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मणिपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Manipur Tour Guide in Hindi

मणिपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Manipur Tour Guide in Hindi
मणिपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल | Manipur Tour Guide in Hindi

भारत के पूर्वी सीमा पर स्थित मणिपुर (Manipur) को प्रकृति ने अपार नैसर्गिक सुन्दरता से सजाया है | मणिपुर (Manipur) में आदिवासी एवं गैर आदिवासी संस्कृति का मिलाजुला रूप देखने को मिलता है | मणिपुर की सीमा म्यांमार (बर्मा) से मिली होने की वजह से यह सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है | पंडित जवाहरलाल नेहरु ने मणिपुर को “पूर्व का मणि” कहा था | इस पुरे प्रदेश पर यदि विहंगम दृष्टि डाली जाए तो यह ऊँचे ऊँचे पहाड़ो के साए सदृश्य नजर आता है |
मणिपुर (Manipur) का मौसम दक्षिण-पूर्वी मानसून से प्रभावित होता है यहाँ दिसम्बर से फरवरी शीत ऋतू , मार्च से अप्रैल पूर्व मानसून , मई से सितम्बर तक मानसून तथा अक्टूबर से नवम्बर उत्तर मानसून रहता है | कला और संस्कृति की दृष्टि से मणिपुर महत्वपूर्ण राज्य है | रासलीला यहाँ का शास्त्रीय नृत्य है | इसके अलावा आदिवासी लोकनृत्य में मणिपुर के आदिवासी समाज के जीवन , रहन-सहन और परम्पराओं की झलक दिखती है |
नीले पहाड़ो , घने जंगलो से घिरी वादी में बसा मणिपुर (Manipur) सांस्कृतिक दृष्टि से भी सम्पन्न है | इसकी वादी जहां कश्मीर वादी की याद दिलाती है वहां मार्शल आर्ट नृत्य केरल की याद दिलाता है |दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए मणिपुर भारत का मुख्य द्वार कहा जा सकता है |

मणिपुर (Manipur) का इतिहास

महाभारत और भविष्य पुराण में मणिपुर का उल्लेख है | अर्जुन-चित्रांगदा का मिलन यही हुआ था किन्तु आज के मणिपुर में भक्तिधारा तब प्रवाहित हुयी जब यह वैष्णव मत के सम्पर्क में आया | बाहरी आक्रमण की चिंता से घिरे रहने वाले मणिपुर के लिए वैष्णव मत का सम्पर्क ताजा हवा के झोंके की तरह था | वैष्णव मत के साथ यहाँ भक्ति धारा के सोते फुट पड़े |
मणिपुर के राजा कियाम्बा ने असम-बंगाल में प्रचलित वैष्णव मत अंगीकार किया | उसके बाद इस मत को वहां राजाश्रय मिला | 17वी शताब्दी में मणिपुर के राजा राजश्री भाग्यचन्द्र के समय से रासलीला परंग में राधा-कृष्ण और गोपियों के प्रसंग को विविध रंगो और रूपों में प्रस्तुत किया जाता है | इसमें एक अध्यात्मिक रूप का प्राधान्य रहता है | रासलीला में आम लोगो की आस्था अत्यंत गहरी है |
चैतन्य महाप्रभु इसके प्रेरणास्त्रोत है |आज मणिपुरी नृत्य विश्वमंच का सर्वाधिक प्रतिष्टित नृत्य है | इंफाल में जवाहरलाल नेहरु नृत्य आकादमी में मणिपुरी नृत्य की नियमित कक्षाए होती है | देश-विदेश से आये पर्यटक यहाँ मणिपुरी नृत्य अवश्य देख सकते है |

इम्फाल का प्राचीन नाम है यमुफाल

मणिपुर (Manipur) में जहां दस हजार फुट से अधिक ऊँचे पहाड़ है वही सुंदर वादियाँ भी है | ऐसी वादी में बसा है इंफाल जो मणिपुर (Manipur) की राजधानी है | इंफाल मणिपुर का सबसे बड़ा शहर है | यह राज्य के लगभग बीचोबीच घाटी के मैदानी क्षेत्र में बसा हुआ है | इंफाल “यमुफाल” से बना है | यमु का अर्थ है घर और फाल का बनाना | कहा जाता है कि पहले पूरा घाटी क्षेत्र पानी से भरा हुआ था | बाद में यह पानी पहाड़ो को काटकर नहर के रस्ते बाहर निकाल दिया गया |
इस तरह जो जमीन उपलब्ध हुयी उस पर घर बनाये गये | इस स्थान को नाम दिया गया यमुफाल को कालान्तर में इम्फाल बन गया |यह शहर तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है | यह समुद्रतल से 780 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है | इंफाल का मौसम हमेशा सुहावना रहता है | अक्टूबर से फरवरी तक सर्दी का मौसम और अप्रैल से अक्टूबर तक वर्षा का | इंफाल एक आधुनिक शहर है | यहाँ पुराने भवन भी है और बहुमंजिली आधुनिक इमारते भी |

मणिपुर (Manipur) के पर्यटन स्थल

इमा बाजार – इंफाल शहर के बीचो-बीच महिला बाजार है | इसकी अपनी पहचान है | यह बहुत बड़ा बाजार है जिसे केवल महिलाये चलाती ही | यहाँ साग-सब्जी , अंडे-मुर्गी , ताजा सुखी मछलियों से लेकर कपड़े-जूते और लोहे का सामान सबकी दुकाने है | यह बाजार 3500 वर्गफुट में फैला हुआ है | ऊँचे चबूतरो पर टिन की छते है बाकी खुला है | महिला बाजार में सभी उम्र की महिलाये होती है | वैष्णव महिलाये माथे पर तिलक लगाये अलग पहचानी जा सकती है |
वीर टीकेन्द्रसिंह पार्क -वीर टिकेन्द्रसिंह पार्क , शहीद मीनार और पास ही पोलो ग्राउंड हर एक का ध्यान आकर्षित करता है | वीर टिकेन्द्रजीत सिंह ने अंग्रेजो के खिलाफ लड़ते हुए यही फाँसी का फंदा अपने गले से लगा लिया था | पोलो मैदान पर आज सभाए और रैलियाँ भी होती है | तथापि विभिन्न खेलो का केंद्र तो यह ही है | संग्रहालय , चिड़ियाघर आदि भी पर्यटकों को आकर्षित करते है | इस चिड़ियाघर में मणिपुर में पाया जाने वाला शंघाई हिरण भी देखा जा सकता है | लान्ग्थ्वल या काँचीपुर में पुराने राजाओं का विश्राम गृह था | अब इसके खंडहर ही शेष है | पहाडी के नीचे समतल भूमि पर मणिपुर विश्वविद्यालय भी भव्य और दर्शनीय है |
खम्भा-थोइबी -इंफाल के अलावा भी अनेक स्थान दर्शनीय है | इनमे मोरंग कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है | यह इंफाल से 45 किमी दक्षिण में है | यह मणिपुर के हीर रांझा “खम्भा-थोइबी” की जन्म स्थली है | इनके नाम पर खम्बा-थोइबी लोकनृत्य मणिपुर का एक लोकप्रिय नृत्य है | यहा थांगजिग देवता का भी मन्दिर है | थांगजिन वन देवता है जो सारे मणिपुर में पूजनीय माना जाता है | इसके सम्मान में हर वर्ष मई के महीने में “लाई-हारोबा” लोकनृत्य का आयोजन होता है |
आजाद हिन्द फ़ौज स्मारक– मोरंग आधुनिक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से अटूट कड़ी के रूप में जुड़ा हुआ है | 4 अप्रैल 1944 के दिन सुभासचन्द्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिन्द फ़ौज ने मोरंग पर कब्जा किया था | नेताजी ने यही भारत भूमि पर सबसे पहले तिरंगा फहराया था | देश के सबसे पहले इसी भू-भाग को आजाद होने का गौरव मिला था | यहाँ आजाद हिन्द फ़ौज का स्मारक तथा संग्राहलय दर्शनीय ही नही प्रेरणा का केंद्र भी है | इसके प्रांगण में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आदमकद कांस्य प्रतिमा के समक्ष हर मस्तक अपने आप झुक जाता है | संग्रहालय में नेताजी के दुर्लभ चित्र , फोटो और करेंसी भी सुरक्षित रखी गयी है |
लोकटक झील – मोरंग के आगे है लोकटक झील | हर पर्यटक यहाँ अवश्य जाता है | यह उत्तरी-पूर्वी भारत की मीठे पानी की बहुत बड़ी झील है | इस झील में तरह तरह के फुल खिलते है जो उसकी शोभा में चार चाँद लगा देते है | लोकटक में कई जातियों की मचलिया भी पाई जाती है | लोकटक की इससे भी बड़ी खूबी है तैरते हुए द्वीप | झील में घास-फूस इकट्ठा होकर द्वीप जैसा बन जाता है | इन पर मछुआरे रहने के लिए मान या झोपडी बना लेते है | झील में जल लहरे उठती है तो ये मानो एक ओर से दुसरी ओर बहने लगते है | यह अनुपम दृश्य देखते ही बनता है | लोकटक झील के बीच एक छोटी सी पहाडी पर एक विश्राम गृह बना हुआ है | चारो ओर झील , ठंडी हवा के झोंके और जिधर भी देखे हरियाली ही हरियाली ऐसा दुर्लभ दृश्य अन्यत्र कहा है ?
केबुल लामजाऊ -इस पर्यटक स्थल से 5 किमी की दूरी पर है केबुल लामजाऊ | यह मणिपुर का राष्ट्रीय पार्क है | यह एक दलदली द्वीप है | यहाँ सरकंडे का घना जंगल है | इसमें अनेक जीव जन्तु पाए जाते है | इसके अलावा माओ ,तोंग नोपाल , विष्णुचूर , चुडा चन्द्रपुर भी अपनी किसी न किसी विशेषता के लिए प्रसिद्ध है |
माओ – माओ मणिपुर नगालैंड सीमा पर समुद्रतल से 1757 मीटर की उंचाई पर बसा एक ठंडा स्थान है | तोंग नोपाल समुद्रतल से 1820 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | यहाँ से मणिपुर की पुरी घाटी का नजारा देखते ही बनता है | यहाँ हर समय बादल छाये रहते है | यहाँ पहुचकर लगता है जैसे आप बादलो के देश में पहुच गये है |
मोरे – मोरे व्यापारिक केंद्र है | यह मणिपुर (Manipur) का सीमान्त नगर है | पहाडियों से नीचे बहती लोकटक नदी भारत और बर्मा की सीमा रेखा है | यहाँ के दूकानदार बर्मा की कियत मुद्रा का विनिमय करते मिल जायेंगे | यहाँ दक्षिण भारत तमिलनाडु , केरल आदि के लोग बड़ी तादात में बसे हुए है | यहाँ एक ओर अयप्पा मन्दिर है और दुसरी ओर रामेश्वर मन्दिर | इसके अलावा मोरे में पंजाबी , मारवाड़ी , बिहारी , असमी और बंगाली भी बसे हुए है | ये सभी मिलजुलकर रहते है | और एक लघुभारत की कल्पना साकार करते है |
मणिपुर (Manipur) में पर्यटन की अपार सम्भावनाये है किन्तु शेष भारत से दूरी और सडक मार्ग से यात्रा के कष्ट बाधा उत्पन्न होते है | मणिपुर की राजधानी इंफाल , कोलकाता और गुवाहाटी से वायुमार्ग से जुड़ी हुयी है | पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए हवाई सुविधाए बेहतर और सस्ती हो तो मणिपुर पर्यटन की मणि भी बन सकता है |

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