Shree Krishna Janmashtami Essay in Hindi

भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी , बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के समय मथुरा नगरी के कारागार में हुआ था | उनके पिता वासुदेव जी और माता देवकी थी | उनका पालन पोषण वृन्दावन में माता यशोदा और नन्द बाबा ने किया था | इस दिन मथुरा में रात को बारह बजे कृष्ण जन्म उत्सव विशाल रूप से मनाया जाता है | वृन्दावन में बिहारी जी के मन्दिर में भक्तो को सुबह से दर्शन होते है | कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव पुरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है | इस दिन घरो में नन्द गोपाल को पालने में विराज कर बाल लीला की झांकी सजाई जाती है |
पूजन सामग्री और पूजन विधि
बालकृष्ण की छोटी मूर्ति ,फूलो से सजा हुआ पालना ,कृष्ण जी के नये वस्त्र , श्रुंगार ,चन्दन ,इत्र ,फुल की माला ,भोग के लिए मेवा | पंचामृत (कच्चा दूध ,दही ,घी ,शहद ,चीनी ), पंजीरी (सूखे धनिये से पीसी हुयी चीनी मिलाये इसके बाद काजू ,बादाम ,पिस्ता मिलाये ) आदि | सर्वप्रथम बारह बजते ही ठाकुर जी जा पंचामृत से अभिषेक करे | पहले कच्चे दूध से फिर शुद्ध जल से ठाकुर जी को स्नान कराए | इसके बाद दही से नहलाये और फिर शुद्ध जल से नहलाये | बाद में शहद और पीसी हुयी चीनी से नहलाये ,फिर शुद्ध जल से नहलाये | स्नान के बाद ठाकुर जी को साफ़ कपड़े से पोंछकर पीले रंग के वस्त्र पहनाये | उनका पूरा श्रुंगार करे | इत्र लगाये और पुष्प माला पहनाये | इसके बाद ठाकुर जी के बधाई के गीत गाते है |
फलाहारी भोग
भगवान को फलाहार का भोग लगाकर कपूर से बालकृष्ण आरती गाते है | फलाहरी भोग में पंजीरी , नारियल की बर्फी ,पेडा, गोंद की बर्फी ,बादाम एवं पिसते की बर्फी ,बादाम का हलवा , छेना संदेश ,खरबूजे के बीज की बर्फी ,आलू की चिप्स ,टाल मखाना , भुने खरबूज के बीज ,बादाम तल कर , चिरोंजी की बर्फी ,कच्चे केले और आलू के बड़े आदि का भोग लगाये |
श्रीकृष्ण का सखा भाव
कृष्ण को प्रिय है सखा बनना , वे द्रौपदी के भी सखा है , अर्जुन के भी और दुर्योधन के भी ,वे सुदामा के साथ भी सखा भाव से पेश आते है और अपना सर्वस्व देने को व्याकुल हो उठते है | अगर रुक्मणी ना रोकती तो शायद सुदामा जैसे दरिद्र ब्राहमण को अपने इसी सखा भाव से सब कुछ दे डालते |
मथुरा की खुशबु ,गोकुल का हार
वृन्दावन की सुगंध , बरसाने की फुहार
राधा की उम्मीद ,कान्हा का प्यार
मुबारक जो आपको जन्माष्टमी का त्यौहार
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