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तानाशाह ईदी अमीन ,जिसने युगांडा के 1 लाख निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतारा था Idi Amin Biography in Hindi

तानाशाह ईदी अमीन ,जिसने युगांडा के 1 लाख निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतारा था Idi Amin Biography in Hindi
तानाशाह ईदी अमीन ,जिसने युगांडा के 1 लाख निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतारा था Idi Amin Biography in Hindi

मित्रो अब तक तानशाही की मामले में हम केवल हिटलर और मुसोलिनी जैसे क्रूर शाशको का नाम सुनते आये है लेकिन 20 सदी के अंत में Idi Amin ईदी अमीन भी उन्ही क्रूर तानाशाहो की श्रेणी में शामिल हो गया जिसने सत्ता के लिए युगांडा के 1 लाख से ज्यादा निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतारा था | Idi Amin ईदी अमीन को “अमीन दादा ” , “बुचर ओर अफ्रीका ” और “ब्रिटिश साम्राज्य के विजेता” जैसे नामो से पुकारा जाता रहा है जो कि उसकी तानशाही को प्रमाणित करते है | आइये आज हम आपको विश्व के बदनाम कातिलो में शामिल Idi Amin ईदी अमीन की जीवनी से रूबरू करवाते है कि किस तरह उसने क्रूरता का रुख अपनाया था |

ईदी अमीन का प्रारम्भिक जीवन

Idi Amin ईदी अमीन का जन्म युगांडा के उत्तर पश्चिमी कोने में स्तिथ काकवा अरुयो के पास कोबोको में हुआ था | उसका जन्म सन 1923 से सन 1925 के मध्य माना जाता है |  ईदी अमीन के पिता किसान थे और इस्लाम का अनुयायी थे और उसकी माँ लुग्बारा जनजाति की सदस्या थी | अमीन के छोटे भाई का दावा है कि उसके बड़े भाई ईदी अमीन का जन्म युगांडा की राजधानी कम्पाला में हुआ था और उनके पिता वहा पुलिस में नौकरी करते थे |
Idi Amin ईदी अमीन अपने जन्म के बाद से ही संयुक्त परिवार के वातावरण से अलग हो गया | अमीन की माँ किंग्स ऑफ़ अफ्रीकन राइफल्स की अनुयायी बन गयी थी तथा उसने दुसरे संबधो से अन्य बच्चो को भी जन्म दिया | ईदी अमीन आठ भाई-बहनों में तीसरे नम्बर पर था | ईदी अमीन ने प्रारम्भिक शिक्षा ही प्राप्त की थी परन्तु वह खेलकूद में अव्वल था | ऐसा माना जाता है कि बहुत छोटी उम्र में वह इस्लाम में धर्मान्तरित हो गया था |

Colonial British Army

सन 1894 में युगांडा को ब्रिटिश सरकार ने संरक्षित देश घोषित कर दिया था | सन 1914 में आस पास के राज्यों की सीमा तय होने के पश्चात 9 अक्टूबर 1962 को युगांडा स्वतंत्र देश बन गया किन्तु देश के विभिन्न जातीय समूहों के परस्पर तनाव की स्तिथि को देखते हुए प्रधानमंत्री मिल्टन ओबोट ने एक नये सविधान की स्थापना करके स्वयं को अध्यक्ष घोषित कर दिया | परन्तु जातीय तनाव निरंतर बढ़ता रहा और इस सीमा तक पहुचा कि युगांडा में तख्तापलट हो गया | इस तख्ता पलट के बाद ईदी अमीन सत्ता पर काबिज हुआ |
सन 1946 में उसने “किंग्स अफ़्रीकी राइफल्स ” में सहायक रसोइये के रूप में काम शूरू किया था | सन 1948 में उसकी पदोन्नति हो गयी और आगे चलकर वह सार्जेंट मेजर ऑफ़ प्लाटून कमांडर बन गया \ ईदी अमीन सन 1951 में युगांडा का हैवी वेट मुक्केबाजी का चैंपियन बना | सन 1952 में उसने केन्या के मऊ विद्रोह के खिलाफ ब्रिटिश कार्यवाही में सेवा की | उस दौरान एक अधिकारी ने उसे एक अच्छा खिलाड़ी बताया | वही एक भूतपूर्व कमांडर ने उसे पागल बताया था |
Idi Amin ईदी अमीन वारंट अधिकारी बना तथा इसके बाद वह बढकर लेफ्टिनेट के पद तक पहुच गया | सन 1962 में ईदी अमीन के नेतृत्व में केन्या के पड़ोसी युगांडा के उत्तर में आदिवासियों द्वारा चोरी ,विशाल नरसंहार एवं पशु दहन का कार्य किया था | ब्रिटिश अधिकारियों की जांच में पाया गया कि अनेक लोगो को यातनाये दी गयी और पीट पीटकर मार डाला गया और अनेक को जीवित ही दफन कर दिया गया | इस अपराध पर ईदी अमीन को “अति उत्साही ” तरीके अपनाने के अभियोग में ब्रिटिश अथॉरिटी ने कोर्ट मार्शल करने का निर्णय लिया परन्तु युगांडा को ब्रिटेन से 9 अक्टूबर को स्वतंत्रता प्राप्त हो गयी |
बगांडा जनजाति के राजा एडवर्ड नये राष्ट्र के प्रथम राष्ट्रपति बने ,ऐसे में प्रधानमंत्री ने ईदी अमीन के नेतृत्व का समर्थन कर दिया | ईदी अमीन पर जो उत्पीडन के आरोप लगे थे उनकी अनदेखी करते हुए और ओबोट द्वारा उसे बढ़ावा देते हुए सन 1964 में कर्नल और सेना और वायुसेना का डिप्टी कमांडर बना दिया गया | इसी वर्ष ईदी अमीन ने युगांडा के दुसरे शहर जिंजा में सैन्य अभियान में मदद की | युगांडा की आजादी के बाद ईदी अमीन को बिना आधार वाले प्रशिक्ष्ण पाठ्क्रम पर इजराइल भेजा गया |
तब Idi Amin ईदी अमीन इजराइल का परमप्रिय व्यक्ति बन गया क्योंकि उसने इजराइल को सूडान के विरुद्ध लड़ने में गोला बारूद की सप्लाई में पुरी सहायता प्रदान की थी | वहा सोने की तस्करी में ओबोट और अमीन को फस जाना पड़ा साथ ही राजा मुटेसा का परोक्ष विरोध हुआ तो राजा ने सविधान को भंग कर दिया तथा आधे मंत्रिमंडल को गिरफ्तार कर लिया और स्वयं को आजीवन राजा बना दिया | ईदी अमीन सेना में आधार निर्माण की प्रक्रिया शूरू करने लगा और उसने गृहक्षेत्र काकवा में सेना भर्ती का काम शूरू कर दिया | इन्ही दिनों ईदी अमीन और ओबोट के संबंधो में खटास आनी शुरू हो चुकी थी |
सन 1969 मे ओबोट की हत्या का प्रयास हुआ किन्तु वह असफल रहा | इसके बाद ब्रिगेडिएर  ,सेना के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मध्य एकमात्र प्र्तिध्वंदी ईदी आमीन बन गया | सन 1970 की 25 जनवरी को ओकोया और उसकी पत्नी को गोली मारकर हत्या कर दी गयी | इस हत्या कर बाद ओबोट और ईदी के संबध ओर भी खराब हो गये |नवम्बर में ओबोट द्वारा ईदी अमीन की भूमिका को प्रशाशनिक भूमिका में परिवर्तित कर दिया गया |

तख्तापलट की शुरुवात

Idi Amin ईदी अमीन ने सैन्य सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आर्थिक कुप्र्ब्धं का शिकार है तथा लोकतंत्र एवं कानून व्व्यव्स्था को बनाए रखने में नाकाम है | ईदी अमीन के इस आरोप पर पलटवार करते हुए ओबोट ने ईदी को अफ़्रीकी माँ द्वारा लाया सबसे बड़ा जानवर बताया | तख्तापलट शूरू हो गया | युगांडा वासी ईदी अमीन के समर्थन में आ गये तथा ओबोट की गुप्त पुलिस को समाप्त कर दिया गया | ईदी अमीन ने युगांडा में आर्थिक सुधारों का वायदा किया | सभी राजनीतक कैदियों की रिहाई कर दी | इसके साथ ही असैनिक शाषन लौटाने को भी ईदी अमीन ने कहा हालांकि यह साफ़ हो गया था कि ईदी अमीन के शाषनकाल में चुनाव नही होंगे |

Seizure of power

Idi Amin Liveसैन्य कमांड में Idi Amin ईदी अमीन के अध्यक्ष तथा सशत्रबलों का प्रमुख होने की घोषणा कर दी गयी | सत्तारूढ़ होते ही ईदी अमीन ने तुंरत ओबोट के वफादार सैनिको और अधिकारियों को सामूहिक रूप से फाँसी पर चढाने का काम किया | उसी समय कम्पाला की जेल में 32 सैन्य अधिकारी डायनामाईट विस्फोट में मारे गये | अमीन की सत्ता के प्रथम वर्ष में मरने वाले सैनिको की संख्या 9000 थी | जहा तक विदेशी मामलों की बात है इसमें ईदी अमीन पश्चिम समर्थक था उसका झुकाव ब्रिटेन और इजराइल की तरफ था |
Idi Amin ईदी अमीन ने जब अपनी पहली राजकीय यात्रा की तो वह इजराइल की यात्रा थी | उसने लन्दन की भी यात्रा की और महारानी एलिजाबेथ के साथ बैठक में भी शामिल हुआ | स्तिथि में परिवर्तन के बाद सन 1971 में वो लीबिया दौरे पर भी गया | सन 1972 में युगांडा अब काले आदमी का देश बन चूका था | वर्ष के अंत में ईदी अमीन ने 40000 से लेकर 80000 भारतीयों और पाकिस्तानियों को निष्काषित कर दिया | ऐसा बताया जाता है कि ऐसा कार्य उसने सपने में मिले संदेश पर किया था |
एशियाई श्रमिको की वह तीसरी पीढ़ी थी जिसे ब्रिटेन युगांडा लेकर आया था , उन्हें देश छोड़ने के लिए मात्र 90 दिन का समय दिया गया था | ईदी अमीन ने चेतावनी दे रखी थी कि “यदि वो देश नही छोड़ेंगे तो खुद को आग पर बैठा पायेंगे “| एक ओर एशियाई देश छोड़ रहे थे दुसरी ओर अमीन अपने प्रियपात्रा सैन्यकर्मियों को मुआवजे बाँट रहे थे | ब्रिटेन तथा इजराइल ने युगांडा के इस वास्तविक रूप को देखकर अपनी नीतियों में फेरबदल करना शूरू कर दिया | उन्होंने युगांडा को ओर अधिक हथियार सप्लाई करने से मना कर दिया |
अपनी सत्ता को सुरक्षित बनाए रखने के लिए ईदी अमीन में अपनी प्रतिद्वंदी जनजातियो और ओबोट समर्थको के उत्पीडन का अभियान छेड़ दिया जिस अभियान में 1 लाख से 5 लाख के बीच हत्याए हुयी | इनमे मरने वालो में आम नागरिको में पूर्व और सेवारत मंत्री ,मुख्य न्यायादीश, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश , राजनयिक , शिक्षा विद ,आदिवासी नेता ,व्यापार अधिकारी ,पत्रकार और विदेशियों की संख्या शामिल है | कई जगह तो पुरे के पुरे गाँव नष्ट कर दिय गये |लाशो को नील नदी में बहा दिया गया |

Exile and Death

सन 1975 के दौरान Idi Amin ईदी अमीन ने वर्ल्ड मीडिया के जरिये खुद को बढ़ावा देने के लिए नाटकबाजी शुरू की | इस हथकंडे को कई चरणों में अपनाया गया | ईदी की तानशाही का व्यापक विरोध हुआ जिसके कारण ईदी अमीन को मौत की सजा सुनाई गयी और उसे सजा सुनाने का यह प्रस्ताव कम्पाला की ब्रिटिश विदेश सचिव की यात्रा पर सामने आया जिसमे कम्पाला के पहाडी जीवन की वापसी की वकालत की गयी | हिल्स ने अमीन को विदूषक और हत्यारे के रूप में चेतावनी दी थी |16 अगस्त 2003 को ईदी अमीन Idi Amin की मृत्यु एक अस्पताल में हो गयी | उसके गुर्दों ने काम करना बंद कर दिया था

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