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Johnny Walker Biography in Hindi | जानी वाकर , जो बिना शराब पीये ,शराबी के एक्टिंग में थे माहिर

Johnny Walker Biography in Hindi

Johnny Walker Biography in Hindi | जानी वाकर , जो बिना शराब पीये ,शराबी के एक्टिंग में थे माहिर
Johnny Walker Biography in Hindi | जानी वाकर , जो बिना शराब पीये ,शराबी के एक्टिंग में थे माहिर

Johnny Walker जानी वाकर अपने समय में फिल्मो में सफलता की गारंटी माने जाते थे | वह लगभग 35 वर्षो तक हास्य अभिनेता के रूप में सक्रिय रहे | इस दौरान उन्होंने लगभग 300 फिल्मो में अभिनय किया , जिनमे अनेक फिल्मो के वह नायक भी थे | मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में 11 नवम्बर 1923 को जन्मे जानी वाकर का असली नाम बदरुद्दीन काजी थे लेकिन उन्हें फ़िल्मी नाम जानी वाकर Johnny Walker गुरुदत्त ने दिया था |
Johnny Walker जानी वाकर इंदौर में छठी जमात तक उर्दू की तालीम हासिल कर 1942 में अपने पिता जमालुदीन काजी के साथ मुम्बई आ गये और जीवनयापन के लिए उन्होंने आर्मी कैंटीन में नौकरी कर ली | उनकी ख्वाहिश थी कि वह फिल्मो में अभिनय करे और फिल्म स्टूडियो के बारे में जानकारी हासिल करे इसलिए उन्होंने बस कंडक्टर की नौकरी कर ली |
बचपन से ही जानी वाकर Johnny Walker को हास्य अभिनय का शौक था | प्राय: वह लोगो की नकल उतार कर सबको हँसाया करते थे | उन्होंने अपना फ़िल्मी सफर जूनियर कलाकार के रूप में आरम्भ किया | उनकी पहली फिल्म “आखिरी पैगाम ” थी जिसमे उन्होंने बदरुद्दीन के नाम से अभिनय किया था |
सही अर्थ में उन्हें पहला मौका देव आनन्द की गुरु दत्त निर्देशित फिल्म “बाजी ” में मिला | 1951 में बनी नवकेतन की इस फिल्म में गुरुदत्त को एक शराबी की भूमिका के लिए कलाकार चाहिए था | फिल्म की कहानी बलराज साहनी ने लिखी थी | बलराज साहनी की मुलाकात बदरुद्दीन काजी से बस में हुयी थी उन्होंने उनको गुरुदत्त से मिलवाया और इस तरह गुरुदत्त को बाजी के लिए एक सड़क छाप परिष्कृत शराबी मिल गया |
एक विस्की के नाम पर बदरुद्दीन काजी को नया नाम जानी वाकर और फिल्मो में हास्य अभिनेता के रूप में पहचान मिल गयी | इसके बाद नवकेतन की ही फिल्म “आंधिया ” आयी जिसमे निर्देशक चेतन आनन्द और कलाकर देव आनन्द ,कल्पना , कार्तिक और निम्मी अदि थे | इसके बावजूद जानी वाकर की भूमिका को बेहद लोकप्रियता मिली थी | इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुडकर नही देखा | उन्होंने “जाल ” “हमसफर” “आर-पार” “शहीदे आजम भगत सिंह ” “श्रीमती 420 ” “प्यासा ” “कागज के फुल ” “पैगाम ” “रिक्शे वाला ” “उस्तादों के उस्ताद ” “आदमी ” “नया दौर ” “मेरे महबूब ” “हंगामा ” “धोती-लौटा और चौपाटी ” “मेरा दोस्त मेरा दुश्मन ” “शान ” और “चाची 420” जैसी फिल्मो में अपने अभिनय से दर्शको को भाव विभोर कर दिया |
Johnny Walker जानी वाकर ने सदैव हास्य भूमिकाये ही निभानी पसंद की | हर फिल्म में कुछ नया करने की चाह ने भी उन्हें अपने आपको दोहराने से बचाए रखा | जानी वाकर कहा करते थे कि “मुझे लोगो को हंसाने ,गुदगुदाने में आत्मिक सुख मिलता है ” |वह साफ़ सुथरा और शालीन हास्य पसंद करते थे | उन्होंने कभी भी हास्य के लिए फूहड़ता .अश्लीलता या द्विअर्थी संवादों का सहारा नही लिया | शराबी की भूमिकाओ के लिए कभी शराब का सहारा नही लिया | यहाँ तक कि निजी जिन्दगी में भी उन्होंने कभी शराब नही पी ,फिर भी उन्होंने शराबी की अनेक यादगार भूमिकाओ को पर्दे पर साकार किया था |
Johnny Walker जानी वाकर पहले हास्य कलाकार थे जिनके नाम पर नटराज प्रोडक्शन ने सन 1957 में “जानी वाकर ” नामक फिल्म का निर्माण किया ,जिसके निर्देशक वेद महान थे | इस फिल्म में नायक जानी वाकर और नायिका श्यामा थी | फिल्म की सफलता से उत्साहित वेद मदान ने अपनी अगली फिल्म “मिस्टर कार्टून एम. ” में भी जानी वाकर को शीर्ष भूमिका के लिए चुना | “मिस्टर जॉन ” “नया पैसा ” “जरा बच के ” “रिक्शा वाला” “उडन छु” आदि फिल्मो में भी उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी | उन्होंने अपने समकालीन लगभग सभी ख्याति प्राप्त निर्माता निर्देशकों की फिल्मो में अभिनय किया था |
जानी वाकर ,महमूद ,कन्हैया ला ,भगवान दादा और आई.एस.जौहर के फ़िल्मी दौर को हास्य का सर्वश्रेष्ट हास्य समय मानते थे | आज के निम्न स्तर के हास्य दृश्यों से आहत जानी वाकर कहा करते थे “फिल्मो में हास्य के नाम पर द्विअर्थी संवाद  ,अश्लील हरकते ,उट पटांग दृश्य और फूहड़ता ही दिखायी जाती है | मेरे हास्य अभिनय के करियर में मेरी किसी भी फिल्म में कोई भी हिस्सा सेंसर बोर्ड द्वारा कभी नही काटा गया | मै ही क्यों गोप ,दीक्षित , भगवान दादा ,कन्हैया लाल ,महमूद ,केस्टो मुखर्जी  ने भी इतना स्तरहीन घटिया हास्य कभी नही किया जो आजकल की फिल्मो में दिखाया जाता है ”
Johnny Walker जानी वाकर पर अनेक यादगार गानों का फिल्मांकन भी हुआ | “प्यासा” का गाना “सर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए ” , CID फिल्म का गाना “ये मुम्बई मेरी जान”  मिस्टर और मिसेज 55 का गीत “जाने कहा मेरे जिगर गया जी ” में उन्होंने अपनी विशिष्ट हास्य शैली की एक ऐसी छाप छोडी कि आज भी उन पर फिल्माए गीत दर्शको को गुदगुदाते है |
सन 1955 में जानी वाकर ने फिल्म अभिनेत्री शकीला बानो की बहन नूर बानो से विवाह किया | उनके 3 बेटे और 3 बेटिया है | उनका एक बेटा नासिर खान ही उनकी अभिनय परम्परा की विरासत को आगे बढाये है बाकि बेटे बेटिया विदेश में बसे है | साम्प्रदायिक एकता के पक्षधर जानी वाकर Johnny Walker का देहांत 29 जुलाई 2004 को हो गया और वह एक महान हास्य कलाकार इस दुनिया से विदा हो गया |

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