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गुरु पूर्णिमा पर निबन्ध | Guru Purnima Essay in Hindi

गुरु पूर्णिमा विशेष - भगवान से बड़ा गुरु का है दर्जा Guru Purnima Essay in Hindi
गुरु पूर्णिमा विशेष – भगवान से बड़ा गुरु का है दर्जा Guru Purnima Essay in Hindi

युग कोई भी रहा हो , गुरु का सम्मान हमेशा बना रहा है | संत कबीरदास भी गुरु को गोविन्द से महान बताकर उसकी महिमा बता चुके है | हर युग में गुरु सदैव पूजनीय रहे है और रहेंगे | सदियों पुरानी गुरु पूजन की परम्परा आज भी जीवित है | गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) के दिन गुरु पूजा का विशेष महत्व है | शिष्यों में गुरु के प्रति आदर भाव कोई कमी नही आयी है |
धनुर्धर अर्जुन के गुरु द्रोणाचार्य से लेकर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के गुरु रमाकांत अचरेकर जैसो ने गुरु की साख को कायम रखा है | आज भी किसी परीक्षा में विद्यार्थी के प्रथम आने पर वह सबसे पहले श्रेय अपने गुरु को ही देता है | वो गुरु ही होता है जो अपने शिष्य की योग्यता को पहचान कर उसको दक्ष करता है | गुरु ही जीवन का सही मार्ग बताता है और भटको हुओ को सही मार्ग पर लाता है |
गुरु के बिना किसी के भी महान बनने की कल्पना नही की जा सकती है | हर गुरु की यही इच्छा होती है कि उसका शिष्य सबसे बेहतर निकले और नाम एवं यश कमाए पर गुरु कभी नाम एवं यश की कामना नही कर अपने शिष्य की ओर ध्यान लगाता है | यही कारण है कि कबीरदास ने गुरु को भगवान से ऊँचा दर्जा दिया है | गुरु की शिक्षा से भगवान को आत्मसात किया जाता है |
आज भे संत महात्मा की वाणी हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता दिखाती है | जमाना बदल गया और आगे भी बदलेगा पर गुरुओ का स्थान ना कोई ले पाया है और ना कोई ले पायेगा | गुरुकुल से लेकर आधुनिक विद्यालयों तक गुरु का विशिष्ट स्थान रहा है | आज भी गाँवों में शिक्षक को गुरूजी संबोधित किया जाता है | एक ऐसा समय भी आया जब गाँवों के निर्णय में सरपंच पंच ना लेकर गुरु की सहमति के लिए जाते है |
आज हर क्षेत्र में गुरु है आध्यात्मिक ,शिक्षा  ,खेल ,साहित्य आदि | महापुरुषों ने कहा है कि यदि सफलता प्राप्त करनी है तो सबसे पहले एक अच्छा गुरु तलाशना चाहिए | बिना गूर की शिक्षा से सफलता पप्राप्त करना मुश्किल है | “गुरु ब्रह्म ,गुरु विष्णु ,गुरु देवो ” सहित अन्य कई पंक्तिया गुरु की महिमा का वर्णन करने के लिए काफी है पर यहे हकीकत यह भी है कि गुरु महिमा एवं कृपा अपरम्पार है |
अपने शिष्यों से स्नेह्र रखने वाले गुरु के भी कई रूप होते है | कभी पिता ,कभी भाई तो कभी दोस्त बनकर गुरु शिष्यों का पथ प्रदर्शक बनता है | गुरु के लिए कोई सीमा नही होती है |अपने शिष्य को ऊँचे मुकाम पर देखना एक गुरु के सबसे बड़ा सपना होता है | शिष्य के विफल होने पर गुरु निराश ना होकर खड़ा होने में हौसला प्रदान करता है |
गुरु ही देश को बनाते है बच्चे देश का भविष्य जरुर है लेकिन उनको देश सेवा के लिए प्रेरित करने का काम गुरुओ के हाथ में है | वर्तमान में भारत फिर से विश्व गुरु बनने की क्षमता रखता है तो उसका प्रमुख कारण गुरुओ की शिक्षा भी है | तो मित्रो अगर आप पर गुरु का सानिध्य रहा हो तो उनके बारे में विचार प्रकट अपने गुरु के प्रति सम्मान जरुर व्यक्त करे |

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) पर लघु निबन्ध

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है | यह पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में मनाया जाता है इसलिए इस व्यास पूर्णिमा भी कहते है | इस पूण्यतिथि को वेदव्यास का जन्म हुआ हटा जिन्होंने वेडशास्त्र पुराण महाभारत की रचना की थी | वेदव्यास इस देश जे जनजीवन के साथ अविभाज्य रूप से जुड़े हुए है | महर्षि वेदव्यास सम्पूर्ण जगत के गुरु माने जाते है | गुरु के रूप में उन्होंने संसार को दिव्य ज्ञान से परिचित कराया |
प्राचीनकाल से ही इस दिन गुरु को उच्च आसन पर बैठाकर उनकी षोडशःउपचार पूजा की जाती है | लोग अपने गुरु में ही  वेदव्यास जी का रूप देखते है | गुरु शब्द का प्रथम अक्षर “गु” इस सत्य का बोध कराता है कि गुरुदेव हमेशा गुणातीत है और द्वीतीय अक्षर “रु” यह बोध कराता है कि शिष्यों के लिए गुरुदेव भगवान रूप है | गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) अर्थात सद्गुरु के पूजना का पर्व | यह किसी व्यक्ति का आदर नही अपितु गुरु के ज्ञान का आदर एवं पूजन है |
इस दिन शिष्य अपने गुरु को भेंट स्वरूप धुप , दीप , माला ,वस्त्र , फल आदि देते है | विद्यालयों में गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) उत्सव के रूप में मनाया जाता है | इस दिन विद्यालयों में गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों द्वारा गुरु वन्दना की जाती है | गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का पर्व वर्ष भर की समस्त पूर्णिमा मनाने के पूण्य का फल प्रदान करता है | गुरुजनों के प्रति श्रुद्धा प्रगट करने का यह पर्व भारतीय सनातन संस्कृति का विशिष्ट पर्व है | यह आस्था , श्रुद्धा और समपर्ण का पर्व है

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