कभी राज

Mahmud of Ghazni History in Hindi | महमूद गजनवी का इतिहास महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni)  , गजनी सामराज्य का सबसे शक्तिशाली शासक था जिसने तत्कालीन भारत उपमहाद्वीप में आने वाले उत्तर पश्चिम इलाके (वर्तमान अफगानिस्तान और पाकिस्तान) पर अपनी मौत तक शासन किया था | महमूद ने भारत में आकर जमकर पैसा लुटा और अपने साम्राज्य को धनी बनाया था | महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) पहला शासक था जिसे सुल्तान की उपाधि दी गयी थी | अपने शासन के दौरान उसने हिंदुस्तान के कई हिस्सों पर आक्रमण किया और लूटपाट मचाई थी | महमूद गजनवी का प्रारम्भिक जीवन | Early Life of Mahmud of Ghazni महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) का जन्म वर्तमान दक्षिणपूर्व अफगानिस्तान के गजना जिले में 02 नवम्बर 971 ईस्वी में हुआ था | उसके पिता सबुक्तगिन एक तुर्की मामलुक था जिसने गजनी साम्राज्य की नींव रखी थी | उसकी माँ एक ज़बुलिस्तान के एक कुलीन परिवार की बेटी थी | 994 ईस्वी से वो अपने पिता के साथ युद्ध अभियानों में लग गया था और 998 ईस्वी ने गजनी का युद्ध जीतकर अपने पिता की सत्ता सम्भाल ली | वहा से वो कांधार के हिस्से को हराने को जीतने के लिए आगे बढ़...

गुलाम वंश , जिन्होंने हिंदुस्तान में रखी मुस्लिम दिल्ली सल्तनत की नींव | Slave Dynasty Rulers History in Hindi

Slave-Dynasty-Rulers-History-in-Hindi कुतुबुदीन ऐबक , मुहम्मद गौरी का गुलाम था | उसने भारत में जिस राजवंश की स्थापना की उसे गुलाम वंश Slave Dynasty कहते है | इस Slave Dynasty वंश ने 1206 से 1290 ईस्वी तक 84 साल तक राज किया | इस काल में कुतुबद्दीन एबक ने दिल्ली में नष्ट किये गये हिन्दू मन्दिरों के खंडहरो से प्रसिद्ध कुतुबमीनार का निर्माण किया | इसी काल में उसकी पुत्री प्रथम महिला शासक रजिया सुल्ताना ने भी शासन किया | इस Slave Dynasty काल का अन्य महत्वपूर्ण शासक बलबन था जिसने साम्राज्य को संगठित किया ,प्रशाशनिक ढांचा तैयार किया विजये की | बलबन के कमजोर उत्तराधिकारी राज्य को आगे न चला सके और सल्तनत में अराजकता फ़ैल गयी | आइये अब आपको गुलाम वंश Slave Dynasty के सभी सुल्तानों  के बारे में विस्तार से बताते है | कुतुबद्दीन ऐबक ने रखी गुलाम वंश की नीव | Qutubuddin Aibak History in Hindi Slave Dynasty गुलाम वंश का पहला शासक कुतुबद्दीन ऐबक था जिसे पहले बार सुल्तान की उपाधि से नवाजा गया था | Qutubuddin Aibak कुतुबद्दीन ऐबक ने 1206 ईस्वी से 1210 ईस्वी तक राज किया था | कुतुबुद्दीन का जन्म तुर्किस्ता...