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भारत की पहली महिला शाषक रजिया सुल्तान का इतिहास Razia Sultan History in Hindi

Razia Sultan History in Hindi

भारत की पहली महिला शाषक रजिया सुल्तान का इतिहास Razia Sultan History in Hindi
भारत की पहली महिला शाषक रजिया सुल्तान का इतिहास Razia Sultan History in Hindi

भारत के इतिहास में रजिया सुल्तान Razia Sultan का नाम स्वर्ण अक्षरों में इसलिए लिखा जाता है क्योंकि उसे भारत की प्रथम महिला शाषक होने का गर्व प्राप्त है | दिल्ली सल्तनत  के दौर में जब बेगमो को सिर्फ महलो के अंदर आराम के लिए रखा जाता था वही रजिया सुल्तान Razia Sultan से महल से बाहर निकलकर शाषन की बागडोर सम्भाली थी | Razia Sultan रजिया सुल्तान ने अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान भी लिया था जिसकी बदौलत उसे दिल्ली सल्तनत की पहली महिला शाषक बनने का गौरव मिला था | उसने दुसरे सुल्तान की पत्नियों की तरह खुद को “सुल्ताना” कहलवाने के बजाय सुल्तान कहलवाया था क्योंकि वो खुद को किसी पुरुष से कम नही मानती थी | आइये आज आपको उसी जाबांज महिला शाषक Razia Sultan की जीवनी से आपको रूबरू करवाते है |

Early Years of Razia Sultan रजिया सुल्तान का प्रारम्भिक जीवन

Razia Sultan रजिया सुल्तान का जन्म 1236 इसवी में उस दौर में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इल्तुतमिश के यहा हुआ था | कई बेटो के जन्म के बाद जब इल्तुत्मिश के यहा पर बेटी का जन्म हुआ तो उसने अपने राज्य में एक भव्य आयोजन किया था | रजिया सुल्तान का बचपन का नाम हफ्सा मोइन था लेकिन सभी उसे रजिया कहकर पुकारते थे | इल्तुत्मिश ने अपनी बेटी को बेटे की तरह पाला था और उसे शिक्षा के साथ अस्त्र-शस्त्र की भी शिक्षा दी थी | खुद पिता ने अपनी बेटी को पढाया और शश्त्र ज्ञान दिया था | जब रजिया 13 वर्ष की हुयी तब वो तलवारबाजी और घुड़सवारी में माहिर हो गयी थी जो अपने पिता के साथ युद्ध के मैदान में जाने लगी थी |
इल्तुतमिश ने खुद अपनी बेटी Razia Sultan रजिया के बारे में इतिहास के पन्नो में लिखा था कि “मेरी बेटी मेरे अनेक पुत्रो से बेहतर है ” | अपनी बेटी की इसी कुशलता के कारण इल्तुतमिश ने उसे गुलाम वंश का अगला सुल्तान बनाने की ठान ली थी जबकि उससे पहले भारत में कभी किसी महिला शाशक ने भारत पर राज नही किया था | उस दौर में महिलाओ को कमजोर माना जाता था और उसे केवल महलो की चाहरदीवारी में कैद रहना की उनका मुक्कदर माना जाता था लेकिन इल्तुमिश ने इसके विपरीत अपनी बेटी को दिल्ली की सरकार तब सम्भालने को कहा जब वो ग्वालियर के किले पर आक्रमण करने को जा रहे थे |
युद्ध से वापस लौटने पर Razia Sultan रजिया के शाषन को देखकर इल्तुतमिश काफी प्रभावित हुए क्योंकि उन्हें अब लग गया था कि वो अस्त्र-शस्त्र के साथ साथ शाषन करने में भी निपुण थी | इन्ही कारणों को देखते हुए इल्तुतमिश ने अपनी बेटी रजिया को दिल्ली सल्तनत की बागडोर सम्भालने को कहा | ऐसा करने पर इल्तुतमिश के सभी पुत्रो ने विरोध किया था लेकिन इल्तुतमिश ने किसी की नही सूनी थी | जब इल्तुतमिश की मौत हो गयी तब उसके एक पुत्र रुक्नुदीन फिरुज ने रजिया से सत्ता हथिया ली | उसने सात महीनों तक दिल्ली पर राज किया लेकिन इल्तुतमिश की बहादुर बेटी ने 1236 में जनता के सहयोग से अपने भाई को हराकर फिर से सत्ता अपने हाथ में ले ली |

Works of Razia Sultan in Delhi Sultanate रजिया सुल्तान के शाषनकाल में किये गये कार्य

अपने शाषनकाल में Razia Sultan रजिया ने अपने पुरे राज्य में कानून की व्यवस्था को उचित ढंग से करवाया | उसने व्यापार को बढ़ाने के लिए इमारतो के निर्माण करवाए , सडके बनवाई और कुवे खुदवाए | उसने अपने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई विद्यालयों , संस्थानों , खोज संस्थानों और राजकीय पुस्तकालयों का निर्माण करवाया | उसने सभी संस्थानों में मुस्लिम शिक्षा के साथ साथ हिन्दू शिक्षा का भी समन्वय करवाया | उसने कला और संस्कृति को बढ़ाने के लिए कवियों ,कलाकारों और संगीतकारो को भी प्रोत्साहित किया था |

Falling Love with Altunia अल्तुनिया के साथ प्यार

Razia Sultan रजिया सुल्तान को अब प्यार के अलवा कोई नही रोक सकता था | उसके अंत का कारण भी बेंतहा मोहब्बत थी | एक अफ्रीकन गुलाम जमालुदीन याकूत के साथ उसे प्यार हो गया था | उनके इस प्यार की चर्चा ना केवल दरबार में बल्कि पुरे राज्य में फ़ैल चुकी थी | भटिंडा के गर्वनर मालिक इख्तिअर अल्तुनिया रजिया के इस रिश्ते से काफी नाराज थे क्योंकि अल्तुनिया और रजिया दोनों बचपन के अच्छे मित्र थे | जब अल्तुनिया बड़ा हुआ तो उसको रजिया से एकतरफा प्यार हो गया था और रजिया को पाने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकता था | अपने प्यार को पाने के लिए उसने रजिया के प्रेमी याकूत की हत्या करवा दी और रजिया को जेल में डाल दिया |

End of Razia रजिया सुल्तान का अंत

जब जेल में Razia Sultan रजिया विद्रोह से निकलने का प्रयास कर रही थी उस दौरान कुछ तुर्कीयो ने , जो पहले ही रजिया के विरोधी थी , इस अवसर का फायदा उठाते हुए दिल्ली पर आक्रमण कर उसे गद्दी से हटवा दिया | अब रजिया के भाई बेहराम को सुल्तान घोषित कर दिया गया | अपने राज्य को बचाने के लिए रजिया ने धैर्य से काम लेते हुए भटिंडा के गर्वनर अल्तुनिया से विवाह करने का निश्चय कर लिया और अपने पति के साथ दिल्ली की तरफ कुछ करने लगी | 13 अक्टूबर 1240 को बेहराम ने रजिया सुल्तान को हरा दिया और अगले ही दिन रजिया सुल्तान और उसके पति अल्तुमिया को दिल्ली की तरफ भागते वक़्त कुछ लुटेरो ने हत्या कर दी  | इस तरह भारत की महिला शाषक Razia Sultan का दुखद अंत हो गया लेकिन इतिहास में उसका नाम अमर हो गया |

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