
हिन्दू धर्म की आस्था एवं श्रुद्धा का केंद्र मथुरा (Mathura) भगवान श्रीकृष्ण की जन्म स्थली होने के कारण काफी प्रसिद्ध है | यहाँ के विशाल और भव्य मन्दिर जो स्थापत्य और शिल्प कला की दृष्टि से काफी उत्कृष्ट है | आइये आपको मथुरा (Mathura) के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में विस्तार से बताते है |
मथुरा के प्रमुख दर्शनीय स्थल
द्वारकाधीश का मन्दिर – द्वारकाधीश मन्दिर अपेक्षाकृत नया होने के बावजूद आस्थावादी हिन्दुओ के आकर्षण का बहुत बड़ा केंद्र है | यहाँ वर्ष बर भारी भीड़ रहती है |
कृष्ण जन्मभूमि – कृष्ण जन्मभूमि जिसे कटारा केशवदास के नाम से जाना जाता है | यह मथुरा का सर्वाधिक दर्शनीय स्थल आस्थावादी हिन्दुओ के अनुसार वही स्थान है जहा एक समय कंस के कारागृह में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था | कृष जन्मभूमि पर स्थित वर्तमान मन्दिर का निर्माण कार्य उद्योगपति डालमिया , हनुमान प्रसाद पोद्दार और बिड़ला के सयुक्त प्रयासों से इसी सदी में हुआ | मन्दिर में कृष्ण जन्मस्थान के अतिरिक्त राधाकृष्ण मन्दिर तथा श्रीमदभागवत भवन भी दर्शनीय है |
शाही ईदगाह – कृष्ण जन्मभूमि से ही सटी हुयी एक विशालकाय मस्जिद है जिसका निर्माण औरंगजेब द्वारा कराया गया था | इसे वर्तमान में शाही ईदगाह के नाम से जाना जाता है | कुछ लोग इसे ही कृष्ण का असली जन्म स्थान बताते है | यह मस्जिद कृष्ण भूमि के मन्दिर से ही पूर्णरूप से देखी जा सकती है |
पुरातात्विक संग्रहालय – मथुरा (Mathura) का पुरातात्विक संग्रहालय भी अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों , विशेष रूप से मूर्तिकला के लिए दर्शनीय है | संग्रहालय में कुषाण , बौद्ध , जैन ,वैदिक कालीन मुर्तिया देखी जा सकती है | संग्रहालय मंगलवार को बंद रहता है |
जामा मस्जिद – ओबाइन वीर खान द्वारा सन 1661 में मथुरा बाजार में मध्य एक विशाल मस्जिद का निर्माण कराया गया | इस मस्जिद मैजैक युक्त चमकीले रंगो का प्रयोग किया गया | इसकी ऊँची मीनारे आकर्षण एक दर्शनीय है |
गीता मन्दिर – मथुरा वृंदावन मार्ग पर शहर की बाहरी सीमा पर स्तिथ गीता मन्दिर एक दर्शनीय स्थल है | इसका निर्माण उद्योगपति घनशयाम दास बिडला द्वारा कराया गया था | मन्दिर का निर्माण लाल तथा सफेद पत्थर से हुआ है |
वृन्दावन – मथुरा (Mathura) से लगभग 15 किमी दूर स्तिथ वृन्दावन मन्दिरों एवं घाटों की नगरी है | यहाँ छोटे बड़े हजारो की संख्या में मन्दिर एवं घाट है |मन्दिरों का निर्माण यहाँ सदैव ही चलता रहता है | वृन्दावन के कुछ प्रसिद्ध मन्दिर इस प्रकार है
- बांके बिहारी मन्दिर – स्वामी हरिदास के अनुचरो द्वारा निर्मित मन्दिर |
- रंग मन्दिर – वृन्दावन का सबसे विशाल एवं भव्य मन्दिर |
- गोविन्द देवजी का मन्दिर – राजपुर राजा मानसिंह द्वारा 16वी सदी में निर्मित |
- मदन मोहन मन्दिर – मुल्तान के रामदास कपूर द्वारा निर्माण |
- कांच का मन्दिर – शीशमहल शैली में कांचो के शिल्प की सजावट |
- राधावल्लभ मन्दिर – 17वी शताब्दी में बना कलात्मक मन्दिर |
- कृष्णबलराम मन्दिर– अंग्रेजो के मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध
- निधिवनन – श्रीकृष्ण एवं राधा की रासलीला स्थली |
- नन्दगाँव – श्री कृष्ण की बाल लीला स्थली |
मथुरा पहुचने के विविध मार्ग
- वायु मार्ग – मथुरा (Mathura) में कोई हवाई अड्डा नही है निकटतम हवाई अड्डा आगरा या दिल्ली है जहां से उतरकर मथुरा पहुचा जा सकता है |
- रेलमार्ग – मथुरा दिल्ली ,मद्रास तथा मुम्बई के मुख्य रेलमार्गों पर स्थित एक प्रमुख जंक्शन होने के कारण देश के सभी भागो से मथुरा रेल सेवा द्वारा जुड़ा है
- सड़क मार्ग – मथुरा (Mathura) सड़क मार्ग से देश के सभी प्रमुख नगरो से जुड़ा हुआ है | जयपुर , दिल्ली , उज्जैन तथा लखनऊ से मथुरा के लिए द्रुतगति से चलने वाली डीलक्स बसे भी उपलब्ध है | दिल्ली तथा आगरा से मथुरा के लिए नियमित टैक्सी एवं जीप की सेवाए उपलब्ध है जिनसे बिना इन्तजार किये मथुरा तुरंत पहुचा जा सकता है |
पर्यटन का उचित समय
मथुरा (Mathura) वर्ष पर्यन्त कभी भी घुमा जा सकता है किन्तु यदि आप विशिष्ट रूप से मथुरा की जन्माष्टमी नदी देखना चाहते तो जुलाई-अगस्त के बरसात के मौसम में मथुरा का भ्रमण न करे क्योंकि अति बरसात के कारण आपका कार्यक्रम बिगड़ सकता है तथा इन दिनों में मथुरा वृन्दावन में गन्दगी भी बढ़ जाती है |
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