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यमुनोत्री का इतिहास और धार्मिक महत्व | Yamunotri Tour Guide in Hindi

यमुनोत्री का इतिहास और धार्मिक महत्व | Yamunotri Tour Guide in Hindi
यमुनोत्री का इतिहास और धार्मिक महत्व | Yamunotri Tour Guide in Hindi

भगवान सूर्य की पुत्री कही जाने वाली यमुना जी की उत्पति भी हिमालय से ही हुयी है इसलिए यमुना भी गंगा की तरह पवित्र मानी जाती है | उतराखंड की यात्रा में ऋषीकेश , बद्रीनाथ , गंगोत्री तथा यमुनोत्री आदि तीर्थो के दर्शन हो जाते है | यमुनोत्री (Yamunotri) का यह स्थान समुद्र तट से दस हजार फुट की उंचाई पर है | यहाँ कई गर्म पानी के कुंड है जिनका जल खौलता रहता है | यात्री लोग कपड़े में चावल आदि बांधकर इसमें डुबो देते है और वे पक जाते है | इस प्रकार यहाँ भोजन बनाने के लिए चुल्हा नही जलाना पड़ता |

यमुनोत्री (Yamunotri) की धार्मिक अवधारणा

बहुत उंचाई पर कालिंदगिरी से हिम पिघल क्र कई धाराओं में गिरता है | कालिंद पर्वत से निकलने के कारण यमुना जी कालिंद-नन्दिनी या कालिंदी कही जाती है | वहां इतना अधिक शीत है कि बार-बार झरनों का जल जमता रहता है | लोगो का ऐसा कहना है कि इस स्थल पर महर्षि असित प्रतिदिन गंगा में स्नान करते थे और इसी आश्रम में आकर निवास करते थे |
महर्षि की वृध्दावस्था में इस पर्वतीय रास्ते को प्रतिदिन जाना मुश्किल हो गया | तब गंगाजी ने अपना एक छोटा सा झरना ऋषि के आश्रम में प्रकट कर दिया | वह उज्ज्वल जल का झरना आज भी वहां है | हिमालय में गंगा और यमुना की धाराए एक हो गयी होती यदि मध्य में दंड पर्वत न आ जाता | देहरादून के समीप ही दोनों धाराए बहुत पास आ जाती है |
सूर्य पुत्री यमराज-सहोदरा कृष्ण-प्रिया कालिंदी का यह उद्गम स्थान अत्यंत भव्य तथा आकर्षक है | इस स्थान की शोभा और उर्ज्व्सिता अद्भुद है | यहाँ मन्दिर में यमुना की छोटी प्रतिमा है | यही पर पंडे ध्रार्मिक कृत्य , तर्पण आदि करते है |

यमुनोत्री (Yamunotri) यात्रा परिवहन मार्ग

यमुनोत्री (Yamunotri) के लिए ऋषिकेश के टिहरी,धरासू बस का मार्ग है | इसके बाद लगभग 10 किमी खरस्थली होकर यमुनोत्री तक अत्यंत दुर्लभ पगडंडी का मार्ग है | उत्तरकाशी अजने के लिए यहाँ से एक रोड निकलती है लेकिन यह रोड बहुत ही खराब एवं जंगल के मध्य होकर गुजरती है | पहले यह मार्ग बहुत दुर्गम था किन्तु अब राज्य सरकार की ओर से सडक बना दी गयी है जिससे बहुत सुगमता हो गयी है | यमुनोत्री (Yamunotri) से उत्तरकाशी जाने वाली सड़क पर कुछ चट्टिया पडती है जो निम्न है | यमुनोत्री (Yamunotri) से 18 किमी पर राणागाँव , 12 किमी पर कुयनरी , 18 किमी पर उपरकटी और दस-बारह किमी पर उत्तरकाशी है |

प्रमुख अनुभव

  • गर्म कपड़े लेकर जाए क्योंकि यहाँ अधिक सर्दी पडती है |
  • प्यास लगने पर झरने का पानी सीधा न पीये अन्यथा हिल डायरिया होने का भय है | कुछ मीठा पदार्थ खाकर ही पानी पीये | पानी को स्वच्छ करके इस्तेमाल में लाये |
  • यमुनोत्री (Yamunotri) , गंगोत्री , बदीनाथ एवं केदारनाथ की पुरी यात्रा करनी हो तो यमुनोत्री से प्रारम्भ रके |
  • अगर एक या दो स्थान पर ही जाना हो तो ऋषिकेश से यात्रा आरम्भ करे |
  • ऋषिकेश से यह पता करके चले कि मोटर बस कहा तक के लिए मिलेगी |
  • यात्रा का पउपयुक्त समय अप्रैल से दीपावली तक का होता है |

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