बछबारस पूजन विधि और कहानी Bach Baras Pooja Vidhi and Story in Hindiमित्रो आज बछ बारस Bach Baras है जो हिन्दू धर्म में गाय और बछड़े के महत्व को समझाता है | बछ बारस प्रतिवर्ष जन्माष्टमी के चार दिन पश्चात भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की द्वादशी के दिन मनाया जाता है इसलिए इस गोवत्स द्वादशी भी कहते है | भगवान कृष्ण के गाय और बछड़ो से बड़ा प्रेम था इसलिए इस त्यौहार को मनाया जाता है और ऐसा माना जाता है की बछ बारस के दिन गाय और बछड़ो की पूजा करने से भगवान कृष्ण सहित गाय में निवास करने वाले सैकड़ो देवताओ का आशीर्वाद मिलता है जिससे घर में खुशहाली और सम्पन्नता आती है | Bach Baras बछबारस का पर्व राजस्थानी महिलाओं में ज्यादा लोकप्रिय है |
Bach Baras बछबारस के दिन विवाहित महिलाये पुत्र प्राप्ति और मंगल कामना के लिए व्रत करती है | इस दिन अंकुरित चने , मटर ,मुंग आदि का सेवन किया जाता है | इस दिन गाय का दूध और उससे बनी वस्तुओ का सेवन नही करना चाहिए | इस दिन गेहू का उपयोग नही करना चाहिए और साथ ही कटी हुयी सब्जियों और फ्लो को भी नही खाना चाहिए | इस दिन गायो और बछड़ो की पूजा की जाती है | अब हम आपको Bach Baras बछबरस पूजन विधि और Bach Baras बछबारस से जुडी कथा के बारे में विस्तार से बताते है |
पूजन की सामग्री और पूजा की विधि Bach Baras Pooja Vidhi in Hindi
पूजा के लिए भैंस का दूध और दही , भीगा हुआ चना और मोठ ले | मोठ-बाजरे में घी और चीनी मिलाये | गाय के रोली का टीका लगाकर चावल के स्थान पर बाजरा लगाये | बायने के लिए एक कटोरी में भीगा हुआ चना , मोठ ,बाजरा और रुपया रखे | इस दिन बछड़े वाले गाय की पूजा की जाती है यदि गाय की पूजा नही कर सकते तो एक पाटे पर मिटटी से बछबारस बनाते है और उसके बीच में एक गोल मिटटी की बावडी बनाते है | फिर उसको थोडा दूध दही से भर देते है | फिर सब चीजे चढाकर पूजा करते है | इसके बाद रोली ,दक्षिण चढाते है |स्वयम को तिलक निकालते है | हाथ में मोठ और बाजरे के दाने को लेकर कहानी सुनाते है | Bach Baras बछबारस के चित्र की पूजा भी की जा सकती है |
बछबारस की कहानी Bach Baras Story in Hindi
बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक साहूकार अपने सात बेटो और पोतो के साथ रहता था | उस साहूकार ने गाँव में एक तालाब बनवाया था लेकिन बारह सालो तक वो तालाब नही भरा था | तालाब नही भरने का कारण पूछने के लिए उसने पंडितो को बुलाया | पंडितो ने कहा कि इसमें पानी तभी भरेगा जब तुम या तो अपने बड़े बेटे या अपने बड़े पोते की बलि दोगे | तब साहूकार ने अपने बड़ी बहु को तो पीहर भेज दिया और पीछे से अपने बड़े पोते की बलि दे दी | इतने में गरजते बरसते बादल आये और तालाब पूरा भर गया |
इसके बाद बछबारस आयी और सभी ने कहा की “अपना तालाब पूरा भर गया है इसकी पूजा करने चलो” | साहूकार अपने परिवार के साथ तालाब की पूजा करने गया |वह दासी से बोल गया था की गेहुला को पका लेना | गेहुला से तात्पर्य गेहू के धान से है | दासी समझ नही पाई | दरअसल गेहुला गाय के बछड़े का नाम था | उसने गेहुला को ही पका लिया | बड़े बेटे की पत्नी भी पीहर से तालाब पूजने आ गयी थी | तालाब पूजने के बाद वह अपने बच्चो से प्यार करने लगी तभी उसने बड़े बेटे के बारे में पुछा|
तभी तालाब में से मिटटी में लिपटा हुआ उसका बड़ा बेटा निकला और बोला की माँ मुझे भी तो प्यार करो | तब सास बहु एक दुसरे को देखने लगी | सास ने बहु को बलि देने वाली सारी बात बता दी | फिर सास ने कहा की बछबारस माता ने हमारी लाज रख ली और हमारा बच्चा वापस दे दिया | तालाब की पूजा करने के बाद जब वह वापस घर लौटे तो उन्होंने देखा बछड़ा नही था | साहूकार ने दासी से पूछा की बछड़ा कहा है तो दासी ने कहा कि “आपने ही तो उसे पकाने को कहा था” |
साहूकार ने कहा की “एक पाप तो अभी उतरा ही है तुमने दूसरा पाप कर दिया “| साहूकार ने पका हुआ बछड़ा मिटटी में दबा दिया | शाम को गाय वापस लौटी तो वह अपने बछड़े को ढूंढने लगी और फिर मिटटी खोदने लगी | तभी मिटटी में से बछड़ा निकल गया | साहूकार को पता चला तो वह भी बछड़े को देखने गया | उसने देखा कि बछडा गाय का दूध पीने में व्यस्त था | तब साहूकार ने पुरे गाँव में यह बात फैलाई कि हर बेटे की माँ को बछबारस का व्रत करना चाहिए और तालाब पूजना चाहिए |
हे बछबारस माता ! जैसा साहूकार की बहु को दिया वैसा हमे भी देना | कहानी कहते सुनते ही सभी की मनोकामना पूर्ण करना |
इसके बाद गणेश जी की कहानी कहे |
बायना निकालना
एक कटोरी मोंठ ,बाजरा रखकर उसके उपर रुपया रख देवे | इनको रोली और चावल से छींटा देवे | दोनों हाथ जोडकर कटोरी को पल्ले से ढककर चार बार कटोरी के उपर हाथ फेर ले |फिर स्वयम के तिलक निकाले | यह बायना सांस को पाँव छुकर देवे | बछबारस के दिन बेटे की माँ बाजरे की ठंडी रोटी खाती है | इस दिन भैंस का दूध ,बेसन ,मोंठ आदि खा सकते है | इस दिन गाय का दूध , दही ,गेहू और चावल नही खाया जाता है |
उद्यापन
जिस साल लड़का हो या जिस साल लडके की शादी हो उस साल बछबारस का उद्यापन किया जाता है | सारी पूजा हर वर्ष की तरह करे | सिर्फ थाली में सवा सेर भीगे मोठ बाजरा की तरह कुद्दी करे | दो दो मुट्ठी मोई का (बाजरे की आटे में घी ,चीनी मिलाकर पानी में गूँथ ले ) और दो दो टुकड़े खीरे के तेरह कुडी पर रखे | इसके उपर एक तीयल (दो साडीया और ब्लाउज पीस ) और रुपया रखकर हाथ फेरकर सास को छुकर दे | इस तरह Bach Baras बछबारस का उद्यापन पूरा होता है |

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