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चन्दन तस्कर वीरप्पन के आतंक की कहानी Notorious Killer Veerappan Story in Hindi

Notorious Killer Veerappan Story in Hindi

चन्दन तस्कर वीरप्पन के आतंक की कहानी Notorious Killer Veerappan Story in Hindi
चन्दन तस्कर वीरप्पन के आतंक की कहानी Notorious Killer Veerappan Story in Hindi

चन्दन तस्कर वीरप्पन Veerappan भारत का एक कुख्यात हत्यारा और स्मगलर था , जिसको पकड़ने में तमिलनाडु सरकार को पसीने आ गये थे | 30 सालो तक तमिलनाडू के जंगलो पर राज करने वाले लम्बी लम्बी मुछो वाले वीरप्पन को पकड़ने में सरकार को 20 साल लग गये थे क्योंकि जंगल में उस तक पहुचने वाला वापस कभी जिन्दा नही लौट पाया था | उसने ना केवल हाथी दांत के लिए हाथियों को मारा , बल्कि उसने अपने रास्ते में आने वाले हर आदमी और पुलिसवाले को मौत के घाट उतार दिया | स्थानीय लोगो के लिए भले ही वो रोबिनहुड जैसा था लेकिन दुसरे लोगो के दिलो में उसने खौफ भर दिया था | अपनी इन्ही गतिविधियों की वजह से सरकार ने उस पर 5 करोड़ का इनाम रखा था और उसे खोजने में सरकार को 20 साल लग गये जिसमे उसमे कई जवान तो शहीद तो हुए साथ ही करोड़ो रूपये का नुकसान भी हुआ | आइये आज हम आपको उसी कुख्यात चन्दन तस्कर वीरप्पन की जीवनी से रुबुरु करवाते है |
Veerappan वीरप्पन का जन्म 18 जनवरी 1952 को कर्नाटक जिले के गोपीनाथम गाँव में हुआ था जो तमिलनाडू की सीमा से लगा हुआ एक जंगली इलाका था | Veerappan वीरप्पन को तस्करी का काम विरासत में मिला था क्योंकि वीरप्पन के पिता कर्नाटक के जंगलो में कई सालो से शिकार के साथ साथ तस्करी किया करते थे | वीरप्पन के पिता का भी उस जंगल में खूब नाम चलता था और जंगल के आस पास के गाँव में लोगो में उनका खौफ था | Veerappan वीरप्पन के पिता के इस तस्करी के काम में उनके परिवार के लोग और रिश्तेदार भी शामिल थे और वो टोलियों में साथ रहते थे | वीरप्पन ने भी चन्दन तस्करी और शिकार का काम बचपन से अपने पिता और रिश्तेदारों के नेतृत्व में शूरू कर दिया था |
Veerappan वीरप्पन ने केवल 10 साल की उम्र में ही अपना जौहर दिखाना शूरू कर दिया था और 1962 में उसने अपने जीवन का पहला जुर्म किया था | वीरप्पन ने अपने गुरु सेवी गौंडर की मदद से एक एक तस्कर को मौत को मौत के घाट उतारा था | जब इस बात की खबर जंगल के वन अधिकारियो को पता चली , तो वीरप्पन ने तीन वन अधिकारियो को मार दिया ताकि वो तस्करी की बात किसी को बता ना पाए | 1970 में वीरप्पन Veerappan एक शिकारियों के गिरोह में शामिल हो गया और पहली बार पुलिस के हत्थे 1972 में आया था |
उम्र के साथ साथ Veerappan वीरप्पन हाथी दांत और चन्दन तस्करी में माहिर हो गया था और हाथी दांत के लिए हाथियों को मार गिराना उसके बांये हाथ का खेल बन गया था | उसके काम में आड़े आने वाले हर इन्सान को उसने मार दिया था | 27 अगस्त 1983 को केवल 17 साल की उम्र में उसने उसको चन्दन तस्करी और हाथी दांत तस्करी से रोकने वाले वन अधिकारी सहित उसके सहयोगियों को मार दिया था | 1986 में में वो एक बार फिर पुलिस के हत्थे चढ़ा और पुलिस ने उसे जब फारेस्ट गेस्ट हाउस में बंदी बनाया तो रहस्यमयी तरीके से वो वहा से फरार हो गया |
1987 में Veerappan वीरप्पन ने तमिलनाडु के वन अधिकारी चिदंबरम को पहले अगुआ किया और फिर उसको मार दिया | ये पहली घटना थी जिससे भारत सरकार का भी ध्यान वीरप्पन की ओर गया | 9 अप्रैल 1990 को उसने तीन पुलिस अफसर को मार दिया , जिसकी वजह से कर्नाटक सरकार और तमिलनाडू सरकार हरकत में आ गयी और दोनों सरकारों ने मिलकर वीरप्पन को ढूढ निकालने के लिए स्पेशल टास्क फ़ोर्स भेजी | नवम्बर 1991 में वीरप्पन ने सीनियर IFS ऑफिसर पंदिल्पल्ली श्रीनिवास को मार कर उसका सर कलंक कर दिया दिया क्योंकि वो उसके काम में व्यवधान पैदा कर रहा था | उस ऑफिसर का सर तीन साल बाद जंगल में मिला था | वीरप्पन ने हाथीदांत के लिए 2000 हाथियो को मार दिया था और हाथी दांत तस्करी में उसके मुकाबले कोई तस्कर नही था |
1991 में वीरप्पन Veerappan में एक ग्रेनाइट खदान मालिक में बेटे को अगुआ कर लिया और 1 करोड़ की फिरौती माँगी लेकिन बाद में उसे 15 लाख पर छोड़ दिया था | 1992 में वीरप्पन ने रामपुरा पुलिस स्टेशन पर हमला बोल दिया , जिसमे उसने पाच पुलिस वालो को तो मौत के घाट उतार दिया था औ दो लोगो को घायल कर सारा असला बारूद लेकर भाग गया | इस भिडंत में वीरप्पन की टोली के भी दो लोग मारे गये थे | इसी तरह उसने 1992 में मैसूर के जिला SP , ह्रारिकृश्ना , शकील अहमद सहित चार कांस्टेबल को भी मार गिराया |
1993 में वीरप्पन Veerappan की तमिलनाडू के पुलिस अफसर रेम्बो गोपाल कृष्णन से एक नजदीकी भिडंत हुयी जिसमे वीरप्पन बाल बाल बच गया था | 1993 में BSF के जवानो ने इस मिशन में शिरकत की लेकिन उनके ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा भाषा थी जिसके कारण ये ऑपरेशन फेल हो गया और BSF के 20 जवान भी मारे गये | 1993 में वीरप्पन ने एक बार फिर जाल बिछाया और पुलिस अफसर ,वन अधिकारी और नागरिको से भरी बस को विस्फोटक से उड़ा दिया | इस घटना को पालर ब्लास्ट कहते है जिसमे 22 नागरिक और पुलिस वालो की मौत हो गयी थी |
1993 में ही Veerappan वीरप्पन ने STF के 6 पुलिस वालो को मार दिया जिसके बाद BSF और STF के जॉइंट ऑपरेशन के कारण वीरप्पन की गेंग के 9 लोग गिरफ्तार हुए और 6 मारे गये | अब गुस्से से भरे वीरप्पन ने 1994 में कोइम्बतुर के पुलिस उपाधीक्षक चिदंबरमनथम सहित दो लोगो का अपहरण कर लिया | 1995 में उसने तमिलनाडु के तीन वन अधिकारियो को अगुआ कर लिया | 1996 में उसने एक पुलिस इनफॉर्मर सहित 19 पुलिस वालो को मार दिया |1997 में उसकी गैंग ने वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सेनानी और कृपाकर का अपहरण कर लिया लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया था |
सन 2000 में Veerappan वीरप्पन ने अपने जीवन का सबसे बड़ा अपहरण किया और उसने मशहूर कन्नड़ अभिनेता राजकुमार को अगुआ कर लिया | इस घटना से ना केवल कर्नाटक सरकार बल्कि पूरा भारत इस घटना के कवरेज में लग गया था | पूरा न्यूज़ मीडिया का ध्यान इस अपहरण की ओर चला गया और वीरप्पन के आतंक की खबर पुरे भारत को चली | हालांकि वीरप्पन ने 108 दिन के बाद 50 करोड़ की फिरौती की रकम पाने के बाद कन्नड़ अभिनेता रिहा कर दिया था लेकिन  सरकार ने उसको खोजने का अभियान जोरो से शुरू कर दिया था |2002 में वीरप्पन कर्नाटक के पूर्व मंत्री नागप्पा को पहले अपहरण किया और फिर मौत के घाट उतार दिया | इस घटना के बाद से वीरप्पन को जिन्दा या मुर्दा पकडकर लाने वाले को सरकार ने 5 करोड़ का इनाम देने की घोषणा की क्योंकि उसको ढूंढने में सरकार के वैसे भी 500 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके थे |
18 अक्टूबर 2004 को वीरप्पन Veerappan और उसके दो साथियो को तमिलनाडू की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने मौत के घाट उतार दिया था | इस बार ऑपरेशन की अगुआई विजय कुमार ने की थी और तमिलनाडू के पपरपट्टी गाँव के पास उनको गोलियों से भुन दिया | वीरप्पन और उसके साथियो के इस गोलीबारी में घायल होने के बाद तुरंत उन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया , लेकिन वीरप्पन बच नही पाया | तमिलनाडु स्पेशल टास्क फ़ोर्स इस ऑपरेशन कर कई महीनों से काम कर रही थे और इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन कोकून था |
उसकी मौत को एक अंग्रेजी अख़बार ने death of a demon कहकर दर्शाया था | वीरप्पन की मौत की खबर सुनते ही गोपीनाथम गाँव के लोगो ने पटाखे जलाकर खुशिया मनाई | वीरप्पन के मौत के बाद इस गाँव को को कर्नाटक सरकार ने ecotourism  के लिए  रिज़र्व कर दिया | वीरप्पन को तमिलनाडु के मूलाकडू गाँव में दफनाया गया  , जहा उसके परिवार के कुछ सदस्य और रिश्तेदार बचे हुए थे |  पुलिस ने पहले हिन्दू रीती रिवाज के अनुसार दाह संस्कार करने की योजना की थी लेकिन रिश्तेदारों के दबाव में वीरप्पन को दफ़नाया गया |
killing veerappanVeerappan वीरप्पन वैसे तो समाचार चैनलों के जरिये खूब छा गया था और उस पर कई लेख और किताबे भी लिखी गयी थी लेकिन उसकी मौत के बाद उसके जीवन पर कई documentary और फिल्मे बनी | इन सभी फिल्मो में वीरप्पन का असली आतंक दिखाने में राम गोपाल वर्मा सफल हुए जो बॉलीवुड और टोलीवुड दोनों में सक्रिय है |   Killing Veerappan  नामक फिल्म में राम गोपाल वर्मा ने Operation Cocoon के आधार पर फिल्म पर निर्देशन किया जिसकी काफी सराहना हुयी | वैसे तो ये फिल्म कन्नड़ भाषा में बनी लेकिन इसके हिंदी वर्शन को भी राम गोपाल वर्मा लांच करने को तैयार है आप देखना ना भूले | जिससे आपको Veerappan वीरप्पन के बारे में ओर नजदीक से जानने को मिलेगा |

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