
रणबांकुरो की भूमि राजस्थान में देवी जीण माता ने सबसे बड़ा चमत्कार मुगल बादशाह औरंगजेब को दिखाया था जब उसकी सेना पर भौरों ने आक्रमण कर दिया जिसके वजह से दिल्ली सल्तनत हिल गयी और स्वयं उसको माता को सोने का छत्र चढाना पीडीए था |
राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र में सीकर-जयपुर मार पर गोरिया के पास जीण माता गाँव में देवीस्वरूप जीण माता का प्राचीन मन्दिर बना हुआ है | जीण माता का वास्तविक नाम जयंती माता था | माता दुर्गा का अवतार है | यह मन्दिर शक्ति की देवी को समर्पित है | घने जंगल से घिरा हुआ यह मन्दिर तीन छोटे पहाड़ो के संगम पर स्थित है |
जीण माता का यह मन्दिर बहुत प्राचीन शक्तिपीठ है | मन्दिर दक्षिणमुखी है लेकिन मन्दिर का प्रवेश द्वार पूर्व में है | मन्दिर के देवायतन का द्वार सभा मंडप में पश्चिम की ओर है और यहाँ जीण भगवती की अष्टभुजी आदमकद मूर्ति स्थापित है | सभा मंडप पहाड़ के नीचे मन्दिर में ही एक ओर मन्दिर है जिसे गुफा कहा जाता है जहां जगदेव पंवार का पीतल का सिर और कंकाली माता की मूर्ति है |
मन्दिर के पश्चिम में महात्मा का तप स्थान है जो धुणा के नाम से प्रसिद्ध है | लोगो का मानना है कि यह मन्दिर 1000 साल पुराना है लेकिन कई इतिहासकार आठवी सदी में जीण माता मन्दिर का निर्माण काल मानते है | मन्दिर में अलग अलग आठ शिलालेख , मन्दिर की प्राचीनता का पूखता सबूत है | इन शिलालेखो में सबसे पुराना शिलालेख संवत 1029 का है परन्तु उसमे मन्दिर के निर्माण का समय नही लिखा गया है |
शक्ति का अवतार है माता
लोक कथाओं के अनुसार जीण माता का जन्म अवतार राजस्थान के चुरू जिले के घाघु गाँव के अधिपति एक चौहान वंश के राजा घघ के घर में हुआ था | जीण माता के एक बड़े भाई का नाम हर्ष था | माता जीण को शक्ति का अवतार माना गया है | कहा जाता है कि दोनों बहन-भाइयो में बहुत स्नेह था किन्तु किसी बात पर दोनों में मनमुटाव हो गया | तब जीण माता यहाँ आकर तपस्या करने लगी |
पीछे पीछे हर्षनाथ भी अपनी लाडली बहन को मनाने के लिए आये लेकिन जीण माता जिद करने लगी और साथ जाने से मना कर दिया | हर्षनाथ का मन बहुत उदास हो गया और वह भी वहां से कुछ दूर जाकर तपस्या करने लगे | दोनों भाई-बहन के बीच हुयी बातचीत का सुलभ वर्णन आज भी राजस्थान के लोकगीतों में मिलता है | भगवान हर्षनाथ का भव्य मन्दिर राजस्थान की अरावली पर्वतमाला में स्थित है |
मधुमक्खियों के आक्रमण से भागी सेना
देवी जीण माता ने सबसे बड़ा चमत्कार मुगल बादशाह औरंगजेब को दिखाय था | औरंगजेब ने शेखावटी के मन्दिरों को तोड़ने के लिए एक विशाल सेना भेजी थी | यह सेना हर्ष पर्वत पर शिव और हर्षनाथ भैरव का मन्दिर खंडित कर जीण मन्दिर को खंडित करने के लिए आगे बढी | कहते है पुजारियों के आर्त स्वर से माँ से विनती करने पर माँ जीण ने भौरे छोड़ दिए जिनके आक्रमण से औरंगजेब की शाही सेना लहू-लुहान होकर भाग खडी हुयी |
औरंगजेब को चमत्कार दिखाने के बाद जीण माता भौरों की देवी कही जाने लगी | माता की शक्ति को जानकर मुगल बादशाह ने वहा पर भंवरो की रानी के नाम से शुद्ध सोने की बनी मूर्ति भेंट की | औरंगजेब को कुष्ट रोग हो गया था | उसने कुष्ट निवारण के लिए माँ से प्रार्थना की और मन्नत माँगी कि अगर कुष्ट ठीक हो जायेगा तो वह जीण के मन्दिर में एक सोने का छत्र चढ़ाएगा | बादशाह का कुष्ट रोग ठीक होने पर उसने माता के मन्दिर में सोने का छत्र चढाया | यह छत्र आज भी मन्दिर में विद्यमान है |
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