Charles Darwin Biography in Hindi

Charles Darwin चार्ल्स डार्विन ने क्रम विकास के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था | उनका जन्म 12 फरवरी 1809 को हुआ था | चिकित्सक परिवार में जन्मे चार्ल्स डार्विन ने चिकित्सा का व्यवसाय चुना | हारकर उनके पिता ने उन्हें धर्माचार्य की शिक्षा दिलानी चाही , पर वो भी पुरी नही हो पाई | बचपन से ही प्राकृतिक वस्तुओं में रूचि रखने वाले चार्ल्स Charles Darwin को जब प्रकृति विज्ञानी के रूप में बीगल अनुसन्धान जहाज में यात्रा करने का अवसर मिला ,तो उन्होंने अपने जीवन को नया मोड़ दिया |
समुद्र से डरने वाले और आलीशान मकान में रहने वाले चार्ल्स ने पांच वर्ष समुद्री यात्रा में बिठाये और एक छोटे से केबिन के आधे भाग में गुजारा किया | जगह जगह पत्तिया , लकडिया ,पत्थर ,कीड़े और अन्य जीव तथा हड्डिया एकत्रित की | उन दिनों फोटोग्राफी की व्यवस्था नही थी | अत: उन्हें सारे नमूनों पर लेबल लगाकर इंग्लैंड भेजना होता था | अपने काम के सिलसिले में वह दस घंटे घुडसवारी करते थे और मीलो पैदल चला करते थे | जगह जगह खतरों का सामना करना , लुप्त प्राणियों के जीवाश्म ढूँढना , अनजाने जीवो को निहारना ही उनके जीवन की नियती थी |
गलापगोज की यात्रा चार्ल्स के लिए निर्णायक सिद्ध हुयी | इस द्वीप में उन्हें अद्भुद कछुए और छिपकलिया मिली | उन्हें विश्वास हो गया कि आज जो दिख रहा है कल वैसा नही था | प्रकृति में सद्भाव और स्थिरता दिखाई अवश्य देती थी , पर इसके पीछे वास्तव में सतत संघर्ष और परिवर्तन चलता रहता है | लम्बी यात्रा की थकान अभी उतरी भी नही थी कि Charles Darwin चार्ल्स ने आगे का अन्वेषण तथा उस पर आधारित लेखन आरम्भ कर दिया था | बहुत थोड़े से लोगो ने उनका हाथ बंटाया | समस्त कार्य चार्ल्स को स्वयं करना पड़ा |
श्रेष्ट वैज्ञानिको का कार्य स्थल आमतौर पर कोई प्रतिष्टित संस्था या शिक्षा केंद्र ही कर रहा है | अरस्तु से लेकर न्यूटन ,फैराडे तक कोई ना कोई रॉयल सोसाइटी ,रॉयल संस्थान आदि मिल ही गया था , जो काम के खर्च दोनों में हाथ बंटाता था | परन्तु Charles Darwin डार्विन ने अपना कार्य ग्रामीण इलाके के दूर दराज स्तिथ मकान में शुरू किया | अपनी पैतृक सम्पति के रूप में प्राप्त सारा धन उन्होंने इस कार्य पर लगा दिया | जिस प्रकार का काम वो कर रहे थे उसने ना कोई पैसा लगाने के लिए आगे आया और ना ही चार्ल्स ने उसके लिए विशेष प्रयास ही किये |
उनके मस्तिष्क में जीवोत्पती का सिद्धांत जन्म ले चूका था | सन 1844 में उन्होंने इसे विस्तार से कलमबद्ध भी कर दिया था ,पर इसे प्रकाशित करने की कोई जल्दी उन्होंने नही दिखाई , क्योंकि इसकी भावी प्रतिक्रिया का उन्हें अहसास था इसलिए वह इसमें कोई कमे रहने देना नही चाहते थे | वह लगातार प्रयोग दर प्रयोग करके इसे प्रमाणित करते चले गये | Charles Darwin धैर्य पूर्वक लिखते रहे | उनकी रचनाये तेजी से [पाठको के हाथो में आती रही | सम्भवतः वह कुछ वर्ष और इंतजार कर लेते ,पर वालेस के अनुसन्धान परिणाम देखकर उन्हें भी अपना सिधांत सार्वजनिक करना पड़ा | हालांकि उनके पास पुख्ता प्रमाण नही था कि वह निष्कर्ष पर पहले पहुचे थे पर उन्होंने वालेस को बराबर का सम्मान दिया |
तत्कालीन समाज में उनके सिद्धांत पर जोरदार बहस हुयी | इश्वर की सन्तान माना जाने वाल मानव वानर की सन्तान माना जाने लगा | इस मानव पतन की संज्ञा दी गयी | राजशाही से लेकर चर्च तक सभी तिलमिला गये , पर डार्विन जरा भी विचलित नही हुए | सभी प्रकार की प्रतिक्रियाओं को वह पुरी विनम्रता से स्वीकार करते रहे | Charles Darwin डार्विन ने जीवन के हर पहलू पर प्रयोग किये | Charles Darwin का देहांत 19 अप्रैल 1882 को हो गया |
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