Shiv Parivar Mahima in Hindi
शिव परिवार के मुखिया महादेव शंकर की अद्भुद महिमा है | भारतवर्ष में उनकी पूजा उत्तर से दक्षिण तक अनेक रूपों में होती है | महाशिवरात्रि में इनकी आराधना घर घर होती है | महिलाये सौभाग्य और समृधि के लिए शिव पार्वती की पूजा चौथ को भी करती है | तीज एवं गणगौर पर्व इन्ही को समर्पित है | राजस्थान में इसर-गणगौर के रूप में शिव पार्वती की युगल सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा होती है |
सदियों से शिव परिवार भारतीय संस्कृति और परिवार प्रथा का प्रेरणा स्त्रोत रहा है | इस परिवार के सभी सदस्य देवताओ की तरह पूजे जाते है | ऐसा बहुत कम परिवारों के साथ होता है | शिव परिवार के मुखिया स्वयं शिव नही है देवी पार्वती है | उनके दोनों पुत्र कार्तिकेय और गणेश विश्व भर में पूजे जाते है | इनके अतिरिक्त इस परिवार में इन सब के वाहन भी शामिल है | महादेव का वाहन नन्दी वृषभ तो उनके साथ हर मन्दिर में रहता है | गौरी का वाहन सिंह आवश्यकता पड़ने पर उपस्थित रहता है | कार्तिकेय कुमार का वाहन मयूर और गणेश का वाहन मूषक (चूहा ) सुविदित है |
गौरी जिस प्रकार सौभाग्य और समृधि की देवी है उसी प्रकार अन्नपूर्णा भी है | कार्तिकेय शौर्य ,पराक्रम ,यौवन और विजय के देवता अहि | दक्षिण भारत में तो स्कन्द ,मुरुगन अदि अनेक नामो से घर घर में पूजे जाते है | उत्तर भारत में भी संतानोत्पत्ति के छठे दिन बालक की दीर्घायु ,स्वास्थ्य ,पराक्रम और कुशलता के लिए इन सबका आह्वान और पूजन किया जाता है |
शिव परिवार के सबसे बड़े पुत्र कार्तिकेय है तो छोटे पुत्र गणेश जो सबके सुपरिचित है | कुछ लोगो का मत है कि गणेश बड़े और कार्तिकेय छोटे भाई है | गजानन गणेश अपनी माता गौरी के प्रिय है | मोदक खाना पसंद करते है | जन जन के पूज्य है विघ्न विनाशक है | दोनों पुत्र बचपन में बहुत शरारती थे | दोनों देवता शस्त्रधारी है कार्तिकेय शक्ति आदो शस्त्र रखते है और गणेश जी त्रिशूल आदि | दोनों भाइयो की रुचिय अलग अलग है |
शिव परिवार की विभिन्न रुचियों ,व्यापक मांगो एवं विभिन्न परिस्थितियो में गृहस्वामिनी पार्वती जिस कुशलता से सामंजस्य बिठाती है उसका सुंदर वर्णन संस्कृत के कवियों ने किया है | अन्नपूर्णा पार्वती ने सारा घर बाँध रखा है |उन्ही की महिमा है कि पुरे परिवारजनों और परिवार के वाहनों (वृषभ ,सिंह ,मयूर और मूषक ) के लिए भोजन की कमी कभी नही होती है तभी तो उन्हें अन्नपूर्णा कहा जाता है | ऐसी कुशल मुखिया के प्रबंध कौशल से सारा परिवार भली भांति चलता है |
शिव परिवार का प्रत्येक देव अलग अलग शक्तियों और विधियों का स्वामी है |शंकर कल्याणकारी है गौरी सौभाग्य की देवी है कार्तिकेय पराक्रम के देवता है और गणेश बुद्धि के | यही सब तो वांछित होता है एक संसारी को अपनी जीवन यात्रा में | जीवन लीला की समाधि के बाद तक शिव परिवार सबका उद्धार करता रहता है |
भगवान शंकर अंतिम क्षण में तारक मन्त्र फूंक कर प्राणी को सद्गति दिलाते है श्मशान तक में उनका साथ नही छूटता है | एह श्मशान वासी भी है तभी तो वह मृत्युंजय है | उनके मन्त्र का जाप मृत्यु पर विजय दिलवा देता है मृत्यु को पास फटकने नही देता है |वह महामृत्युंजय न जाने कितनी शताब्दियों से सारे देश को जीवन दान देते आ रहे है ,मृत्यु के भय को परास्त कर अमृत्व का पियूष पिलाते रहे है | सारा विष सारा कलुष स्वयं पी लेते है और औरो को अमृत पिलाते है |
गौरी दाम्पत्य सुख की अधिष्ठात्री देवी है | उनकी पूजा कर उनके नाम का सिंदूर मांग में धारण कर सुहागिने अखंड सौभाग्य का वर प्राप्त करती है | लोककथाओ में तो शिव पार्वती त्रिलोकी में सदा विचरण करते रहते है जहा कोई दीन दुखिया या अभागिन दिखी ,पार्वती उनकी विपत्ति समाप्त करने के लिए शिवजी से आग्रह करती है एवं सबका दुःख दूर करना ही अपना कर्तव्य मानती है |इन्ही सब अपूर्व गुणों और चमत्कारों के कारण विलक्षण महिमा का धनी है यह शिव परिवार | भारत के घर घर में इसकी महिमागाई जाती है |सभी भारतीय भाषाओ में इस परिवार के देवताओ की स्तुतिया लिखी गयी है काव्य लिखे गये है गाथाये गाई जाती है कथाए प्रचलित है |
गाव गाँव ,नगर नगर में जो शिव मन्दिर स्थापित है उनमे इस परिवार के दर्शन से सब कृतार्थ होते रहते है |शिव ,पार्वती ,गणेश और नन्दी बैल तो उत्तर भारत के मन्दिरों में स्थापित देखे जा सकते है |कार्तिकेय भी तो दक्षिण भारत के मुरुगन है घर घर में मन्दिरों में पूजे जाते है | यह इस मूल्य का प्रतीक है कि परिवार के सदस्य अलग अलग स्वभाव और शक्ति की रूचि अवश्य रखते है किन्तु उनका एकजुट रहना ही परिवार की सच्ची परिभाषा देता है |
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