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जैसलमेर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Jaisalmer Tour Guide in Hindi

जैसलमेर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Jaisalmer Tour Guide in Hindi
जैसलमेर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Jaisalmer Tour Guide in Hindi

राजस्थान राज्य के पश्चिमी दिशा में स्थित जैसलमेर (Jaisalmer) पाकिस्तान की सीमा के करीब है | यह के मरुस्थलीय क्षेत्र होने के बाद भी प्राकृतिक रूप से बहुत ही अनूठा है | जैसलमेर (Jaisalmer) मीलो लम्बे रेत के समुद्र के बीच स्थित है | कुदरत की अनुकम्पा भी निराली है | इस नगर के चारो तरफ रेत ही रेत का साम्राज्य कुदरत ने बनाया है | वही दुसरी तरफ मानव के मस्तिष्क एवं उसके हाथो ने प्रस्तरो पर नायाब नक्काशी उकेर कर इसे ओर खुबसुरत बना दिया है |
जैसलमेर (Jaisalmer) में चारो तरफ दूर दूर तक जहां तक नजर जाती है रेत की बनती बिगडती लहरे , मीलो लम्बी खामोशी को तोडती रेत की सरसराहट वीरान पहाड़िया , ऊँची ऊँची हवेलियाँ तथा उनकी कलात्मक बनावट , नक्काशी युक्त जाली जरोखे , किले की अनूठी स्थापत्य कला , सोनार किला , सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय बिखेरती स्वर्णिम आभा , शांतमय एवं उल्लास से परिपूर्ण तथा उमंग भरा जीवन आदि सभी कुछ तो देखने के योग्य है | सूर्य की रोशनी में स्वर्ण की भांति चमकती इस “स्वर्णनगरी” में कलात्मक हवेलियो की बहुतायत के वजह से इसे “हवेलियों की नगरी” भी कहा जाता है |

जैसलमेर का इतिहास | Jaisalmer History in Hindi

सन 1156 में भाटी राजपूत वंश के शासक रावजैसल ने इस शहर को स्थापित कर इसे अपने राज्य की राजधानी बनाया | 12वी से 14वी शताब्दी का काल जैसलमेर (Jaisalmer) के इतिहास में कुछ अशांति एवं युद्ध रहा | इसके बाद  से आज तक यह शहर उन्नति के पथ पर अग्रसर रहा है | सन में यह 1952 में  राजस्थान में सम्मिलित हुआ जिन स्थानों पर कृषि कार्य के स्थान पर पशुपालन को प्राथमिकता दी जाती है | तथा यह शहर राजस्थान का सबसे बड़ा जिला होने एक नाते इसकी गिनते गिने-चुने जिलो में होती है |

जैसलमेर (Jaisalmer) के मुख्य दर्शनीय स्थल 

सोनार का किला – लगभग 80 मीटर उंचाई वाली त्रिकुटा पहाडी पर   बना यह किला बहुत की आकर्षक है जो जैसलमेर शहर के मध्य में स्तिथ है | यह किला राव जैसल ने सन 1156 ई. में पीत पाषाणों द्वारा निर्मित करवाया | इस किले की दीवारों के चारो तरफ 30-30 फुट की ऊँचाई पर 99 बुर्ज बनाये हुए है जो देखने में ऐसे प्रतीत होते है मानो शिकार के इन्तजार में शेर जो देखने में बूढा हो तथा लेटा हुआ हो | शुरू शुरू में इस किले के भीतर ही बस्ती , राजमहल , प्रशासनिक भवन , कुए , बावडिया तथा मन्दिर बने हुए थे | धीरे धीरे समय परिवर्तित होता गया तथा आबादी भी दिन-प्रतिदिन फैलती गयी | अब इस नगर की आबादी किले के चारो तरफ फ़ैल गयी है |
इस आकर्षक किले के भीतर जैन मन्दिर और राजमहल भी अपने आप में अद्भुत है जो पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण है | राजमहल के अंदर संग्रहालय संचालित है | संग्रहालय के अंदर पुराने करेंसी नोटों के आलावा पालने इत्यादि रखे हुए है किन्तु यहाँ पर कोई खास चीज देखने लायक नही है | जैन मन्दिरों आठो मन्दिरों की शिल्पकला एवं मूर्तिकला बड़ी ही अद्भुत एवं आकर्षक है | इनमे सबसे प्रमुख एवं प्राचीन मन्दिर 23वे तीर्थकर चिंतामणि पार्श्वनाथ का है | इन सभी जैन मन्दिरों को प्रात: 8 बजे से 12 बजे तक देखा जा सकता है |
सालिम सिंह की हवेली – जैसलमेर (Jaisalmer) रियासत के दीवान सालिमसिंह ने सन 1825 में एक हवेली को बनवाया हो इन्ही के नाम से प्रसिद्ध हुयी | यह हवेली किले के पूर्वी ढलान पर स्थित है तथा यह शिल्प वैभव का बेजोड़ नमूना है | प्रारम्भ में यह हवली नौखंड के रूप में थी लेकिन अब इसके काष्ट निर्मित उपरी दो खंडो को उतार दिया गया है | इस हवेली में जाली ,झरोखे , कंगूरे छज्जे एवं उत्कृष्ट नक्काशी आदि आकर्षक एवं दर्शनीय है | अब यह हवेली रिहायशी के कार्य में आ रही है |
लोक संस्कृति संग्रहालय – गड़सीसर सरोवर के किनारे स्थित इस संग्रहालय में जैसलमेर की लोक संस्कृति का अनोखा प्रस्तुतिकरण है | कवि,शिक्षक एवं लेखक नन्दकिशोर शर्मा ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से सन 1984 में इसकी स्थापना की |
गडसीसर झील – जैसलमेर (Jaisalmer) के प्रवेश द्वार पर स्थित यह झील सन 1367 ई.  में महारावल गडसी सिंह द्वारा बनवाई गयी थी | यह झील बहुत ही आकर्षक है इसे देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो यह पर्यटकों का इस्तकबाल करती है | झील के प्रवेश द्वार पर टीला पोल , किनारे पर बने मन्दिर , छतरीयाँ घाट एवं महला जैसलमेर शैली की स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने है | सूर्य जब निकलता है उस समय यहाँ की छवि अनोखी एवं मनमोहक होती है |
हवेलियाँ पटवो की – शिल्प एवं कला का अनूठा मिश्रण लिए एक ही पंक्ति में सहेलियों की तरह खड़ी ये सतखड़ी हवेलियाँ आधार से अंतिम मंजिल तक नक्काशीयुक्त जाली , झरोखो की अनुपम बानगी समेटे हुए है | हस्त के कार्य को इन हवेलियों पर इस प्रकार से कलात्मक चित्रकारी एवं बेलबुटो से अत्यधिक आकर्षक बनाया गया है जो पर्यटकों तथा दर्शको को अद्भुत आनन्द की अनुभूति प्रदान करता है | हाथी के दांतों तथा कांच के कार्य भी इस तकनीक के साथ किया जाता है जिसको पहली नजर में देखकर ही दर्शक मनमोहित हो जाता है | सन 1800 से 1860 के अंदर इन पांचो हवेलियों का निर्माण सेठ गुमानलाल के 5 बेटो ने करवाया था | ये पांच हवेलियाँ है | दो हवेलियाँ अब राजस्थान के पुरातत्व के अधीन है जो केवल अपने निर्धारित समय से ही देखी जा सकती है | इन दोनों हवेलियों को देखने का समय 10 बजे से पांच बजे तक है |
हवेली नथमल – यह हवेली जैसा कि नाम से स्पष्ट है जैसलमेर के दीवान नथमल द्वारा बनवाई गयी थी जिसका निर्माण कार्य सन 1881 से लेकर 1885 तक चला था | हवेली की स्थापत्य कला ,बारीक कारीगरी ,भित्तिचित्र , अनेक प्रकार की रंगबिरंगी कलाकृतियाँ आदि दर्शनीय है | अब इस हवेली को रिहायश के लिए इस्तेमाल किया जाता है तथा बाहर से ही यह देखी जा सकती है |

जैसलमेर (Jaisalmer) पहुचने के विविध मार्ग 

जैसलमेर (Jaisalmer) जाने के लिए पर्यटकों को वायु , रेल तथा सड़क तीनो मार्ग उपलब्ध है | दिल्ली जयपुर तथा जोधपुर के लिए सप्ताह के अंदर तीन उड़ाने उपलब्ध है | रेलमार्ग से जैसलमेर जाने के लिए जोधपुर से प्रतिदिन दो गाड़िया चलती है | सडक के रास्ते जैसलमेर जाने हेतु अनेक राज्य परिवहन की बसों के आलावा निजी साधन उपलब्ध है |

पर्यटन का उचित समय

जैसलमेर (Jaisalmer )भ्रमण के लिए उपयुक्त मौसम अक्टूबर से मार्च तक का होता है | इन दिनों यहाँ का वातावरण ठंडा रहता है अत: मौसम के अनुसार अपने उनी वस्त्र भी साथ लेकर जाए | यहाँ का न्यूनतम तापमान 15 डिग्री एवं अधिकतम तापमान 47 डिग्री तक रहता है | पर्यटकों की सुविधा के लिए यहाँ अनेक गेस्ट हाउस एवं होटल है |

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