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Moral Stories in Hindi for Children शिक्षाप्रद कहानिया

Moral Stories in Hindi for Children

मित्रो जैसा कि आप जानते है हमारे बचपन की पाठयपुस्तको में कई शिक्षाप्रद कहानिया Moral Stories in Hindi for Children हुआ करती थी जिसे हम बड़े चाव से पढ़ा करते थे | ये कहानियाबहुत छोटी होती थी लेकिन फिर भी उसमे कोई ना कोई सीख मिलती थी | आज हम उनमे से चुनिन्दा शिक्षाप्रद कहानिया Moral Stories in Hindi for Children को आपके सामने पेश कर रहे है

सारस और भेड़िया The Wolf and The Crane -Moral Stories in Hindi 

The Wolf and The Craneएक बार एक भेड़िया एक मेमने को मारकर खाने लगता है | अचानक एक हड्डी का टुकड़ा उसके गले में अटक जाता है | वो मदद के लिए जोर से चिल्लाने लगता है | तभी वहा से सारस गुजरता है और भेड़िया उसको मदद करने के लिए बोलता है और कहता है कि अगर वो उसकी मदद करेगा तो वो उसे इनाम देगा |
लालची सारस उसकी बात मान लेता है और हड्डी का टुकड़ा अपनी लम्बी चोंच से बाहर निकाल देता है | भेडिये का दर्द तुरंत दूर हो जाता है | अब सारस उसे इनाम के लिए कहता है | भेड़िया सारस को देखकर हंसता है और बोलता है “मैंने बिना  तुम्हारे सर को काटे तुम्हे इनाम दे दिया है अब “यहा से भाग जाओ वरना तुम्हे मार दूंगा ” | सारस निराश होकर वहा से अपनी जान बचाकर भाग जाता है
Moral of Stories in Hindi : उसी की मदद करनी चाहिए जो उसके लायक हो

दो बेवकूफ बकरिया Two Silly Goats -Moral Stories in Hindi 

Two Silly Goatsएक गाँव में दो बकरिया रहती थी | उस गाँव में नदी पार करने के लिए एक संकड़ा पुल था | एक दिन वो दोनों बकरिया उस पुल को पार कर रही थी | एक बकरी पुल के एक तरफ थी और दुसरी बकरी पुल के दुसरी तरफ थी |  एक बकरी ने कहा “मैं पहले जाउंगी , मुझे जाने दो ” और दुसरी बकरी ने कहा “तुम एक तरफ हो जाओ मै पहले पुल पार करूंगी ” |
उन दोनों में से कोई भी अपनी बात से मुकरने को राजी नही हुयी | अंत में वो दोनों पुल के बीच में आ गयी और आपस में लड़ना शुरू कर दिया | लड़ते लड़ते दोनों नदी में गिर गयी और डूबकर मर गयी
Moral of Stories in Hindi : पड़ोसियों से प्रेम से रहो

दो मित्र और भालू Two Friends and The Bear -Moral Stories in Hindi 

Two Friends and The Bearएक बार दो मित्र जंगल के रास्ते से गुजर रहे थे | वो पृकति की सुन्दरता का लुत्फ़ उठा रहे थे अचानक रास्ते में उनको एक भालू को उनकी ओर आता हुआ देखा | वो दोनों बुरी तरह डर गये | उनमे से एक पेड़ पर चढना जानता था और वो दौडकर पेड़ पर चढ़ गया | उसने अपने मित्र के बारे में बिलकुल नही सोचा | दूसरा मित्र पेड़ पर चढ़ना नही जानता था | उसने कुछ देर विचार किया |
फिर उसके दिमाग में आया कि जंगली जानवर मृत शरीर की तरफ ध्यान नही देते | वो जमीन पर लेट गया और उसने अपनी साँसे रोक ली | भालू ने उसे सुंघा और सोचा कि शायद ये मर गया है और भालू वहा से चला गया |  पेड़ से नीचे उतरकर उसके मित्र ने उससे पूचा कि “भालू ने तेरे कान में क्या कहा ” | तब दुसरे मित्र ने उत्तर दिया “भालू ने मुझसे कान में कहा कि तुम जैसे मित्रो से दूर रहे ” और ये कहकर चला गया |
Moral of Stories in Hindi : मुसीबत के वक्त जो काम आये वही असली मित्र है

भेड़ की खाल में भेड़िया The Wolf in Sheep-skin -Moral Stories in Hindi 

The Wolf in Sheep-skinएक बार एक भेड़िया ग्रामीण इलाको में घूम रहा था तभी उसे जमीन पर भेड़ की खाल पड़ी हुयी नजर आयी | उसने सोचा “अगर मै इस भेड़ की खाल पहनकर भेड़ो के झुण्ड में घुस जाऊँगा तो गडरिये मुझे पहचान नही पायेंगे और रात को एक मोटी ताजा भेड़ को मारकर यहाँ से ले जाऊँगा ” | अब वो भेड़िया भेड़ की खाल पहनकर योजना अनुसार भेड़ो के झुण्ड में शामिल हो गया |
जैसा उसने सोचा वैसा ही हुआ , गडरिये ने उसे भी भेड़ मानकर बाड़े में बंद कर दिया | अब वो भेडिया पुरी रात सही समय का इन्तजार करता रहा | गडरिये ने उस रात अपने घर पर दावत रखी थी | उसने नौकर को भेजकर एक मोटी भेड़ को लाने को कहा | उस नौकर ने सयोंग से भेड़ की खाल में भेडिये को उठा लाया और उस रात मेहमानों ने भेडिये के गोश्त का आनन्द उठाया
Moral of Stories in Hindi : बुरे विचारो का हमेशा बुरा अंत होता है

हवा और सूरज The Wind and The Sun -Moral Stories in Hindi 

The Wind and The Sunपतझड़ के दिन चल रहे थे | एक दिन हवा और सूरज में बहस हो गयी | हवा ने दावा किया “मै तुमसे ज्यादा ताकतवर हु ” और सूरज ने हल्के से कहा “तुम ताकतवर नही हो ” | तभी वहा से एक कम्बल में लिपटा हुआ एक आदमी गुजर रहा था | हवा ने कहा “जो भी इस राहगीर के कम्बल को निकाल देगा वो ही विजेता होगा , क्या तुम सहमत ही ??”| सूरज सहमत हो गया और जवाब दिय “पहले तुम्हारी बारी है “|
हवा जोर से चलने लगी और राहगीर ने कम्बल को जोर से पकडे रखा | हवा ओर जोर से चलने लगी लेकिन राहगीर ने ओर ज्यादा कसकर कम्बल को पकड़े रखा | जितनी ज्यादा हवा तेज होती वो राहगीर उतना तेज कम्बल को जकड़े रख रहा था | अंत में हवा ने हार मान ली | अब सूरज की बारी थी | पहले सूरज से राहगीर की तरफ हल्की से मुस्कान दी और राहगीर ने अपने कम्बल को थोडा ढीला कर दिया | अब सूरज ने अपनी गर्मी थोड़ी ओर तेज जकी और राहगीर ने गर्मी के मारे उस कम्बल को उतार दिया | सूरज को ताकतवर घोषित किया गया |
Moral of Stories in Hindi : जो काम सरलता से हो सकता है उसमे दम नही लगाना चाहिए

प्यासा कौवा The Thirsty Crow-Moral Stories in Hindi 

Moral Stories in Hindi for Childrenएक बार एक कौवा बहुत प्यासा था और पानी की तलाश में बहुत घुमा लेकिन उसे कही पानी नही मिल रहा था | तभी उसकी नजर एक घड़े पर पड़ी लेकिन उसमे पानी बहुत थोडा था | उसने अपनी चोंच अंदर डाली लेकिन पानी तक नहीं पहुच पायी | तभी कौवे को एक तरकीब सूझी और उसने छोटे छोटे कंकड़ इकट्टा करना शुरू कर दिया | उसके बाद एक एक करके कंकड़ उस घड़े में डालने लगा | पानी का स्तर उपर बढ़ने लगा | जब पानी बिलकुल उपर आ गया तो उसने पानी पिया और खुशी से उड़ गया |
Moral of Stories in Hindi : जीवन में कभी हार नही माननी चाहिए

दो मेंढक The Two Frogs-Moral Stories in Hindi 

The Two Frogsबरसात के दिनों की बात है दो मेंढक कूदते कूदते एक घर में जा पहुचे | वहा पर एक दूध का मटका पड़ा हुआ था और वो दोनों मेंढक इसमें गिर गये | दोनों मेंढको ने खूब कोशिश की लेकिन सफल नही हो पाए | एक मेंढक ने उम्मीद छोड दी और कहने लगा “मै अब ज्यादा तैर नही सकता ” और वो डूब गया | दुसरे ने हार नही मानी और वो लगातार तैरता रहा | उसकी हलचल से दूध धीरे धीरे मक्खन में बदल गया | मेंढक एक मक्खन के एक दुकड़े पर चढ़ गया और कूदकर मटके से बाहर आ गया |
Moral of Stories in Hindi : भगवान भी उनकी मदद करता है जो खुद की मदद करता है

दो घड़े The Two Pots-Moral Stories in Hindi 

The Two Potsएक बार भयकर चक्रवात आया और चारो तरफ बाढ़ आ गयी | कई घर बाढ़ में बह गये | एक घर में एक ताम्बे का घडा और मिटटी का घडा था | दोनों बाढ़ से निकलने की कोशिश कर रहे थे  | ताम्बे के घड़े ने मिटटी के घड़े से कहा “मित्र , तुम मिटटी के बने हो और बहुत कमजोर हो , मेरे पास आ जाओ , मै तुम्हे बचा लूँगा  ” | मिटटी के घड़े ने जवाब दिया “तुम्हारी उदारता के लिए धन्यवाद मित्र लेकिन मै खुद तैरकर किनारे तक जाना चाहता हु ” |मिटटी का घडा तैरते हुए नदी के किनारे की तरफ बढ़ रहा था | जैसे ही ताम्बे का घडा तैरने की कोशिश करने लगा उसमे पानी भर गया और ताम्बे का घडा डूब गया |  मिटटी का घडा किनारे तक पहुच गया था |
Moral of Stories in Hindi : कमजोर देखने से पता नही चलता

मोर और बत्तक The Peacock and The Crane-Moral Stories in Hindi 

The Peacock and The Craneएक मोर अपनी खूबसूरती की प्रशंशा करता रहता था | रोज वो तालाब के किनारे तक चलता और पानी में अपनी परछाई देखता और कहता ” मै कितना खुबसुरत पक्षी हु  , मेरे पंख कितने सुंदर है ” | एक दिन मोर को तालाब के किनारे बत्तख दिखी | उसने बत्तख से व्यग्य में कहा “तुम कितने बेरंग पक्षी हो , तुम ना तो सुंदर हो और ना तुम्हारे पंख मेरे जैसे सुंदर है  ” | बत्तख ने उत्तर दिया ” बिलकुल सही , तुम्हारी तरह मेरे सुंदर पंख नही है लेकिन मेरे पंख मुझे उड़ा कर नदी पार करा सकते है , क्या तुम्हारे पंख ऐसा कर सकते है ” | मोर के पास इसका कोई जवाब नही था |
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