The Seventh Voyage of Sinbad the Sailor अब सिंदबाद ने सातवी समुद्री यात्रा की कहानी सुनाई | तो मै छठी यात्रा से थका हारा लौट आया लेकिन अब बहुत हो गया था | अब मैंने सोच लिया था कि अब वापस कभी समुद्री यात्रा पर नही जाऊँगा लेकिन मेरा भाग्य मेरा पीछा नही छोड़ रहा था | एक दिन मेरे घर पर एक आदमी आया और कहने लगा कि खलीफा ने मुझे बुलाया है | अब खलीफा के यहा गया और उनको अभिवादन किया | उन्होंने मेरा अभिवादन स्वीकार किया और कहा “मुझे तुमसे एक काम है , क्या तुम करोगे ?” | मैंने कहा “आपका गुलाम आपकी क्या मदद कर सकता है ” | खलीफा ने कहा “”मेरी इच्छा है कि तुम सरनदीप राजा के वापस जाओ और मेरी तरफ से कुछ तोहफे उन्हें भेंट करो ” |
ये सुनकर मै काँप गया और कहा “ए खुदा , मै अब समुद्री याताओ से नफरत करने लगा हु और जब भी कोई मुझे समुद्री यात्रा के लिए बोलता है मेरी रूह काँप उठती है , पिछली यात्राओ की मुसीबतों को देखते हुए मैंने बगदाद से बाहर नहीं निकलने की कसम खाई थी ” | मैंने खलीफा को अपनी पिछली समुद्री यात्राओ की मुसीबते बताई तो उन्होंने कहा “वास्तव मे सिंदबाद तुम बहुत बहादुर हो , इसलिए तो मैंने तुम्हे बुलाया है , मेरे खातिर एक अंतिम बार समुद्री यात्रा कर ये तोहफे उन तक पंहुचा दो , तुम एक बार वापस लौट आओ फिर मै कभी तुम्हे समुद्री यात्रा पर नही भेजूंगा “| अब मै अपने खलीफा की बात कहा टाल सकता था और उनके खर्चे पर उपहार लेकर यात्रा के लिए तैयार हो गया |
मै एक जहाज में दुसरे व्यापारियों के साथ रवाना हो गया | कुक दिनों तक समुद्री यात्रा करने के बाद हम सरनदीप के द्वीप पर पहुचे | मै तुरंत राजा के पास गया और उन्हें उपहार सौपे | उन्होंने मुझे देखते ही पहचान लिया और मेरा स्वागत करते हुए कहा “ओ सिंदबाद , तुम्हे देखे काफी समय हो गया , अल्लाह ने हमे दूसरी बार मिला ही दिया ” | उन्होंने मुझे उनके नजदीक बिठाया और सफर की बाते की | उन्होंने अपने खलीफा को तोहफे के लिए धन्यवाद देने को कहा | राजा ने मुझे कई तोहफे देकर वापस भेजा और मै वापस अपने जहाज पर सवार हो गया |
वापस लौटते वक़्त हमारे जहाज पर समुद्री लुटेरो ने हमला कर दिया | उन्होंने हमारे जहाज को चुरा लिया और हमे गुलाम बनाकर एक टापू पर बेच दिया | एक अमीर आदमी ने मुझे खरीद लिया और वो मुझे घर लेकर गया | उन्होंने मेरे साथ गुलामो वाला बर्ताव नही किया बल्कि अच्छा व्यवहार किया | एक मेरे मालिक ने मुझसे पूछा “क्या तुम कोई कला या व्यापार करना जानते हो ” | मैंने बताया कि मै एक व्यापारी हु और समुद्री व्यापार के अलावा कुछ नही जानता | उसने मुझसे कहा “क्या तुम धनुष बाण चलाना जानते हो ?” | मैंने कहा “हां ,बचपन में सिखा था लेकिन बाद में कभी काम नही आया लेकिन मै आपके लिए क्या कर सकता हु ” | अब वो धनुष बाण लेकर मुझे हाथी पर बिठाकर एक जंगल में ले गया | वहा पर एक मुझे एक विशाल पेड़ पर बैठने को कहा और कहा “तुम यहा पर छुपकर बैठो और जब भी कोई हाथी आये तो तुम उन पर बाण चलाओ , अगर तुम उनमे से एक भी मार पाओ तो मुझे बता देना “|
मैने ऐसा काम जिन्दगी में पहले कभी नही किया था फिर बहे डरते हुए उस पेड़ पर बैठ गया और हाथियों का इंतजार करने लगा | शाम ढलते ही कुछ हाथियों का झुण्ड उधर से गुजरा , मैंने बाण चलाना शूरु किया और बड़ी मुश्किल से एक हाथी को मार गिराया | मै तुरंत जाकर अपने मालिक को ये सुचना दी और मेरे मालिक मेरे काम से बहुत प्रस्सन हुए | मेरे मालिक ने बताया कि वो इन मरे हुए हाथियों को एक गड्डे में डाल देते है और जब इनका शरीर गल जाता है तो इनके दांतों और हड्डियों को बेचकर काफी धन कमाते है | अब इस तरह मै रोज अपने मालिक के लिए हाथियों को मारने लगा |
एक दिन जब मै पेड़ पर बैठा हुआ हाथियों को तीर मार रहा था ,एक हाथी ने मुझे देख लिया | उस हाथी के साथ दुसरे हाथी भी मेरे पेड़ के नजदीक आये और उस पेड़ को जोर से हिलाना शूरू कर दिया | मै उस पेड़ पर अपना संतुलन खो बैठा और नीचे उन हाथियों के झुण्ड के बीच गिर गया | मुझे लगा कि आज तो मेरा अंतिम सफर खत्म हो जाएगा | तभी एक विशाल हाथी ने मुझे उसकी सूंड में उठा लिया और मुझे एक अनजान जगह पर ले जाकर पटक दिया | मै बेहोश हो गया था और उसके बाद सभी हाथी वहा से चले गये | कुछ देर बाद जब मुझे होश आया तो अपने आस पास मुझे हाथीयो की हड्डिया दिखाई दी | ऐसा लगता था कि हाथियों को मरने के बाद इसी जगह पर लाया जाता था |
हाथियों के प्रहार से मेरा शरीर टूट गया था फिर भी हिम्मत करते हुए मै अपने मालिक के घर पंहुचा | मेरा मालिक मेरी हालत देखकर घबरा गया और कहने लगा “खुदा का शुक्रिया है , जो तुम जिन्दा हो , जब तुम शाम तक वापस नही लौटे तो मै उस पेड़ पर तुम्हे देखने आया लेकिन तुम कही नजर नही आये , मैंने सोचा कि तुम्हे हाथियों ने मार दिया होगा , अब तुम बताओ कि तुम्हारे साथ क्या हुआ ” |मैंने उसे सारी घटना सुनाई और मै उनको उस जगह पर लेकर गया जहा मुझे हाथियों ने गिरा दिया था | मेरा मालिक वहा पर हाथीदांत और हाथियों की हड्डिया देखकर काफी प्रस्सन हुआ | अब वो सारे हाथीदांत को लेकर वापस मेरे साथ घर लौट आया |
उन्होंने मुझको धन्यवाद दिया और कहा “तुमने मुझे सही दिशा दिखाई है , मै बेवजह हाथियों को मरवाता था जबकि हाथी तो खुद उस जगह पर अपनी कब्रगाह बना रखी थी , खुदा मुझे माफ़ करे , तुम्हारे इसी नेक काम के लिए मै तुम्हे आजाद करता हु ” | मैंने अपने मालिक को कहा “भगवान आपको भी इस नर्क से आजाद करे ,अब मै वापस अपने वतन लौटना चाहता हु “| मालिक ने कहा “मै तुम्हे ऐसे ही नही जाने दूंगा , तुम कुछ हाथीदांत ले जाओ और इनसे व्यापार करना , मै तुम्हे यही इनाम दे सकता हु ” | मै उनकी बात मान गया और एक दिन कुछ दुसरे व्यापरियों के साथ वापस जहाज में बैठ गया | अब मैने उन हाथीदांतों को बेचकर खूब धन कमाया और वापस बगदाद लौट आया | मैंने खलीफा को भी अपनी पुरी कहानी सुनाई और उन्होंने मेरी कहानी स्वर्ण अक्षरों में लिखवाई | इस तरह मेरी सातो यात्राये खत्म हुयी |
जब सिंदबाद जहाजी ने अपनी कहानी खत्म की तो उसने सिंदबाद हमाल को 100 सोने की अशर्फिया देते हुए कहा “क्या तुमने इससे पहले ऐसी दर्दनाक और खतरनाक किस्सा सुना है , अगर पता हो तो मुझे बताओ ” | सिंदबाद हमाल ने कहा “आप महान है मेरे मालिक , ऐसी भयानक घटनाये मैंने जीवन में कभी नही सूनी , अल्लाह आपको खूब बरकत दे ” | अब सिंदबाद जहाजी ने उसे अपना साथी बना लीया और दिन रात उसके साथ रहता था |
- सिंदबाद जहाजी की पहली समुद्री यात्रा The First Voyage of Sinbad the Sailor
- सिंदबाद जहाजी की दुसरी समुद्री यात्रा The Second Voyage of Sinbad the Sailor
- सिंदबाद जहाजी की तीसरी समुद्री यात्रा The Third Voyage of Sinbad the Sailor
- सिंदबाद जहाजी की चौथी समुद्री यात्रा The Fourth Voyage of Sinbad the Sailor
- सिंदबाद जहाजी की पांचवी समुद्री यात्रा The Fifth Voyage of Sinbad the Sailor
- सिंदबाद जहाजी की छठी समुद्री यात्रा The Sixth Voyage of Sinbad the Sailor
तो दोस्तों अगर आपको सिंदबाद की सातो समुद्री यात्राओ की कहानिया पसंद आयी हो तो कमेंट में अपने विचार लिखना ना भूले | सिंदबाद की कहानियों में आपको अधिकतर किस्से काल्पनिक लगे होगे और हो भी सकते है लेकिन सिंदबाद से हमे ये सीख मिलती है कि “भगवान भी उन्ही की मदद करता है जो खुद की मदद करता है ” | सिंदबाद ने मुश्किल से मुस्किल हालतों में बहादुरी से काम लिया और भाग्य ने भी हर बार उसका साथ दिया | मित्रो सिंदबाद के इस किस्से को सही रूप से हिंदी में पेश करने के लिए कई ब्लॉग और विशेषत अलिफ़ लैला का धन्यवाद करता हु जिनकी वजह से ये मै लिख पाया हु | इन्टरनेट के इतिहास में पहली बार सिंदबाद के सातो समुद्री यात्राओ के किस्से को हमने हिन्दी में उभारा है |तो मित्रो जल्द आपके लिए अरेबियन नाइट्स को ओर किस्से पेश करेंगे तब तक के लिए खुदा हाफिज और दोनों हाथ जोडकर राम राम
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