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Yuri Gagarin Biography in Hindi प्रथम अन्तरिक्ष यात्री युरी गागरिन की जीवनी

Yuri Gagarin Biography in Hindi

Yuri Gagarin Biography in Hindi प्रथम अन्तरिक्ष यात्री युरी गागरिन की जीवनी
Yuri Gagarin Biography in Hindi प्रथम अन्तरिक्ष यात्री युरी गागरिन की जीवनी

Yuri Gagarin युरी गागरिन रूसी अन्तरिक्ष यात्री थे जिन्होंने पहली बार अन्तरिक्ष में जाकर इतिहास में प्रथम अन्तरिक्ष यात्री के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया | 12 अप्रैल 1961 को प्रात: 9 बजकर 7 मिनट पर उनका अन्तरिक्ष यान वोस्तक प्रथम रूसी अन्तरिक्ष केंद्र से उडा और 1 घंटे 48 मिनट तक पृथ्वी की कक्षा में उड़ान भरकर 10 बजकर 55 मिनट पर वापस रूस लौट आया | इसी के साथ युरी गागरिन मिडिया की सुर्खी बन गये और दुनिया भर में प्रथम अन्तरिक्ष यात्री का तौर पर पहचाने जाने लगे | आइये उस बहादुर अन्तरिक्ष युरी गागरिन की जीवनी से आपको रूबरू करवाते है
Yuri Gagarin युरी गागरिन का जन्म 9 मार्च 1934 को पश्चिमी मास्को में एक छोटे से गाँव क्लुशिनो में हुआ | रूस को तब सोवियत संघ के नाम से जाना जाता था | वो चार भाई-बहन थे जहा उनके पिता एलेक्सी एवोंविच गागरिन बढाई का काम किया करते थे और माँ अन्ना टिमोफेय्ना  गागरिन दूध की डेयरी में काम करती थी | द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अभी युरी गागरिन सात वर्ष के ही थे कि वर्ष 1941 में नाजियो ने सोवियत संघ पर हमला कर दिया | गागरिन परिवार को फ़ार्म में उनके घर से बेघर कर दिया गया | नाजियो ने युरी गागरिन की दो बहनो को भी बंधुआ मजदूर बनाकर जर्मनी भेज दिया |
जैसे तैसे सरातोव के एक ट्रेड स्कूल में Yuri Gagarin गागरिन की पढाई आरम्भ हुयी , उन्हें गणित और भौतिकी में दिलचस्पी थी | इसी स्कूल में उन्होंने धातुओ का काम सीखा | यही के एक लोइंग क्लब में भी उन्होंने दाखिला ले लिया और जल्द ही हवाई जहाज उडाना सीख गये | वर्ष 1955 में उन्होंने पहली बार अकेले हवाई जहाज उड़ाया | उड़ान के प्रति रुझान बढ़ने के कारण उन्होंने सोवियत एयरफोर्स की नौकरी कर ली | उड़ान की सटीक कुशलता देख अधिकारियों ने उन्हें आरेनबर्ग एविएशन स्कूल में भेज दिया , जहा वो मिग विमान उडाना सीख गये |
नौकरी के दौरान वर्ष 1957 में ही उन्होंने उच्च श्रेणी से ग्रेजुएशन उत्त्तीर्ण किया | अब वो फाइटर पायलट बन गये ,लेकिन उनका सपना अन्तरिक्ष में उड़ान भरना था | जब सोवियत सरकार ने अंतरिक्ष में जाने के लिए आवेदन मांगे तो 3000 आवेदन आये , जिनमे गागरिन भी एक थे | इनमे से 20 लोगो को ट्रेनिंग के लिए चुना गया , इनमे भी गागरिन का चयन हो गया था | जब ट्रेनिंग शुरू हुयी तो एक एक कर सब लोग बाहर हो गये और सबसे योग्य अन्तरिक्ष यात्री के रूप में गागरिन बचे रहे | उनका छोटा कद भी उनका सहायक बना , क्योंकि बोसत्क प्रथम का कैप्सूल लगभग उन्ही के आकार जितना था |
तय दिन 12 अप्रैल 1961 को Yuri Gagarin गागरिन ने एक संक्षिप्त भाषण में इस कार्य को देश के लिए गौरव और जिम्मेदारी बताया और अपने कैप्सूल में ही लेटे रहे | वो किसी भी तरह से इसे कण्ट्रोल नही कर सकते थे | तय सुबह 9 बजकर 7 मिनट पर  बैकानूर से उनका अंतरिक्षयान उड़ा और वो बोले “पोयखेली  (हम दूर चले )” | अन्तरिक्ष में प्रविष्ट होकर गगारिन ने पृथ्वी का एक पूरा चक्कर लगाया | इस समय वोस्तक प्रथम की गति 28.260 किमी प्रति घंटा थी | इसके बाद सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर उनका यान पृथ्वी पर लौट आया |
Yuri Gagarin Welcome Homeउनकी अन्तरिक्ष यात्रा ने अन्तरिक्ष युग का आरम्भ किया | वी अन्य अन्तरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने लगे लेकिन दुर्भाग्य से केवल 34 वर्ष की आयु में ही 27 मार्च 1968 को जब वो एक मिगनड फाइटर जेट की परीक्षण उड़ान पर थे , वह दुर्घटना ग्रस्त हो गया और उनकी मृत्यु हो गयी | बाद में पता चला कि सामने से आते एक सुखोई फाइटर जेट ने उनके यान के पिछले भाग को टक्कर मार दी थी जिससे उनका यान चक्कर खाकर नीचे गिर गया था | एक बहादुर अन्तरिक्ष यात्री Yuri Gagarin का एक दुखद अंत हुआ लेकिन विश्व इतिहास में हमेशा के लिए Yuri Gagarin युरी गागरिन का नाम स्वर्ण अक्षरों में चिन्हित हो गया |

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