Confucius Biography in Hindi
जिस समय भारत में भगवान महावीर और बुद्ध धर्म के संबध में नये विचार रखे जा रहे थे , उसी समय चीन में एक समाज सुधारक का जन्म हुआ जिसका नाम कन्फ्यूशियस था | उस समय चीन में झोऊ वंश का बसंत और शरद काल चल रहा था | समय के साथ झोऊ राजवंश की शक्ति शिथिल पड़ने के कारण चीन में बहुत से राज्य कायम हो गये , जो सदा आपस में लड़ते रहते थे | इसी कारण उस दौर को चीन का “झगड़ते राज्यों का काल ” कहा गया | अत: चीन की प्रजा बहुत कष्ठ झेल रही थी | ऐसे समय में चीनवासियों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने हेतु महात्मा कन्फ्यूशियस Confucius का आविर्भाव हुआ था |
Confucius कांफ्युसिय्स का जन्म ईसामसीह के जन्म से करीब 550 वर्ष पहले चीन के शानदोंग पदेश में हुआ था | बचपन में ही उनके पिता की मृत्यु हो गयी थी | उनके ज्ञान की आकांशा असीम थी बहुत अधिक कष्ठ सहन करके उन्हें ज्ञान अर्जन करना पड़ा था | मात्र 17 वर्ष की उम्र में उन्हें राजकीय नौकरी मिली | कुछ ही वर्षो बाद वो राजकीय नौकरी छोडकर शिक्षण कार्य में लग गये | घर में एक विद्यालय खोलकर उन्होंने विध्यात्रियो को शिक्षा देना आरम्भ किया | वो मौखिक रूप से इतिहास ,काव्य और नितिशास्त्र की शिक्षा देते थे | उन्होंने काव्य ,इतिहास , संगीत और नीतिशास्त्र पर कई पुस्तको की भी रचना की थी |
53 वर्ष की उम्र में लू राज्य में एक शहर के वो शाषनकर्ता और बाद में मंत्री पद पर भी नियुक्त हो गये | मंत्री होने के नाते उन्होंने दंड के बदले मनुष्य के चरित्र सुधार पर बल दिया | Confucius कन्फ्यूशियस ने अपने शिष्यों को सत्य ,प्रेम और न्याय का संदेश दिया | वो सदाचार पर अधिक बल देते थे | वो लोगो को विनयी ,परोपकारी ,गुणी और चरित्रवान बनने की प्रेरणा देते थे | वो बडो एवं पूर्वजो का आदर-सम्मान करने के लिए कहते थे | वो कहते थे कि दुसरो के साथ वैसा बर्ताव ना करो , जैसा तुम अपने साथ स्वयं नही करना चाहते हो |
Confucius कन्फ्यूशियस एक समाज सुधारक थे धर्म प्रचारक नही | उन्होंने ईश्वर के बारे में कोई उपदेश नही दिया , परन्तु फिर भी बाद में लोग उन्हें धार्मिक गुरु मानने लगे थे | उनकी मृत्यु 480 ईस्वी पूर्व हुयी थी | कन्फ्यूशियस के समाज सुधारक उपदेशो के कारण चीनी समाज में के स्थिरता आई थी |Confucius कंफ्यूशियस का दर्शन शास्त्र आज भी चीनी शिक्षा के लिए पथ प्रदर्शक बना हुआ है |Confucius कांफ्युसिय्स सदैव सदाचार और दर्शन की बाते करते थे | वो देवताओ और इश्वर के बारे में ज्यादा बात नही करते थे | यह धार्मिक प्रणाली कभी चीनी साम्राज्य का राजधर्म हुआ करती थी |
इस मत के अनुसार शासक का धर्म आज्ञा देंना और शाशित का कर्तव्य उस आज्ञा का पालन करना है | इसी प्रकार पिता ,पति और बड़े भाई का धर्म आदेश देना है और पुत्र ,पत्नी एवं छोटे भाई का कर्तव्य आदेशो का पालन करना है | परन्तु साथ ही आवश्यक है कि आदेश देनेवाले का शाशन औचित्य ,निति और न्याय पर आधारित हो | तभी शाषित गण से भी आशा की जा सकती है कि वे विश्वास और इमानदारी से आज्ञाओं का पालन कर सकेंगे | यदि किसी समाज में आदर्श शाशक प्रतिष्टित हो जाए , तो वहा की जनता भी आदर्श जनता बन सकती है | कुशल शाषक अपने चरित्र का उदाहरण प्रस्तुत कर अपने राज्य की जनता का सर्वोन्मुखी सुधार कर सकता है |
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