Miya Tansen Biography in Hindi
मियाँ तानसेन Tansen एक महान शास्त्रीय गायक थे | तानसेन का जन्म 1520 ईस्वी में ग्वालियर के हिन्दू परिवार में हुआ था | उनके पिता का नाम मुकुंद मिश्रा था जो स्वयं एक महान कवि थे | Tansen तानसेन ने संगीत की शिक्षा पहले स्वामी हरिदास से ली और बाद में हजरत मुहम्मद गॉस ने उन्हें संगीत सिखाया | वो पहले रेवा के राजा रामचंद्र के दरबार में एक संगीतकार थे जिसे बाद में अकबर के नवरत्नों में शामिल कर लिया गया | राजा रामचंद्र तानसेन Tansen के जाने से बहुत दुखी हुए | तानसेन भारत के इतिहास का एक प्रसिद्ध नाम बन गये और उन्होंने कई शाष्त्रीय रागों की रचना की |उनकी राग दीपक और राग मल्हार सबसे ज्यादा प्रसिद्ध थे |
तानसेन की उनके संगीत गुरु हरिदास से मुलाकात Tansen Meets Guru Haridas
तानसेन जब बड़ा हुआ तो उनको उनके पिता ने पढ़ाने के लिए कई अध्यापको को नियुक्त किया लेकिन उनको पढने के बजाय पास के जंगल में अपने दोस्तों के साथ घुमने का शौक था | जंगल में वो दोस्तों के साथ जानवरों और पक्षियों की आवाजो की नकल निकाला करते थे | एक बार एक गायकों का दल उस जंगल से गुजरा | तानसेन एक झाड़ी के पीछे छुप गया और शेर की तरह दहाड़ने की आवाज निकालने लगा | उसकी आवाज इतनी असली लग रही थी कि वो गायक बुरी तरह डर गये |
जब वो बालक उन गायकों के सामने आया तो उस दल के नेता ने तानसेन की तारीफ की कितनी सफाई से उसने शेर की आवाज निकाली | उन्होंने तानसेन को और दुसरे पशु-पक्षियों की आवाजे निकालने को कहा जिसे सुनकर उस दल का नेता बहुत प्रभावित हुआ | वो गायक दल का नेता ओर कोई नही बल्कि महान संगीत गुरु हरिदास थे | हरिदास जी ने तानसेन को अपना शिष्य बनाने का प्रस्ताव दिया और उसके पता से कहा “आपके पुत्र में संगीत की असीम प्रतिभा है ” | तानसेन की माँ ने अनिच्छा से अपने इकलौते पुत्र को हरिदास से शिक्षा लेने के लिए वृन्दावन भेज दिया |
लगभग दस सालो तक हरिदास जी ने तानसेन को संगीत की शिक्षा दी | उन्होंने तानसेन को सारेगामापा से लेकर तानपुरा बजाना तक सिखाया | तानसेन ने हरिदास से अलग अलग रागों की शिक्षा ली जिससे अलग अलग भाव निकलते थे | कुछ राग से ऐसी खुशी निकलती थी जिससे नाचने का मन हो जाता था और कुछ रागों से आँखों में आसू आ जाते थे | एक दिन तानसेन के पिता गम्भीर रूप से बीमार हो गये और तानसेन तुरंत घर पहुचा | तानसेन के पिता ने मरने से पहले अपने पुत्र को कहा “मुझे बहुत खुशी है कि तुम संगीतकार बन गये हो , अब तुम मुहम्मद घौस के पास जाओ ” | उनके पिता के यही अंतिम शब्द थे क्योंकि मुहम्मद घौस की दुआओं से तानसेन का जन्म हुआ था | तानसेन अब कुछ दिनों तब घर पर रहकर अपनी माँ की सेवा करने लगा और एक दिन उनकी भी मौत हो गयी |
मोहम्मद घौस से शिक्षा Music Education from Mohammad Ghaus
तानसेन ने अपने पिता की अंतिम इच्छा को याद करते हुए मोहम्मद घौस से शिक्षा लेने का विचार किया | अपने नये गुरु से शिक्षा लेने से पहले तानसेन अपने पहले गुरु हरिदास जी से आज्ञा लेने गया | हरिदास ने तानसेन से कहा “तुम्हे चिंता करने की कोई जरूरत नही है , तुम्हे अपने पिता की अंतिम इच्छा का सम्मान करना चाहिए और नये गुरु से शिक्षा लो , याद रखना मै तुम्हारे लिए सदैव तैयार हु जब भी तुम्हे जरूरत हो तुम मेरे पास आ जाना , तुम मेरे पुत्र की तरह हो ” | इस तरह हरिदास ने तानसेन को आशीर्वाद देकर विदा किया |
अब तानसेन तीन वर्षो तक मोहम्मद घौस से शिक्षा लेने लगे और अपनी संगीत प्रतिभा सुधारने लगे | मोहम्मद घौस उनको ग्वालियर के राजा के पास मिलाने गये | तानसेन का अब ग्वालियर दरबार में आना जाना लग गया | वो एक दिन दरबार मर हुसैनी नामक महिला से मिले जिससे तानसेन को प्यार हो गया | तानसेन ने उससे विवाह कर लिया | कुछ वर्षो बाद मोहम्मद घौस अपनी सारी धन-दौलत तानसेन के नाम कर मर गये | तानसेन का परिवार मोहम्मद घौस के घर में बस गया और वही से आगे बढ़ा |
राजा रामचन्द्र दरबार में तानसेन की नियुक्ति Tansen in Raja Ramchnadra court
एक दिन ग्वालियर के पास रेवा के दरबार से एक दूत सन्देश लेकर आया | उस दूत ने सन्देश पढ़ा “रेवा के राजा रामचंद्र तुम्हे अपने दरबार का संगीतज्ञ बनाना चाहते है ” | तानसेन के लिए ये एक सम्मान की घड़ी थी और प्रसिधी का पहला कदम था | राजा रामचन्द्र के दरबार मर तानसेन ने गाना गया और उसके गायन से खुश होकर राजा ने उसे कीमती उपहार दिए | एक बार तो राजा ने उसे हजार सोनी की अशर्फिया दी | एक दिन राजा रामचन्द्र के दरबार में अकबर को शाही मेहमान के रूप में बुलाया गया |
बादशाह अकबर तानसेन के संगीत से बहुत खुश हुए और एक दिन अकबर ने राजा रामचन्द्र को सन्देश भेजा जिसमे वो तानसेन को अपने दरबार में जगह देना चाहते थे | राजा रामचन्द्र तानसेन को नही भेजना चाहते थे लेकिन शक्तिशाली अकबर को नाराज करने का जोखिम भी नही उठा सकते थे | अकबर भारत का बादशाह था उअर रामचंद्र एक छोटे से राज्य का राजा था | इसलिए बेमन से राजा रामचंद्र ने तानसेन को शाही उपहार के रूप में अकबर के दरबार में भेज दिया |
अकबर दरबार में तानसेन Tansen in Akbar Court
तानसेन का आगरा के शाही दरबार में भव्य स्वागत किया गया | अकबर तानसेन के संगीत से इतना प्रभावित हुआ कि उसने तानसेन को प्रदेश की सबसे बड़ी उपाधि दे दी | तानसेन अकबर के नवरत्नों में से एक थे | दरबार में गाने के अलावा तानसेन अक्सर अकेले बादशाह के लिए भी गाते थे | उनकी राग से रात में अकबर को नींद आ जाती थे और कुछ मधुर रागों से बादशाह से नींद जाग जाती थी | तानसेन के संगीत की बहुत सी कहानिया मशहूर थी जिसमे उनके संगीत से पशु-पक्षी एकत्रित हो जाते थे |
एक बार बादशाह अकबर ने एक सफ़ेद हाथी को पकडवाया और उसे महल में लाकर कैद किया | वो हाथी बहुत उग्र था और किसी के बस में नही आ रहा था | जब तानसेन ने अपना संगीत सुनाया तो हाथी शांत हो गया जिससे बादशाह उस हाथी की सवारी कर पाए | अकबर ने उनके इस कार्य के लिए उन्हें कई उपहार से सम्मानित किया | बादशाह ने तानसेन को अपने महल के नजदीक रहने को घर दिया |
तानसेन का राग दीपक और अकबर के दरबार में आग Tansen Raag Deepak and Fire in Akbar Court
एक दिन अकबर ने दरबार में तानसेन Tansen को राग दीपक सुनाने को कहा | तानसेन ने राग दीपक गाने से मना कर दिया क्योंकि उसने बताया कि इस राग से दरबार में तबाही फ़ैल जायेगी | फिर बहे अकबर नही माना और वो तबाही को अपनी आँखों से देखना चाहते थे | तानसेन ने राग दीपक गाना शूरू किया | पहले तो दरबारियों को पहले दरबार में गर्मी महसूस हुयी और तभी अचानक दरबार के सारे दिए जल पड़े | उन दीयों की आग इतनी तेज थी कि दरबार के पर्दे जलना शूरु हो गये और दरबार में आग लग गयी | सभी दरबारी इधर उधर भागने लगे कि अब वो क्या करे |
Tansen तानसेन की बेटी भी गाने में निपुण थी | किसी ने सुझाव दिया कि तानसेन की बेटी को बुलाकर दरबार को ठंडा किया जा सकता है | तानसेन की बेटी को तुरंत बुलाया गया और उसने मेघ मल्हार राग गाना शुरू कर दिया | हैरानी की बात हैकि कुछ देर बाद बारिश होने लग गयी और पुरे दरबार में ठंडक छा गयी और आग बुझ गयी | इस तरह तानसेन ने कई रागों को इजात किया | इसके अलावा उन्होंने राग दरबारी की भी रचना की और ध्रुपद संगीत को भी जन्म दिया | आज भी शास्त्रीय घराना अपने आप को मियाँ तानसेन का वंशज मानता है |
तानसेन का परिवार Tansen Family
Tansen तानसेन के चार पुत्र तानरस खान , बिलास खान , हमीरसेन और सुरतसेन और एक पुत्री सरस्वती देवी थी | उसके सभी पुत्र और पुत्री संगीतकार थे | सरस्वती देवी ने इस्लाम धर्म कबूल कर अपना नाम हुसैनी रख दिया था | उसने बाद में किशनगढ़ के राजा समोखन सिंह राठोड के पौत्र नौबत खान उर्फ़ अली खान करोरी से विवाह किया | अली खान उस वक़्त आगरा में मुगल सलतनत के वित्त मंत्री थे | अकबर ने उसे खान की पदवी और कारोरी उपनाम दिया था | अली खान को बाद में मुगल बादशाह जहांगीर ने नौबत खान नाम दिया | तानसेन के पुत्र बिलास खान ने तानसेन की मौत के बाद राग बिलक्षनी की रचना की | Tansen तानसेन के रक्त वंशज सेनिया घराना को माना जाता है जो कई सदियों से संगीत की ख्याति को बनाये हुए है | उनके अंतिम जीवित वंशज इम्तिआज अली खान और शब्बीर खान है |
तानसेन की मृत्यु Tansen Death
तानसेन की मौत 1586 में हुयी और अकबर उनकी मौत पर बहुत दुखी हुआ कि उन्होंने एक महान संगीतज्ञ जी खो दिया | Tansen मियाँ तानसेन को ग्वालियर में दफन किया गया जहा आज भी उनकी कब्र मौजूद है | हर वर्ष उनकी तानसेन की कब्र के नजदीक एक संगीत महोत्सव का आयोजन होता है | उनकी कब्र के पास एक इमली का पेड़ है जो उतना ही पुराना है जितनी वो कब्र पुराणी है | ऐसा माना जाता है कि जो भी उस इमली के पेड़ के पत्ते चबाता है उसे संगीत प्रतिभा में बरकत मिलती है | आज भी ये इस बात पर संदेह है कि तानसेन ने इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया या नही | अकबर ने उसकी प्रतिभा से प्रसन्न होक उन्हें मिया का ख़िताब दिया था |
मित्रो अगर आपको Miya Tansen Biography in Hindi पसंद आयी हो तो Miya Tansen Biography in Hindi के बारे में अपने सुझाव और कमेंट देना ना भूले ताकि इतिहास के कुछ ओर कलाकारों के बारे में आपको बता सके |
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