
चित्तोडगढ (Chittorgarh) राजस्थान का एक एतेहासिक पर्यटन स्थल है | यहाँ अनेक प्रकार के किले , महल और मन्दिर है | चित्तोडगढ (Chittorgarh) देशवासियों को अखंड , अविभाज्य , विविधताओं में एकता के दर्शन कराने वाले क्षेत्र का एहसास कराता रहेगा तथा आने वाली अनेक सदियों तक चित्तोडगढ (Chittorgarh) प्रेरणा स्त्रोत बना रहेगा | भारतीय इतिहास के अंदर चित्तोडगढ का अपूर्वं योगदान रहा है | वह कभी भी भुलाया नही जा सकता |
चित्तोडगढ (Chittorgarh) के संबध में एक कहावत यह है जो प्रचलित भी है “गढ़ में चित्तोडगढ बाकी सब गडिया” | इसका मतलब यही है कि चित्तोडगढ के अभेद्य दुर्ग जैसा विश्व में कोई दूसरा दुर्ग नही है | इसके अतिरिक्त बाकी कोई गढ़ नही है अपितु गड़िया है | चित्तोडगढ दुर्ग का निर्माण कब हुआ यह कहना कठिन है तथा इतिहासकारों में भी इस संबध में मतभेद है | परन्तु इसके बावजूद भी अनेक इतिहासकारो का दावा है कि आज से करीब 5000 वर्ष पूर्व इसका निर्माण किया गया था |
चित्तोडगढ (Chittorgarh) के प्रमुख दर्शनीय स्थल
महाराणा कुम्भा के महल – इन महलो का निर्माण महाराणा कुम्भा के द्वारा 13वी शताब्दी में निर्मित कराए जाने से ये महाराणा कुम्भा के नाम से विख्यात है | यहाँ के दर्शनीय स्थल में जनाना महल , दीवाने आम तथा शिव मन्दिर आदि प्रमुख है | इतिहासकारों के कथनानुसार चित्तोड़ में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए महारानी पद्मिनी ने हजारो वीरांगनाओ के साथ इसी महल परिसर में जौहर किया था |
सिद्धेश्वर महादेव – सिद्धेश्वर महादेव मन्दिर के रूप में प्रसिद्ध यह शिव मन्दिर बहुत ही विशाल एवं आकर्षक है | यह प्राचीन मन्दिर विजय स्तम्भ के दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में बना हुआ है | यहाँ मौजूद त्रिमूर्ति की भव्यता एवं शिल्पकारो की कला जो अत्यंत आकर्षक एवं दर्शनीय है तथा जिनकी छवि देखते ही बनती है |
गौमुख कुंड – यह सिद्धेश्वर महादेव मन्दिर के समीप स्तिथ यह कुंड भी पर्यटकों को आकर्षित करने में पीछे नही रहता है | गौमुख कुंड में चट्टान के बने गौमुख में भूमिगत जल तथा प्राकृतिक जल लगातार झरने के रूप में एक शिवलिंग के उपर गिरता है | अनेक पर्यटक गौमुख के अंदर स्नान करके आनन्दित होते है |
कीर्ति स्तम्भ – चित्तोडगढ का कीर्ति स्तम्भ 75 फुट ऊँचा है जो चित्तोडगढ की शान है इसके अंदर सात मंजिले बनी हुयी है | इसका निर्माण दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के बगैरवाल महाजन सानाय के पुत्र जीजा ने 14वी शताब्दी में करवाया था | इसकी बनावट नीचे से 30 फुट चौड़ी तथा उपरी हिस्से से इसकी चौड़ाई 15 फुट है | वीर भूमि मेवाड़ का यह एतेहासिक दुर्ग है |
रावत बाघसिंह का स्मारक – रावत बाघसिंह का स्मारक दुर्ग के पहले द्वार पाडनपोल के बाहर ही बना हुआ है | प्रतापगढ़ के रावत बाघसिंह ने मेवाड़ का राज्य चिन्ह धारण कर महाराणा विक्रमादित्य का प्रतिनिधित्व किया तथा युद्ध में शहीद हो गये थे | उनकी याद में एक यादगार स्मारक उसी स्थान पर बना हुआ है |
नवलखा भंडार – चित्तोड़ दुर्ग के पास अर्धवृताकार का बुर्ज जो पूरा नही हुआ है बनवीर द्वारा बनवाया गया है | इस बुर्ज को उसने अपनी सुरक्षा एवं अस्त्र-शस्त्र के भंडार हेतु बनवाया था | इसकी पेचीदी बनावट को कोई जान नही सकता था इसलिए इसको नवलखा भंडार के नाम से पुकारा जाता है |
मीरा मन्दिर – मेवाड़ में स्थित मीरा का प्रसिद्ध मन्दिर धार्मिक आस्था वाले पर्यटकों हेतु श्रुद्धा का केंद्र है | मन्दिर के ठीक सामने एक छोटे आकार की छतरी बनी हुयी है | मीरा के गुरु रैदास के पगलिये बने हुए है | महाराणा कुम्भा द्वारा सन 1449 में निर्मित कुम्भ श्याम मन्दिर के पास हुआ हुआ है | यह कुम्भ श्याम का मन्दिर भी आकर्षक एक दर्शनीय है |
विजय स्तम्भ – मालवा के सुल्तान महमूद शाह खिलजी को महाराणा सांगा ने परास्त कर अपनी शानदार विजय की यादगार में इस विजय स्तम्भ का निर्माण 1448 में करवाया था | यह विजय स्तम्भ 47 वर्गफुट के 10 फुट ऊँचे आधार पर बना 122 फुट ऊँचा है | यह नौमंजिल का स्मारक भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरन है इसके उपरी सतह पर पहुचने के लिए 157 सीढिया गोल आकार में बनी हुयी है |
पुरातत्व संग्रहालय – इस संग्रहालय वाले महल का निर्माण महाराणा फतेहसिंह ने करवाया था जो पूर्ण रूप से आधुनिक दिखाई देता है | इसके अंदर अस्त्र-शस्त्र तथा पुरातत्व सामग्री को वर्तमान में रखा हुआ है लेकिन पर्यटक यहाँ अधिक समय होने पर ही व्यतीत करे तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि यहाँ के संग्रहालय में वर्तमान में नाममात्र की ही संग्रहित वस्तुए रखी हुयी है | पुरातत्व की बाहरी दीवार अत्यधिक आकर्षक एवं दर्शनीय है |
चित्तोडगढ में मनाये जाने वाले प्रमुख त्यौहार
- महाराणा पप्रताप जयंती -हर वर्ष जयेष्ट शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन महाराणा प्रताप के जन्म दिवस पर महाराणा प्रताप जयंती मनाई जाती है | इस दिन विशेष पूजा और कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है |
- मीरा महोत्सव – मीरा स्मृति संस्थान सहित चित्तोडगढ के कई अधिकारी हर वर्ष शरद पूर्णिमा के दिन हर वर्ष मीरा महोत्सव का आयोजन करते है जो तीन दिनों तक चलता है | इस महोत्सव में कई संगीतज्ञ और गायक भजन प्रस्तुत कते है | इस तीन दिनों के उत्सव में पूजा , नृत्य , आतिशबाजी आदि का आयोजन होता है |
- तीज – तीज चित्तोडगढ में मुख्य त्योहारों में से एक है जो श्रावण महीने में मनाया जाता है | यह त्यौहार माता पार्वती को समर्पित रहता है और साथ में भगवान शिव की पूजा भी की जाती है |
- गणगौर -मेवाड़ क्षेत्र में गणगौर एक रंगारंग और महत्वपूर्ण त्यौहार है जो जुलाई-अगस्त महीने में आता है | गौरी पूजा कर अच्छे वर के लिए अविवाहित महिलाये अच्छा वर पाने के लिए इस दिन व्रत एवं पूजा करती है
- जौहर मेला – जौहर मेला चित्तोडगढ का सबसे बड़ा राजपुत मेला है जो रानी पद्मिनी के जौहर की याद में मनाया जाता है |
- रंगतेरस – आदिवासी मेला रंग तेरस के दिन मनाया जाता है जो चैत्र महीने में मनाया जाता है
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