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सेलफोन के जनक मार्टिन कूपर की जीवनी Martin Cooper Biography in Hindi

Martin Cooper Biography in Hindi

सेलफोन के जनक मार्टिन कूपर की जीवनी Martin Cooper Biography in Hindi
सेलफोन के जनक मार्टिन कूपर की जीवनी Martin Cooper Biography in Hindi

सोचिये कि अगर हमारे पास एक दिन भी मोबाइल फोन नही हो तो कैसे बैचैन हो जाते है लेकिन इस बैचैनी को बढाने वाले और वायरलेस communication के जनक के बारे में आपको पता नही हो तो आपका मोबाइल फ़ोन रखना बेकार है | 70 के दशक में कूपर ने पहला handheld मोबाइल फ़ोन बनाया जिसके बाद से संचार के क्षेत्र में एक ऐसी क्रांति आ गयी तो आज तक रुकने का नाम नही ले रही है | आईये आज हम आपको उसी संचार क्षेत्र में क्रांति लाने वाले Martin Cooper मार्टिन कूपर की जीवनी से आपको रूबरू करवाते है |
डा.मार्टिन कूपर Martin Cooper का जन्म 26 दिसम्बर 1928 को संयुक्त राज्य अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था | Martin Cooper कूपर का बचपन शिकागो में ही बीता और आरम्भिक शिक्षा भी वही हुयी थी | Illinois Institute of Technology से 1957 में उन्होंने Electrical Engineering में मास्टर डिग्री हासिल की थी | उसके पूर्व ही वर्ष 1954 में उन्होंने मोटोरोला में काम करना आरम्भ कर दिया था | यंहा उन्होंने पोर्टेबल वस्तुओ के उत्पादन पर काम आरम्भ कर दिया था |
इसी दौरान उन्होंने शिकागो पुलिस के लिए एक पोर्टेबल दस्ती पुलिस रेडियो बनाया और सन 1967 में पुलिस विभाग को सौंप दिया | इसके बाद उन्होंने मोटोरोला की सेलुलर रिसर्च को आगे बढ़ाया |3 अप्रैल 1937 को उन्होंने पहला सेलफोन बनाया और इसे बनाने वाले पहले व्यक्ति बन गये | सेलफोन बनाने की प्रेरणा Martin Cooper डा.कूपर को Star Trek टीवी सीरियल से मिली थी ,जिसमे हाथ में पकड़ी डिवाइस से बातचीत करते दिखाया गया था |
अपने सेलफोन बनाने के बाद Martin Cooper डा.कूपर ने उसके अनेक टेस्ट किये और लोगो की उस मान्यता को तोड़ दिया कि फ़ोन केवल लैंडलाइन से ही किये जा सकते है |मजे की बात यह रही कि उन्होंने अपने सेलफोन से पहली काल अपने प्रतिद्वंदी जोएल एंजेल से की , जो AT&T Bell Labs में काम करता था | जब जोएल ने अपना लैंडलाइन फ़ोन उठाया तो कूपर ने कहा कि वो अपने पोर्टेबल फ़ोन से बात कर रहे है | यह फ़ोन 850 ग्राम वजनी था और ऐसा लगता था मानो ईंट उठा रखी हो | सन 1983 में मोटोरोला ने डायनाटेक फोन बनाये , जो पहले से आधे वजनी थे |
इनकी कीमत 3500 डॉलर थी | इसके बाद सेलफोन और हल्के -सस्ते  होते गये |
सन 1983 में Martin Cooper डा.कूपर ने मोटोरोला कम्पनी छोड़ दी और एक नई कम्पनी बनाई , जो सेलुलर इंडस्ट्री के लिए सॉफ्टवेर और बिलिंग सिस्टम तैयार करती थी | इस फर्म को बेचने के पश्चात 1986 में उन्होंने एरेकोम कम्पनी खडी करनी आरम्भ की ,जो सन 1992 में आरम्भ हुयी | इससे वे “स्मार्ट एंटेना ” और तेज ब्रॉडबैंड प्रोधोगिकी पर काम करने लगे ,जो सेलफोन उपभोक्ताओं को सस्ती और तेज इन्टरनेट सेवा उपलब्ध कराती थी |
कम्पनी में उनकी पत्नी एरलेज हैरिस भी सहयोगी थी , जो स्वयं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से निकली इंजिनियर थी | सन 2003 में एरेकोम ने एक ब्रॉडबैंड वायरलेस सिस्टम iBurst विकसित किया , जिसका ऑस्ट्रेलिया के कई भागो में आज भी सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है | Martin Cooper डा.कूपर का सपना था कि सेलफोन पर जैसे बाते की जा सकती है वैसे ही सबको तेज और सस्ती इन्टरनेट सुविधा उपलब्ध हो | इसके लिए वो तेज ब्रॉडबैंड लेकर आये और उनकी कम्पनी एरेकोम अज भी इस दिशा में ओर तेजी लाने के लिए सक्रियता से जुटी हुयी है |

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