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रोटी की कहानी , गजबखबर की ज़ुबानी Roti Story in Hindi

Roti Story in Hindi

Roti Story in Hindiमित्रो मनुष्य जीवन में भोजन का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि भोजन के बिना जीवन असम्भव है | भोजन में भी रोटी Roti का सबसे ज्यादा महत्व है क्योंकि यही एकमात्र भोजन है जिसको प्रतिदिन खाया जा सकता है | आज से सैकड़ो वर्ष जब मानव सभ्यता की शुरुवात हुयी थी तब आदिमानव रोटी Roti के बारे में नही जानते थे क्योंकि पशुओ का शिकार कर उनके मॉस से अपना जीवन चलाते थे | जैसे जैसे सभ्यताए विकसित होती गयी और मनुष्य एक समूह के रूप में रहने लगा तो उसे खेती का महत्व पता चला |
Roti रोटी का सबसे प्राचीन और प्रबल प्रमाण मिस्त्र देश में मिलता है जहा पर एक स्त्री को 3500 वर्ष पुराणी कब्र  में एक टोकरी मिली थी | इस टोकरी में गेहू के आटे की गोल ,चौकोर , पशु पक्षियों के आकार की और गेंद जैसी कई प्रकार की रोटिया रखी हुयी थी | यह टोकरी ज्यो की त्यों न्युयोर्क के एक अजायबघर में रखी हुयी है  मिस्त्र की अन्य समाधियो में भी कुछ पुराणी रोटिया मिली है | मिस्त्र के प्राचीन इतिहास से पता चलता है कि वहा किसी समय रोटी का वही स्थान था जो आजकल सिक्को का है |
उस दौर में राज्य के छोटे बड़े अधिकारियो ,सैनिको ,साधारण नौकरों और मजदूरों को वेतन के रूप में रोटिया दी जाती थी | उस समय रोटी बनाने की कला का विकास नही हुआ था | गेहू को पहले भिगोकर सिल पर पीसा जाता था और फिर गेहू की उस पीठी से भिन्न भिन्न आकार की रोटिया बनाई जाती थी | बाद में आटे की रोटिया भी बनने लगी | सुप्रसिद्ध इतिहास लेखक हेरोडोटस ने लिखा है कि मिस्त्र वाले आटे को हाथ से नही ,बल्कि पैरो से गूंथते थे |
यूरोप में भी प्रारम्भिक काल से रोटी Roti किसी ना किसी रूप में खाई जाती थी | यूरोप के देशो में बाजारू रोटिया चलती थी | राज्य की ओर से जिन्हें रोटी बनाने का अधिकार मिलता था ,उन्ही से सबको खरीदना पड़ता था | जर्मनी में कुछ लोग इसका पेशा करते थे | वहा कई प्रकार की रोटिया बनायी जाती थी | फ़्रांस के बादशाह की रसोई में बीस प्रकार की रोटियों के बनाने का वर्णन मिलता है | ये रोटिया हमारी रोटियों जैसी नही , बल्कि खमीरी डबल रोटियों जैसी ही होती थी |
हमारे देश में गेहू की रोटी Roti कब से चली ,यह बताना कठिन है | संसार के सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद में गेहू का नाम नही है पर जौ ,सत्तू ,चलनी ,भाड़ और भडमुंजे की चर्चा है | संस्कृत में रोटी और तवे के लिए कोई शब्द नही है जिससे पता चलता है कि प्राचीन आर्य लोग गेहू का उपयोग नही जानते थे और रोटी नही खाते थे | जौ का उपयोग सत्तू के रूप में किया जाता था | यहा का मुख्य आहार चावल था | यज्ञ में भी चावल और जौ ही प्रशस्त माने गये है | भोजन गृह को भी भक्तशाळा इसलिए कहा जाता था कि वहा बैठकर भात खाया जाता था |
कुछ विद्वानों का मत है कि गेहू इस देश में ईसा के जन्म से 9000 वर्ष पूर्व मेसोपोटामिया से आया था | यजुर्वेद में “गोधूम ” नामस उसका उल्लेख मिलता है | मोहनजोदड़ो की खुदाई में भी 5000 वर्ष पुराने गेहू के डेन मिले है जिससे सिद्ध होता है कि इस समय भी उसका उपयोग होता रहा होगा | यह दुसरी बात है कि खाद्य पदार्थो में उसका मान ना रहा हो | कुछ भी हो ,इतना तो मानना ही पड़ेगा कि रोटी बनाने की कला का विकास भारत और एशिया के देशो में ही हुआ था |
भारत में घर घर में रोटी बनाने की प्रथा बहुत दिनों से चली आ रही है | ये रोटिया कई प्रकार की होती है फुलके या चपाती से हम लोग परिचित ही है | इसके अलावा एक प्रकार की रोटी बनती थी जिसे “बाटी ” कहते थे | गरीब लोग मोटी मोटी रोटिया बनाते थे जिन्हें “भौरी ” और “मुकनी” कहते है | गेहू और जौ के अलावा ज्वार ,बाजरा  ,बेसन ,उडद या मुंग के चूर्ण की भी रोटिया बनती है | इनके स्वाद ,गुण और नाम भी अलग अलग है |
अकबर के समय में “भाव प्रकाश ” नामक प्रसिद्ध वेधक ग्रन्थ रचा गया था उसमे “रोटिका” के नाम से कई प्रकार की रोटियों के गुण दोष बताये गये है | उसके अनुसार गेहू की रोटी गुरु पौष्टिक और वातनाशक होती है जौ की रोटी श्वास-कफ , पचने में हल्की और वातकारक होती है | उद्द के चूर की रोटी ,जिसे “बलभद्रिका” कहते है बलवर्धक और वायुकारक है | धुले उद्द की पीठी की रोटी जिसे “झर्जरिका “कहते है कफ-पित्त नाशक होती है | बेसन की रोटी रुखी , भारी नेत्रों के लिए अहितकारी और कफ पित्त नाशक होती है | मुगलों के समय में पराठे का आविष्कार हुआ था | अब भारत के नगरो में पावरोटी का भी काफी प्रचार हो गया है |
पंजाब में तन्दूरी रोटी Roti का रिवाज है नान भी तंदूर से सिकती है पर उसके आटे में खमीर मिलाया जाता है जिससे वो फुल जाती है | नान शब्द मुगलों की देन है यह फारसी भाषा का शब्द है | रोटी बनाने वालो को नान बाई कहते है | इस तरह भारत में अलग अलग हिस्सों में रोटी को अलग अलग प्रकार से बनाया जाता है जिनके नाम भी प्रदेश के साथ बदल जाते है बस उनका मूल कारक गेहू ही होता है | तो मित्रो इस तरह आपने देखा है कि किस तरह रोटी प्राचीन समय से वर्तमान तक पहुची जिसका रंग रूप समय के साथ बदलता गया और वर्तमान में रोटी हमारे आहार का मुख्य हिस्सा हो गया है | मित्रो अगर आपको Roti रोटी की ये कहानी पसंद आयी तो अपने विचार हमे कमेंट के जरिये जरुर देवे ताकि इसी तरह हम हमारी मुलभुत आवश्यकताओ के चीजो की कहानी आप तक पहुचाये |

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