Panchtantra Stories पंचतंत्र कविताओ और कहानियों के रूप में पशु दंतकथाओ का एक प्राचीन संग्रह है | इसका रचना वास्तविक रूप से संस्कृत भाषा में 3 सदी में विष्णु शर्मा द्वारा की गयी थी | यह मुख जबानी कथाओ पर आधारित है जिसमें पशु दंतकथाओ को हम आसानी से समझ सकते है | विष्णु शर्मा द्वारा रचित Panchtantra Stories पंचतंत्र पांच भागो में विभाजित होती है | इनकी पांच किताबे मित्रभेद ,मित्रलाभ , ककोलुकियम, लभधपरसनम और अपरीक्षितकारनम है | इन्ही पांच किताबो Panchtantra Stories की पांच मुख्य कहानियों के आधार पर अन्य कहानिया लिखी गयी | पंचतंत्र की इन कहानियों को हमने अपने बचपन में पाठयपुस्तको में अवश्य पढ़ा होगा |आज इन्ही Panchtantra Stories कहानियों में से कुछ चुनिन्दा कहानिया Panchtantra Stories आपके सामने लेकर आये है |
बन्दर और लकड़ी का लट्ठा The Monkey and the Wedge-Panchtantra Stories in Hindi
एक बार के व्यापारी था जिसने उसके बगीचे में मन्दिर बनाने के लिए कई सुथार रख रखे थे | सुथार प्रतिदिन सुबह काम के लिए आते और दिन में मध्यांतर का भोजन करते और शाम को काम खत्म करके घर आ जाते थे |एक दिन बंदरो का समूह उस स्थान पर पहुच गया और मजदूरों को काम करते हुए देखने लगा | अब कुछ मजदूर मध्यांतर के भोजन के लिए रवाना हो गये थे | एक सुथार लकड़ी के एक बड़े लट्ठे को चीर रहा था और उस लट्ठे को आधा चीर दिया था | उसने उस लट्ठे के बीच में एक कील ठोक दी ताकि वो लट्टा फिर से ना जुड़ जाए | अब वो भी दुसरे मजदूरों के साथ मध्यांतर भोजन करने के लिए चला गया |
जब सब मजदूर चले गये तब बन्दर पेड़ो से नीचे उतरकर नीचे आ गये और उस स्थान पर कूदने लगे | उनमे से एक बन्दर लकड़ी के लट्ठे के बीच फंसी कील के बारे में जाननें को बहुत उत्सुक था | वो उस लट्ठे पर जाकर बैठ गया और लट्ठे की आधे चीरे हुए भाग में अपने आप को फसा दिया | अब वो उस कील को जोर से खीचने लगा और अचानक कील बाहर आ गयी | परिणाम स्वरूप वो बन्दर उस लकड़ी के लट्ठे के बीच फंस गया और उसी वक़्त दम घुटने से उसकी मौत हो गयी
Panchtantra Stories in Hindi Moral : जो दुसरो के काम में टांग अड़ाता है वो खुद उसमे फंस जाता है
सियार और ढोल The Jackal and the Drum-Panchtantra Stories in Hindi
एक दिन एक सियार भोजन की खोज में जंगल ने घूम रहा था |कुछ देर चलते चलते वो जंगल से बाहर आ गया और एक वीरान रणभूमि में पहुच गया था | इस रण भूमि से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे अभी कुछ समय पहले यहा पर युद्ध हुआ हो | लड़ने वाली सेना का ढोल शायद वही छुट गया था जो कि एक पेड़ के नजदीक पड़ा हुआ था | जैसे ही हवा चलती पेड़ की टहनियों के ढोल दे रगड़ खाने से अजीब आवाज उत्पन्न होती |
जब सियार को ये आवाज सुनाई दी वो बहुत घबरा गया और वहा से भाग जाने का निश्चय किया और सोचने लगा कि “अगर मै अगर यहा से नही भागा तो इस आवाज को निकालने वाला आदमी मुझे देख लेगा और मै मुसीबत में पड़ सकता हु |”|जैसे ही वो वहा से भागने के लिए रवाना होने लगा तभी उसे एक दूसरा विचार आया “मुझे इस आवाज के स्त्रोत को जाने बिना यहा से चले जाना मुर्खता होगी “| उसने साहस दिखाया और धीरे धीरे आवाज वाली जगह पर आगे बढ़ रहा था | तभी उसने वहा पर एक ढोल देखा और अब वो जान गया कि ये आवाज केवल हंवा के कारण आ रही थी | वो अब अपने खाने की खोज में आगे बढ़ गया और ढोल के नजदीक उसे पर्याप्त भोजन मिल गया |
Panchtantra Stories in Hindi Moral : बहादुर ही अपने जीवन में सफल होते है
व्यापारी का पतन और उदय The Fall and Rise of a Merchant -Panchtantra Stories in Hindi
वर्धमान नाम के शहर में एक कुशल और समृद्ध व्यापारी रहता था | उस राज्य के राजा ने उसकी योग्यता को देखकर उसे अपने राज्य में मंत्री बना दिया | वो अपने व्यवहार से साधारण लोगो को हमेशा खुश रखता था और दुसरी तरफ राजा को भी प्रभावित कर रखा था | सभी को खुश रखने वाला इंसान मिलना बहुत मुश्किल होता है | कुछ समय बाद व्यापारी की बेटी की शादी का समय आया और उसने शादी में भव्य स्वागत का आयोजन किया था |
व्यापारी ने ना केवल राजा रानी बल्कि पुरे शाही परिवार और सम्मनित लोगो को शादी में बुलाया | स्वागत के दौरान उसने अपने मेहमानों के उचित व्यवहार से प्रसन्न कर दिया | उसने शादी में सम्मिलित हुए मेहमानों को सम्मान देने के लिए उपहार भी दिए | उसके समारोह में शाही परिवार में झाड़ू लगाने वाला नौकर आ गया जबकि उसे व्यापारी ने नही बुलाया था | वो शाही परिवार के लिए आरक्षित आसन पर बैठ गया | ये देखकर व्यापारी बहुत क्रोधित हुआ | उसने झाड़ू लगाने वाले को गर्दन से पकड़ा और उसके नौकरों को उसे बाहर भगा देने को कहा |
शाही नौकर ने अपने आप को बहुत अपमानित महसूस किया और वो सारी रात नही सो सका | उसने सोचा “अगर मै इस व्यापारी को राजा के विपक्ष में कर दू तो मेरा बदला पूरा हो जाएगा लेकिन मै रो एक साधारण इन्सान हु और एक शक्तिशाली इन्सान को कैसे हानि पंहुचा सकता हु ” | ये सोचते हुए अचानक उसके दिमाग ने एक योजना आयी |
कुछ दिनों बाद जब नौकर एक दिन सुबह सुबह राजा के पलंग के नजदीक फर्श पर झाड़ू लगा रहा था तभी उसने देखा कि राजा बिस्तर में सोये हुए और आधे जगे हुए है | अब नौकर बडबडाते हुए बोलने लगा “हे भगवान , व्यापारी इतना लापरवाह हो गया कि उसने रानी से गले मिलने की हिम्मत की ” | जब राजा ने बिस्तर पर पड़े ये आवाज सूनी और उछल पड़ा और तुरंत नौकर से पूछा “क्या ये सत्य है , क्या तुमने व्यापारी को मेरी रानी से गले मिलते देखा ??”
तभी वो नौकर राजा के चरणों में गिर गया और बोला “हे मालिक , मै पुरी रात जुआ खेल रहा था और मैनें पुरी रात नींद नही निकाली इसलिए सुस्ती में कुछ बडबडा गया होगा और अगर मैंने कुछ गलत कहा हो तो मुझे क्षमा कर देना ” | राजा कुछ नही बोला लेकिन नौकर जान गया था कि उसने राजा के मन में शंका के बीज बो दिए है | राजा अब सोचने लगा “क्या ये सच हो सकता है ? क्योंकि नौकर और व्यापारी दोनों पुरे महल में आजादी से घूमते है और शायद नौकर ने कुछ ऐसा देखा हो “|
राजा अब इर्ष्या के मारे जल रहा था | उस दिन के बाद से राजा ने व्यापारी का पक्ष लें और उसे अपने महल में आने से मना कर दिया|एक दिन जब व्यापारी महल के द्वार से गुजर रहा था और उसे अचानक पहरेदारो ने रोक दिया | व्यापारी राजा के अचानक बदले व्यवहार को देखकर चकित रह गया | अब वो नौकर पहरेदारो के पास जाकर मजाक ने चिल्लाकर बोलने लगा ” हे पहरेदारो , व्यापारी राजा का बहुत प्रिय है और बहुत शक्तिशाली इन्सान है वो लोगो को गिरफ्तार भी करवा सकता है और बाहर भी निकाल सकता है जिस तरह उसने मुझे उसकी बेटी की शादी में बाहर निकाल था तुम इससे बच के रहना वरना तुम मुसीबत में पड़ सकते हो “|
नौकर की ये बात सुनकर व्यापारी सब समझ गया था कि ये सब इस नौकर की करतूत होगी | वो उदास होकर अपने घर चला गया | उसने विचार किया और उस नौकर को अपने घर बुलाया | उसने सम्मान के साथ उस नौकर को गहने और आभुषण दिए | व्यापारी ने नम्रता से उससे कहा “अरे मित्र , उस दिन मैंने तुम्हे खाने के कारण बाहर नही निकाला बल्कि तुम वो शाही आसनों पर बैठे इसलिए ऐसा किया| वो अपने आप को अपमानित महसूस करते इसलिए मैंने तुम्हे बाहर निकाला , मुझे क्षमा कर दो ”
नौकर उसके द्वारा उपहारों से वैसे भी प्रसन्न हो गया था और खुशी से बोला ” श्रीमान , मैंने आपको माफ़ कर दिया तुमने ना केवल अपनी गलती स्वीकार की बल्कि मुझे सम्मान भी दिया “| उसने व्यापारी को विशवास दिलाया “मैं तुमको ये सिद्ध करूंगा कि मै कितना चतुर हु और पहले की तरह अब राजा को तुम्हारे पक्ष में ले आऊंगा “| यह कहकर नौकर घर चला गया |
अगली सुबह जब वो महल में जब झाड़ू लगाने गया तब वो राजा के आधे जगे होने का इंतजार कर रहा था | जब समय आया तब उसने फिर बडबडाना शुरू कर दिया “हमारा राजा पागल है वो शौचालय में ककडी खाता है ” ये सुनते ही राजा उठ गया और गुस्से में नौकर पर चिल्लाया “ये तुम क्या बक रहे हो , अगर तुम मेरे नौकर नही होते तो मै तुम्हे इसका दंड देता , क्या तुमने कभी मुझे ऐसा करते देखा ”
एक बार नौकर फिर राजा के चरणों में गिर गया और प्रार्थना की “हे मेरे मालिक , मुझे क्षमा कर दो अगर मैंने कुछ गलत कहा हो तो , मैं पुरी रात जुआ खेल रहा था और सो नही पाया , सुस्ती में मै क्या बडबडा रहा था मुझे पता नही था ” | राजा सोचने लगा कि मैंने कभी शौचालय में ककडी नही खाई और वो नौकर ऐसे गलत कैसे बोल रहा था , जरुर उसने मैंने भरोसेमंद व्यापरी के लिए जो बोला हो वो भी गलत हो , मुझे बिना सोचे समझे व्यापारी के साथ बदसलूकी करना गलत था ” |अगले दिन राजा ने व्यापारी को महल में बुलाया और उसे गहने , उपहार दिए | राजा ने उस व्यापारी को पुनः अपने पद पर स्थापित कर दिया
Panchtantra Stories in Hindi Moral : हर व्यक्ति को सबके साथ समान एक जैसा व्यवहार करना चाहिए
Comments
Post a Comment