The Making of Mahabharata TV Serial 1988

महाभारत के लिए बी.आर.चोपड़ा ने जब सोचना शुरू किया तो वो पहले महाभारत पर फिल्म बनाना चाहते थे लेकिन उनको पता था कि महाभारत इतनी विशाल है और इसमें इतने पात्र है कि केवल 3 घंटे में इस फिल्म को सही रूप से पेश कर पाना असम्भव है | तब उन्होंने टीवी माध्यम का चुनाव किया | सतीश भटनागर ने महाभारत पर रिसर्च करना शुरू कर दिया और देश भर के अलग अलग पुस्तकालयों की किताबे पढना शुरू किया |उन्होंने उर्दू कवि डा.राही मासूम रजा को इसकी स्क्रिप्ट लिखने को कहा और मुस्लिम होते हुए भी उन्होंने बहुत सुंदर स्क्रिप्ट लिखी थी और हिंदुस्तान के भूतकाल की कहानी को वर्तमान की कहानी से जोड़ने का काम किया |
बी.आर.चोपड़ा के पुत्र रवि चोपड़ा ने निर्देशन की बागडोर संभाली | उन्होंने समाचार पत्रों में कलाकारों के लिए विज्ञापन दिया जिसमे दस हजार से भी ज्यादा लोगो ने महाभारत में काम करने के लिए पत्र लिखे | अब महाभारत के लिए वो ऐसे पात्रो का चुनाव करना चाहते थे जो फिल्मो या टीवी पर कभी नहीं आये हो | इस काम के लिए उन्होंने शकुनी का किरदार निभाने वाले गुफी पेंटल को इस काम के लिए सौंपा जो उस समय जाने माने असिस्टेंट डायरेक्टर और कास्टिंग डायरेक्टर थे |
Casting of king Bharat and Shantanu

गुफी पेंटल ने कलाकारों के कई ऑडिशन करवाए लेकिन उनको शूरु में कोई दमदार कलाकार नही मिला क्योंकि उन्हें शुद्ध हिंदी बोलने वाले कलाकार नही मिल पाए | इसी कारण पहले एपिसोड में उस समय के जाने माने अभिनेता राज बब्बर को राजा भरत का किरदार दिया था | इस तरह गुफी पेंटल के ऑडिशन से अब किरदारों का मिलना शुरू हो गया था | लगभग 1500 लोगो का स्क्रीन टेस्ट लिया गया था जिसको पूरा करने में लगभग आठ महीने लगे थे | अब शांतनु के किरदार के लिए उन्हें एक शांत और रोमांटिक आदमी की जरूरत थी जो उनको ऋषभ शुक्ला में दिखा | ये किरदार तो उन्होंने निभा दिया अब उनको भीष्म का किरदार चाहिए था | भीष्म के किरदार के लिए पहले मुकेश खन्ना के स्थान पर किसी ओर को लिया गया था लेकिन उस कलाकार ने अंतिम मौके पर मना कर दिया गया था तब भीष्म के किरदार के लिए मुकेश खन्ना को बुलाया गया |
भीष्म पितामह के किरदार का चयन Casting of Bhisma Role

अब महाभारत में एक ऐसे दमदार कलाकार की जरूरत थी जो पुरी महाभारत में एक प्रभावशाली अभिनय कर सके | उस किरदार का नाम था भीष्म जिसके उपर पुरे महाभारत की कहानी टिकी हुयी थी | अब मुकेश खन्ना को जब गुफी पेंटल ने पहली बार बुलाया तो मुकेश खन्ना ने पूछा “कौनसा रोल दोगे ” | गुफी ने उनको कर्ण या अर्जुन का किरदार देने को कहा | जब बी.आर.चोपड़ा ने गुफी से बात की तो गुफी ने मुकेश खन्ना को कहा “चोपड़ा साहब तो तुम्हे दुर्योधन का किरदार देना चाहते है ” लेकिन मुकेश खन्ना ने नेगेटिव रोल के लिए मना करते हुए कहा “मेरे अंदर से विलेन नही निकलता है “| अब कर्ण का रोल पंकज धीर और अर्जुन का रोल फेरोज खान को मिल गया था इसलिए अब मुकेश खन्ना के लिए अब दोनों किरदार भी नही रहे | अगली बार जबी मुकेश खन्ना को फिर गुफी ने बुलाया और द्रोणाचार्य का किरदार देने को कहा और वो द्रोणाचार्य के लिए राजी हो गये थे |
जब मुकेश खन्ना के घर वालो को पता चला कि वो द्रोणाचार्य का रोल कर रहे है तो उनके घरवालो ने कहा “तू पागल हो गया है क्या , दुर्योधन जैसा किरदार छोडकर द्रोणाचार्य का किरदार कर रहा है ” लेकिन वो अपनी बात पर अड़े रहे | अब मुकेश खन्ना द्रोणाचार्य बनकर मुहूर्त में शामिल हो गये थे अब सेट पर भरत का किरदार निभा रहे राज बब्बर ने पूछा “मुकेश ,आप क्या कर रहे हो ” | मुकेश खन्ना ने कहा “अभी तक तो द्रोणाचार्य हु ” | अब उस समय भीष्म का किरदार उस समय हिंदी सिनेमा के जाने माने कलाकार विजेंद्र घटगे कर रहे थे लेकिन जब उनको पता चला कि उनको इस सीरियल में लम्बे समय तक एक वृद्ध आदमी का किरदार निभाना पड़ेगा तो अंत में उन्होंने मना कर दिया | अब मुकेश खन्ना को अंतिम मौके पर द्रोणाचार्य के स्थान पर भीष्म के कपड़े पहनाकर देखा गया कि अगर ये इस रोल में फिट हो सके | और उनका भीष्म के किरदार के लिए चयन हो गया जिससे उनके जीवन में एक नया मोड़ आ गया था |
दुर्योधन के किरदार का चयन Casting of Duryodhan Role

अब बी.आर.चोपड़ा को दुर्योधन की तलाश थी | उस समय पुनीत इस्सर ने कुछ फिल्मे की थी लेकिन 1983 में कुली फिल्म में हुए हादसे की वजह से उनका स्टारडम गिर गया था | अब पुनीत जब बी.आर.चोपड़ा के पास ऑडिशन के लिए आये तो उनकी कद काठी देखकर उन्होंने पहले पुनीत को भीम का रोल देने का विचार किया | पुनीत इस्सर भीम बनने के इच्छुक नही थे क्योंकि वो फाइटर से हटकर अपनी छवि बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने दुर्योधन का किरदार देने को कहा ताकि वो वो एक फाइटर की छवि से हटकर एक अच्छे अभिनेता के रूप में पेश आये | लेकिन चोपड़ा साहब उनको इस किरदार देने में इच्छुक नही थे |
एक दिन राही मासूम रजा ने पुनीत इस्सर को बुलाकर कहा “ये तो तुम्हारा सौभाग्य है कि तुम्हे एक हीरो का ऑफ़र दिया है और तुम मना कर रहे हो , सभी लोग यहाँ हीरो बनने आ रहे है और तुम विलेन बनना चाहते हो “| पुनीत ने जवाब दिया “ये परोक्ष में था प्रत्याक्ष में था ” मतलब इस रोल से उनकी काबिलियत चुप जायेगी | चोपड़ा साहब ने पुनीत इस्सर को कहा “बेटे , इसमें आपको हिंदी बोलनी पड़ेगी और डायलॉग बहुत होंगे ” |पुनीत ने सबके लिए हां कर दिया और उन्होंने चोपड़ा साहब को 15-20 मिनट तक लगातार हिंदी में डायलॉग सुनाये जिसे सुनकर चोपड़ा साहब बहुटी प्रभावित हुए और बोले “यही मेरा दुर्योधन है ” | पुनीत का दुर्योधन के लिए चयन हो गया लेकिन फिर भीम के किरदार के लिए समस्या हो गयी |
Casting of Bhima and Balram Role

अब भीम के लिए उनको पुनीत इस्सर से भी बड़े और भारी किरदार की जरूरत थी | चोपड़ा साहब ने प्रवीण कुमार के बारे में सुन रखा था जिन्होंने एशियाई खेलो में तश्तरी फेंक प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल जीते थे और उनकी कद काठी भी पुनीत इस्सर से बेहतर थी | पुनीत इस्सर ने भी प्रवीन कुमार को भीम के किरदार के लिए चोपड़ा साहब को आग्रह किया | प्रवीन कुमार इससे पहले हिंदी फिल्मो लोहा और शंहशाह में काम कर चुके थे जिनमे उन्होंने विलेन का किरदार निभाया था | अब भीम के किरदार के लिय प्रवीण कुमार का चयन हो गया और सागर सालुंके जो पहले भीम के लिए चुने जाने वाले थे उनको बलराम का किरदार दे दिया गया |
Casting of Krishna Role

अब श्रीकृष्ण के किरदार का चयन करना था | “Mahabharat ki Mahabharat” में तीन लोगो का स्क्रीन टेस्ट बताया गया था जिसमें अजीब दिखने वाले गजेन्द्र चौहान , दुसरे मीठे बोलने वाले ऋषभ शुक्ला और तीसरे सीनपर घने बाल व बड़ी मुछो वाले नितीश भरद्वाज ऑडिशन में शामिल थे | 70 और 80 के दशक में कई फिल्मो में कृष्ण का किरदार निभाने राकेश पांडे को भी इस किरदार के लिए चुनने का विचार किया था | नितीश भरद्वाज को पहले विदुर का किरदार दिया जाना था लेकिन रवि चोपड़ा ने उनको विदुर के बहुत कम उम्र का माना था | अब नितीश भरद्वाज ने दुसरी बार पुरी बी.आर.चोपड़ा टीम के सामने स्क्रीन टेस्ट दिया और उनका कृष्ण के किरदार के लिए चयन हो गया क्योंकि उनकी हिंदी पर पकड़ बहुत अच्छी थी |
Casting of Yudhistir and Draupadi

अब कृष्ण का चयन हो जाने के कारण गजेन्द्र चौहान को युधिष्ठिर का किरदार दिया गया | गजेन्द्र चौहान की कृष्ण का किरदार निभाने की बहुत इच्छा थी लेकिन रवि चोपड़ा के अंतिम निर्णय पर नितीश भरद्वाज का चयन हो गया था | अब द्रौपदी के किरदार की बारी आती है | चोपड़ा साहब के लिए द्रौपदी के किरदार के लिए रूपा गांगुली पहली पसंद नही थी | वो पहले जूही चावला को द्रौपदी का किरदार देना चाहते थे लेकिन उसी साल जूही चावला को पहली सुपरहिट फिल्म “कयामत से कयामत तक ” मिल गयी थी जिसने जूही चावला को रातो रात स्टार बना दिया था | अब रूपा गांगुली के चयन की बारी आयी जो पहले भी कुछ धारावाहिकों में अभिनय कर चुकी थी और उनका चयन द्रौपदी के किरदार के लिए कर लिया गया |
Casting of Shakuni
अब गुफी पेंटल को कोई आईडिया नही था कि शकुनी का किरदार कौन निभाएगा | गुफी ने इस किरदार के लिए कई लोगो का ऑडिशन लिया लेकिन उन्हें कोई दमदार कलाकार नही मिला | गुफी ने चोपड़ा साहब से पूछा “अगर आपको कोई आपति ना हो तो क्या मै शकुनी का किरदार निभा लू “| चोपड़ा साहब ने तुंरत राजी हो गये क्योंकि उनमे वैसा किरदार नजर आता था | जब सारे कलाकारों का चयन हो गया तो अब एक सूत्रधार की आवश्यकता थी जो इस कथा का वर्णन करे | अब समय के किरदार का चयन करना था जिसके लिए दमदार आवाज की जरूरत थी |
Casting of Samay
अब समय के लिए पहले दिलीप कुमार और NT Rama Rao को चुनने का विचार किया गया था लेकिन चोपड़ा साहब कुछ नई आवाज को लाना चाहते थे | अब चोपड़ा साहब एक जाने माने voiceover artist हरीश भिमानी पर आकर रुक गये थे जिन्होंने कई प्रसिद्ध विज्ञापनों में आवाज दे रखी थी | इस तरह हरीश भिमानी को समय के लिए चुन लिया गया |पहले ही एपिसोड में समय ने लोगो का मन मोह लिया जिसमे कहा गया था “मै इस कथा को इतिहास की तरह गुजरते हुए देखता हु ” |
Shooting of Mahabharata

अब प्रोडक्शन टीम में 100 से भी ज्यादा आदमी , 2000 पृष्ठों की स्क्रिप्ट और 2 साल तक लगातार शूटिंग की गयी जिसके बारे में चोपड़ा साहब ने कभी नही सोचा था | प्रोडक्शन नियंत्रक किशोर मल्होत्रा ने बताया कि महाभारत को बनाने में 9 करोड़ रूपये की लागत लगी थी और हर एपिसोड की लागत 10 लाख के आस पास थी जिस उस समय के लिए बहुत बड़ी रकम थी | महाभारत की अधिकांश शूटिंग मुम्बई फिल्म सिटी में हुयी थी | कुरुक्षेत्र युद्ध के लिए 15 दिनों तक जयपुर में शूटिंग की गयी थी जहा पर हजारो लोगो को दैनिक आमदनी के हिसाब से रणभूमि तैयार करने के लिया जाता था |उस समय टेक्नोलॉजी उतनी विकास पर नही थी फिर भी इस टीम ने कई स्पेशल इफेक्ट्स देकर लोगो को चकित कर दिया | उस समय मुकुट भी लगभग 2 किलो तक का होता था |
Ad Income from Mahabharata
भारतीय जनता में ये सीरियल दिलो में बस गया था | ऐसा माना जाता है कि दूरदर्शन ने इस सीरियल के दौरान 65 करोड़ रूपये विज्ञापन से कमाए थे जिसमे एक दस मिनट के विज्ञापन की कीमत शुरवात में लगभग 65000 रूपये होती थी जो बाद में बढकर 1 लाख हो गयी थी | इसके मुकाबले रामायण को एक विज्ञापन से 70000 से ज्यादा कभी नही मिले | वैसे देखा जाए तो रामायण के कारण ही महाभारत को यश मिला था | महाभारत से लोगो की धार्मिक और सामजिक भावनाए भी जुड़ गयी थी | महाभारत में रामायण के मुकाबले रिश्तो के ज्यादा रूप देखने को मिले | जहा रामायण में राम और हनुमान जैसे किरदारों को प्रसिधी मिली तो महाभारत में हर पात्र को अपना अभिनय दिखाने का पूरा मौका मिला और इस नाटक से कई कलाकारों का भविष्य उज्ज्वल हुआ था |
Actors After Mahabharata Serial

द्रोणाचार्य का किरदार निभाने वाले सुरेन्द्र पाल भी महाभारत को उनकी नीव का पत्थर मानते है जिसके कारण उन्हें चाणक्य और चन्द्रकान्ता जैसे बड़े सीरियल में काम करने का मौका मिला था | इसके बाद उन्होंने खुद की भोजपुरी प्रोडक्शन कम्पनी डाली जिसका नाम द्रोणाचार्य फिल्मस था | सुरेन्द्र पाल आज भी कई पौराणिक सीरियल जैसे देवो का देव और सुर्यपुत्र कर्ण में नजर आते है |
पुनीत इस्सर भी महाभारत के बाद एक मंझे हुए अभिनेता के रूप में उभर कर आये और उन्हें भी कई बड़ी फिल्मो जैसे “सनम बेवफा” और “राम जाने” में काम करने का मौका मिला | कर्ण का किरदार निभाने वाले पंकज धीर के पास भी फिल्मो की बाढ़ लग गयी और उन्होंने भी 150 से ज्यादा फिल्मे की | जी हॉरर शो के पहले ही एपिसोड के लिए उनका चयन किया गया था जो काफी सफल रहा | इसके बाद गुफी पेंटल ने भी कई फिल्मो में काम किया |
युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेन्द्र चौहान एक बार कार में कही जा रहे थे और जब सिग्नल पर रुके तो किसी ने उन्हें कहा “सब कुछ तो जुए में हार गये हो , अब क्या द्रौपदी की गाडी लेकर घूम रहे हो क्या ?” | इस तरह महाभारत के कलाकारों के साथ खूब वाकिये हुए |अर्जुन का किरदार निभाने वाले फिरोज खान तो अपने किरदार में इतने खो गये थे कि उन्होंने अपना नाम ही अर्जुन रख दिया | उन्होंने ये किरदार निभाने के बाद कहा कि “कौन कहता है कि गीता सिर्फ हिन्दुओ के लिए है ” | मुस्लिम होते हुए भी उन्होंने अर्जुन के किरदार को जीवंत किया था और पुरा गीता सार सुना था | महाभारत के बाद उन्होंने भी 150 से ज्यादा फिल्मे की |
नितीश भरद्वाज के लिए थोड़ी समस्या हो गयी कि उनको कोई कृष्ण के अलावा कोई किरदार नही देता था फिर भी उन्होंने अपने किरदार से हटकर भी अभिनय किया | अब वो जल्द ही ऋतिक रोशन की मोहनजोदड़ो फिल्मे में नजर आयेंगे |इसके साथ ही उन्होंने मराठी फिल्मे बनाना शुरू कर दिया |द्रौपदी का किरदार निभाने वाली रूपा गांगुली ने ज्यादा काम नही किया और कुछ फिल्मे करने के बाद वापस कोलकाता लौट गयी |
भीष्म पितामह का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना ने अपनी खुद की कम्पनी बना दी जिसका नाम भीष्म इंटरनेशनल रखा | महाभारत के बाद उउन्होंने लगभग 60 फिल्मे की लेकिन वो अपने “भीष्म पितामह” की छवि से नही निकल पाने के कारण निराश हो गये थे और उन्होंने भीष्म इंटरनेशनल बैनर के तले उन्होंने 1997 में शक्तिमान बनाया जो बच्चो में बहुत पोपुलर रहा | मुकेश खन्ना को जब भी किसी इवेंट में बुलाया जाता है तो वो अपने दोनों अवतारों की चर्चा करते है जिसमे एक किरदार बडो के लिए और एक किरदार बच्चो के लिए होता है|
मुकेश खन्ना का ये भी कहना है कि जब भी कोई उनसे मिलता है तो उनके मुह से “आयुष्मान भव ” निकल ही जाता है | धृतराष्ट्र का किरदार निभाने वाले गिरिजा शंकर भी महाभारत के बाद अलिफ़ लैला में नजर आये और इसके बाद उन्होंने खुद की कंपनी खोल दी | भीम का किरदार निभाने वाले प्रवीण कुमार ज्यादा नजर नही आये और उन्होंने कुछ भोजपुरी फिल्मे की |
जब महाभारत को दुबारा एकता कपूर ने बनाया तो महाभारत के सभी कलाकारों ने उसकी आलोचन की और कहा कि “”एकता कपुर की महाभारत में पात्र नही बल्कि सिक्स पैक वाले पहलवान भर दिए ” | ये शो बुरी तरह पिटा और 9x चैनल भी बंद हो गया | महाभारत के सभी किरदारों ने एक बार फिर “बार्बरिक ” फिल्म में काम किया लेकिन इसके बारे में कोई खबर नही लगी |इस तरह महाभारत की महाभारत खत्म हुयी |
महाभारत में ओर भी कई किरदारों का अहम रोल था जिनके चयन में ज्यादा कठिनाई नही हुयी इसलिए उनके बारे में विस्तार से नही बताया | मित्रो फिर भी अगर हम महाभारत के किसी पंसदीदा किरदार के बारे में विस्तार से नही बता पाए तो क्षमा करे |तो मित्रो अगर आपको हमारा लेख पसंद आया तो अपने विचार जरुर कमेंट में लिखे और महाभारत के पसंदीदा पात्र का नाम लिखकर कमेंट में जरुर लिखे | जैसे #BhishmaMahabharat
Comments
Post a Comment