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स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindi

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindi
स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindi

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindiलगभग छ: दशको से अपने जादुई आवाज के जरिये बीस से अधिक भाषाओ में पचास हजार से भी ज्यादा गीत गाकर “गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड ” में नाम दर्ज करा चुकी संगीत की देवी लता मंगेशकर Lata Mangeshkar आज भी श्रोताओ के दिलो पर राज कर रही है | गीत , संगीत गायन और आवाज की जादूगरी की जब भी चर्चा होती है सहज ही एक ही नाम होठो पर आता है -लता मंगेशकर Lata Mangeshkar | उन्हें संगीत की दुनिया में सरस्वती का अवतार माना जाता है | आइये आज उस संगीत की देवी के जीवन से आपको रूबरू करवाते है |

लता मंगेशकर का प्रारम्भिक जीवन | Early Life of Lata Mangeshkar

लता मंगेशकर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के एक मराठी परिवार में हुआ था | उनके पिता दीनदयाल उपाध्याय एक शास्त्रीय संगीत गायक और थिएटर एक्टर थे | उनकी माता शेवंती , उनके पिता की दुसरी पत्नी थी | ये परिवार शुरुवात में अपना उपनाम हार्दिकर प्रयोग करता था लेकिन दीनानाथ ने इस बदलकर मंगेशकर किया था क्योंकि उनके पैतृक गाँव गोवा का मंगेशी कस्बा था | लता का बचपन का नाम हेमा था लेकिन पिता ने बाद में इसे बदलकर लता कर दिया था क्योंकि वो उनके पिता के नाटको में एक महिला किरदार लतिका से प्रेरित था | लता अपने भाई बहनों में सबसे बड़ी थी | उनकी तीन बहने मीना ,आशा ,उषा और एक भाई हृदयनाथ है |
लता मंगेशकर ने जीवन का पहला पाठ अपने पिता से ही सीखा था | महज पांच साल की उम्र में लता जी ने अपने पिता के एक नाटक में अभिनय किया था | लता जी जब पहली बार स्कूल गयी तब वो कक्षा के दुसरे बच्चो को संगीत सिखाने लगे गयी तब ऐसा करने से अध्यापक ने उन्हें रोका तो वो बहुत नाराज हुयी और उस दिन से स्कूल जाना छोड़ दिया | इस तरह लता जी अपने जीवन में एक दिन ही स्कूल गयी थी | कुछ तथ्य बताते है कि लता जी ने इसलिए स्कूल छोड़ा कि वो अपनी बहन आशा को साथ लाने के लिए स्कूल वालो ने मना किया था |

लता मंगेशकर के संघर्ष का दौर और संगीत की दुनिया में प्रवेश

1942 में जब लता जी केवल 13 साल की थी तब उनके पिता की दिल की बीमारी की वजह से मौत हो गयी थी | उनकी मौत के बाद नवयुग चित्रपट कम्पनी के मालिक और मंगेशकर परिवार के करीबी दोस्त मास्टर विनायक ने उनके परिवार को सम्भाला | उन्होंने लता को अभिनेत्री और गायिका बनने के लिए शुरुवाती मदद की थी | लता जी ने 1942 में एक मराठी फिल्म के लिए मराठी गाना गया था लेकिन अंतिम समय पर उनके गाने को फिल्म से हटा दिया था | विनायक ने बाद में उन्हें एक मराठी फिल्म में अभिनय का मौका दिया था | उन्होंने अपने जीवन का पहला हिंदी गाना “माता एक सपूत दुनिया बदल दे तू “एक मराठी फिल्म “गजबाहू” के लिए गाया था |
1945 में लता जी मुम्बई आ गयी और उन्होंने उस्ताद अमानत अली खान से संगीत प्रशिक्ष्ण लेना शूरू कर दिया | लता जी और उनकी बहन आशा ने 1945 में विनायक की पहली हिंदी फिल्म बड़ी माँ छोटा सा किरदार भी निभाया था | इस फिल्म में लता जी ने एक भजन “माता तेरे चरणों में ” भी गाया था | इसके बाद विनायक की दुसरी हिंदी फिल्म सुभद्रा के लिए उनका परिचय संगीत निर्देश वसंत देसाई से कराया गया | 1947 में विभाजन के बाद उस्ताद अमानत अली खान पाकिस्तान चले गये इसलिए वो रजब अली खा के भतीजे अमानत खा से शास्त्रीय संगीत सीखने लगी |
1948 में विनायक की मौत के बाद गुलाम हैदर उनके संगीत गुरु बने | गुलाम हैदर ने लता जी की मुलाक़ात शशधर मुखर्जी से कराई जो उन दिनों शहीद फिल्म पर काम कर रहे थे लेकिन मुखर्जी ने यह कहकर मना कर दिया कि उनकी आवाज पतली है | उनको क्या पता था कि आने वाले दौर में निर्माता निर्देशक उनको अपनी फिल्म में गाना गंवाने के लिए उनके पैर पड़ेंगे | हैदर ने लता जी को मजबूर फिल्म में मौका दिया जिसमे उन्होंने “दिल मेरा तोडा ,मुझे कही का न छोड़ा ”  गाना गाया जो उनके जीवन का पहला हिट गाना बना | यही कारण है कि लता जी गुलाम हैदर साहब को ही अपना गॉडफादर मानती है जिन्होंने उनके टैलेंट को पहचाना और उन पर विश्वास दिखाय था |
शुरुवाती दौर में लता जी को नूरजहाँ की आवाज की नकल माना जाता था लेकिन बाद में उन्होंने अपना खुद का संगीत का अलग तरीका निकाला था | शुरुवाती दौर में अधिकतर गाने उर्दू गीतकारो द्वारा लिखे जाते थे इसलिए लता जी ने उर्दू भी सीखी | 1949 में महल फिल्म का गीत “आएगा आनेवाला” सुपरहिट रहा था |

संगीत की बुलन्दियो पर लता मंगेशकर

शायद ही ऐसा कोई संगीत निर्देशक होगा जिसके लिए लता जी ने गाना न गाया हो | 1950 के दशक में अनिल विश्वास से लेकर कल्याणजी आनन्द जी जैसे दिग्गज संगीत निर्देशकों के लिए लता जी ने गाने गाये थे | Lata Mangeshkar लता मंगेशकर ने दो आँखे बारह हाथ ,मदर इंडिया ,मुगल-ए-आजम आदि महान फिल्मो में गाने गाये | उनके “महल” “बरसात” “एक थी लडकी” “बड़ी बहन” आदि फिल्मो में अपनी आवाज के जादू से इन फिल्मो की लोकप्रियता में चार चाँद लगाये | सात दशक की लता जी की स्वर यात्रा में उनकी  ख्याति इतनी प्रबल हो गये थी अगर किसी भी Music Director को लता जी से इंकार कर दे तो उसे Film Industry से Survive करना मुश्किल हो जाता था |
उनके गायकी का इतना जादू था कि ना केवल 70 और 80 के दशक बल्कि 90 के दशक में भी उनके गानों की धूम रही थी | यश चोपड़ा ने तो अपनी लगभग सभी फिल्मो में उनसे गाने गंवाए थे जो आज भी लोगो की जबान पर है | लता जी एक सिद्धि भी थी जिसकी भाषा और उच्चारण की खिल्ली उड़ाई गयी थी , एक दिन सभी भाषाओ पर उनका प्रभुत्व स्थापित हो गया | लोग उनसे उच्चारण सीखने लगे | फ़िल्मी गीतों के अतिरिक्त गैर फ़िल्मी गीतों और भजनों की भी रिकॉर्डिंग होती रही | सरकारी सम्मान के लिए भी जहा तहां लता जी को ही बुलाया जाता था | चीनी आक्रमण के समय कवि प्रदीप के अमर गीत “ए मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भर लो पानी ” गाने के लिए लता जी को दिल्ली बुलवाया गया था | यह गीत सुनकर नेहरु जी रो पड़े थे | लता जी आज भी बिलकुल स्वस्थ्य और संगीत की दुनिया में सक्रिय है |

लता मंगेशकर के शौक

Lata Mangeshkar लता जी बहुत ही सादगी प्रिय एवं सरल स्वभाव की है | इतनी बड़ी कीर्ति और वैभव होने के बावजूद अहंकार उनमे कभी नही देखा गया | उनको आभूषनो का शौक नही ,पहनने ओढने का शौक नही , खान पान की भी शौक़ीन नही है | जीवन में दो ही बातो की उनमे लगन है पहली आध्यात्म की जिस पर वे विशेष ध्यान देती है और दुसरी शास्त्रीय संगीत सीखने की | लेकिन ये सब वे परमेश्वर की कृपा मानती है | लता जी को संगीत के अलावा खाना पकाने और फोटो खीचने का बहुत शौक है |

लता मंगेशकर को मिले सम्मान

भारत रत्न लता मंगेशकर Lata Mangeshkar भारत की सबसे लोकप्रिय और सम्मानीय गायिका है जिनका सात दशको का कार्यकाल अविस्म्य्कारी  एवं आश्चर्यजंक उपलब्धियों के भंडार से भरा पड़ा हो | हालांकि लता जी ने लगभग 30 से ज्यादा भाषाओ में 30 हजार से ज्यादा फ़िल्मी और गैर फ़िल्मी गाने गाये है लेकिन उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायिका के रूप में ही रही है | सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का “गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड ” उनके नाम पर दर्ज है | उनकी सुरीली आवाज के दीवाने ना केवल भारतीय उपमहाद्वीप बल्कि पुरी दुनिया में है | टाइम मैगजीन ने तो उन्हें भारतीय पार्श्वगायन के क्षेत्र में दुनिया की एकछत्र साम्राज्ञी स्वीकार किया है | लता जी Film Industry की पहली महिला है जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरुस्कार प्राप्त हुआ |
वर्ष 1974 में लन्दन के सुप्रिस्ध अल्बर्ट हाल में उन्हें पहली भारतीय गायिका के रूप में गाने का अवसर प्राप्त है | उनकी आवाज की दीवानी पुरी दुनिया है | उनकी आवाज को लेकर अमेरिका के वैज्ञानिकों ने कह दिया कि इतनी सुरीली आवाज न कभी थी और न कभी होगी | भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर Lata Mangeshkar की आवाज सुनकर कभी किसी की आँखों में आसू आये तो कभी सीमा पर खड़े जवानो को हौंसला मिला | वे न केवल भारत बल्कि दुनिया में संगीत का गौरव एवं पहचान है |

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