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अक्षरधाम मन्दिर , गुजरात का अनोखा तीर्थ स्थल | Akshardham Gujarat Tour Guide in Hindi

अक्षरधाम मन्दिर , गुजरात का अनोखा तीर्थ स्थल | Akshardham Gujarat Tour Guide in Hindi
अक्षरधाम मन्दिर , गुजरात का अनोखा तीर्थ स्थल | Akshardham Gujarat Tour Guide in Hindi

गुजरात की हरी भरी राजधानी गांधीनगर अहमदाबाद नगर से सड़क द्वारा 25 किमी दूर है | गांधीनगर की हरियाली भूमि पर राष्ट्रीय राजमार्ग र आकर्षण का यह केंद्र अक्षरधाम मन्दिर (Akshardham Temple)स्थापत्य एवं नवीनतम तकनीक का संगम है | अक्षरधाम (Akshardham) परिसर तक सभी दिशाओं से पहुचा जा सकता है | हवाई अड्डा केवल 23 किमी दूर है | गांधीनगर का रेलवे स्टेशन मात्र 2 किमी दूर है | गांधीनगर में होटल ,हवेली ,सर्किट हाउस और पथिक आश्रम भी बने है |
बोचासण वाणी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संख्या इस अक्षरधाम के निर्माता है | इसके प्रेरक है प्रमुख स्वामी महाराज शास्त्री नारायण स्वरूप दास | अक्षरधाम मन्दिर का यह परिसर भगवान के प्रति श्रुद्धभक्ति है | इसका शिलान्यास 14 दिसम्बर 1979 को हुआ था और 2 नवम्बर 1992 को अक्षरधाम (Akshardham) के पट जनता के लिए खोल दिए गये थे | अक्षरधाम परिसर चार प्रमुख भागो में बंटा है | अक्षरधाम स्मारक ,अक्षरधाम अनुभूति ,आर्ष और सहजानंद वन |
अक्षरधाम परिसर-अक्षरधाम स्मारक परिसर गुलाबी पत्थरों से निर्मित है | इसके विशाल एवं भव्य केन्द्रीय हॉल में भगवान स्वामीनारायण की 7 फीट ऊँची स्वर्ण मंडित प्रतिमा स्थापित है | उनके सामने अक्षरब्रह्म गुणातीता नन्द स्वामी और आदिभक्त गोपालानन्द स्वामी जी की स्वर्णमंडित प्रतिमाये हाथ जोड़े खडी है |
अक्षरधाम अनुभूति -इसके तीन हॉल है जिनमें प्रदर्शनी लगती है | इन तीनो हॉल को देखने में लगभग ढाई घंटे लग जाते है | उनमे प्रवेश करने के लिए टिकट लेना पड़ता है |
आर्ष -यह एक शोध केंद्र है |
सहजानंद वन -अक्षरधाम की हरियाली ,झरने और बच्चो का क्रीडास्थल अपनी ओर आकर्षित करता है | वन में गंगा ,यमुना और सरस्वती अवतरण , समुद्रमंथन , सूर्य रथ , भगवान विष्णु शेषशैया आदि की झांकिया देखी जा सकती है | सहजानन्द वन में भोजन और अल्पाहार के लिए प्रेमवटी नाम का स्थान है | इस परिसर में बाहर का लाया हुआ खाना एवं अन्य पदार्थ निषिद्ध है | यहाँ खाद्य पदार्थ लिए स्वयंसेवक घूमते फिरते रहते है | यहाँ व्हीलचेयर का भी प्रबंध है| ससामान रखने की भी सुविधा है | सूर्यास्त के बाद के घंटे की विशेष रोशनी का आयोजन होता है जो दर्शको के मन मोह लेता है | सोमवार को यह परिसर बंद रहता है |
परिसर (Akshardham) में प्रवेश हेतु कुछ नियमो का कड़ाई से पालन करना पड़ता है जैसे पालतू जानवरों को बाहर रखना , पान, बीडी ,सिगरेट , गुटखा का सेवन करना | रेडियो ,टेपरेकॉर्डर साथ ले जाना | फोटोग्राफी एवं विडियोग्राफी करना भी मना है |
प्रदर्शनी के पहले हॉल में प्रवेश करने पर हमे एक दृश्य दिखाया जाता है | पत्थर के एक विशाल खंड को एक शिल्पी तराश रहा है | उसके बाद वे दृश्य आते है जिनसे गढ़ी मुर्तिया है | इस दृश्य का मूल भाव यह है कि मनुष्य जीवन अनगढ़ पत्थर के समान है | हमे अपने जीवन को गढने के लिए किसी शिल्पी के हाथ में सौंप देना चाहिए | मनुष्य जीवन का वह शिल्पी कौन है ? भगवान एवं भगवान के संत | उनके द्वारा ही मनुष्य जीवन का गढन होता है | इसमें अनेक आध्यात्मिक सत्य छुपे है |
यहाँ से आगे चलने पर नीलकंठ ब्रहमचारी की वन यात्रा के दृश्य आते है | नीलकंठ ब्रहमचारी का घर का नाम घनश्याम था और दीक्षा लेने के बाद स्वामी सह्त्रनन्दन , बाद में स्वामीनारायण नाम से प्रसिद्ध हुए | अगले हॉल में महाभारत ,रामायण आदि के दृश्यों को अंकित किया गया है | अंत में एक सजीव सभा का दृश्य आता है |

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