Unknown Facts of Mahabharat in Hindi
जैसा कि आप जानते है कि Mahabharat महाभारत हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा और प्राचीन ग्रन्थ है और इस ग्रन्थ ने हिन्दू धर्म की नींव रखने में काफी योगदान दिया | Mahabharat महाभारत को मानव इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है जो आज से 4 लाख वर्ष पूर्व घटित हुयी थी | मित्रो Mahabharat महाभारत के तथ्यों के बारे में पढने से पहले मै आपको मेरा पसंदीदा महाभारत टीवी सीरियल का प्रसिद्ध श्रीर्षक गीत बताना चाहता हु |
अथ श्री महाभारत कथा , कथा है पुरुषार्थ की , स्वार्थ की , परमार्थ की
सारथी जिसके बने श्री कृष्ण भारत स्वाश की
शब्द दिग्गोषित हुआ , जब सत्य सार्थक सर्वाथा
यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिभवत भारत
अभ्युथानम अधर्मस्य तद्न्मानाम सृज्नायन्म
पारित्रादाय साधुनाम विनाशाय च दुष्कृताम
धर्मसंस्थापनाअर्थाय संभावनी युगे युगे
भारत की है कहानी ,सदियों से है पुरानी
ये ज्ञान की है ये गंगा , ऋषियों की अमरवाणी
यह विश्व भारती है, वीरो की आरती है
चयनित नई पुराणी ,भारत की ये कहानी
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अब हम आपको महाभारत से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य Facts of Mahabharat बताएँगे जो आपने पहले कभी नही सुने होंगे |
हस्तिनापुर महाभारत काल का सबसे समृद्ध राज्य
हस्तिनापुर Mahabharat महाभारत काल में मानव इतिहास का सबसे समृद्ध और विकसित स्थान था | उस समय में सभ्य राज्य के सारे साधन जैसे बाँध , स्मारक , मन्दिर , कृतिम तालाब और सिचाई व्यवस्था थी | महाभारत के बाद हस्तिनापुर का पहला अस्तित्व राजा भरत ने अपनी राजधानी बनाकर किया | हस्तिनापुर पर चार हिन्दू राजाओ का शाषन करना यह साबित करता है कि Mahabharat महाभारत का युद्ध लगभग 3139 ईस्वी पूर्व हुआ था |
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अर्जुन की भगवान से तुलना
कृष्ण ने भगवतगीता में स्वय अर्जुन से कहा था “ओ अजेय अर्जुन , तुम नर हो और मै नारायण हु और हम दोनों मिलकर नर-नारायण संत है जो इस धरती पर सही समय पर आये है ”
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युधिष्टर का चौपड़ सीखना
युधिष्टर ने वृहद्वासा से चौपड़ खेलना सिखा था जिन्होंने वनवास के दौरान नल और दमयन्ती की कहानी सुनाई थी |
भीम का एकमात्र जीवित पुत्र
भीम का केवल एक पुत्र जीवित रहा था जिसका नाम सर्वगा था | उसको परीक्षित से ज्यादा ज्येष्ठ होने के बावजूद सिंहासन नही सौपा गया | वो अपनी मातृभूमि काशी का शाषक बना था |
अर्जुन का कृष्ण की पत्नियों का रक्षा नही कर पाना
कृष्ण के वैकुण्ठ जाने के बाद अर्जुन कृष्ण की पत्नियों को साधारण लुटेरो से नही बचा सके | इस दौरान उनका धनुष काफी भारी हो गया था और वो सारे मन्त्र भूल गया था | कृष्ण की आठ पत्नियों ने आत्महत्या कर ली और बाकि लुटेरो द्वारा अगुआ कर ली गयी
अर्जुन की अन्य रानिया
अर्जुन एक बार गलती से युधिष्ठिर और द्रौपदी के भवन में प्रवेश कर गया और उसे इस बात की आत्मग्लानि हुयी | इस आत्मग्लानि के लिए उसने सजा स्वरुप खुद को 12 वर्ष का वनवास दे दिया | अर्जुन , द्रौपदी के साथ वैवाहिक जीवन छोड़ने के बाद , वनवास चले गये और उन्हें यात्रा के दौरान तीन ओर रानिया चित्रांगदा , उलूपी और सुभद्रा मिली |
सहदेव का भविष्य ज्ञान
पांड्वो में सबसे छोटा भाई सहदेव भविष्य के बारे में सब जानता था | वो यह भी जानता था कि युद्ध होगा लेकिन चुप रहा क्योंकि उसे ये भेद किसी को बताने पर मृत्यु का अभिशाप मिला था |
विधुर का मायावी धनुष
कुछ संदर्भो में ये बताया जाता है कि विदुर एक शक्तिशाली और रहस्यमयी धनुष के प्रभाव में थे जो उनको स्वय विष्णु भगवान् ने भेट किया था | उस धनुष से युद्ध में कोई हार नही सकता था | जब कृष्ण कौरवो के साथ शान्ति वार्ता करने को आये तब दुर्योधन ने विदुर को इतना अपमानित किया कि विदुर ने प्रण लिया कि वो युद्ध में भाग नही लेंगे और उन्होंने अपने धनुष के दो टुकड़े कर दिए |
एकलव्य कृष्ण का भाई
एकलव्य वास्तविकता में कृष्ण का चचेरा भाई था | वो कृष्ण के पिता वासुदेव के भाई देवश्रवा का पुत्र था जो कि जंगल में खो गया था जिसकू निषादा हिरण्यधनु ने खोजा था |एकलव्य रुक्मणी स्वयम्वर के दौरान अपने पिता की रक्षा करते हुए मारा गया था | उसे कृष्ण ने मारा था | उसके गुरुदक्षिणा में दिए बलिदान के लिए कृष्ण ने उसे अगले जन्म में धर्स्ताय्धुम बनाया जिसने द्रोण को मारा था |
शकुनी का जन्म एवं प्रतिशोध
Mahabharat महाभारत के युद्ध में शकुनी कौरवो की तरफ थे लेकिन उसके गुप्त इरादों ने पांड्वो और कौरवो दोनों का पतन किया | उसकी इस घृणा के पीछे एक कड़वा सच था | गांधार में एक घटना हुयी जिसमे ज्योतिषों के कहने पर राज्य में आयी आपदा को टालने के लिए , गांधारी ने धृतराष्ट्र से विवाह करने से पूर्व यग्न को पूरा करने के लिए एक बकरे से शादी की | क्योंकि गांधारी एक कन्या थी और यग्न उसके पति को नुकसान पंहुचा सकता था | तकनीकी रूप से इस कृत्य ने गांधारी को विधवा बना दिया और धृतराष्ट्र उसका दूसरा पति था |
कई वर्षो बाद जब धृतराष्ट्र को इस बात का पता चला वो उसने गांधारी से खफा होकर राजा सुबाला सहित उसके सारे परिवार को कैद में डाल दिया | कैद में रहते हुए उनको केवल मुट्ठी भर चावल खाने को दिए जाते थे और जब गांधारी के पिता को जब ये पता चला कि उनको धृतराष्ट्र भूख से मार देना चाहता था तो गांधारी के पिता ने उसके सबसे छोटे पुत्र को सभी लोगो का खाना खाने को दिया जाने लगा ताकि उनमे से एक इस दर्दनाक मौत से जीवित रह सके |
सुबाला का सबसे छोटा पुत्र शकुनी था | उसने जीवित रहते हुए कसम खाई की वो जीते जी कुरु साम्राज्य को नष्ट कर देगा | उसने अपने पिता की जांघ की हड्डी से पासा बनाया जिससे उसने पांड्वो को चौपड़ के खेल में पराजित कर दिया था जिससे परिणामस्वरूप करुक्षेत्र का युद्ध हुआ था और पूरा कुरु साम्राज्य नष्ट हो गया | शकुनी के पिता ने खुद उसके एक पैर को मोडकर लंगड़ा कर दिया था ताकि वो जीवन भर प्रतिशोध को याद रख सके | महाभारत के कुछ अंशो में शकुनी को कृष्ण का भक्त भी बताया जाता है |
द्रौपदी चीरहरण
द्रौपदी चीरहरण की घटना के बाद द्रौपदी स्वयं को सभा में क्षमा मागते हुए कहती है ” मुझे इस दरबार में घसीटकर लाया गया और अपमानित किया गया , ये सब देखते हुए भी मै दरबार के अपने से बडो और उनके परिवार के आगे नही झुकी इसलिए मै उनसे क्षमा मागती हु ” | ऐसी प्रतिकूल परिश्तिथियो में भी द्रौपदी ने अपने धर्म को याद रखा | उसकी ये बात सुनकर भीम और कई बडो की आँखों में आंसू आ गये | महाभारत के अनुसार द्रौपदी ने “अंधे का पुत्र अँधा “शब्द कभी नही कहा और एक भी अंश में चीरहरण के वक्त उसकी आवाज नही आयी |
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द्रौपदी का शिवजी से वरदान
द्रौपदी पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री थी और उसने भगवान शिव की तपस्या की थी | उसकी तपस्या से प्रस्सन होकर उसने शिव से 14 विशेषताओ वाले नर से विवाह करने का वरदान माँगा | भगवान शिव ने मनुष्य योनी में 14 गुणों वाले इन्सान की बात को असम्भव बताया |लेकिन द्रौपदी के जोर देने पर शिवजी ने उसको ये वरदान दे दिया | द्रौपदी का विवाह पांच महान पांड्वो से हुआ और उन पांचो को मिलाकर 14 गुण पुरे होते थे और हर सुबह स्नान करने पर उनका कौमार्य उन्हें वापस हासिल हो जाता था
कृष्ण का मोहिनी रूप में विवाह
अर्जुन और उलूपी के पुत्र इरानवन ने माँ काली के समक्ष अपनी भक्ति प्रदर्शित करने और युद्ध में पांड्वो की जीत के लिए खुद का बलिदान दे दिया | उसने मृत्यु से पूर्व एक लडकी से विवाह करने की इच्छा प्रकट की और उसकी इच्छा को पूरा करने के लिए कृष्ण ने स्वयं मोहिनी रूप लेकर इरान्वन से विवाह किया और उसकी मृत्यु के बाद असली पत्नी की तरह रोये |
भगवदगीता सुनने वाले अर्जुन के अलावा इंसान
कृष्ण के भगवतगीता को सुनने वाला केवल अर्जुन नही बल्कि हनुमान और संजय भी था | हनुमान कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन के रथ के मुकुट पर विराजमान थे और संजय को वेदव्यास ने दिव्य दृष्टि से धूर्तराष्ट्र को महाभारत के युद्ध की हर घटना को सुनाया था |
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दुशाला का पुत्र
जयद्रथ , जो कि अर्जुन के 16 वर्ष के पुत्र को चक्रब्यूह में फंसाने के लिए जिम्मेदार था , वास्तविकता में पांडव और कौरवो का एकमात्र जीजा था जिसने उनकी इकलौती बहन दुशाला से विवाह किया था |
कौरवो के असली नाम
कौरवो के सभी भाइयो का नामकरण उनके बदनामी के कारण रखा गया | दुर्योधन [मतलब बुराई का योद्धा ] वास्तव में सुयोधन [अच्छा योद्धा ], दुशाशन [बुरा शाषन ] वास्तव में सुशाशन [अच्छा शाषक ], दुशाला [बुराई की राह पर चलने वाला ] वास्तव में सुचला [अच्छाई की राह पर चलने वाला ] कहलाता था | भारत की 125 करोड़ से भी ज्यादा की जनसंख्या में आज भे किसी का नाम कौरवो के नाम पर नहीं रखा जाता है बल्कि शत्रु उनको ऐसा नाम देते है
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महाभारत में पत्नी धर्म का विवरण
Mahabharat महाभारत वास्तव में ज्ञान का भंडार है | वन पर्वम में द्रौपदी सत्यभामा को पत्नी धर्म सिखाती है | वो उदाहरण देकर पत्नी के कर्तव्यो और पति व्रता के सिद्धांत बताती है |इन सिद्धांतो का पालन आज भी हिन्दू धर्म की स्त्रिया मनचाहे वर की कामना के लिए करती है |
कृष्ण महाभारत के विवादित किरदार
कृष्ण महाभारत में सबसे मुश्किल और विवादित किरदार थे और भक्ति के बिना भगवान की शक्ति को समझना मुस्किल था |एक दिन वो अर्जुन से ही लड़ना शुरू हो गये थे लेकिन भगवान शिव ने उन्हें ऐसा करने से रोका | शिव ने कृष्ण से इसका कारण पूछा तो उन्होंने उत्तर दिया कि अर्जुन को रणभूमि में युद्ध करने उसके परीक्षा ले रहे थे |
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विदुर यमराज के अवतार
धृतराष्ट्र का मुख्य सलाहकार विदुर यमराज का अवतार था जिसको छोटे कीड़े को मारने के कारण मंडूक मुनी ने अगले जन्म में शुद्र बनने का अभिशाप दिया था जबकि कीड़ा उनसे अज्ञानता से मर गया था |
दुर्योधन का कृष्ण की बाते नकारना
कृष्ण ने दुर्योधन को भगवत गीता सुनाने का प्रयास किया लेकिन दुर्योधन ने कृष्ण से कहा कि वो अच्छी तरह जानता है कि क्या सही है और गया गलत है | अगर दुर्योधन शिक्षित होता तो शायद युद्ध टल सकता था | उसने एक बहस में कृष्ण से कहा था कि कि कुछ आंतरिक शक्तिया उसके दिमाग को सही फैसला लेने में मदद करती है लेकिन वो यह नही जानता था कि प्रक्रति उसे धर्म का पालन ना करने की अनुमति दे रहा था |
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कृष्ण की बहन सुभद्रा का अर्जुन से विवाह
कृष्ण को ज्ञान हो गया था कि अर्जुन और कृष्ण की बहन सुभद्रा को एक करना आवश्यक है तो उन्होंने अर्जुन को उसे अगुआ करने के लिए प्रेरित किया | जब अर्जुन ने उसे अगुआ किया तब बलराम और दुसरे पांडव क्रोधित हो गये थे | उन्होंने अर्जुन का पीछा किया | बलराम रुके और उन्होंने जब कृष्ण को बिलकुल शांत देखा तो उनसे इसका कारण पूछा और कृष्ण ने उत्तर दिया “मैं सोचता हु अर्जुन ने क्षत्रिय धर्म के अनुसार सही किया और ये सब कुछ सुभद्रा की सहमती और परिवार की सहमती से हुआ “| इस तरह अर्जुन ने कृष्ण की बहन सुभद्रा से विवाह किया |
कृष्ण का रणभूमि में शस्त्र ना उठाने का प्रण तोडना
कृष्ण ने Mahabharat महाभारत के युद्ध में कोई शस्त्र ना उठाने का प्रण तोड़ दिया था | दुसरी तरफ भीष्म ने दुर्योधन से वादा किया था कि वो शेर की तरह युद्ध लड़ेंगे और या तो अर्जुन या कृष्ण को मार देंगे लेकिन वो भी अपना वादा पूरा नही कर पाए |जब भीष्म और अर्जुन के बीच युद्ध हुआ तब भीष्म के सामने अर्जुन बहुत कमजोर था |अर्जुन को असहाय देखकर कृष्ण से रहा नही गया और तुरंत उन्होंने रथ को रोका और रणभूमि में उतर गये | उन्होंने रथ का एक पहिया हाथों में उठा लिया और भीष्म की तरफ फेंन्कने की कोशिश की | अर्जुन ने उन्हें रोकने की कोशिश की जिसके बाद श्री कृष्ण शांत हुए लेकिन फिर भी उन्होंने शस्त्र ना उठाने का वचन तोडा था |
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धर्मराज युधिष्टर द्वारा पांड्वो का जीवन दान
एक बार वन में घूमते हुए पांड्वो को प्यास लगी और तभी उन्हें एक सरोवर दिखाई दिया | जब वो एक एक करके पानी पीने लगे तब यक्ष ने उनसे प्रश्न पूछे लेकिन उनका उत्तर दिए बिना पानी पी गये और सरोवर का पानी पीने से चार पांड्वो की मृत्यु हो गयी| जब युधिष्टर पानी पीने आया तब उन्होंने भी उससे पांच प्रश्न पूछे और युधिष्टर ने पाचो प्रश्नों के सही उत्तर दे दिए | प्रस्सन होकर यक्ष ने युधिष्टर को अपने एक भाई को जीवनदान देने की बात कही तो युधिष्टर ने नकुल का नाम लिया
युधिष्टर की ये बात सुनकर यक्ष चौक गया और उसने अर्जुन और भीम जैसे शूरवीरो की बजाय नकुल को जीवित करने का कारण पूछा | युधिष्टर ने बताया कि कुंती के पुत्रो में उन्हें जीवनदान मिल गया लेकिन माता माद्री के तो दोनों पुत्र काल में समा गये इसलिए माता माद्री के एक पुत्र को जीवनदान देना ही उचित है | यक्ष उसके मातु प्रेम और भ्राता प्रेम को देखकर काफी भावुक हो गया और उसने चारो पांड्वो को जीवनदान दे दिया | यक्ष ने कहा वो उनकी परीक्षा ले रहे थे कि वो वास्तव में धर्मराज यानी धर्म के अवतार है या नही |
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तो मित्रो अगर आपको Mahabharat से जुड़े तथ्य पसंद आये हो तो आप अपने सुझाव कमेंट में जरुर देवे और अगर आपको भी यदि Mahabharat से जुड़ा कोई अनोखा तथ्य पता हो तो कमेंट में जरुर बतावे ताकि Mahabharat महाकाव्य की विशेषता को पुरे विश्व में फैला सके |
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