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इटानगर , जहा आज भी मौजूद है ईंटो से बने किले के अवशेष | Itanagar History in Hindi

इटानगर , जहा आज भी मौजूद है ईंटो से बने किले के अवशेष | Itanagar History in Hindi
इटानगर , जहा आज भी मौजूद है ईंटो से बने किले के अवशेष | Itanagar History in Hindi

हरी भरी वादियों के बीच बसा छोटा सा नगर इटानगर (Itanagar) अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जाना जाता है | कभी यहा किसी राजा द्वारा बनाया गया किला था जो समय की धुंध में लुप्त हो गया , लेकिन किले के खंडहर आज भी उस राजा के इतिहास को स्मरण करा रहे है | किले का निर्माण लगभग 1550 ईस्वी पूर्व का बताया जाता है | इंट से बने इसे किले की उंचाई लगभग 5 मीटर है और यह दो भागो में बंटा हुआ है | इसका पूर्वी सिरा लगभग 1 किमी तथा पश्चिमी सिरा 1.40 किमी तक फैला हुआ है | इस किले की मोटाई 1.5 मीटर है |
आजकल यह किला इंटा फोर्ट के नाम से जाना जाता है और इसी फोर्ट के नाम से इस जगह का नाम इटानगर (Itanagar) रखा गया जो इस राज्य यानि अरुणाचल प्रदेश की राजधानी है | यह राज्य भारत के दुसरे वन प्रदेशो में गिना जाता है | इसकी गुणवत्ता राजधानी ईटानगर से परखी जा सकती है | इस छोटे से नगर के चारो तरफ हरियाली ही हरियाली है जिससे यहाँ का सौन्दर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है | हरियाली यहा के वातावरण को शुद्ध रखती है |
रोजमर्रा की जिन्दगी में यहाँ के लोग बड़े नगरो की अपेक्षा पिछड़े नही है | यु तो आदिवासी बहुल है लेकिन इटानगर के हरेक समुदाय के लोग रहते है |रोजी रोटी की तलाश में यहाँ अन्य राज्यों से भी लोग आकर रह रहे है | यहाँ के आदिवासी जातियाँ कई समुदाय में बंटी हुयी है | आदि निसिंग अपतानी , मिसिंग , नोक्टे ,आका ,हिलमिरी ,तांगीर ,तंगासा खामती ,दिगरू और वान्यो आदि यहा की जातिया है | ये जातिया उपजातियो में बंटी हुयी है |सभी समुदायों के लोग मुख्यत: “दोनों पालो” अर्थात सूर्यदेव को अपना इष्टदेव मानते है | हरेक समुदाय के अपने अलग पर्व या उत्सव है जो बड़ी धूमधाम से मनाये जाते है |
itanagar-history-in-hindiआदि समुदाय के लोगो का मुख्य पर्व “मोपिन” तथा “सालुंग” है जो अप्रैल तथा सितम्बर महीने में मनाया जाता है | यहा बहुत से एतेहासिक रहस्य छिपे हुए है |बौध धर्म के मानने वालो की संख्या अधिक है |नगर में एक बौद्ध मन्दिर भी स्थित है जिसे गोम्पा मन्दिर कहते है | यह एक पहाडी टीले पर स्थित है | यह मन्दिर एक ऐसी जगह स्थित है जहा से इटानगर (Itanagar) का सारा नजारा साफ़ साफ़ दीखता है | मन्दिर के चारो तरफ बड़ा ही शांत वातावरण है | सुबह शाम यहाँ लोग सैर सपाटे के लिए तथा दर्शन के लिए आया करते है |आज की भीड़ भाड़ और भागदौड़ के कौतुहल से दूर यह स्थान अपने आप में अनूठा है |

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