वक़्त के घने कोहरे में ,
शतरंज के सजे मोहरे में ,
मतलब परस्तो की इस बस्ती में ,
अपनी धुन अपनी मस्ती में ,
इन्सान कही खो गया , इन्सान कही खो गया
दुनिया के उजड़े नजारों में ,
रिश्तो की बनती मजारो में ,
हैवानियत के गर्म बाजारों में ,
इन्सान कही खो गया , इन्सान कही खो गया
लालच की इस बेमकसद दौड़ में ,
हवस के ठिकानो की होड़ में ,
जिन्दा लाशो के इस शहर में ,
इन्सान कही खो गया , इन्सान कही खो गया
चेहरों पर पड़े इन नकाबो में ,
अपने अपने ख्वाबो में ,
डूबे हुए इन इंसानों को क्या हो गया ?
या खुदा ? क्या तू भी सो गया ?
शायद खुदा भी मतलबी हो गया ,
तभी तो वो सो गया ,
इसलिए तो,
इन्सान कही खो गया , इन्सान कही खो गया
इससे पहले की वक़्त गुजर जाए
भीतर का इन्सान भीतर ही मर जाए ,
हमे खुद को और उसे बचाना होगा ,
अपने वतन और अपने जहा को खुद ही सजाना होगा ,
इन्सान कही खो गया , इन्सान कही खो गया
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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