संत जुनैद का एक विचित्र शौक था | वह जिन्दगी के अलग अलग अनुभव हासिल करने के लिए भेष बदलकर घुमा करते थे | एक बार वह भिखारी बनकर एक नाई की दूकान पर पहुच गये | वह नाई उस समय एक रईस ग्राहक की ढाढी बना रहा था | उसने जब एक भिखारी को दूकान पर आते देखा तो तुंरत उस रईस की ढाढी बनाना छोड़ जुनैद की ढाढी बनाने का निर्णय किया | उसने जुनैद से पैसे तो नही लिए बल्कि उन्हें अपनी क्षमता के मुताबिक़ भिक्षा भी दी |
जुनैद नाई के व्यवहार से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने निश्चय किया कि वे उस दिन जो कुछ भी भीख के रूप में हासिल करेंगे उसे उस नाई को दे देंगे | यह एक संयोग ही था कि उस दिन अमीर तीर्थयात्री ने जुनैद को सोने के सिक्को से भरी एक थैली दी | जुनैद खुशी खुशी थैली लेकर नाई की दूकान पर पहुचे और उसव वह देने ;लगे | एक भिखारी के हाथ में सोने की भरी थैली देखकर नाई को आश्चर्य हुआ | वह यह भी नही समझ पा रहा था कि एक भिखारी उसे यह क्यों देना चाहता है |
जब उसे पता चला कि जुनैद उसे वह थैली क्यों दे रहे है रो वह नाराज होकर बोला “आखिर तुम किस तरह के फकीर हो ? सारा कुछ तुम्हारा फकीरों जैसा है पर मन से तुम व्यापारी हो | तुम मुझे मेरे प्रेम के बदले में यह पुरुस्कार दे रहे हो | प्रेम के बदले में तो प्रेम दिया जाता है कोई वस्तु नही | ऐसी वस्तु उपहार नही रिश्वत है ” | जुनैद भोच्क्के रह गये | उस नाई ने उन्हें एक बड़ी नसीहत दी |
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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